Thursday, 22 December 2016

प्रेस कार्ड के लिए बन रही है नियमावली ...

प्रेस कार्ड के लिए बन रही है नियमावली ... 




राष्ट्रचंडिका/ नई दिल्ली : पत्रकारिता के गिरते स्तर तथा पत्रकारिता जगत में असामाजिक तत्वों के प्रवेश से चिंतित केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा समाचार पत्रों के पंजीकरण, समाचार पत्र/पत्रिका व टीवी चैनल तथा न्यूज एजेंसी द्वारा जारी प्रेस कार्ड के लिए नियमावली तैयार की जा रही है तथा मौजूदा नियमावाली में संशोधन किए जाने पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार देशभर में बढ़ रहे अखबारी आंकड़े और पत्रकारों की बढ़ रही संख्यां से पाठकों की जागरूकता में वृद्धि हुई है। वहीं कुछ ऐसे चेहरों ने भी पत्रकारिता जगत में दस्तक दे दी है, जिसके कारण पत्रकारिता पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए है। 
पत्रकारिता क्षेत्र में होगी शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य ...
बता दें कि समाचार पत्र, पत्रिका के पंजीकरण के बाद प्रकाशक व संपादक एक-दो अंक प्रकाशित कर अनगिनत लोगों को प्रेस कार्ड जारी कर देते है, जिनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं होता। ऐसे चेहरों की बदौलत पत्रकारिता पर जरूर उंगलियां उठती है।
हर गावं शहर मे कुछ तथाकथित पत्रकार या समाचार पत्र मालिको ने कुछ लोगो को पैसे लेकर प्रेस कार्ड जारी कर रखे है जो पुलिस एवं टोलटेक्स नाको पर धोंस जमाते हैं. ऐसे तथाकथित पत्रकारो से असली पत्रकार भी परेशान हो रहे है । पुलिस, प्रशासन एवं टोलटेक्स नाके वाले असली नकली मे फर्क नही कर पाते है। अब इस नियम के लागू होने पर तथाकथित फर्जी पत्रकारो से पुलिस प्रशासन पुछताछ कर उन सरगनाओ तक पहुचं सकेगी जिन्होने पैसे लेकर प्रेसकार्ड जारी कर रखे हैं.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समाचार पत्र, पत्रिका के पंजीकरण के लिए आवेदक की शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता में डिग्री की शर्त को अनिवार्य करने जा रहा है।  दैनिक समाचार पत्रों, न्यूज एजेंसियों व टीवी चैनल के रिपोर्टर के लिए संबंधित जिला मैजिस्ट्रेट की स्वीकृति उसकी पुलिस वैरीफिकेशन होने उपरांत जिला सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा प्रेस कार्ड तथा प्रैस स्टीकर जारी किए जाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अन्य समाचार पत्र, पत्रिकाओं के प्रकाशक व संपादक का प्रैस कार्ड सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी किया जाएगा। सरकारी तंत्र द्वारा जारी प्रेस कार्ड व प्रेस स्टीकर ही मान्य होंगे। केंद्र सरकार द्वारा उन समाचार पत्र व पत्रिकाओं का प्रकाशन बंद किया जा सकता है जिन्होंने पिछले तीन वर्ष से अपनी वार्षिक रिपोर्ट जमा नहीं करवाई। चर्चा तो यह भी है कि किसी भी क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने वाला दैनिक समाचार पत्र, न्यूज चैनल, न्यूज एजेंसीज को प्रतिनिधि नियुक्त करने के लिए जिला मैजिस्ट्रेट को आवेदन करना होगा, जो जिला सूचना व संपर्क अधिकारी की तस्दीक उपरांत स्वीकृति प्रदान करेंगे। जिला सूचना व संपर्क अधिकारी अपनी रिपोर्ट में दर्शाएंगे कि अमूक दैनिक समाचार पत्र, न्यूज चैनल, न्यूज एजेंसीज को इस क्षेत्र से प्रतिनिधि की जरूरत है। संशोधित नियमावाली के चलते प्रैस कार्ड की खरीदों-फरोख्त तथा प्रैस लिखे  वाहनों पर सरकारी तंत्र की नजर रहेगी। तथ्य पाए जाने उपरांत अपराधिक मामला कार्ड धारक, कार्ड जारी करने वाले हस्ताक्षर तथा प्रैस लिखे वाहन के मालिक पर दर्ज होगा। जाहिर है केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इस संभावित योजना पर अमल होने से पत्रकारिता का मानचित्र बदल जाएगा। हम खुद प्रेस कार्ड वालो से परेशान है कैसे पता किया जाये की कौन सही पत्रकार है और कौन फर्जी इसके लिये जैसे ही आदेश आते है प्रेस लिखे सभी वाहनों की जाँच की जायेगी और जो भी सूचना जनसम्पर्क विभाग की लिस्ट मै नही होगा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा।

आज भी नहीं हुआ विकास का सबेरा

                      जिस गांव में 8 साल पहले रात गुजारी उस गांव में 

                                 आज भी नहीं हुआ विकास का सबेरा 

 चीचली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सिलेहटी में एक गरीब परिवार के घर रात गुजारने रूके प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को लगभग 8 वर्ष बीत चुके हैं किंतु इन 8 वर्षों में उस गांव के लोगों के मन में आज भी मुख्यमंत्री द्वारा गांव के लोगों को दिये गये आश्वासनों को पूर्ण होने की आशा आज भी कम नहीं हुई है इस बात को लेकर गत दिवस हमने सिलेहटी गांव जाकर वहां के लोगों से बातचीत  तो हमने पाया कि आज भी सिलेहटी के लोगों के मन में शिवराज जी के प्रति अटूट् विश्वास आज भी दिखाई दिया वहीं सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर उन्हें आज भी उनके हक न मिलने का दर्द भी वयां किया । 
अमर नौरिया/राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर-21 दिसंबर 2009 को प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान नरसिंहपुर जिले की चीचली जनपद पंचायत के सिलेहटी ग्राम पंचायत में एक गरीब कमलेश भरिया के घर में रात गुजारने को रूके थे इस  दौरान शिवराज जी ने कमलेश के घर में खाना खाया व गंाव के लोगों के बीच ढोल मजीरें से गीत संगीत का आनंद भी लिया था इस दौरान उन्होनें ग्रांव के लोगों के सामने गांव की तस्वीर बदलने की बात कहकर कहा था कि इस गांव के हर घर को पक्का करवा दूंगा,सब घरों में पीने के पानी की व्यवस्था होगी तथा बिजली के खंबों पर लाइट भी लगवाई जायेगीं तथा अस्पताल और हाईस्कूल भी खोला जायेगा बच्चों के खेलने के लिये स्टेडियम का निर्माण भी किया जायेगा । 
जिस कमलेश के घर रात गुजारी थी उसकी पत्नी हक्कीबाई को अपनी मुहंबोली बहिन बताकर उसका घर भी पक्का बनवाने का बादा किया था ।  समय बीतता गया और सिलेहटी गांव के लोगों के जीवन में विकास का जो रूपरेखा प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह जी उन ग्रामीणों के बीच तय करके गये थे उसे लगभग 8 साल बीत गये इन आठ सालों में सिलेहटी गांव की हालत में जो बदलाव व विकास होना था वह कहीं भी दिखाई नहीं देता ।
गांव में आज भी पीने के पानी की समस्या बनी हुई थी अधिकांश लोगों को हेंडपंपो के सहारे ही पेयजल की सुविधा प्राप्त है तो जिन लोगों के पक्के आवास बनाये जाने की प्रक्रिया की जा रही थी उनमें से किसी भी हितग्राही को एक किस्त के बाद दूसरी किस्त नहीं प्राप्त हो पायी है और तो और जिस घर में मुख्यमंत्री जी ने रात गुजारी थी उस कमलेश का मकान भी उनके द्वारा उसके खाते में एक ही बार 35 हजार रूपये की किस्त के बाद आज तक अधूरा पड़ा है इस संबंध में जब हमने कमलेश की पत्नि हक्कीबाई से पूछा कि शिवराज जी तो आपके भाई हैं उन्हें क्या इस बात की जानकारी दी है कि आपका अधूरा मकान अभी तक अपूर्ण पड़ा है इसे कब पूर्ण कराया जायेगा तो हक्की बाई का कहना था कि भैया शिवराज बहुत ही व्यस्त रहतें हैं उनने तो पैसा अवश्य भेजा होगा  हमारे यहां के अधिकारियों व कर्मचारियों ने उल्टी सीधी रिपोर्ट भेजकर यह लिखकर भेज दिया कि कमलेश के घर में छत डल गई है और उसका मकान बन गया है इसलिये हमें अब मकान बनाने  दूसरी किस्त  नहीं मिल पायी  है ।
गांव में बाह्य शौच मुक्त किये जाने को लेकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों का निर्माण भी किया जा रहा है किंतु जिस गुणवत्ता का कार्य किया जाना था वैसा न होने के कारण शौचालयों को लेकर भी ग्रामीण शिकायतें करने की बात कह रहें हैं तो पात्र लोगों के नाम गरीबी रेखा ने न जोड़े जाने और दो माह का राशन एक माह में देने की बात भी अंधिकांश लोगों ने कही,लोगों को कई महीने से पेंशन भी न मिलर्ने  व गांव में क ेवल 8 घंटे ही बिजली मिलती है ऐसा बताया ।
लगभग 130 परिवार इस गांव में रहते हेैं कुछ दिनों पूर्व जिला कलेक्टर के भी गांव में आने को लेकर ग्रामीणों ने बताया और कहा कि कलेक्टर साहब को हम अपनी समस्यायें बताते किंतु उन्हें कलेक्टर साब के पास तक ही नहीं जाने देते कुछ लोग ही अगुवा बनकर सब सही होने की बात कहते हेैं जिससे कलेक्टर साब के पास भी सही बात नहीं पहुंच पाई ।
्चीचली जनपद का यह गांव काफी कुछ पिछड़ा हुआ है और जिस गांव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने ग्रामीणों के बीच रात गुजारी हो उसकी यादें आज भी उनके दिमाग में हैं और उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जी तो हमारे लिये काफी कुछ कहकर गये हेैं किंतु हमारे अपने लोगों ने हमारी सुध लेने में कोर कसर छोड़ रखी है जिससे हमें आज भी अपना जीवन परेशानियों से गुजारना पड़ रहा है ।  सिलेहटी गांव के लोगों का जीवन यापन मूलत: खेती मजदूरी व अन्य छोटे मोटे कामों से ही गुजारा हो रहा हेै यहां के स्कूल के शिक्षक देवी सिंह चौधरी बताते हेैं कि अत्यंत पिछड़ापन होने के कारण यहां के अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल आदि भेजने में ध्यान नहीं देते जिससे अंधिकांश बच्चे 8 वीं तक पढऩे के बाद मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरणपोषण करने में लग जातें हैं । विकास के तमाम दाबों के बाद सिलेहटी गांव के लोगों के मन में आज भी शिवराज जी के दिये गये आश्वासनों को पूर्ण होने की उम्मीद कायम है वहीं प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही लापरवाही से अधूरे पड़े कई आवासों को लेकर गं्रामीणों का दर्द बयां करता फुददीलाल का वह अधूरा मकान है जिसकी दूसरी किस्त की आशा करता हुआ वह स्वर्ग सिधार गया और उसका एक लडक़ा जो मानसिक रूप से कमजोर हेै गांव में कहीं भी रात गुजार कर अपने अधूरे घर को पूरा होने की आशा में भटकता रहता  है ।




Saturday, 17 December 2016

मां राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की शोभायात्रा में धर्ममय हुआ जिला

मां राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की शोभायात्रा में धर्ममय हुआ जिला
नोटबंदी की जगह गौमांस बंदी होना चाहिये थी - शंकराचार्य जी
अमर नौरिया
राष्ट्रचंडिका/ नरसिंहपुर-  भगवान नरसिंह की नगरी में लगभग 23 साल बाद राजराजेश्वरी  मां त्रिपुर सुंदरी की शोभायात्रा को लेकर ज्योतिपीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का शुभागमन हुआ तो पूरे नरसिंहपुर शहर में धर्म का भाव भक्तिपूर्ण उल्लास देखने को मिला मां त्रिपुर सुंदरी के दर्शनार्थ बूढ़े से लेकर बच्चों और सभी धर्म के अनुयायियों ने इस शोभायात्रा के दर्शन लाभ प्राप्त कर पुण्य लाभ प्राप्त किया महत्वपूर्ण यह कि मां राजराजेश्वरी की परमहंसी गंगा झोैतेश्वर जिला नरसिंहपुर में स्थापना क े पाटोत्सव के 34 वे वर्ष पूर्ण होने  पर मां की शोभायात्रा निकाली जा रही है।
इस आयोजन के दौरान आयोजित की गई एक विशाल धर्मसभा में महाराज श्री ने उपस्थित हजारों धर्मानुरागी जनों को प्रवचनों के माध्यम से धर्म के अनुसार आचरण न किये जाने को लेकर समाज में अपराधों की प्रवृति बढऩे पर धर्म के मार्ग पर चलने की बात कही वहीं समाज में नशे के दुष्परिणामों का फल समाज के लोगों को ही भोगना पड़ता है इसके लिये सरकार व पुलिस कुछ नहीं कर सकती इसके खिलाफ केवल जनजागरूकता से ही अंकुश लगाया जा सकता है ।
नोटबंदी को लेकर महाराजश्री ने सरकार क ी तीखी आलोचना करते हुये इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि जब  उसके द्वारा कमाये गये धन पर ही उसका अधिकार नहीं तो फिर उसे कहां की स्वतंत्रता है कोई भी धन काला पीला नहीं होता उसके कमाये जाने की प्रवृति ही उसके काले और सफेद का निर्णय करती है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा नोटबंदी को लेकर जिस तरह से आतंकवाद को खत्म होने की बात की जा रही थी उस पर महाराज श्री ने कहा कि आंतकवादी हमारे नोटों से हथियार नहीं खरीदते वे डालरों से लेते हैं और वह डालर उन्हें अमेरिका देता है जिससे वे अपनी उन्नति करें किंतु वे इसका इस्तेमाल आंतकवाद के लिये करते हैं हमारे अन्य पड़ौसी देश हैं लेकिन केवल पाकिस्तान ही क्यों हमारा दुश्मन है उसकी वजह यह कि वह कश्मीर लेना चाहता है और कश्मीर हमारे भारत का मुकुट है जिसे हम कभी दे नहीं सकते । इस दौरान महाराजश्री ने कहा कि अगर नोटबंदी की वजाय गौमांस बंदी की जाती तो आज मोदी अजर अमर हो जातें किंतु ऐसा नहीं किया गया जिससे आम जनता आज भी परेशान हो रही है ।
स्कूली पाठयक्रमों में अब गीता ओर रामचरित मानस नहीं पढ़ाई जा रही है जिससे लोग धर्म का अनुसरण नहीं कर रहें हैं वहीं सांई पूजा को लेकर महाराज श्री ने कहा कि आज सांई को हमारे देवी देवताओं के मंदिरों में स्थापित कर वहां पर उसे विराट रूप में दिखाया जा रहा है सांई भक्तों ने सनातन धर्म को ठैस पहुंचाई है जो उचित नहीं हैं हम शिरडी में लगभग 35 एकड़ में एक विशाल सुदर्शन मंदिर का निर्माण करने वाले हैं जिसमें गौशाला आदि का भी निर्माण किया जायेगा ।  वहीं महाराज श्री ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि सांई के विरोध करने का कारण हमारी चढौत्री कम हो गई ऐसा नहीं है ऐसा होता तो हम विरोध ही नहीं करते हमारा काम धर्म की रक्षा करना है और वह दायित्व हमारे द्वारा निभाया जा रहा है ।
मां त्रिपुर सुंदरी की यह शोभायात्रा करेली और गाडरवारा शहर में भी बड़ी धूमधाम से निकाली गई जिसमें आस पास के क्षैत्रों के हजारों ग्रामीणों ने भी धर्मलाभ प्राप्त किया । 

ट्रंासपोर्टरों की लापरवाही

ट्रंासपोर्टरों की लापरवाही
किसानों का मक्का ना उठने के कारण
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। मक्का खरीदी का कार्य जिले की सोसायटियों में बंद होने के कारण किसान चिंतित है क्योंकि कई वर्षो तक उन्हें अच्छी फसल प्राप्त हुई लेकिन मंडी/ सोसायटी में ले जाने के बाद किसानों की फसल नहीं खरीदी गयी कि उनकी मक्का गीली है। लगभग 15 दिनों तक मक्का सुखाने के बाद में जांच मशीन यही दिखाती रही कि फसल गीली है। समय सीमा समाप्त हो गयी और बेचारे किसानों की फसल रखी की रखी रह गयी।
अब नोअबंदी के चक्कर में प्रायवेट व्यापारी भी माल नहीं खरीद रहे हैं ऐसे में किसानों के सामने भारी समस्या बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि उनकी फसल की सोसायटी में ना तो एंट्री की गयी और ना ही खरीदी की गयी जिसके कारण किसानों को परेशान होना पड़। खरीदी की तिथि समाप्त होने के बाद अब किसानों की कम दामों में मक्का बेचना पड़ रहा है वह केसबंदी के कारण किसानों के सामने लाकर खड़ा है। किसान आगामी दिनों में इस बात को लेकर आंदोलन के लिये भी रणनीति तैयार कर रहा है।  ज्ञात रहे कि पहले नर्मदा गु्रप ट्रांसपोर्टिंग का कार्य करता था लेकिन हाल ही में मोदी ट्रांसपोटिंग इस कार्य में लगा हुआ है जो कि समय पर माल ना उठाने के कारण नयी खरीदी भी बंद रही यह कारण भी किसानों की खरीदी ना होने का कारण बताया जा रहा है। अत: उक्त मामले में तिथि बढ़ाये जाने की मांग किसानों ने की है। 

डी ब्लॉक वाले पत्रकारों को विभाग ने क्या नहीं हटाया

    डी ब्लॉक वाले पत्रकारों को विभाग ने क्या नहीं हटाया

राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। जिले में अनेक लोग है जो किसी ना किसी व्यवसाय में लगे हुए है लेकिन हाल ही में पत्रकारिता जगत के अनेक संगठन है जो अपने आपको मजबूत करने के लिये इन व्यवसायियों को अपने संगठन का कार्ड देकर अवैध एवं अनैतिक कार्य के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। 
क्या पत्रकार जगत के लिये यह शर्म की बात नहीं है कि जिन हाथों में किताब या कलम है उनकी उपेक्षा कर ऐसे लोगों को हम महत्व दे रहे हैं जो कि अखबार को काला अक्षर भैंस मानते हैं। किसी भी कार्यालय में जाकर अफसरों के सामने अफसरशाही बताना और मैं ये छाप दूंगा वो छाप दूंगा जैसी धमकी देकर उन्हें अपना महत्व बताने का फैशन चल रहा है। सुरसा की तरह ये पत्रकार कहीं भी उग जाते हैं और अपने को सर्वमान्य बताने का प्रयास करते हैं। जिला जनसंपर्क विभाग को भी हम इसके लिए दोषी मानते हैं जहां पर ऐसे ऐसे समाचार पत्रों के नाम अंकित है जो कई वर्षो पहले बंद हो चुके हैं या फिर नियमित प्रकाशित नहीं होते लेकिन विभाग द्वारा आज तक इन समाचार पत्रों को अपडेट नहीं किया गया। आज भी समाचार पत्रों की सूची में डी ब्लॉक में आने वाले समाचार पत्रों के संपादक एवं अन्य लोग अपनी धौंस जमाने में पीछे नहीं रहते लेकिन इन पर समय रहते अगर लगाम नहीं लगायी गयी तो ये पूरे पत्रकारिता जगत को ही गंदा कर देंगे।

आज स्थिति यह है कि विभागों में फर्जी कार्डधारी एवं फर्जी पत्रकारों के कारण सम्मानजनक पत्रकारो को ही सही जानकारी नहीं मिलती और राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार विभागों में जाने से भी कतराने लगे हैं। आखिर पत्रकार संगठन इन पर अंकुश लगाने के स्थान पर इन्हें बढ़ावा क्यों दे रहा है। अगर जिला प्रशासन इन पर लगाम नहीं लगायेगा तो यह विकास के मार्ग में अवरोध पैदा करेंगे। 

Saturday, 10 December 2016

                                                                                                 प्रेस की आड़ में धौंस
ाष्ट्रचंडिका/ यदि देश भर में यह सर्वेक्षण किया जाए कि दो चक्कों और चार चक्कों वाली गाडिय़ों पर सबसे अधिक कौन सा स्टीकर चिपकाया गया होता है? मेरा विश्वास है कि सबसे आगे ‘प्रेस’ ही होगा। गांवों, कस्बो, शहर और महानगर तक में आपकों बड़ी छोटी गाडिय़ों पर प्रेस लिखी गाडिय़ां आसानी से मिल  जाएंगी। कुछ लोग अपनी गाड़ी पर प्रेस लिखवाने के लिए और प्रेस लिखा परिचय पत्र पाने के लिए पैसा खर्च करने को भी तैयार होते हैं। मैंने सुना था, दिल्ली के गुरु तेग बहादुर नगर में कोई संस्था पांच सौ-हजार रुपए लेकर छह महीने-साल भर के लिए प्रेस परिचय पत्र जारी करती थी। यदि महीने में उसने पच्चीस-तीस लोगों का परिचय पत्र भी बनाया तो उसके महीने की आमदनी हो गई पन्द्रह से तीस हजार रुपए की। खैर, यहां मेरा उद्देश्य उनकी आमदनी पर बात करना नहीं है। मैं सिर्फ इतना समझना चाहता हूं कि अपनी गाड़ी पर प्रेस लिखने की ऐसी कौन सी अनिवार्यता है, जो प्रेस लिखे बिना पूरी नहीं होती।
क्यों किसी गाड़ी पर ‘प्रेस’ लिखा होना चाहिए? क्या आज किसी गाड़ी पर आपने पलम्बर, हेयर डिजायनर, एक्टर, सिंगर लिखा देखा है? सिर्फ प्रेस और पुलिस जैसे कुछ पेशे वाले ही अपनी गाड़ी पर अपना परिचय लिखवाते हैं। कुछ सालों से विधायक, सांसद, जिला पार्षद लिखने की परंपरा भी शुरु हुई है। क्या यह स्टीकर सिर्फ रोड़ पर मौजूद दूसरे लोगों पर धौंस जमाने के लिए होता है। या इसकी दूसरी भी कोई उपयोगिता है। किसी गाड़ी पर एम्बुलेन्स लिखा हो तो समझ में आता है। चूंकि एम्बुलेन्स के साथ कई लोगों की जिन्दगी और मौत जुड़ी होती है। यह मामला फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों के साथ भी जुड़ा है।
वैसे कुछ पत्रकार मित्र यह भी कहेंगे कि रिपोर्टिंग के लिए जाते समय वे किसीवास्तव में प्रेस के स्टीकर के साथ यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि व्यक्ति उस संस्था का नाम भी साथ में जरुर लिखे, जहां से वह ताल्लुक रखता है। या फिर इस तरह के नियम बनने चाहिए कि प्रेस लिखा स्टीकर अपने पत्रकारों के लिए संस्थान ही जारी करें। इससे सडक़ पर प्रेस स्टीकर की अराजकता कम होगी। इसी प्रकार अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए खरीदी गई गाड़ी पर कोई व्यक्ति पुलिस का स्टीकर लगा रहा है? तो यह समझने की बात है कि इसके पीछे उसका क्या उद्देश्य हो सकता है? इस तरह की स्टीकर बाजी पर वास्तव में कुछ नीति बननी चाहिए।  सिवनी से प्रकाशित होने वाले ऐसे कई अखबारों के रिपोर्टरों की यहां भरमार है जो उन अखबारों के नाम पर अवैध वसूली करते घूमते हैं। मजे की बात यह है ?कि सिवनी  के अखबार का रिपोर्टर होने का एक रौब रहता है और राजधानी के उन तथाकथित अखबारों की स्थिति भी वैसी ही है जैसे यहां पर उनके फर्जी रिपोर्टरों की। ये तथाकथित अखबार यहां अपने पत्रकार के रूप में वसूली एजेन्ट बना देते हैं जोकि भोले-भाले लोगों को प्रेस का रौब दिखाकर थाने, कचहरी की दलाली और अपराधियों को संरक्षण देने में लगे हुए हैं कुछ तो ऐसे हैं कि वे स्वयं ही यही धंधा कर रहे हैं। इस तरह के लोग पुलिस की भी आय का अच्छा जरिया बने हुए हैं। सिवनी  में अब यह भी होने लगा है कि प्रेस के कार्ड बनाकर एक-एक हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं जिन्हें कोई भी ले सकता है चाहे वे पत्रकार हो या नही हो। ये लोग जिला, शहर, कस्बा आदि का सम्वाददाता कार्ड मुहैया कराते हैं और उनको गाडिय़ों या अन्य वाहन पर प्रेस लिखने का मौका देते हैं। बरेली में कुछ तथाकथित पत्रकार संगठन भी पैदा हो गए हैं जिनमें इस तरह के लोगों को अपना सदस्य बनाने और इस प्रकार प्रशासन के सामने शक्ति-प्रदर्शन की होड़ रहती है।

ढ़े पिता को आज भी पता नहीं कि उसके बंदी बेटे की मौत कैसे हुई थी?

बूढ़े पिता को आज भी  पता नहीं कि उसके बंदी बेटे की मौत कैसे हुई थी?
नरसिंहपुर जिला जेल में चार साल पहले हुई थी बंदी दिनेश की मौत 
अमर नौरिया
राष्ट्रचंडिका/ नरसिंहपुर- भोपाल जेल ब्रेक के बाद जिस तरह से प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कवायद की जा रही हैं और जेल के अंदर बंद कैदियों का हाल चाल पूछा व परखा जा रहा है किंतु यह कवायद कितने दिनों तक अपने आप में जेल प्रबंधन रख पायेगा यह अपने आप में जेल के अंदर बंद केैदियों से अच्छा कोई नहीं जान सकता कुछ इसी तरह के एक मामले में वर्ष 2012 में नरसिंहपुर केंद्रीय जेल में बंद एक बंदी दिनेश की मौत के बाद आज तक उसकी मौत का कारण क्या था इस बात की जानकारी उसके बूढ़े हो चुके पिता व उसकी दो मासूम बेटियों के जेहन में आज भी एक सवाल बनकर कौंध रहा है । 
नरसिहपुर जिला जेल में दिनांक 16 अक्टूबर 2012 को सुबह 9 बजे के करीब अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट रहे बंदी दिनेश पिता चन्नी लाल की मौत जेल के अंदर बिजली के खंबे पर चढक़र कूदने से होने की बात कही जा रही थ्ज्ञी किंतु जब उसके बूढ़े पिता को अपने बेटे की  मृत्यु का प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई तो उसे जारी किये जाने क ो लेकर जो  बात सामने आयी तो उसकी मौत को लेकर  उसकी मृत्यु का स्थान किस जगह था इस बात को लेकर अनेक आवेदन देने के बाद उसे उसके बेटे की मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया गया । 
जिला जेल में बंद बंदी दिनेश की मौत जेल के अंदर किस प्रकृति की हूुई है इस बात को लेकर जेल अधीक्षक नरसिंहपुर के पत्र क्रंमाक 607/बारंट/नरसिंहपुर दिनांक 11/02/2012 के अनुसार दिनेश आत्मज चन्नीलाल सत्र न्यायाधीश महोदय नरसिंहपुर के सत्र प्रकरण क्रं 188/11 अपराध धारा 302 भादवि निण्र्रय दिनांक 26/6/2012 आजीबन काराबास की सजा काट रहा था जो कि दिनांक 16/10/2012 को जेल के अं्रदर एक बिजली के खंये पर चढ गया था और खंबे से कूदने से गिरने के कारण उसकी मौत हुई थी  जिसकी न्यायिक जांच की जा रही थी किंतु बंदी दिनेश की मौत किस कारण और किस बजह से उसने बिजली के खंबे से कूदकर अपनी जान दे दी थी इसकी जानकारी आज दिनांक तक उसके बूढ़े पिता को नहीं लग पाई है । 
 गत दिनों जेलों की व्यवस्थाओं व बंदियों की पूछ परख को लेकर बंदी दिनेश के पिता चन्नीलाल से हमने फोन कर उसके मृतक बैटे दिनेश की मौत को लेकर की जा रही जांच को लेकर किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त होने के संबेंध मेें जानकारी चाही गई तो उन्होने ंबताया कि चार साल हो गये  उसके बेटे दिनेश की मौत जेल के अंदर किन परिस्थितियों के चलते हुई थी इसके बारे में उसे अभी तक किसी भी प्रकार की जानकारी नहींं मिल पाई है ऐसे में भोपाल जेल बेंक के बाद जिस तरह से जेलों की व्यवस्थाओं को लेकर जो जांच पड़ताल की जा रही है यह कितनी कारगर व जेल में बंद कैदियों के लिये कितनी सार्थक है यह बंदी दिनेश की मौत के चार साल बाद भी जेल की व्यवस्थाओं और जेल के अंदर एक कैदी की मौत से स्पष्ट तौर पर सामने आती है । 

भगवान भरोसे चल रहा शिक्षा विभाग

जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनता प्रशासन
भगवान भरोसे चल रहा शिक्षा विभाग
राष्ट्रचंडिका/ जिला कलेक्टर एस धनराजू शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और वे लगातार अन्य विभागों की तुलना में शिक्षा विभाग की समीक्षा में ज्यादा समय देते हैं यह अच्छा भी है आखिर शिक्षा के नाम पर उनके लिए चंद शालायें ही महत्वपूर्ण नजर आती हैं। अन्य शालाओं के प्रति वे कभी सुध लेना भी उचित नहीं समझते।
जब से वे सिवनी आये हैं उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट विद्यालय में चल रही गतिविधियों को देखना भी उचित नहीं समझा जबकि मठ कन्या शाला, उर्दू हायर सेकेण्डरी एवं नेताजी सुभाषचंद बोस उच्च. माध्य. शाला में अनेको बार जाकर संज्ञान लिया इसके अतिरिक्त अनेक शालाएं जर्जर पड़ी है जिनमें हिन्दी मेन बोर्ड, जिला स्कूल कन्या शाला महावीर वार्ड जो जर्जर हो चुकी है इस ओर आपका ध्यान नहीं है। शासन द्वारा सर्वशिक्षा अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के अंतर्गत इनका जीर्णोद्धार किया जा सकता है लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किये गये।
शालाएं शिक्षकों की कमी के कारण जूझ रही है इस ओर आपका जरा भी ध्यान नहीं है। जनप्रतिनिधियों ने भी मानो शिक्षा विभाग को भगवान भरोसे छोड़ दिया है अब तो यह चर्चा भी होने लगी है कि जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात को महत्व नहीं देता आज तक जनप्रतिनिधियों ने जो भी बात रखी उसे जिला प्रशासन की निष्क्रियता के चलते अनदेखा किया गया।
जिला शिक्षा विभाग में खुलेआम डीईओ द्वारा मनमानी की जा रही है वेतन भुगतान बिल पास कराने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है ना देने पर कई महीनो तक चक्कर लगाना पड़ता है लेकिन जिला प्रशासन उन पर ना तो कार्यवाही करता और ना ही दबाव बनाता है ऐसे में समस्या विकराल होते जा रही है।
हाल ही में परीक्षाएं नजदीक है और शाला के प्राचार्य शिक्षक छात्रवृत्ति सहित अनेक कार्यो के कारण परेशान है और उन्हें अच्छे परिणाम के लिये दबाव बनाया जा रहा है क्या ऐसी स्थिति में कोई अच्छे परिणाम की आशा कर सकता है। 

युवा पीढ़ी को कर रही बर्बाद लता कुल्हाड़े

                                              युवा पीढ़ी को कर रही बर्बाद लता कुल्हाड़े

किसी भी नगर के लिए सट्टा एक ऐसा अभिशाप है जो कैंसर की तरह का रोग है जो व्यक्ति का जीवन बर्बाद कर देता है। सिवनी नगर में इसका संचालन लता कुल्हाड़े द्वारा किया जाता है उक्त महिला के कारण अनेक पुलिसकर्मियों की नौकरी और चरित्र का पतन तक की स्थिति निर्मित हुई लेकिन पुलिस भी उसका कुछ नहीं कर पाती। अनेक बाद उसे जेल पहुंचाया गया लेकिन पैसो की दम पर वह छूटकर अपने व्यवसाय को प्रारंभ कर देती है अब तो स्थिति यह है कि वह यह कहती है कि मीडिया वालों को भी मैं पैसे देती हूं इसलिए वे भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। वैसे तो जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन छुटभैय्या तत्वों पर लगाम लगाने की कार्यवाही करता है लेकिन सट्टे का कारोबार करने वाली लता पर आखिर कब लगाया जायेग लगाम। लता के तार सिवनी ही नहीं बालाघाट जिले के कटंगी एवं छिंदवाड़ा के चौरई सहित अेनक जिलों से जुड़े है अगर इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो ये सुरसा की तरह बढ़ता जायेगा और युवा पीढ़ी को अपने गिरफ्त में ले लेगा। 
   राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। सट्टे का कारोबार खूब फलफूल गया है। कई घर अब तक इस सट्टे के कारण तबाह हो चुके हैं और कई उजडऩे की कगार पर हैं। चंद सैकेंड में अमीर बनने की लालसा में अंधे होकर लोग इस सट्टे रूपी जुए के खेल को खेलते हैं। इस धंधे से जुड़े लोग कई गरीबों के घर उजाडऩे में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
ये लोगों को रातोंरात अमीर होने का सब्जबाग दिखाते हैं और उनसे 1 से 100 तक किसी भी एक अक्षर पर सट्टा लगाने को कहते हैं। रातोंरात अमीर बनने की चाह में लोग अपनी मेहनत की कमाई सट्टे में लगाकर अपना सब कुछ बर्बाद कर बैठते हैं। एक रुपए के 90 रुपए वही अंक आने पर मिलते हैं। यदि अंक न निकले तो लालच में वे दोबारा फिर से दूसरे अंक पर रुपया लगा देते हैं।
सबसे ज्यादा सट्टा मजदूर वर्ग लगाता है। वे दिन भर मेहनत करते हैं और शाम के समय घर पर कुछ सब्जी लेकर जाएं न जाएं लेकिन सट्टे रूपी जुए का नम्बर जरूर लगाकर जाएंगे। उनके घर पर भी इस बात को लेकर क्लेश रहता है लेकिन ये लोग सुधरने की बजाय सट्टे की गेम खेलने में लगे रहते हैं। सारा दिन काम करते समय भी इनका ध्यान नम्बर बनाने में रहता है।
 स्कूली छात्र भी अब इस गेम में अपना भाग्य आजमाने लग पड़े हैं। सट्टा माफिया इनका जीवन बर्बाद करने में आगे ही है। वह भी स्कूली छात्रों को पर्ची लगाने से इंकार करने की बजाय उनको इस खेल में फायदे बता रहा है। खाइवाल पूरी तरह से सट्टा रूपी जुए से सबके घर तबाह करने में जुट गए हैं। उनको पुलिस के डंडे का भी डर इसलिए नहीं होता क्योंकि इस केस में जमानत मौके पर ही हो जाती है। उसके बाद वे लोग फिर से अपने कार्य को अंजाम देना शुरू कर देते हैं। कई ढोंगी बाबे भी सट्टे का नम्बर देने के लिए मशहूर हो चुके हैं। उनके पास पिछले कई वर्षों का रिकार्ड रहता है, जिसमें प्रत्येक दिन के आए नम्बर का हिसाब रहता है। उन्हीं के आधार पर सट्टे का नम्बर देकर वे लोगों से पैसे ऐंठ कर ले जाते हैं। जिसका नम्बर निकल आया उसके लिए तो बाबा सब कुछ हो जाता है। वे बाबा की खातिरदारी में कोई कमी शेष नहीं छोड़ते हैं।
लता के अंगने में चल रहा तीन पत्ती का खेल 
इतना ही नहीं सट्टे के बाद इस महिला किंग ने तीन पत्ती नामक जुएं का खेल भी अपने घर में शुरू करवा दिया है जहां धड़ल्ले से युवा वर्ग जमावड़ा लगाकर अपना भाग्य आजमाता है। इतना ही नही नई पीढ़ी के युवा इस किस्मत के खेल में हाथ आजमाकर जल्दी अमीर बनना चाहते हैं लेकिन यहां आकर कई युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। लता की इस दुकानदारी का विरोध अब तक किसी भी सामाजिक संगठन या जनप्रतिनिधि ने नहीं किया जो बात बात पर समाज सुधारने की बात करते हैं। बहरहाल अब यह पुलिस के लिए जांच का विषय है कि वह कब तक लता के इस काले साम्राज्य पर लगाम लगाती है वरना युवा पीढ़ी बेरोजगारी के साथ साथ कर्ज की खाई में धंसते जायेगी।
वाट्सएप गु्रप में भी लिखते हैं ओपन-क्लोज
पुलिस लाख दावे कर ले, लेकिन सट्टा बाजार पर वह अंकुश लगाने में विफल रही है। पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए शहर का 40 फीसदी से अधिक सट्टा मार्केट अब इंटरनेट के माध्यम से वॉट्सएप पर आ गया है। सट्टा रैकेट के सरगनाओं ने एजेंट्स के वॉट्सएप ग्रुप बनाकर नया जाल बिछा दिया है। जिसके बाद सट्टे के अड्डे पर आकर पर्चियां लगाने की जरुरत नहीं है सिर्फ एक मैसेज टाइप कर एजेंट्स को भेजा जाता है और उधर से ओके का मैसेज आते ही नंबर लग जाता है। नंबर खुलने पर अड्डे पर आकर पैमेंट ले जाओ नहीं तो 5 से 7 परसेंट पर कमीशन पर एजेंट पैमेंट लेकर आ जाता है। जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है वह साधारण मोबाइल से मैसेज के जरिए रैकेट से जुड़े हैं। न पुलिस का झंझट और न बार-बार सट्टा अड्डे पर जाने की टेंशन। शहर के 35 से 40 फीसदी इलाके में और पेशेवर ग्राहकों के बीच ही वॉट्सएप व मैसेजिंग सेवा के माध्यम से सट्टा खिलाया जा रहा है। जिस स्पीड से सट्टेबाज अपना क्षेत्र बढ़ा रहे हैं उससे लगता है कि आने वाले एक से दो सालों में पूरा सट्टा मार्केट इंटरनेट और ऐप के सहारे आ जाएगा। यहां खास बात यह है कि अच्छी गुडविल और पेशेवर सट्टा ग्राहक को ही एजेंट्स वॉट्सएप या मैसेज सर्विस से कनेक्ट कर रहे हैं। यदि कोई नया ग्राहक एजेंट्स की सेवा से जुडऩा चाहता है तो उसे पहले किसी गुडविल वाले ग्राहक का रिफरेंस नंबर देना पड़ता है। इसके बाद भी कुछ महीनों तक उसे 7 से 15 दिन की एडवांस मनी जमा करानी होगी।
 सट्टे का अवैध काला कारोबार शहर की गलियों से निकलकर गांव व कस्बों की गलियों तक फैल चुका है. नौजवान व महिलाएं तथा बच्चे भी सट्टे के मकडज़ाल में फंसते चले जा रहे है. ईमानदार पुलिस अधीक्षक व प्रदेश सरकार की छवि भी धूमिल होती जा रही है. पुलिस चैकी प्रभारियों व बीट सिपाहियों का खुला संरक्षण सट्टे के काले कारोबारियों को मिलता देखा जा सकता है. संभ्रांत नागरिकों के अनुसार सट्टे के काले कारोबार के कुप्रभाव से घातक परिणाम निकल सकते हैं.जानकारों की माने तो बीस प्रतिशत के सीधे लाभ पर लौट फेर कर पांचवें दिन उक्त काले कारोबार मे लगा सारा धन सट्टे के काले कारोबारियों का हो जाना चाहिए, परन्तु अशिक्षित नौजवान व महिलाएं तथा बच्चे सट्टे की उक्त गणित को समझ नही पा रहे है, क्योंकि अशिक्षा, गरीबी व लालच के कारण कभी कभार उनके घर का चूल्हा तक नही जल पाता है. और तो और सट्टे में कंगाल हो चुके नवयुवक अपराधिक रास्तों पर निकल कर चोरी व राहजनी जैसा अपराधों में संलिप्त हो रहे बताए जा रहे है.
शहर में व्यस्ततम चौराहों और कई मार्गों पर चाय की होटलों की आड़ में सट्टे का कारोबार फल फूल रहा है। चाय की थडिय़ों और उसके इर्द-गिर्द सटोरियों का जमावड़ा लगा रहता है। यह लोग बुकी के पास सट्टा बुक कराने के बाद चाय की होटलों पर खबर आने का इन्तजार करते दिखाई पड़ते है। इन दिनों सट्टे के काले कारोबार को संचालित करने के लिये काले धन का प्रयोग किया जा रहा है। राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आये इस काले कारोबार के लालच में गरीब परिवार भी गिरफ्त में आने लगा हैं।  पुलिस विभाग भी जान कर अंजान बना हुआ है। देखा जा रहा है कि सट्टे का काला कारोबार शहर के कुछ स्थानों से बढ़ते हुए दर्जनों चौराहों पर पहुंच चुका है और अपराधियों व पूंजीपतियों ने सट्टे के रूप में अपनी काली कमाई को इस व्यापार में निवेश के तौर पर लगाया हुआ है। काले कारोबार के कारिंदे लोगों को सट्टे के मकडज़ाल में फांस लेते हैं। और लालच में फंसकर लोग बर्बाद हो रहे हैं। पुलिस सब कुछ जानकर खामोश बैठी है। पुलिस सटोरियों को हर प्रकार का संरक्षण देती नजर आ रही है। जिसके कारण सट्टेबाजों की हौसला आफजाई हो रही है। सट्टा बाजार न केवल गरीबों, मजदूरों व बेरोजगार लोगों को बर्बादी की दिशा में ले जाने में सहायक होगा बल्कि अगर इसी तरह यह काला कारोबार और पर्चियों पर धन का लेन-देन किया जाता रहा तो इससे कानून व्यवस्था बिगडऩे की भी संभावना है।
शहर में कई स्थानों पर सट्टे का कारोबार चाय की होटलों की आड़ में धड़ल्ले से चल रहा है। सट्टे की बुकिंग के बाद सटोरिये शहर की होटलों पर इन्तजार के दौरान असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने से भी बाज नहीं आते है। इन चाय की होटलों पर चाय-सिगरेट के साथ ही अन्य नशीली वस्तुओं का भी खुले आम प्रयोग किया जाता है। जिन्हें कोई रोकने-टोकनें वाला नहीं है। चौराहों पर इस तरह की गतिविधियों के संचालन से राह चलता व्यक्ति भी एक-आध बार अपना भाग्य आजमाने की सोचता है और फिर वह इस मायाजाल में फंस जाता है जो चाह कर भी नहीं निकल पाता है। जुओं और सट्टों में हजारों परिवार बर्बाद हो जाने के बाद भी इसे बन्द करवाने के जिम्मेदार आंखें मुन्दकर बैठें है। जिन क्षेत्रों में सट्टे का कारोबार फल फूल रहा है उन क्षेत्रों से पुलिस के वाहनों की दिन भर आवाजाही रहती है लेकिन इनकी नजऱ सट्टे के कारोबारियों पर नहीं पड़ती है। इससे सट्टे के कारोबारी भी बिना किसी दबाव के बेखोफ होकर हजारों लोगों को बर्बाद कर रहे है।
            

Saturday, 26 November 2016

ब्राम्हण समाज क्यों झेल रही हैं इन्हें

प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष बरगद नहीं बल्कि अजगर है समाज के
ब्राम्हण समाज क्यों झेल रही हैं इन्हें
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। ब्राम्हण समाज के चुनावों को लेकर अक्सर मीडिया में चर्चा होती रहती है और इस चर्चा के पीछे कौन लोग है इसका रहस्य हम आज खोल रहे हैं। कहते है बुजुर्ग बरगद के समान होते हैं और वे हमें भले ही कुछ ना दे लेकिन छाया स्वरूप मार्गदर्शन अवश्य प्रदान करते हैं लेकिन बुजुर्ग का स्वभाव अजगर की तरह हो जाये तो फिर समाज के पतन में ’यादा समय नहीं लगेगा यही स्थिति वर्तमान में समाज की बनी हुई है।
जिन बुजुर्गो को और युवाओं को समाज के उत्थान के लिए समाज ने दायित्व सौंपा था, उन लोगों ने पद में रहते हुए समाज को अपनी स्वार्थ सिद्धी का साधन बना लिया खासकर प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष एक ऐसी शख्सियत है जो पद से हटना भी नहीं चाहते और जो लोग पद में रहकर कार्य करना चाहते हैं उन्हें मौका भी नहीं देते, उनके साथ कुछ चाटुकारों की फौज भी है जो उनके डाले गये टुकड़ो पर उनकी भाटगिरी के लिये हमेशा तैयार रहती है।
मीडिया में समाज के दो रूपों में जीने वाले प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष कहने को तो ठेकेदार है मगर समाज के भवन का मामला हो या अन्य मामलो में वे हमेशा अपना लाभ देखने का प्रयास करते हैं। आखिर अध्यक्ष के पद से वे क्यों नहीं हटना चाहते? ब्राम्हण समाज एक प्रबुद्ध समाज रहा है जो अपने कर्मो से भलाई के कार्य के लिए अग्रणी माना जाता है। देश या समाज में कोई भी विषम परिस्थिति आयी इस समाज ने हमेशा अपनी उदारता का परिचय दिया लेकिन प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष एक ओर अपने आपको एक पार्टी की राजनीति से जुडक़र समाज पर यह छाप अंकित करने का प्रयास कर रहे हैं कि समाज का वोटबैंक उनके इशारे से चलता है, अगर इन्हें समाज विशेष अधिकारों के तहत नहीं हटाती तो आने वाले समय में वे समाज के लिए नासूर ना बन जायें। कभी पत्रकार, कभी समाजसेवी तो कभी ठेकेदारी का नकाब लगाकर समाज को गुमराह करना इनकी फितरत बन गयी है। ना तो ब्राम्हण समाज की तरह इनका अनुभव है और ना ही ज्ञान है, बेहतर है समाज चिंतन करते हुए इस दिशा में कदम उठाये। 

Friday, 25 November 2016

कर्मचारियों की धौंस से चलता है सोहाने पेट्रोल पंप

कर्मचारियों की धौंस से चलता है
सोहाने पेट्रोल पंप
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं शासकीय बस स्टैण्ड से प्रतिदिन हजारों वाहनों का आना जाना लगा रहता है और यह पेट्रोल पंप बस स्टैण्ड के बाजू में होने से दोनों दिशाओं से आने वाले वाहन टकराने की संभावना बनी रहती है।
नहीं रहती चिकित्सा व्यवस्था
नियमानुसार किसी भी पेट्रोल पंप में दुर्घटना की स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था होना चाहिए लेकिन सोहाने पेट्रोल पंप नियमों को ताक में रख इस नियम का उल्लंघन कर रहा है। आने वाले ग्राहकों के लिए यहां पर पेयजल की भी व्यवस्था ना होने से लोग परेशान देखे जाते हैं।
चिल्हर के नाम पर कालाबाजारी
जब से नोटबंदी के आदेश हुए हैं तब से ग्राहकों से चिल्हर नोट के नाम पर दबाव बनाया जाता है लोगों से एकत्र चिल्लर आखिर कहां जा रही है यह सवाल जनता आज जिला प्रशासन से पूछना चाहती है जबकि बैंको ने स्पश्ट निर्देश दिये हें कि पेट्रोल पंप में 500-1000 के नोट लिये जायेंगे लेकिन यहां पर 500 व 1000 के नोट के नाम पर पेट्रोल डालने का दबाव डाला जाता है।
नगर के सरकारी बस स्टैंड, के बाजू मे पेट्रोल पंप संचालित है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में दो पहिया व चार पहिया वाहन चालक पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए आते हैं। प्रत्येक पेट्रोल पंप पर आने वाले ग्राहकों के लिए नियमत: कुछ नि:शुल्क सेवाएं रखना आवश्यक है। इसके साथ ही हवा भरने की मशीन अनिवार्य रूप से रखना है, लेकिन अधिकांश पेट्रोल पंप में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही पंप में पेयजल व शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। पेट्रोल पंपों में सुविधा के अभाव के चलते वाहनधारियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्दी भी नहीं पहनते कर्मचारी
पेट्रोल पंपों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को वर्दी पहनना अनिवार्य रहता है, लेकिन जिले के कुछ पेट्रोल पंपों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश पेट्रोल पंपों में कार्यरत कर्मचारी वर्दी भी नहीं पहनते। कर्मचारी कंपनी की वर्दी में नहीं, बल्कि सादे कपड़ों में कार्य करते हैं जो नियम विरूद्ध है।
कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार
अक्सर यहां के कर्मचारियों द्वारा आने वाले उपभोक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। पुलिस में शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही इन पर नहीं की जाती ऐसा अनेक उपभोक्ताओं का कहना है जिससे यह प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन सोहाने पेट्रोल पंप को नहीं हटाने के पीछे कोई रहस्य छिपा है। जब शहर को सुंदर बनाने के लिये अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गयी तो फिर इस पेट्रोल पंप को इस कार्रवाही से क्यों वंचित रखा गया।
मशीन है, कर्मचारी नहीं
नहीं होती नियमित जांच
जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों में मिलावट कर पेट्रोल व डीजल बेचे जाने की अनेक शिकायत मिलने के बाद भी खाद्य विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। वहीं पेट्रोल पंपों में सुविधाओं का अभाव बना हुआ है जिसका निरीक्षण भी नहीं किया जाता। लोगों ने बताया कि मिलावट की जांच के लिए फिल्टर पेपर मांगने के बाद भी पंप संचालक उपलब्ध नहीं कराते, जबकि नियमानुसार ग्राहक को संदेह होने पर यह पेपर दिया जाना चाहिए। पेट्रोल पंपों में सुविधाओं की जांच के लिए खाद्य विभाग तो है, लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए। विभाग की ओर से पेट्रोल पंपों का सतत निरीक्षण नहीं किया जाता, जिसके चलते पंप संचालकों के हौसलें बुलंद है।
शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों में वाहन चालकों को घंटो लाइन लगानी पड़ती है। पेट्रोल पंप में पेट्रोल और डीजल के लिए कई मशीन तो है, लेकिन कर्मचारी के अभाव में केवल एक या दो ही पंप से पेट्रोल दिया जाता है। 

Monday, 21 November 2016

क्या ब्राम्हण समाज नहीं देगा युवाओं को मौका?

कब तक ढोते रहेंगे कुरीतियों को
युवा गढ़ सकते हैं नया
क्या ब्राम्हण समाज नहीं देगा युवाओं को मौका?
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। ब्राम्हण सदिया से हर जाति में पूज्यनीय रहे हैं भले ही अलग-अलग समाज में इन्हें अलग-अलग नाम दिया गया हो लेकिन वे प्रतिष्ठा पाते रहे हैं। सिवनी जिले में हिन्दु वर्ग को एकजुट रखने के लिये ब्राम्हण समाज के संगठन का गठन किया गया था और इस संगठन से अपेक्षा थी कि ये समाज को दिशा देने तथा समाज की दशा सुधारने में ब्रम्हास्त्र का काम करेगा लेकिन पद पर बैठे लोगों ने इस पद को अपनी बपौती समझ लिया है और अजगर की तरह कुण्डली मारकर बैठने के बाद हटना ही नहीं चाहते हैं।
वैसे तो लंबे समय से जिला ब्राम्हण समाज के प्रवक्ता अनेकों बार समाज के चुनाव को लेकर विज्ञप्तियां जारी करते रहे हैं। ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष पद पर लंबे समय से वृद्धो को ही दायित्व सौंपा जाता रहा है जिसके कारण समाज की गति कछुआ की तरह ही रही है लेकिन अब समय आ गया है कि नये युवाओं में संदीप उपाध्याय, अभिषेक दुबे, विक्रांत तिवारी, बाबा पाण्डे, विशाल तिवारी, दीपक तिवारी, रविंद्र तिवारी  जैसे युवाओं को दायित्व सौंपा जाये और वृद्धजनों को संरक्षक के रूप में दायित्व सौंपकर उनका मार्ग दर्शन लिया जाये। अब वह समय नहीं रहा जब ब्राम्हणों के आचार विचार से प्रभावित होकर लोग उन्हें चलती फिरती न्यायालय मानकर उनके अक्षरश: वाक्यों को जीवन में अंगीकार करते थे। आज का युवा आने वाले कल का भविष्य है अगर उसे आज समाज द्वारा मौका नहीं दिया गया तो कल हमें पछताना पड़ेगा, हर युवा की इच्छा होती है कि में समाज के लिये कुछ करूं और समय रहते उसे मौका मिलता है तो वह समाज का नया इतिहास भी रच सकता है। समाज पुरानी रूढ़ीवादी विचारधारा को त्याग आने वाले कल और आने वाली पीढिय़ों के कंधे पर समाज का बोझ सौंप उनकी पीठ मजबूत करें तभी यह नारा सार्थक होगा ब्राम्हण सर्वत्र पूज्यंते। 

Sunday, 9 October 2016

नेताजी की अश्लील सीडी मामला पुलिस कब करेगी कार्यवाही ?



राष्ट्रचंडिका/नरसिंपुर/जबलपुर/अमर नौरिया। - संस्कारधानी के रूप में जाने जाना वाला मध्यप्रदेश का जबलपुर इन दिनों सोशल मीडिया में छाये एक वीडियो को लेकर अच्छी खासी चर्चा का विषय बना हुआ है ।  इस वीडियो में जबलपुर शहर के एक कांग्रेसी नेता का एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में एक कमरे के अंदर का वीडियो सोशल मीडिया में बायरल हो गया और इस से संबंधित खबरें सोशल मीडिया सहित कई मीडिया माध्यमों में सुर्खिया बनी हुई हैं और इस संबंध में कांग्रेस के अंदर खलबली मची हुई है । 
 सूत्रों की माने तो इस वीडियो के पीछे ब्लेैकमेंलिग किये जाने की बातें सामने आ रहीं है और इस आपत्तिजन वीडियो को लेकर एक महिला व युवती सहित कैमरामेन युवक लाखों रूपये वसूल भी कर चुके हैं  किंतु यहा वीडियो लीक कैसे हो गया इसके पीछे का असली सच क्या है इसको लेकर बताया जा रहा है कि संबंधित वीडियो लीक होने की वजह जो सामने आयी है वह यह कि यह वीडियो जिस मोबाइल सेट में था उसे सुधारने के लिये किसी दुकानदार को दिया गया था वहां से यह लीक कर दिया गया है । 
 वीडियों में आपत्तिजनक हालत में युवती के साथ दिखाई दे रहे नेताजी जबलपुर के प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों से भी जुड़े रहें हैं और इस संबंध में उक्त संस्थानों की समिति की भी आनन फानन में एक बैठक बुलाकर इस पूरे मामले को लेकर चर्चा भी हो चुकी है ।  वहीं इस पूरे मामले में पुलिस के द्वारा कोई कार्यवाही न किये जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है ओर पुलिस भी इस पूरे मामले को कांग्रेसी नेता से जुड़ा होने को लेकर अपनी ओर से किसी प्रकार की रिस्क नहीं ले रही है  लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि अक्सर पार्कों,होटलों में अचानक छापामार कार्यवाही कर आपित्तजनक हालत में लड़का लड़कियों को पकड़कर उन्हें नैतिकता के बहाने कार्यवाही करने वाली पुलिस इस पूरे प्रकरण मे सोशल मीडिया में आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद संबंधित पक्षों से पूछताछ व कार्यवाही करने से अभी तक परहेज क्यों कर रही है 

क्या गरबा समितियां देगी चंदे का हिसाब

क्या गरबा समितियां देगी चंदे का हिसाब
                 सायकल स्टैण्ड के भी वसूलते हैं पैसे,
                    गरबा की आड़ में पनपती है बुराईयां
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। मां दुर्गा की आराधना का पर्व नवरात्रि में भक्ति के लिये लोगों ने गरबा को माध्यम बनाया और कुछ वर्षो तक गरबा पवित्र भावना के साथ खेला जाता रहा है लेकिन आज इस गरबाकी झलक भी नहीं दिखती क्योंकि गरबा की रासलीला का स्वरूप ही परिवर्तित हो गया है जिसका जो समझ में आता है गरबा प्रशिक्षण के नाम पर अपनी दुकान खोल लेते हैं और युवा बालिकाओं व बालकों को गुमराह करते हैं।
इस वर्ष गरबा प्रशिक्षण के नाम पर नगर की कुछ प्रशिक्षण प्राप्त करने वालो ने नगर के संभ्रात लोगों से आयोजन के नाम पर अच्छा खासा चंदा बटोरा और इस चंदे में प्रशिक्षण देने वालों ने एक कमेटी बनाकर राशि वसूल कर राशि का बंदरबांट तक किया।
हम यहां पर बताना चाहते हैं कि चार माह पहले से इन संस्थाओं द्वारा गरबा का प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया जाता है। संभ्रात परिवार की महिलायें गरबा सीखने के लिये घरों से निकलती है और गरबा सीखने के साथ साथ समाज की अनेक बुराईयो को भी अपने साथ लेकर आती है जिसके कारण गरबा की आड़ में विकृतियां फलती फूलती हैं लेकिन इस ओर ना तो कोई बोलने का साहस करता है और ना ही जिला प्रशासन ही इन पर अंकुश लगाता है।
गरबा प्रशिक्षण हो या महोत्सव इनके नाम से वसूला जाने वाला चंदा या उपयोग एवं आय व्यय का ब्यौरा लेने का दुस्साहस कोई नहीं करता है। क्या आयोजन समिति का दायित्व नहीं बनता कि वे गरबा से प्राप्त आय व्यय प्रस्तुत कर अपने कार्यो में पारदर्शिता लाये लेकिन हमे विश्वास है कि जिस दिन आय व्यय का ब्यौरा पेश किया जाने लगेगा उस दिन हमारे द्वारा जो बाते कही जा रही है उन बातों को भी समाज के लोग सही मानने लगेंगे। कहते हैं सच उस कड़वी दवा की तरह होता है जो कड़वी होने के कारण बीमार को भी स्वस्थ्य कर देती है। यही स्थिति गरबा महोत्सव की है। अगर समय रहते इस पर विचार नहीं किया गया तो बाद में पछताना पड़ेगा।
लगभग सात-आठ दिनों से अनेक स्थानों में चल रहे गरबा महोत्सव को पारिवारिक महोत्सव का नाम दिया जाता है लेकिन आयोजक दोपहिया चौपहिया वाहनों में आने वाले परिवार के लोगों से पार्किंग चार्ज, प्रवेश शुल्क तथा रसीद काटने में भी पीछे नहीं रहते।
इनकी यह स्थिति को देखकर ऐसा लगने लगा है कि मानो गरबा के नाम पर इन गरबा प्रशिक्षकों को लूटने की खुली छूट दे दी गयी है। समय की मांग है कि समाज अब गरबा प्रशिक्षकों से आय व्यय का हिसाब मांगे । हमारा गरबा के भक्ति स्परूप में आ रही बुराईयों की ओर ध्यान आकर्षित करने के पीछे यही उद्देश्य है कि मां भवानी की तपस्या का यह पर्व गरिमा और शालीनता के साथ मनाया जाये ना कि लोग इसे अपनी उदर पूर्ति का साधर बनाये। 

Saturday, 24 September 2016

गरबा के कोरयोग्राफर के पास नहीं डिग्री

गरबा के कोरयोग्राफर के पास नहीं डिग्री

फीस लेने के बाद भी मांगते है सहयोग
गरबा सिखाने के नाम प्रशिक्षणार्थियों से मोटी फीस तो ही ली जाती है इसके अलावा आयोजन के नाम पर शहर के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों नेताओं व गणमान्य नागरिकों से तरह-तरह की मदद ली जाती है जबकि गरबे में उतना खर्च नहीं हो पाता। साल भर अपना पेट पालने के लिये कुछ लोगों ने गरबे को व्यवसय बनाकर रख दिया है।
गरबे के नाम पर 
चंदा वसूली
इन दिनों देखा जा रहा है कि गरबा आयोजन के नाम पर शहर में चंदा वसूली भी शुरू हो चुकी है। आयोजकों के द्वारा बकायदा घरो-घरो व प्रतिष्ठानों में उनका प्रचार करने व पास मुहैया कराने के एवज में चंदा उगाही की जा रही है। 

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। हमारा समाचार पत्र आपके हाथ में होगा और तब तक गरबा की गूंज पंडालों में गूंजने लगेगी। श्रद्धालु भक्ति तप उपवास में डूबे रहेंगे और भक्ति का ही रूप गरबा की आड़ में फिर प्रेम प्रसंग और भोग विलास का नंगा नाच प्रारंभ होगा।
हमारे पाठकों को बता दें कि पूर्व के अंक में गरबा पर हमने जो लिखा उस पर लोगों ने हमारा उत्साह बढ़ाया हम बता देना चाहते हैं कि गरबा की आड़ में कुछ संस्थाओं ने तो अब इसे कुछ माह के लिए नहीं बल्कि वर्ष भर का व्यवसाय बना लिया है और जन्माष्टमी पर्व हो या नवदुर्गा या फिर अन्य किसी भी समाज के पर्वो में गरबे के कार्यक्रम में कोरयोग्राफी करना या फिर प्रशिक्षण देने के नाम पर लोगों का समय बर्बाद करना इनकी फितरत में शामिल हो गया है। युवा वर्ग की चाहे बालक हो या बालिकाएं ये गरबा को भक्ति की दृष्टि से कम बल्कि अपना प्रेम प्रसंग चलाने का साधन बनाने के लिये इन गरबा प्रशिक्षण केंद्रो की शरण लेते हैं और गरबा में बालक बालिकाओं का एक साथ नृत्य प्रेम प्रसंग में बदल जाता है, बाद में इसके परिणाम आते हैं उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
गरबा का प्रशिक्षण देने वाले लोगों के पास ना तो कोई ऐसी संस्था की डिग्री या डिप्लोमा होता जिससे यह सिद्ध हो सके कि वास्तव में गरबा या अन्य नृत्यों के संबंध में ये जानकार है। इनके यहां प्रशिक्षण लेने वालो को यह कहा जाता है कि वे उन्हें टेलीविजन स्टारों के साथ या कोई नामी हस्ती के साथ गरबा कने का मौका देंगे और उनके इस प्रलोभन में आकर प्रशिक्षण के नाम पर लोगों का आर्थिक शोषण का सिलसिला चलता रहता है इन पर समय रहते लगाम नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में ये समाज के लिए नासूर बन जायेंगे और चाहकर भी हम कुछ नहीं कर पायेंगे।

कबाड़ी चंद दिनों में बन जाते हैं करोड़पति

कबाड़ी चंद दिनों में बन जाते हैं करोड़पति
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। बचपन से कबाड़ा बेचने वाले बालक बालिकाओं में धीरे धीरे ज्यादा लाभ कमाने को लेकर चोरी की प्रवृत्ति बढऩे लगती है और ये लोग कबाड़े की आड़ में घरों में घुस चोरियां भी करने में पीछे नहीं नहीं रहते, अनेकों बार इन्हें लोगों ने रंगे हाथो पकड़ा लेकिन इन्हें गरीब मानकर बिना थाने पहुंचाये ही छोड़ दिया जाता है जिसके कारण इनकी सह निरंतर बढ़ती जा रही है।
कहने को तो शासन से बाल अधिकार अधिनियम के तहत ऐसे बच्चों को मार्गदर्शन के लिये सामाजिक न्याय विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग को दायित्व सौंपा है जो इन बच्चों को कबाड़ा बीनने के स्थान पर शिक्षा ग्रहण करने के लिये प्रेरित करे लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम को सिर्फ कागजों और फाईलों तक ही सीमित कर दिया गया है।
अगर पुलिस विभाग इन कबाड़ा बीनने वालो से लेकर कबाड़ा का व्यवसाय करने वालों का इतिहास और वर्तमान की सूक्ष्मता से जांच करेगी तो कई चोरी और कई रहस्यों पर पड़ा पर्दा की हकीकत सामने आ सकती है लेकिन पुलिस विभाग नहीं चाहता कि उनकी मासिक चढ़ोत्तरी पर आंच आये और यह सिलसिला बंद हो।
्आखिर बेलगाम हो चुके इन कबाडिय़ों पर अंकुश कब लगेगा। अब तो आम आदमी को एक या दो दिन के लिये घर से बाहर जाने में चिंता सताने लगती है कि कहीं घरों में चोरी ना हो जाये क्योंकि कबाड़ा बीनने की आड़ में ये लोग घरों की रेगिंग करते हैं और फिर संतुष्ट होने पर धावा बोल देते हैं।
पुलिस का है इनको संरक्षण
नगर मुख्यालय इन दिनों चोरों की नर्सरी बन गया है, पैदा होने के बाद कुछ साल के बच्चों के हाथों में कबाड़ा बीनने का थैला पकड़ा देना और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना कोई नयी बात नहीं। कबाड़ा बीनने वाले ये युवक इस कार्य में इसलिए लिप्त रहते हैं क्योंकि कबाड़ा बेचने के बाद कबाड़ा मालिक उहें तुरंत भुगतान कर देता है। कबाड़े का थोक व्यवसाय करने वालों को इससे कोई सरोकार नहीं होता कि जिसने उसके पास सामान बेचने लाया है वह कहा से लाया है, यहां तक कि शासकीय विभागों में लगी हुई सामग्री भी ये चुराने में बाज नहीं आते हैं और इस कार्य में लगे लोगों को पुलिस का खुला संरक्षण होने की वजह से ये लोग बेधड़क होकर कबाड़ बेच चांदी काटते हैं।
कबाड़ो में खपता है सरकारी सामान
सूत्रों की माने तो नगर के दो बड़े कबाडख़ानों में शासकीय सामान खपने की खबर आये दिन मिलते रहती है लेकिन इनका कुछ नहीं होता। सूत्रों की माने तो बीते माहों में चौरसिया मोहल्ला गुरूनानक वार्ड में स्थित एक कबाड़ा दुकान में सरकारी विभाग के पाईप व अन्य पाट्र्स रखे होने की खबर लगी थी लेकिन कबाड़ा संचालक यह माल रातोरात उठाकर अन्य जगह पर रखवा दिया था। वहीं दूसरा बड़ा कबाडख़ाना बुधवारी बाजार में चल रहा है जहां भी कई प्रतिबंधित सामान खरीदे जाते हैं जिसकी भनक पुलिस को ना लगे इसके लिए इनके द्वारा अलग से गोदाम बनाये गये हैं। यदि इनके गोदामों में पुलिस छापामार कार्यवाही करती है तो एक बड़ा जखीरा बरामद होगा लेकिन पुलिस इस तरफ ध्यान क्यों नहीं देती यह तो वही जाने। 

खनिज माफिया ने फूंका अधिकारी शासकीय वाहन

खनिज माफिया ने फूंका अधिकारी शासकीय वाहन

खनन माफियाओं के खिलाफ लगातार कर रहे थे कार्यवाही 
अमर नौरिया/राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर- जिले में अवैध खनन को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा की जा रही कार्यवाही को लेकर खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है और इस बात के चलते प्रशासनिक अधिकारियों को डराने और धमकाने का सिलसिला भी लगातार जारी है और कुछ इसी तरह की बात को लेकर जिला खनिज अधिकारी ओ पी बघेल के शासकीय वाहन को गत २१-२२ ङ्क्षसंतबर की दरम्यानी रात को कुछ अज्ञात तत्वों ने आग लगा दी जिससे शासकीय वाहन जीप पूरी तरह से जल गई ।
 जिले में कुछ समय पूर्व गोटेगांव विधायक कैलाश जाटव व कांग्रेस महामंत्री सुरेन्द्र राय के द्वारा पत्रकारवार्ता कर जिले में नर्मदा नदी में लगातार किये जा रहे अवैध खनन को लेकर सत्तापक्ष के लोगों पर सवाल उठाये जा रहे थे जिस बात को लेकर जिला प्रशासन द्वारा गत दिनों से कुछ कार्यवाही गोटेगांव तहसील के अंतगर्त की जा रही थी इस बात को लेकर अधिकारियों धमकी भी मिल रही थी और इसी की परिणिती यह हुई की उनके निजी निवास धनारे कालोनी सांई मंदिर के पास उनके शासकीय वाहन को आग के हवाले कर दिया गया ।
गौरतलब है कि जिले में नर्मदा नदी में लगातार अवैध खनन किये जाने से नर्मदा नदी के संरक्षण व उसके पर्यावरणीय स्वरूप को नुकसान पहुंचाये जाने से चिंतित गोटेगांव विधायक कैलाश जाटव ने अवैध खनन व जिले में प्रशासनिक मशीनरी को भ्रष्टायार में लिप्त बताते हुये अवैध खनन पर कार्यवाही न किये जाने की बात कही थी इसके बाद कांग्रेस महामंत्री सुरेन्द्र राय ने भी जिले में समानंातर सरकार के माध्यम से अवैध खनन व अन्य अवैध धंधो को लेकर सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधाा था । 

Saturday, 17 September 2016

गरबा प्रशिक्षण बना व्यवसाय

                                 गरबा प्रशिक्षण बना व्यवसाय

                            प्रशिक्षण की आड़ में काट रहे चांदी
      पार्टनरों का सहारा लेती हैं बालिकाएं
                   02 से 20 हजार फीस

नौरात्रि पर्व वैसे तो श्रृद्धा और भक्ति का पर्व है लोग अपने अपने अंदाज में मां शारदा की भक्ति में लीन रहते हैं लेकिन आजकल इस श्रृद्धा भक्ति को भी व्यवस्था से जोड़कर देखा जाने लगा है। लगभग 10-15 वर्षो से सिवनी में गरबा महोत्सव को लेकर प्रचलन बढ़ गया है। गरबा की रासलीला दिन ब दिन बढ़ते जा रही है। लोग गरबा की आड़ में अब चांदी काट रहे हैं। जिन संस्थाओं का वर्ष भर अता पता नहीं रहता अचानक नवरात्रि के पहले प्रचार प्रसार कर लोगों को और खास कर कुछ महिलाओं को जोड़कर प्रशिक्षण देने के नाम पर लूटने का प्रयास करते हैं।
राष्ट्रचंडिका/सिवनी/02 महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान 2 से 20 हजार रूपये की राशि प्रति प्रशिक्षक से वसूल की जाती है तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को सब्जबाग दिखाये जाते हैं उन्हें टेलीविजन एवं फिल्मों में होने वाले गरबा की तरह उनके गरबा महोत्सव में नृत्य करने का मौका मिलेगा जो संस्थाएं गरबा का प्रशिक्षण देती है ना तो उनका रजिस्ट्रेशन होता है और ना ही अता पता। बस प्रचार के नाम पर पाम्पलेट और अखबारों में विज्ञप्ति प्रकाशित कर लाखो ंकी कमाई करते हैं।
गरबा का आयोजन का इतिहास भगवान श्री कृष्ण और मां शारदा देवी की भक्ति के लिये किया जाता था लेकिन वर्तमान गरबा मॉडलिंग और फैशन बनकर रह गया है जिसके प्रति समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि गरबा की आड़ में लोग इस महोत्सव को व्यवसाय ना बनाये।
इतना ही नहीं अधिकांश बालिकाएं जो व्यस्क और अव्यस्क है वे गरबा सीखने के आर्थिक तंगी के चलते अपने पार्टनर पुरूष का सहारा लेती है और आर्थिक सहारा लेने के पश्चात आगे क्या होता है वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
गरबा महोत्सव की परंपरा हमारे नगर में जोर शोर से बढ़ी है और चाहे गरबा करने वाले हो या गरबा देखने वाले युवा सभी इसकी आड़ में गलत कामों को अंजाम  देते है भले ही सिवनी में ऐसे मामले प्रकाश में ना आये हो लेकिन कई महानगरों के मामले हमें सचेत करते हैं कि हमें हमें भी संभलकर चलना चाहिए नहीं तो गरबा का स्वरूप हमें पतन की ओर ले जायेगा और हम अपनी आने वाली पीढ़ी को जवाब नहीं दे पायेंगे।
वैसे भी देर रात्रि तक होने वाले आयोजनों को लेकर प्रशासन को नवरात्रि में भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है जिससे भक्ति का वातावरण से पूरा जिला गूंजायमान हो। 

स्वच्छता की रेंकिंग में नरसिंहपुर देश में 37 वें पायदान पर

                स्वच्छता की रेंकिंग में नरसिंहपुर देश में 37 वें पायदान पर 

अमर नौरिया/ राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर- देश में स्वच्छता को लेकर एकत्रित की गई जानकारी में नरसिंहपुर जिले को पूरे देश में 37 वां तथा प्रदेश में 2 स्थान प्राप्त हुआ है जिले को स्वच्छता अभियान को लेकर मिली इस उपलब्धि पर यह गौरव की बात है किं तु इस उपलब्धि क ो मिलने के चंद रोज पूर्व ही जिले के गोटेगांव विधायक कैलाश जाट बाह्य शौचमुक्त घोषित की गई प्रदेश की प्रथम जनपद पंचायत चांवरपाठा के अंतगर्त आने वाली ग्राम पंचायतों में निर्मित किये गये शौचालयों के निर्माण कार्यों को लेकर उच्च स्तरीय समिति से जांच कराये जाने की मांग कर चुके  हैं देश में 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान का शुभारंभ किया गया था । व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण को लेकर वर्ष 2014 में नरसिंहपुर जिला प्रदेश में तीसरे पायदान पर था । 

-शिकवा शिकायतों को दरकिनार कर प्रदेश में स्वच्छता के मामले में नंबर 2 पर नरसिंहपुर 
 स्वच्छता के मामले में जिले को यह उपलब्धि भारत सरकार के स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय द्वारा जारी की गई है इसके लिये नरसिंहपुर जिले को हैदराबाद में आयोजित कार्यशाला के दौरान प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है । स्वच्छता के लिये निर्धारित बिंदुओं को लेकर  रेंकिंग में जिले क ो 77.7 अंक प्राप्त हुये हैं और इन्हीं अंको के आधार पर जिले को स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश में दूसरा  व पूरे देश में 37 वें स्थान पर रखा गया है । जिले को मिली यह रैंकिंग जिसमें शौचालयों और उनके उपयोग,घरों के आसपास स्वच्छता,कूडें कर्कट का निपटारा,साफ सुथरे सार्र्वजनिक स्थान,गंदे पानी का जमाव नहीं होने देने जैसे बिंदुओं पर मिले अंको के आधार पर निर्धारित की गई है । 
स्वच्छता अभियान को लेकर स्वच्छता एवं पेयजल  मंत्रालय ने जो जानकारी अपने आधार पर जिन बिंदुओं पर जुटाई गई है उसको लेकर देश व  प्रदेश में स्वच्छता अभियान को लेकर सुर्खियों में आने वाला नरसिंहपुर जिले की शौचालयों के निर्माण को लेकर जमीनी हकीकत कुछ और ही है शौचालयों के निर्माण को लेकर आज भी ग्रामीणों के मन में संतुष्टि का भाव नहीं है और यही इस पूरे अभियान की वास्तविकता को दर्शाता है । 
नरसिंहपुर जिले को जब बाह्य शौचमुक्त घोषित किये जाने का अभियान चलाया जा रहा था तब ही जनपद पंचायत चांवरपाठा को प्राथमिकता देते हुये जिले की अन्य जनपद पंचायतों के अधिकारियों व कर्मचारियों को चांवरपाठा जनपद क े गांवों में शौचालयों के निर्माण कार्यों हेतु दिशा निर्देश देकर लक्ष्य प्राप्त क रने की कवायदें की जाने लगी थी इसका नतीजा यह हुआ कि चांवरपाठा जनपद के गांवो में दिनरात लोगों के मन में अपने अपने घरों में शौचालयों को बनाये जाने का ऐसा माहौल बनाया गया कि बच्चे हों या बुढ़े हों सभी अपने अपने घरों में शौचालयों के गडडे खोंदनें लगे और इन शौचालयों के गडडों को लेकर जो लोग आनाकानी करते अधिकारियों व कर्मचारियों की फौज उन्हें शासकीय योजनाओं सहित अन्य बातों का डर दिखाकर दो तीन दिन के अंदर शोैचालय के निर्माण के लिये तैयार कर लेती थी जिसका नतीजा यह हुआ कि आनन फानन में तैयार किये और बनाये गये शौचालयों की स्थिति यह हुई की कहीं किसी शौचालय का दरवाजा सही ढंग से नहीं लग पाया तो किसी का शौचालय बनाये जाने में केवल एक ही गड्डा खोदकर उस शौचालयों को पूर्ण किये जाने का प्रमाणपत्र दे दिया गया । 
जनपद पंचायत चांवरपाठा सहित जिले की अन्य जनपदों की ग्राम पंचायतों में भी शौचालयों के निर्माण को लेकर लक्ष्य पाने की ऐसी आपाधापी मची की अगर घटिया निर्माण या अन्य कोई परेशानी बताकर शौचालयों की अनमितिताओं की बात या शिकायतें जिला पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक की जाने लगी किंतु जांच के नाम पर उनसभी शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । 
 जब पूरे जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण का काम किया जा रहा था इस दौरान सूचना के अधिकार के तहत जिले की कुछ जनपदों से पूर्ण अपूर्ण शौचालयों को लेकर  जानकारी मांगी गई तो इन शौचालयों की जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी इससे अंदाजा लगाया जा सकता था कि इस फर्जीबाड़ा को किसी न किसी रूप में सामने आने से बचाया जाये इसका नतीजा यह हुआ कि सूचना के अधिकार के तहत आवेदनों को भी रद्दी की टोकरी में डाल कर इस अभियान को अपनी मनमर्जी से जमीनी हकीकत को धता बताकर  श्रेय लूटने की होड़ में पूर्ण करा दिया । 
बाह्य शौचमुक्त घोषित जनपद पंचायत चांवरपाठा की ग्राम पंचायतों में निर्मित किये गये शौचालयों के निर्माण कार्यो पर  खर्च की गई राशि को लेकर भी कई तरह बातें सामने आई कभी कोई 40 करोड़ रूपये खर्च होने की बात कहता तो कभी अपूर्ण  शौचालयों की संख्या व नवनिर्मित शौचालयों के आंकड़ो की बात की जाती तो वह बात स्पष्ट रूप से कभी सामने नहीं आई । वहीं शौचालयों के निर्माण की राशि को लेकर भी पेंच फंसा रहा इस अभियान के प्रारंभिक चरणों में आयोजित पत्रकारवार्ता में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जीर्ण शीर्ण शौचालयों के निर्माण के लिये जिला स्तर से 5000 हजार रूपये की राशि प्रदान कर मरम्मत कराये जाने व हितग्राही द्वारा स्वंय के द्वारा शौचालयों के निर्माण किये जाने पर 12000 हजार रूपये सीधे उसके खाते में प्रदान किये जाने की बात कही थी । 
लेकिन बाद में पता चला कि ग्राम पंचायतों में शौचालयों के निर्माण कार्यों को लेकर ठेका देकर काम करवाया गया है इस तरह का ठेका किसने कितने में दिया और कब दिया इसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाई । 
         जिले को स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश में मिली इस उपलब्धि को लेकर गौरव की बात है किंतु इस मिशन को लेकर जो आशंकायें आमजनमानस में पहले थे वह आज भी जस की तस बनी हुई हैं अलबत्ता जनपद पंचायत चांवरपाठा की 82 ग्राम पंचायतों में शौचालयों के निर्माण को लेकर 
17 करोड़ 43 लाख 71 हजार 586 रूपये खर्च होने की बात सामने आई है किंतु इसमें से भी जो जानकारी सूत्रों से मिल रही है उसके अनुसार कई ग्राम पंचायतों में अभी भी शौचालयों के निर्माण कार्यों की राशि का भुगतान नहीं हुआ है वहीं अनेक हितग्राही भी ऐसे हैं जिनके द्वारा स्वंय के द्वारा शौचालयों का निर्माण किये जाने के बाद भी उनके खातों में राशि नहीं भेजी गई है ।  वहीं चांवरपाठा जनपद के बाह्य शौचमुक्त घोषित होने पर भारतीय प्रबंध संस्थान ,इंदौर के 138 छात्र-छात्राओं....
शेष 03 पर

Tuesday, 13 September 2016

जमकर फलफूल रहा है भ्रष्टाचार-जाटव


  • जमकर फलफूल रहा है भ्रष्टाचार-जाटव

  • बाह्य शौचमुक्त घोषित चांवरपाठा जनपद के शौचालयों के निर्माण पर भी की जांच की मांग जिले में राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर-अमर नौरिया/ गोटेगांव विधानसभा क्षैत्र के विधायक डा कैलाश जाटव ने एक प्रेसवार्ता के माध्यम से जिला प्रशासन सहित पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर जिले में भ्रष्टचार सहित अन्य निर्माण कार्यौं आदि में की जा रही हीलाहवाली को लेकर जमकर निशाना साधा ।  इस दौरान उन्होंने बताया कि हमारे जिले में शासन की अनेक योजनाओं का कार्य चल रहा है लेकिन सीधे जनता से जुड़े कुछ ऐसे विभाग हैं जिनमें आचरण और कार्यप्रणाली से भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है। पुलिस विभाग को लेकर उन्होनें बताया कि कई दिनों से नशामुक्ति के शिविर लगाये जा रहें हैं मैं इसके खिलाफ नहीं हूँ किंतु इससे म प्र भर में जिले की छवि को गहरा धक्का लगा है । मेरी विधानसभा के कुछ गांव नशे के प्रभाव में हो सकते हैं किंतु पूरी गोटेगांव विधानसभा के गांवों को नशामुक्त करने अपने आप में सही इसलिये नहीं हो सकता क्योंकि कई सामाजिक जतिवर्गों में बगैर नशे के उनके धार्मिक आयोजन एवं विवाह आदि नहीं हो सकते यह एक परम्परा को नशे के रूप में नहीं लिया जा सकता । गोटेगांव के कुछ नेताओं पर आज भी सांमतशाही व्यवस्था से शासन चलाना चाह रहें हैं पर उनसे निवेदन है कि राजनीति करने के लिये पूरा जीवन पड़ा है हम समाज के नेता होने के नाते समाजनीति का क्या संदेश देना चाहते हैं । गांवों में ग्राम रक्षा समितियों के गठन को लेकर पुलिस अधीक्षक को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देकर मजबूत किये जाने की बात क ही गई थी किंतु 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी बैठकें तक नहीं हो पाई और तो और वर्तमान पुलिस अधीक्षक को तो इनकी जानकारी तक नहीं है । ग्राम रक्षा समितियों के मजबूत होने से पुलिस प्रशासन का बहुत बड़ा नुकसान यह होगा कि उनका महीना और हप्ता बसूली बंद हो जायेगी इसलिये इनके गठन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं की जा रही है । 

  • जिले में भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र एवं खनन शराब सहित शुगर माफियाओं की मिली भगत से विकास कार्यो में रूकावट है जिनमें आदिमजाति कल्याण विभाग,पीएचई,पीडब्लूडी,आरईएस आदि विभाग सहित शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग प्रमुख हैं । 
  • इसके अलावा विधायक ने जिला पंचायत के द्वारा बाह्य  शौचमुक्त घोषित जनपद पंचायत चांवरपाठा को लेकर भी सवाल उठाये और कहा कि जिला पंचायत के अधिकारियों के द्वारा भी वहां भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है अभी तक कई पंचायतों का शौचालयों का निर्माण कार्यों का भुगतान नहीं हुआ है जिन शौचालयों का निर्माण कार्य किया गया है एक साल में उनकी दुर्दशा हो चुकी है मेरी मांग है कि 

बरेला पावर प्लांट में बढ़ा अपराधों का ग्राफ

                                 बरेला पावर प्लांट में बढ़ा अपराधों का ग्राफ

                                               जनप्रतिनिधियों की क्यों है दिलचस्पी
                                                    प्रदूर्षण से कैसे बचेंगे आदिवासी
राष्ट्रचंडिका/थम्रली पावर प्लांट घंसौर (बरेला) का कार्य जब से प्रारंभ हुआ है तब से यहां पर मानो राहू ग्रह के साथ साथ साढ़े साती शनि ने भी यहां पर अजगर की तरह कुण्डली मारकर अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है। बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिये पूंजी लगाई थी लेकिन इस पावर प्लांट का दुर्भाग्य है कि इतने प्रयास के बाद भी यह सफल नहीं हो पा रहा है।
पावर प्लांट प्रारंभ करने के लिये प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस प्लांट को प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की थी इस उद्योग के लिये अनाप शनाप दामों मे ंआदिवासियों से जमीन खरीदी गयी जिसको लेकर आदिवासियों ने जब विरोध प्रारंभ किया तो उन्हें पैसे देकर कंपनी ने चुप करा दिया लेकिन वे आदिवासी आज भी अपने आपको ठगा सा महसूस करते हैं और इस सारे मामले में क्षेत्र के वरिष्ठ नेता बताने वाले शक्तिसिंह का विशेष हाथ रहा जिन्होंने कंपनी और आदिवासियों से दलाल के रूप में अच्छा मुनाफा कमाया।
इस कंपनी ने कच्चा माल पहुंचाने के लिये सड़क का निर्माण तो किया लेकिन इसकी आड़ में खनिज विभाग से बिना अनुमति के करोड़ो रूपये की मुरम एवं अन्य सामग्री  का वारा न्यारा कर सड़क का निर्माण कार्य कराया। गौर करने वाली बात यह है कि सड़क मार्ग से आने वाले वाहनों में प्रतिदिन अन्य राज्यों से लोगों का आना जाना भी लगा रहा जिसके चलते इस क्षेत्र में अपराधिक गतिविधियों का ग्राफ जिले से (दिल्ली) राजधानी तक गूंजता रहा है और आज भी अपराधिक गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही है लेकिन प्रशासन मौन है। 
थर्मल पावर प्लांट से जुड़े प्रबंधक एवं अन्य अधिकारी गणों को इस बात की जरा भी चिंता नहीं  है कि जो संयत्र यहां लगाया गया है उसकी चिमनी से निकलने वाले धुएं से आसपास के 10 से 20 किमी तक के लोग भी प्रदूर्षण के कारण प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा। जब भी प्रदूर्षण को लेकर यहां चिंता की जाती है तो यहां के प्रबंधक एवं साथियों द्वारा प्रदूर्षण मुक्ति के लिये 10-20 वृक्षों को रोपण कर इतिश्री कर लेते हैं।
इस पावर प्लांट में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिये मेडिकल सुविधा के कोई इंतेजाम नहीं है अगर कोई घटना होती है तो श्रमिक को घंसौर लाने के दौरान श्रमिक दम तोड़ सकता है इसी तरह श्रमिकों के परिवारजनों की सुख सुविधा के लिये अच्छी शाला प्लेग्राउंड, बगीचा आदि के इंतेजाम भी नहीं है अगर समय रहते ये व्यवस्था नहीं की गयी तो आने वाली पीढ़ी हमसे सवाल करेगी कि आपने हमारे लिये क्या किया? 

विवेक के दाता गणेश की बने रहे गरिमा

                        विवेक के दाता गणेश की बने रहे गरिमा

                                   चंदा वसूल कर शौक पूरा करते हैं कमेटी के लोग
                                        बाध्ययंत्र से आमजन होते हैं परेशान

राष्ट्रचंडिका/भगवान गणेश को बुद्धि एवं विवेक के दाता के रूप में पूजा जाता है लेकिन दस दिनों तक मनाये जाने वाले इस पर्व के दौरान गणोशोत्सव मनाने वाले लोग विवेक का जरा भी ध्यान नहीं रखते जिसके कारण बिना विवेक से की जाने वाली पूजा का प्रतिफल हमें अनेक रूप से देखने को मिलता है। 
अक्सर देखा जाता है कि गली चौराहों में गणेश प्रतिमा स्थापित करने वाले मण्डपों में समिति के सदस्यगण मदिरापान करते हैं और अपने क्षेत्र में अशांति का वातावरण निर्मित करते हैं और जब पुलिस शाांति बनाने पहुंचती हे तो ये शांति के बाधक बन जाते हैं। क्या इस तरह गणोशोत्सव पर्व मनाना उचित है। 
इस उत्सव को मनाने वाले लोग अक्सर मण्डपों में अनलिमिट साउंड में बाध्ययंत्रों को बजाकर बुजुर्गो एवं घरों में बीमार लोगों के लिये सिरदर्द बन जाते हैं जब इन समितियों से इन बाध्ययंत्रों पर कम साउंड या बंद करने की बात कही जाती है तो ये लोग अपना अपमान समझते हैं वे भूल जाते हैं कि उनके तेज बाध्ययंत्र बजाने से आपके एवं अन्य परिवार के लोगों को भी तकलीफ होती है।
गणेशोत्सव पर्व वैसे तो आजादी के पहले से मनाया जा रहा है और इस त्यौहार ने लोगों को एकजुट होने में काफी मदद भी की थी लेकिन उस समय के हालात और आज के हालातों में अंतर आ गया है। पहले शास्त्र सम्मत रीति रिवाज से इस त्यौहार को मनाया जाता था लेकिन वर्तमान में गणेशोत्सव मनाने वाले ना तो शास्त्र सम्मत तरीके से समय पर प्रतिमा को स्थापित करते हैं और ना ही समय पर विसर्जन करते हैं जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि आयोजक इस उत्सव की आड़ में हमारे इष्टदेवता का माखौल उड़ा रहे हैं और विसर्जन यात्रा के दौरान शोभायात्रा में शराब का सेवन कर पुरानी रंजिश भुनाना और शांति भंग करने की घटनाएं आम हो गयी है इसके लिये पुलिस प्रशासन की सक्रियता हमें त्यौहार की गरिमा बनाने में मदद कर सकती है।  सबसे गंभीर बात यह है कि इस उत्सव की आड़ में लोगों से अनाप शनाप चंदा वसूल करना आज का फैशन बन गया है और इस चंदे को मदिरा पान में खर्च करना भी फैशन बन गया है जिसको लेकर आमजनों को सक्रिय होने की जरूरत है वे चंदा देने से पहले जान ले कि जिसे आप उत्सव के नाम पर सहयोग कर रहे हें वास्तव में आपकी दी हुई दान की राशि का उपयोग उत्सव में हो रहा है या अन्य में।

Sunday, 4 September 2016

राष्ट्र चंडिका



राष्ट्र  चंडिका



पार्टी के लिये वरदान है राजा

पार्टी के लिये वरदान है राजा
स्तीफा ना मंजूर, विरोधियों के मंसूबों पर फिरा पानी
हाईकमान चाहता है राजा को दिया जाये मौका
राजा को डॉमीनेट करने का रचा था षडय़ंत्र

राष्ट्रचंडिका/जिला कांग्रेस कमेटी सिवनी में पिछले दिनों हुए घटनाक्रमों को लोग पचा नहीं पा रहे हैं। युवा कार्यकर्ता राजा बघेल ने जैसे ही अपना स्तीफा सौंपा था वैसे ही कांग्रेस के एक खेमे में उत्सव मनाते हुए मिठाई तक बांटी और पार्टी भी दी थी लेकिन जिलाध्यक्ष हीरा आसवानी एवं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें मनाने की जो पहल की उसमें वे सफल भी रहे लेकिन जिन लोगों ने उत्सव मनाया था उनके इरादों पर पानी फिर गया। 

यह सर्वविदित है कि राजा बघेल ना केवल अच्छे वक्ता के रूप में जाने पहचाने जाते हैं बल्कि उनके द्वारा सभी कांग्रेसियों का मनोबल बढ़ाने के हमेशा प्रयास किया गया लेकिन राजा बघेल के प्रयासों और बढ़ते कदम को लेकर यह बात कांग्रेस के ही एक विरोधी गु्रप को हजम नहीं हो रहा था जिसके चलते उन्होंने श्री बघेल के खिलाफ षडय़ंत्र रचने का प्रयास किया जब इसकी भनक श्री बघेल के खिलाफ षडय़ंत्र रचने का प्रयास किया जब इसकी भनक श्री बघेल को लगी तो उन्होंने तत्काल अपनी स्तीफा देते हुए यह बताने का प्रयास किया कि वे कांग्रेस के कार्यकर्ता है और पार्टी में बिना पद के भी वे अपनी सेवाएं देते रहेंगे। 
विरोधी खेमे द्वारा रचा गया षडय़ंत्र ताश के पत्तों की तरह ढह गया है लेकिन हाइकमान चाहती है कांग्रेस की भलाई के लिए राजा  बघेल जैसे होनहार कार्यकर्ता की जरूरत है और इन्हें पार्टी से अगर दायित्व सौंपती है तो उसका निर्वहन करना भी इन्हें आता है आज भी कांग्रेस के कार्यकर्ता राजा बघेल के एक इशारे पर हर आंदोलन के लिये आगे आ जाते हैं।
अगर यूं कहे कि कांग्रेस का भूत भविष्य और वर्तमान राजा बघेल पर है तो अतिश्योंक्ति नहीं होगी। राजा के लिये हाईकमान के नेतागण भी हर समय समर्पित रहते हैं यहां तक कि अनेक नेताओं ने तो राजा को यह तक आश्वासन दिया है कि अगर सिवनी में कोई आंदोलन होगा तो हम तुम्हारे साथ है।
यह सब जानते हैं कि राजा ने हमेशा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का सम्मान किया है और उन्हें आदर भी दिया है चाहे स्व. हरवंश सिंह रहे हो या ठा. रजनीश सिंह या फिर सुश्री विमला वर्मा, आशुतोष वर्मा, राजकुमार खुराना, प्रसन्न मालू या फिर वरिष्ठ कांग्रेसीजन सभी के प्रति आदर का भाव रखना इनकी फितरत में है, इन्होंने कभी किसी की चाटुकारिता नहीं की। हाईकमान ने देश के किसी कोने में भी इनकी उपयोगिता समझी और आदेश दिया इन्होंने इस आदेश को सिरोधार करते निभाया जिसमें हाईकमान ने अनेकों बार प्रदेश के विभिन्न पदों का दायित्व सौंपा। आज जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं का जो सम्मान बचा है उसका श्रेय भी राजा को जाता है क्योंकि आंदोलनों के दौरान जिन कार्यकर्ताओं को संगठित कर विरोध प्रदर्शन किया जाता है परदे के पीछे राजा बघेल की अहम भूमिका होती है।
सड़कों पर आकर आंदोलन करने के दौरान किसी भी परिणामों की चिंता ना करना और आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाना इनका स्वभाव है। बेहतर है ऐसे कार्यकर्ता का पार्टी सम्मान करे तभी पार्टी में ऊर्जा आयेगी।

गाडरवारा पशु बाजार में गौवंशो के नाम पर चल रही है

गाडरवारा पशु बाजार में गौवंशो के नाम पर चल रही है 
                     अवैध वसूली 
राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर - यूं तो नरसिहपुर जिले की पुलिस गौवंशो की सुरक्षा को लेकर काफी मुस्तैद है और कई थाना क्षैत्रों में गौवंशो की सुरक्षा के नाम पर उचित कार्यवाही भी कर रही है किंतु कई ऐसे  भ्रष्ट पुलिस अधिकारी और कर्मचारी हैैं जो गोवंशों की रक्षा के नाम पर कटने जा रहे गौवंशो के परिवहन से अपनी जेबे भर रहें हैं शर्मनाक बात यह भी है कि तथाकथित रूप से गौवंशो की रक्षा का भार जो लोग अपने ऊपर लेकर समाज में परचम लहरा रहें हैं उनका डर  भी इन अवैध वसूली करने वालों के मन में कहीं दिखाई नहीं देता है इससे यह सवाल उठता हेै कि आखिर इसके पीछे कहीं न कहीं एक संगठित गिरोह तो इस पूरे गोरखधंधे में जिले में सक्रिय तो नहीं हैं । 
पुलिस विभाग,नगरपालिका व अन्य के गोरखधंधे का स्ंिटग आया सामने 
गत जून माह में नरसिंहपुर थाना कोतवाली के अंतगर्त अपने पालतू गौवंशो को आर्थिक तंगी से बेचने डांगीढाना बाजार ले जा रहे गरीबों के साथ जिस तरह से हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओ ने मारपीट कर उनके दो बैल छुड़ाकर उन्हें गौतस्करी का आरोपी बनाते हुये जिस तरह की कार्यवाही पुलिस से करवाते हुये उन्हें जेल भिजवाया था वह अब इस तरह से खुलेआम हो रही गौवंशो के  परिवहन की बसूली और उन्हें कौन कहां ले जा रहा है इसकी पूछताछ कर उन पर कार्यवाही करने का दबाब डालकर गाडरवारा में की जा रही अवैध बसूली बंद कराने का प्रयास करेगें ेै । 
गाडरवारा में इस तरह से हो रही गौवंशो की अवैध वसूली को लेकर वहां के जनप्रतिनिधियों के द्वारा मौन साधे रहना भी अपने आप में इन मूक गौवंशो की दर्दशा के लिये काफी हद तक जिम्मेदार है । सत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गाडरवारा में काफी लंबे समय से पशुओं के व्यापार में अवैध वसूली की जा रही है और इसमें पुलिस विभाग नगरपालिका सहित अन्य लोगों का जमकर हिस्सा वांट होता है जिसके चलते कभी भी इस मामले में किसी पर कार्यवाही तक नहीं की गई है । 
गाडरवारा में प्रति रविवार भरने वाले पशुओं के बाजार में गौवंशो के परिवहन को लेकर की जा रही अवैध वसूली पर हमारी टीम द्वारा किये गये स्टिंग के दौरान हुये वार्तालाप - 
दिनांक 28 अगस्त 2016 
स्थान - गाडरवारा पशु बाजार की सड़क 
(जहां पर पुलिस विभाग का एक कर्मचारी बगैर वर्दी के अपने एक साथी के साथ खड़ा है )
तभी एक टाटा एसी वाहन जिसमें कुछ गौवंश जा रहे थे उसे हाथ देकर रोका जाता है उसमें बैठा शख्स पुलिसकर्मी से कहता है - अपनई है घरे ले जा रहे हैं , 
पुलिसकर्मी - ठीक है 50 देओ और आगे बढ़ाओ । 
तभी भोपाल के नंबर की एक बोलेरो पिकअप गाड़ी जिसमें एक पार्टी का झंडा सामने बोनट के पास लगा है उसे रोका जाता है वाहन में बैठा हुआ व्यक्ति कहता है । 
व्यक्ति - नइ जा रये यार हम तो देके जात हैं,कक्का तुम्हई बताओं आर शक्ल देख के पहचान जात है 
(तभी उक्त पुलिसकर्मी वाहन के नजदीक जाता है वाहन में बैठा व्यक्ति कुछ रूपये देता हेै जिसे पुलिसकर्मी अपनी जेब में रख लेता हेै ) 
 रिपोर्टर- काय कैसे हो बाजार ?
पुलिसकर्मी - कछ़ नई अब तो गुजरयाई है, वो अभे तुमरे सामने पचास को दे गओ है । 
(पुलिस कर्मी के साथ खड़ा व्यक्ति भी हां में हां मिलाता है और कहता है कि अब तो गजरयाई बाजार चल  रहे है )
इसके बाद अचानक पुलिसकर्मी अपने साथी से कहता है कि अरे जाओ आज वा आई है भर गई हुई है वाहे देख लो और ने होये तो 400 में ठेका करा दइयो । 
रिपोर्टर - देखलो नइ तो कौन है वाहे अंदर करा    दो । 
पुलिसकर्मी - मुस्करा देता है और कहता है कि भोपाल जा रई है आत रहत है । इसके बाद पुलिसमकर्मी का साथी मोटर साइकिल स्टार्ट कर वहां से चला जाता है । इस प्रकार से अन्य वाहनों से भी  जिनमें गौवंशो को भरकर ले जाया जाता है उनसे इसी  प्रकार की अवैध वसूली का क्रम जारी रहता है । अन्य वातें करते हुये हमारे स्टिंग रिर्पोटर वहां से अन्य  स्थान पहुंचता हेै जहां पर नगरपालिका का एक कर्मचारी कुसी लगाकर बेठा है जिसे मोटर साइकिलों से आये कई लोग गंदी गंदी गालियां देते हुये गंड़ई से पैसे वसूलने के लिये मना कर रहें हैं तथा उसे सम्मानीय जाति का होने से जूता नहीं मारने की कह रहे हेँ । 
( गाडरवारा पशु बाजार में इस तरह से प्रति रविवार को की जाने वाली अवैध वसूली को लेकर नगरपालिका,पुलिस प्रशासन सहित अन्य लोगों के द्वारा किये जा रहे गौवंशो के इस व्यापार की  आड़ में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन न किये जाने पर समाजहित में हमने यह स्ंिटग किया था  )
   

Friday, 12 August 2016

कुकरमुत्ते की तरह निकलने वाले समाचार पत्रों पर कब लगेगा अंकुश

कुकरमुत्ते की तरह निकलने वाले समाचार पत्रों पर कब लगेगा अंकुश

आजादी के पहले जो समाचार पत्र निकलते थे और उनके सम्पादकगण राष्ट्रभक्ति की भावना को लेकर समर्पित थे ये पत्रकारों का अध्ययन और लेखनी लोगों में जोश भर देती थी, अनेको नाम गिनवाये जा सकते हैं जिसमें गनेशशंकर विद्यार्थी, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल सहित अनेक नाम है। 

सिवनी। देश को आजादी मिलने के बाद भी कुछ दिनों तक यह सिलसिला जारी रहा लेकिन समय ने करवट लिया और पत्रकारिता ने सेवा के स्थान पर उद्योग का स्वरूप ले लिया और पत्रकारिता की आड़ में कोई खाई की फैक्ट्री डाल कर व्यवसाय करने लगे तो कोई भूमाफिया बनकर अपनी कलम को उदरपूर्ति का साधन बना बैठे।
यही स्थिति सिवनी जिले की भी बनी हुई है। सिवनी में ई स्थानीय तथा 30 अन्य जिलों से आने वाले व 100 समाचार पत्र साप्ताहिक पंजीयन जनसंपर्क विभाग में है इनमें से कुछ साप्ताहिक समाचार पत्रों को छोड़ दे तो त्यौहार पर्वो में प्रकाशित होने वालों की लंबी सूची है जो सिर्फ विज्ञापन विशेषांक के रूप में प्रकाशित होकर अधिकारी एवं अन्य लोगों पर धौंस जमाते है। इतना ही नहीं अनेक दैनिक समाचार पत्र के स्थानीय सम्पादकों को तो ठीक से लिखना भी नहीं आता इनके लिये काला अक्षर भैंस बराबर की कहावत चरितार्थ होती है मगर नेताओं से जी हुजूरी करके अपना नाम भोपाल और दिल्ली से जुड़वाकर हजारों रूपये के विज्ञापन प्रकाशित कर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। क्या पत्रकारिता का यही अर्थ है पत्रकार समाज का दर्पण होता है, लोग इसे लोकतंत्र की चोथी आंख भी कहते हैं मगर दुर्भाग्य है कि चौथी आंख के नाम पर काला धब्बा इन्हें कहे तो अतिश्ंयोक्ति नहीं होगी।
यहां पत्रकारिता के साथ साथ संगठनों का जिक्र करना भी लाजमी होगा कि जिले में अनेक संगठन है जो कार्यकर रहे है मगर ये ऐसे शेषनाग हो गये हैं जो हटना ही नहीं चाहते पांच में दस वर्षो के संगठन के अध्यक्ष एवं अन्य पदों पर बैठने वाले पत्रकारों को अपने विवेक का परिचय देते हुए स्वयं हटना चाहिए क्योंकि तालाब में ज्यादा दिन तक भरा पानी गंदा हो जाता है और बदबू मारने लगता है। संगठन में ज्यादा दिनों तक रहने वाले सदस्यों के प्रति भी आक्रोश उत्पन्न होने लगता है, इसलिए स्वविवेक का परिचय देना चाहिए।
अगर संगठन को निष्पक्ष और निर्भिक बनाना है तो खरपतवार की तरह या कुकरमुत्ते की तरह त्यौहारो में निकलने वाले समाचार पत्रों का विरोध होना चाहिए अन्यथा ये समाज और पत्रकारिता जगत में प्रदूर्षण फैलाने से बाज नहीं आयेंगे और इसका फायदा राजनैतिक दलों से जुड़े लोग उठाते रहेंगे। 

Saturday, 30 July 2016

विधायक ने जवाब देने पाल रखे हैं भाट

विधायक ने  जवाब देने पाल रखे हैं भाट
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। सिवनी विधानसभा के विधायक दिनेश राय जिन्होंने अपनी राजनैतिक यात्रा सिर्फ खनकदार सिक्कों से की और आज भी वे इन सिक्को की चमक से हमेशा लोगों को यह बताने का प्रयास करते हैं कि जिले में एकमात्र वे ही नेता हैं जो जिलेवासियों के शुभचिंतक है। हम अपने पाठकों को बताना चाहते हंै कि इन्होंने अपनी राजनैतिक यात्रा का सूत्रपात कैसे किया और यहां तक कैसे पहुंचे। 
नगर परिषद लखनादौन अध्यक्ष कैसे बने थे
नगर परिषद लखनादौन में अध्यक्ष का चुनाव लडऩे के पूर्व इन्होंने लखनादौन की गणेश एवं दुर्गा समितियों को आर्थिक सहयोग दिया और इन कमेटियों के सदस्यों को मौखिक रूप से अपना कार्यकर्ता बनाया था और इन कार्यकर्ताओं ने इन्हें विजयश्री दिलवाने एवं इनकी महिमा मण्डित करने में जी जान लगा दिया था, हम इनके सार्वजनिक जीवन में या इनके व्यवसाय के संबंध में टिप्पणी नहीं करूंगा कि ये क्या करते थे या क्या करते हैं? या फिर इस क्षेत्र क लोगों को लुभाने के लिये इन्होंने क्या क्या किया था? यह सब आप सभी अच्छी तरह जानते हैं
विधानसभा में भी यही स्थिति
जिले में तो इनका बड़बोलापन लोग जानते ही है लेकिन विधानसभा में रखने वाले प्रश्रों को चर्चा के पूर्व ही समाचार पत्रों में प्रकाशित कर सुर्खियां बटोरने का वे प्रयास करते रहते हैं। अब तो प्रशासनिक अधिकारी हो या जिले के नेता सभी उनके इस व्यवहार से वाकिफ होने के कारण उनकी बातों को तवज्जों नहीं देते हैं।
पाल रखे हैं भाटो को 
राजाओं के कार्यकाल में राजा की प्रशंसा के लिये जिस तरह भाट हुआ करते थे ठीक इसी तरह इन विधायक महोदय को भी भाट पालने का शौक शुरू से रहा है जो गली चौराहों में इनकी भाटगिरी करने से नहीं थकते इतना ही नहीं वाटसएप में इनकी महिमा मंडित करने क लिये एक गु्रप को भी जिम्मेदारी सौंप रखी है जो आमजन द्वारा किये जाने वाले तीखे प्रश्रों का भाटो की तरह जवाब देते हैं। 
बड़बोलेपन में माहिर हैं मुनमुन
चुनाव के पूर्व इन्होंने फोरलेन मेडिकल एवं अनेक ऐसी बाते लोंगो के सामने रखी थी तथा अपना घोषणापत्र बांटकर आश्वासन दिया था कि वह उनकी सभी समस्याओं का समाधान करेंगे अगर शासन सहयोग नहीं करेगा तो वे अपने पैसों से यह कार्य को पूर्ण करेंगे लोगों ने विश्वास कर उन्हें विधायक बनाया लेकिन उसक बाद कार्य पूर्ण करने के स्थान पर इन्होंने विज्ञप्तिवीर बनकर अपना बड़बोललापन ही दर्शाया क्योंकि उनके द्वारा जो कहा गया वह सच नहीं हुआ। 
सस्ती लोकप्रियता इनकी कमजोरी
सिवनी जिले में आज तक जितने भी नेता हुए चाहे गार्गीशंकर मित्र, विमला वर्मा, रामनरेश त्रिपाठी, प्रहलाद पटेल या फिर महेश शुक्ला, नेहासिंह, हरवंश सिंह इन्होंने हमेशा अपने काम पर विश्वास रखा ना कि फोटो छपवाने पर या फिर बेतुके बयान देकर लोगों को गुमराह करने का काम कभी नहीं किया लेकिन दिनेश राय ने अपने चाटुकारों को मोबाईल थमाकर सस्ती लोकप्रियता के लिये छोटे छोटे कार्यक्रम जिनका कोई औचित्य नहीं है इसकी भी फोटो समाचार पत्रों में भेजकर प्रकाशित करवाने जैसी ओछी हरकत करना इनकी फितरत बन गयी है।

Friday, 8 April 2016

फर्जी पत्रकार दे रहे धौंस

फर्जी पत्रकार दे रहे धौंस

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राष्ट्र चंडिका (सिवनी) । हाल ही में संपूर्ण जिले में प्रेस, यह शब्द प्रसिद्ध होने से सैकड़ों वाहन चालक अपने दुपहिया वाहन, चार पहिया वाहनों पर प्रेस लिखकर समझते हैं कि मान-सम्मान प्रतिष्ठा मिलेगी यह स्थिति सर्वत्र होने से सही मायने में यातायात नियमों का खुले आम उल्लंघन होता नजर आ रहा है।  गांव से शहर तक और शहर से महानगरों तक प्रेस के लेबल पर कुछ भी कर सकते हैं। ऐसे लोगों मेेंं धारण होने ेसे दुपहिया सहित ऑटो मिनीडोर, टैक्स, काली-पीली-पीली आदि अवैध यातायात वाहनों पर बड़े अक्षरों में प्रेस यह शब्द दिखने से सर्वत्र चर्चा का विषय बन गया है। में कोई भी संबंध न रखने वाले और इस व्यवसाय में न होने से प्रेस का लेबल लगाकर घुमने की शुरूआत करने पर इस प्रतिबंध लगाने से बहुत परेशानी हो रही है। इन प्रेस वाहनों की आड़ में प्रेस का लेबल का उपयोग कर आतंकवादी व नक्सलवादी हमला कर सकते हैं इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। जिले के बड़े दैनिक समाचारपत्रकेकर्मचारी, संवाददाता,पत्रकार, के वाहनों पर प्रेस का  शब्द नजर आते हुए भी यातायात पुलिस उन पर कार्यवाही करती है। परंतु जो बोगस पत्रकार खुलेआम अपने वाहन पर प्रेस शब्द का उपयोग करते हैं, उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती है वह खुले आम घूमते हैं। तहसीलों मेें बहुत से वाहनों पर प्रेस शब्द लिखा नजर आने से संपूर्ण जिला प्रेस मय होने का प्रतीत होता है। यहां महाभाग वाहन पुलिस तक ही मर्यादित न होने से नेताओं के कार्यक्रम से तो सरकारी, गैरसरकारी कार्यक्रम तक वह अनेक कार्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने के लिए दौड़धूप कर प्रवेश करते हैं। 
एकादि कार्यक्रम में विविध  दैनिक समाचार पत्रों के संवाददाता समाचार संकलन करते हुए एक कोने में खड़े रहकर समचार संकलन करते हैं, परंतु यह बोगस पत्रकार कार्यक्रम में प्रवेश करते और खुले आम समाने की कुर्सी पर 

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वाहन चैकिंग के नाम पर गुण्डागर्दी

वाहन चैकिंग के नाम पर गुण्डागर्दी

नवसिखियों के हवाले यातायात महकमा
ग्रामीणो को किया जा रहा परेशान
 चलते वाहन से खींच लेते है चॉबी
 यातायात प्रभारी की गैरमौजूदगी का उठा रहे फायदा
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। यातायात कर्मियों की कमी के चलते नगर रक्षा व होमगार्ड के युवकों को यातायात का जिम्मा तो सौंपा गया है लेकिन अब यही युवा विभाग के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। रोजाना बस स्टैण्ड स्थित यातायात ऑफिस के सामने गुण्डागर्दी की तर्ज पर इनके द्वारा वाहन चैकिंग की जाती है, खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को जबरन परेशान किया जाता है। चलती गाड़ी से चॉबी निकालने मे माहिर यह युवक लोगों से बदतमिजी करने से भी बाज नहीं आते। बस स्टैण्ड में दुकान लगाने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गत दिवस नगर रक्षा समिति के एक युवक द्वारा वाहन चैकिंग की जा रही थी तभी एक व्यक्ति जो कि अपने किसी रिश्तेदार की गमी में जा रहा था जिसे जबरन रोका गया और उसके वाहन की चॉबी निकालकर जेब में रख ली गई, उसके बाद उक्त व्यक्ति ने उन्हें समझाया कि वह गमी में जा रहा है, उसे छोड़ दो तभी नगर रक्षा समिति के गुण्डेनुमा युवकों ने उसके बदतमिजी करते हुए चालान कटवाने की बात कही, तब उसने कहा कि वह लौटकर चालान कटवा लेगा चाहे तो वाहन खड़ा कर लो.. लेकिन इन गुण्डेनुमा युवकों ने उसकी एक न सुनी इतना ही नहीं उसे मारने के लिये बेल्ट तक निकाल लिया गया।
मैडम की गैरमौजूदगी का फायदा उठा रहे युवक
यातायात की कमान संभाल रही यातायात प्रभारी की ड्यूटी फिलहाल उज्जैन के सिहंस्थ मेले में लगी है जिनकी गैरमौजूदगी का फायदा नवसिखिये युवक उठा रहे हैं। बीच रोड़ में खड़े होकर गुण्डा प्रवृत्ति दिखाते हुए इनके द्वारा बेवजह आम लोगों को परेशान किया जा रहा है जबकि बस स्टैण्ड से ही रोजाना बिना परमिट व ओव्हरलोड बसे निकल रही हैं जिन्हें देखकर भी यातायात कर्मी आंख मूंद लेते हैं।
चलती गाड़ी से निकाल लेते हैं चॉबी
हद तो तब हो गई जब नगर रक्षा समिति के एक युवक ने चलती गाड़ी से चॉबी निकाल ली जिसके चलते वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिरते-गिरते भी बचा। ऐसा रोजाना ही देखने को मिल रहा है जब यह युवक चलती गाड़ी में लपक जाते हैं और चॉबी निकालकर जेब में रख लेते हैं। जब वाहन चालक उनसे कहता है कि चॉबी वाहन लगा दो हम चालान कटवा रहे हैं तब इन युवकों के द्वारा उनकी एक न सुनते हैं चॉबी निकाल ली जाती है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
बिना वर्दी के दिखाते है रौब
सफेद रंग की सादी टीशर्ट पहले नगर रक्षा समिति व होमगार्ड के युवकों की टोली पूरी रोड में घेरा बनाकर खड़े रहती है जबकि बस स्टैण्ड में भीड़ भाड़ होने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। सादी वर्दी में इनका रौब किसी पुलिस के उच्चाधिकारी से कम नहीं होता।
साहब का वाहन देखकर छुप गये
गुरूवार की सुबह लगभग 11.30 बजे जब कलेक्टर का वाहन बस स्टैण्ड से निकला जिसे देखकर बिना वर्दी वाले युवक तितर-बितर हो गये, और कलेक्टर साहब की गाड़ी के जाने के बाद तुरंत सड़कों में आ गये।  

Saturday, 5 March 2016

वाहन चोर गिरोह और कबाडिय़ो की टोली पकड़ाई

 वाहनों की चोरी कर कबाडिय़ों को बेचते थे
राष्ट्रचंडिका/ नरसिंहपुर/- अमर नौरिया\ वाहन चोरों के एक बड़े गैंग का पर्दाफाश कर नरसिंहपुर पुलिस ने नरसिंहपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों से चुराये गये वाहनों को जप्त किया तथा इन चोरों से लगातार की जा रही पूछताछ से इनसे कई और वाहनों के चोरी किये जाने की जानकारी मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है ।
इस संबंध में गत दिवस थाना कोतवाली में आयोजित एक पत्रकारवार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में लगातार हो रही वाहनों की चोरियों को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन के नेतृत्व में जिला स्तर पर पतासाजी करने हेतु दो टीमों का गठन किया गया था जिसमें एक टीम में  एसडीओपी नरेश शर्मा,थाना कोतवाली प्रभारी डीव्हीएस नागर,मुंगवानी थाना प्रभारी उमेश दुबे,चौकी प्रभारी हिमलेन्द्र पटैल,एवं सहायक उप निरीक्षक संतोष मिश्रा,तथा दूसरी टीम में एसडीओपी करेली डीपी श्रीवास्तव,थाना प्रभारी करेली अरविंद दुबे,उप निरीक्षक बच्चन मिश्रा,सहाउनि,बसंत शर्मा,सउनि जीएस महोरे इन टीमों के द्वारा लगातार जुटाई जा रही जानकारी के आधार पर थाना कोतवाली प्रभारी डीव्हीएस नागर को सूचना मिली की एक बोलेरो गाड़ी चोरी करके बदमाश भाग रहें हैं जिस पर पुलिस टीम के द्वारा इस गाड़ी को पकडऩे हेतु पीछा किया गया जिस पर पुलिस द्वारा उक्त बोलेरो को जबलपुर कटनी रोड पर पनागर के  पास पकड़ा गया इस सफेद रंग  की बुलेरो गाड़ी जिसका नं एमपी 49टी0743 था इस गाड़ी में तीन बदमाश पाये गये गाड़ी को राजा बंशकार नाम का बदमाश चला रहा था तथा उसके साथी मोन्टी उर्फ पुष्पेन्द्र , गुडडू उर्फ धुव्रराज सिंह  परिहार पाये गये थे प्रारंभिक पूछताछ के दौरान इन बदमाशों ने बताया कि यह गाड़ी सिद्धेश्वर कालोनी स्टेशन गंज,नरसिंहपुर से  चुरा कर लाये हैं जब इनसे थाना कोतवाली लाकर पूछताछ की गई तो इन्होनें चोरी की गई अन्य गाडिय़ों के बारे में भी बताया ।
इन्होनें जो गाडिय़ा चुराई उनमें हुन्डई वर्ना कार एम पी 15 सी ए 0432,नरसिंहपुर से बुलेरो एमपी 49टी0743,करेली जिला नरसिंहपुर से एक बुलेरो एम पी 49 टी 5505 इसे बदमाश लेकर भाग रहे थे तो ब्यौहारी के पास सस्पेंसर टूट जाने से इसको वहीं छोड़कर भाग गये थे,एक महेन्द्र बुलेरो करेली महेन्द्र वार्ड एमपी 21टी 0815,महादेव वार्ड करेली से एक बुलेरो एमपी 49सी 1004 इस वाहन को आरोपियों ने धमेंन्द्र सिंह निवासी गाढ़ाघाट जिला सिवनी को बेचना बताया पुलिस द्वारा आरोपी धमेन्द्र को भी अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जा रही है ,इस दौरान पूछताछ में इन्होनें अमरवाड़ा जिला छिंदवाड़ा से 2 दो गाडिय़ा,लखनादौन जिला सिवनी से 1 गाड़ी तथा 1 गाड़ी बीना शाहपुर थाना सिमरिया जिला रीवा से 1 स्कार्पियो क्रीम कलर की ,1 पिकअप क्रीम कलर की ग्राम राजेंन्द्र नगर जिला अनूपपुर से चोरी किया जाना स्वीकार किया है । इसके अलावाा बदमाशों ने गोटेगांव जिला नरसिंहपुर से एक वर्ष पूर्व एक बुलेरो वाहन चोरी किया जाना कुबूल किया है जिसे आधारताल जबलपुर पुलिस ने जप्त कर लिया है इस प्रकार बदमाशों ने कुल 12 वाहनों की चोरी किया जाना कबूल किया जिसमें से पुलिस ने अभी तक 5 वाहनों जिनमें 4 बुलेरो व एक हुडंई वर्ना कार जप्त करने में सफलता प्राप्त की है । इसके अलावा पुलिस को अभी अन्य जिलों में बदमाशों द्वारा बेची गई गाडिय़ों की बरामदगी सुनिश्चित किया जाना है जिसमें एक हुंडई वर्ना कार एम पी 15 सीए 0432 का सतना में होना पता चला है जिसके पार्टस दूसरी वर्ना कार में आरोपी समद द्वारा लगाये गये हैं उसे भी पुलिस ने जप्त कर लिया है तथा करेली,रीवा तथ ा अनूपपुर से चुराई गई गाडिय़ों को बदमाशों ने गैस कटर से काटकर गाढ़ाघाट जिला सिवनी के कबाड़ी अहसान अली तथा रद्दी चौकी जबलपुर के कबाड़ी शौकत अली को बीस बीस हजार रूपये में बेची गई थीं इस कारण इन कबाडिय़ों को चोरी का माल हड़पने तथा साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में गिरप्तार किया गया है ।
पुलिस द्वारा इस पूरे मामले में लगभग 40 लाख रूपये के वाहन जप्त किये जाने में सफलता हासिल की गई है तथा इस मामले में समस्त घटनाक्रम में प्राप्त साक्ष्य के आधार पर आरोपी राजा बंशकार,पुष्पेन्द्र निवासी जबलपुर,गुडडू उर्फ धु्रव राज ,धमेन्द्र राजपूत, अहसान, समद, कवाड़ी शौकत अली को चोरी के वाहन खरीदने सहयोग देने एवं उन्हें खुर्दबुर्द करने के आरोप में गिरप्तार किया गया है ,वहीं पुलिस अधीक्षक मुकेश श्रीवास्तव ने इस मामले में आरोपियों के द्वारा नशीले पदार्थ का व्यापार करने  की आशंका के चलते इस  मामले में भी गहन पड़ताल की जा रही है ।