Saturday, 17 September 2016

गरबा प्रशिक्षण बना व्यवसाय

                                 गरबा प्रशिक्षण बना व्यवसाय

                            प्रशिक्षण की आड़ में काट रहे चांदी
      पार्टनरों का सहारा लेती हैं बालिकाएं
                   02 से 20 हजार फीस

नौरात्रि पर्व वैसे तो श्रृद्धा और भक्ति का पर्व है लोग अपने अपने अंदाज में मां शारदा की भक्ति में लीन रहते हैं लेकिन आजकल इस श्रृद्धा भक्ति को भी व्यवस्था से जोड़कर देखा जाने लगा है। लगभग 10-15 वर्षो से सिवनी में गरबा महोत्सव को लेकर प्रचलन बढ़ गया है। गरबा की रासलीला दिन ब दिन बढ़ते जा रही है। लोग गरबा की आड़ में अब चांदी काट रहे हैं। जिन संस्थाओं का वर्ष भर अता पता नहीं रहता अचानक नवरात्रि के पहले प्रचार प्रसार कर लोगों को और खास कर कुछ महिलाओं को जोड़कर प्रशिक्षण देने के नाम पर लूटने का प्रयास करते हैं।
राष्ट्रचंडिका/सिवनी/02 महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान 2 से 20 हजार रूपये की राशि प्रति प्रशिक्षक से वसूल की जाती है तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को सब्जबाग दिखाये जाते हैं उन्हें टेलीविजन एवं फिल्मों में होने वाले गरबा की तरह उनके गरबा महोत्सव में नृत्य करने का मौका मिलेगा जो संस्थाएं गरबा का प्रशिक्षण देती है ना तो उनका रजिस्ट्रेशन होता है और ना ही अता पता। बस प्रचार के नाम पर पाम्पलेट और अखबारों में विज्ञप्ति प्रकाशित कर लाखो ंकी कमाई करते हैं।
गरबा का आयोजन का इतिहास भगवान श्री कृष्ण और मां शारदा देवी की भक्ति के लिये किया जाता था लेकिन वर्तमान गरबा मॉडलिंग और फैशन बनकर रह गया है जिसके प्रति समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि गरबा की आड़ में लोग इस महोत्सव को व्यवसाय ना बनाये।
इतना ही नहीं अधिकांश बालिकाएं जो व्यस्क और अव्यस्क है वे गरबा सीखने के आर्थिक तंगी के चलते अपने पार्टनर पुरूष का सहारा लेती है और आर्थिक सहारा लेने के पश्चात आगे क्या होता है वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
गरबा महोत्सव की परंपरा हमारे नगर में जोर शोर से बढ़ी है और चाहे गरबा करने वाले हो या गरबा देखने वाले युवा सभी इसकी आड़ में गलत कामों को अंजाम  देते है भले ही सिवनी में ऐसे मामले प्रकाश में ना आये हो लेकिन कई महानगरों के मामले हमें सचेत करते हैं कि हमें हमें भी संभलकर चलना चाहिए नहीं तो गरबा का स्वरूप हमें पतन की ओर ले जायेगा और हम अपनी आने वाली पीढ़ी को जवाब नहीं दे पायेंगे।
वैसे भी देर रात्रि तक होने वाले आयोजनों को लेकर प्रशासन को नवरात्रि में भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है जिससे भक्ति का वातावरण से पूरा जिला गूंजायमान हो। 

No comments:

Post a Comment