जिस गांव में 8 साल पहले रात गुजारी उस गांव में
आज भी नहीं हुआ विकास का सबेरा
गांव में आज भी पीने के पानी की समस्या बनी हुई थी अधिकांश लोगों को हेंडपंपो के सहारे ही पेयजल की सुविधा प्राप्त है तो जिन लोगों के पक्के आवास बनाये जाने की प्रक्रिया की जा रही थी उनमें से किसी भी हितग्राही को एक किस्त के बाद दूसरी किस्त नहीं प्राप्त हो पायी है और तो और जिस घर में मुख्यमंत्री जी ने रात गुजारी थी उस कमलेश का मकान भी उनके द्वारा उसके खाते में एक ही बार 35 हजार रूपये की किस्त के बाद आज तक अधूरा पड़ा है इस संबंध में जब हमने कमलेश की पत्नि हक्कीबाई से पूछा कि शिवराज जी तो आपके भाई हैं उन्हें क्या इस बात की जानकारी दी है कि आपका अधूरा मकान अभी तक अपूर्ण पड़ा है इसे कब पूर्ण कराया जायेगा तो हक्की बाई का कहना था कि भैया शिवराज बहुत ही व्यस्त रहतें हैं उनने तो पैसा अवश्य भेजा होगा हमारे यहां के अधिकारियों व कर्मचारियों ने उल्टी सीधी रिपोर्ट भेजकर यह लिखकर भेज दिया कि कमलेश के घर में छत डल गई है और उसका मकान बन गया है इसलिये हमें अब मकान बनाने दूसरी किस्त नहीं मिल पायी है ।
गांव में बाह्य शौच मुक्त किये जाने को लेकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों का निर्माण भी किया जा रहा है किंतु जिस गुणवत्ता का कार्य किया जाना था वैसा न होने के कारण शौचालयों को लेकर भी ग्रामीण शिकायतें करने की बात कह रहें हैं तो पात्र लोगों के नाम गरीबी रेखा ने न जोड़े जाने और दो माह का राशन एक माह में देने की बात भी अंधिकांश लोगों ने कही,लोगों को कई महीने से पेंशन भी न मिलर्ने व गांव में क ेवल 8 घंटे ही बिजली मिलती है ऐसा बताया ।
लगभग 130 परिवार इस गांव में रहते हेैं कुछ दिनों पूर्व जिला कलेक्टर के भी गांव में आने को लेकर ग्रामीणों ने बताया और कहा कि कलेक्टर साहब को हम अपनी समस्यायें बताते किंतु उन्हें कलेक्टर साब के पास तक ही नहीं जाने देते कुछ लोग ही अगुवा बनकर सब सही होने की बात कहते हेैं जिससे कलेक्टर साब के पास भी सही बात नहीं पहुंच पाई ।
्चीचली जनपद का यह गांव काफी कुछ पिछड़ा हुआ है और जिस गांव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने ग्रामीणों के बीच रात गुजारी हो उसकी यादें आज भी उनके दिमाग में हैं और उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जी तो हमारे लिये काफी कुछ कहकर गये हेैं किंतु हमारे अपने लोगों ने हमारी सुध लेने में कोर कसर छोड़ रखी है जिससे हमें आज भी अपना जीवन परेशानियों से गुजारना पड़ रहा है । सिलेहटी गांव के लोगों का जीवन यापन मूलत: खेती मजदूरी व अन्य छोटे मोटे कामों से ही गुजारा हो रहा हेै यहां के स्कूल के शिक्षक देवी सिंह चौधरी बताते हेैं कि अत्यंत पिछड़ापन होने के कारण यहां के अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल आदि भेजने में ध्यान नहीं देते जिससे अंधिकांश बच्चे 8 वीं तक पढऩे के बाद मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरणपोषण करने में लग जातें हैं । विकास के तमाम दाबों के बाद सिलेहटी गांव के लोगों के मन में आज भी शिवराज जी के दिये गये आश्वासनों को पूर्ण होने की उम्मीद कायम है वहीं प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही लापरवाही से अधूरे पड़े कई आवासों को लेकर गं्रामीणों का दर्द बयां करता फुददीलाल का वह अधूरा मकान है जिसकी दूसरी किस्त की आशा करता हुआ वह स्वर्ग सिधार गया और उसका एक लडक़ा जो मानसिक रूप से कमजोर हेै गांव में कहीं भी रात गुजार कर अपने अधूरे घर को पूरा होने की आशा में भटकता रहता है ।
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