Saturday, 10 December 2016

भगवान भरोसे चल रहा शिक्षा विभाग

जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनता प्रशासन
भगवान भरोसे चल रहा शिक्षा विभाग
राष्ट्रचंडिका/ जिला कलेक्टर एस धनराजू शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और वे लगातार अन्य विभागों की तुलना में शिक्षा विभाग की समीक्षा में ज्यादा समय देते हैं यह अच्छा भी है आखिर शिक्षा के नाम पर उनके लिए चंद शालायें ही महत्वपूर्ण नजर आती हैं। अन्य शालाओं के प्रति वे कभी सुध लेना भी उचित नहीं समझते।
जब से वे सिवनी आये हैं उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट विद्यालय में चल रही गतिविधियों को देखना भी उचित नहीं समझा जबकि मठ कन्या शाला, उर्दू हायर सेकेण्डरी एवं नेताजी सुभाषचंद बोस उच्च. माध्य. शाला में अनेको बार जाकर संज्ञान लिया इसके अतिरिक्त अनेक शालाएं जर्जर पड़ी है जिनमें हिन्दी मेन बोर्ड, जिला स्कूल कन्या शाला महावीर वार्ड जो जर्जर हो चुकी है इस ओर आपका ध्यान नहीं है। शासन द्वारा सर्वशिक्षा अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के अंतर्गत इनका जीर्णोद्धार किया जा सकता है लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किये गये।
शालाएं शिक्षकों की कमी के कारण जूझ रही है इस ओर आपका जरा भी ध्यान नहीं है। जनप्रतिनिधियों ने भी मानो शिक्षा विभाग को भगवान भरोसे छोड़ दिया है अब तो यह चर्चा भी होने लगी है कि जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात को महत्व नहीं देता आज तक जनप्रतिनिधियों ने जो भी बात रखी उसे जिला प्रशासन की निष्क्रियता के चलते अनदेखा किया गया।
जिला शिक्षा विभाग में खुलेआम डीईओ द्वारा मनमानी की जा रही है वेतन भुगतान बिल पास कराने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है ना देने पर कई महीनो तक चक्कर लगाना पड़ता है लेकिन जिला प्रशासन उन पर ना तो कार्यवाही करता और ना ही दबाव बनाता है ऐसे में समस्या विकराल होते जा रही है।
हाल ही में परीक्षाएं नजदीक है और शाला के प्राचार्य शिक्षक छात्रवृत्ति सहित अनेक कार्यो के कारण परेशान है और उन्हें अच्छे परिणाम के लिये दबाव बनाया जा रहा है क्या ऐसी स्थिति में कोई अच्छे परिणाम की आशा कर सकता है। 

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