डी ब्लॉक वाले पत्रकारों को विभाग ने क्या नहीं हटाया
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। जिले में अनेक लोग है जो किसी ना किसी व्यवसाय में लगे हुए है लेकिन हाल ही में पत्रकारिता जगत के अनेक संगठन है जो अपने आपको मजबूत करने के लिये इन व्यवसायियों को अपने संगठन का कार्ड देकर अवैध एवं अनैतिक कार्य के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है।
क्या पत्रकार जगत के लिये यह शर्म की बात नहीं है कि जिन हाथों में किताब या कलम है उनकी उपेक्षा कर ऐसे लोगों को हम महत्व दे रहे हैं जो कि अखबार को काला अक्षर भैंस मानते हैं। किसी भी कार्यालय में जाकर अफसरों के सामने अफसरशाही बताना और मैं ये छाप दूंगा वो छाप दूंगा जैसी धमकी देकर उन्हें अपना महत्व बताने का फैशन चल रहा है। सुरसा की तरह ये पत्रकार कहीं भी उग जाते हैं और अपने को सर्वमान्य बताने का प्रयास करते हैं। जिला जनसंपर्क विभाग को भी हम इसके लिए दोषी मानते हैं जहां पर ऐसे ऐसे समाचार पत्रों के नाम अंकित है जो कई वर्षो पहले बंद हो चुके हैं या फिर नियमित प्रकाशित नहीं होते लेकिन विभाग द्वारा आज तक इन समाचार पत्रों को अपडेट नहीं किया गया। आज भी समाचार पत्रों की सूची में डी ब्लॉक में आने वाले समाचार पत्रों के संपादक एवं अन्य लोग अपनी धौंस जमाने में पीछे नहीं रहते लेकिन इन पर समय रहते अगर लगाम नहीं लगायी गयी तो ये पूरे पत्रकारिता जगत को ही गंदा कर देंगे।आज स्थिति यह है कि विभागों में फर्जी कार्डधारी एवं फर्जी पत्रकारों के कारण सम्मानजनक पत्रकारो को ही सही जानकारी नहीं मिलती और राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार विभागों में जाने से भी कतराने लगे हैं। आखिर पत्रकार संगठन इन पर अंकुश लगाने के स्थान पर इन्हें बढ़ावा क्यों दे रहा है। अगर जिला प्रशासन इन पर लगाम नहीं लगायेगा तो यह विकास के मार्ग में अवरोध पैदा करेंगे।
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