Saturday, 24 September 2016

कबाड़ी चंद दिनों में बन जाते हैं करोड़पति

कबाड़ी चंद दिनों में बन जाते हैं करोड़पति
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। बचपन से कबाड़ा बेचने वाले बालक बालिकाओं में धीरे धीरे ज्यादा लाभ कमाने को लेकर चोरी की प्रवृत्ति बढऩे लगती है और ये लोग कबाड़े की आड़ में घरों में घुस चोरियां भी करने में पीछे नहीं नहीं रहते, अनेकों बार इन्हें लोगों ने रंगे हाथो पकड़ा लेकिन इन्हें गरीब मानकर बिना थाने पहुंचाये ही छोड़ दिया जाता है जिसके कारण इनकी सह निरंतर बढ़ती जा रही है।
कहने को तो शासन से बाल अधिकार अधिनियम के तहत ऐसे बच्चों को मार्गदर्शन के लिये सामाजिक न्याय विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग को दायित्व सौंपा है जो इन बच्चों को कबाड़ा बीनने के स्थान पर शिक्षा ग्रहण करने के लिये प्रेरित करे लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम को सिर्फ कागजों और फाईलों तक ही सीमित कर दिया गया है।
अगर पुलिस विभाग इन कबाड़ा बीनने वालो से लेकर कबाड़ा का व्यवसाय करने वालों का इतिहास और वर्तमान की सूक्ष्मता से जांच करेगी तो कई चोरी और कई रहस्यों पर पड़ा पर्दा की हकीकत सामने आ सकती है लेकिन पुलिस विभाग नहीं चाहता कि उनकी मासिक चढ़ोत्तरी पर आंच आये और यह सिलसिला बंद हो।
्आखिर बेलगाम हो चुके इन कबाडिय़ों पर अंकुश कब लगेगा। अब तो आम आदमी को एक या दो दिन के लिये घर से बाहर जाने में चिंता सताने लगती है कि कहीं घरों में चोरी ना हो जाये क्योंकि कबाड़ा बीनने की आड़ में ये लोग घरों की रेगिंग करते हैं और फिर संतुष्ट होने पर धावा बोल देते हैं।
पुलिस का है इनको संरक्षण
नगर मुख्यालय इन दिनों चोरों की नर्सरी बन गया है, पैदा होने के बाद कुछ साल के बच्चों के हाथों में कबाड़ा बीनने का थैला पकड़ा देना और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना कोई नयी बात नहीं। कबाड़ा बीनने वाले ये युवक इस कार्य में इसलिए लिप्त रहते हैं क्योंकि कबाड़ा बेचने के बाद कबाड़ा मालिक उहें तुरंत भुगतान कर देता है। कबाड़े का थोक व्यवसाय करने वालों को इससे कोई सरोकार नहीं होता कि जिसने उसके पास सामान बेचने लाया है वह कहा से लाया है, यहां तक कि शासकीय विभागों में लगी हुई सामग्री भी ये चुराने में बाज नहीं आते हैं और इस कार्य में लगे लोगों को पुलिस का खुला संरक्षण होने की वजह से ये लोग बेधड़क होकर कबाड़ बेच चांदी काटते हैं।
कबाड़ो में खपता है सरकारी सामान
सूत्रों की माने तो नगर के दो बड़े कबाडख़ानों में शासकीय सामान खपने की खबर आये दिन मिलते रहती है लेकिन इनका कुछ नहीं होता। सूत्रों की माने तो बीते माहों में चौरसिया मोहल्ला गुरूनानक वार्ड में स्थित एक कबाड़ा दुकान में सरकारी विभाग के पाईप व अन्य पाट्र्स रखे होने की खबर लगी थी लेकिन कबाड़ा संचालक यह माल रातोरात उठाकर अन्य जगह पर रखवा दिया था। वहीं दूसरा बड़ा कबाडख़ाना बुधवारी बाजार में चल रहा है जहां भी कई प्रतिबंधित सामान खरीदे जाते हैं जिसकी भनक पुलिस को ना लगे इसके लिए इनके द्वारा अलग से गोदाम बनाये गये हैं। यदि इनके गोदामों में पुलिस छापामार कार्यवाही करती है तो एक बड़ा जखीरा बरामद होगा लेकिन पुलिस इस तरफ ध्यान क्यों नहीं देती यह तो वही जाने। 

No comments:

Post a Comment