बरेला पावर प्लांट में बढ़ा अपराधों का ग्राफ
जनप्रतिनिधियों की क्यों है दिलचस्पी
प्रदूर्षण से कैसे बचेंगे आदिवासी
राष्ट्रचंडिका/थम्रली पावर प्लांट घंसौर (बरेला) का कार्य जब से प्रारंभ हुआ है तब से यहां पर मानो राहू ग्रह के साथ साथ साढ़े साती शनि ने भी यहां पर अजगर की तरह कुण्डली मारकर अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है। बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिये पूंजी लगाई थी लेकिन इस पावर प्लांट का दुर्भाग्य है कि इतने प्रयास के बाद भी यह सफल नहीं हो पा रहा है।
पावर प्लांट प्रारंभ करने के लिये प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस प्लांट को प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की थी इस उद्योग के लिये अनाप शनाप दामों मे ंआदिवासियों से जमीन खरीदी गयी जिसको लेकर आदिवासियों ने जब विरोध प्रारंभ किया तो उन्हें पैसे देकर कंपनी ने चुप करा दिया लेकिन वे आदिवासी आज भी अपने आपको ठगा सा महसूस करते हैं और इस सारे मामले में क्षेत्र के वरिष्ठ नेता बताने वाले शक्तिसिंह का विशेष हाथ रहा जिन्होंने कंपनी और आदिवासियों से दलाल के रूप में अच्छा मुनाफा कमाया।
इस कंपनी ने कच्चा माल पहुंचाने के लिये सड़क का निर्माण तो किया लेकिन इसकी आड़ में खनिज विभाग से बिना अनुमति के करोड़ो रूपये की मुरम एवं अन्य सामग्री का वारा न्यारा कर सड़क का निर्माण कार्य कराया। गौर करने वाली बात यह है कि सड़क मार्ग से आने वाले वाहनों में प्रतिदिन अन्य राज्यों से लोगों का आना जाना भी लगा रहा जिसके चलते इस क्षेत्र में अपराधिक गतिविधियों का ग्राफ जिले से (दिल्ली) राजधानी तक गूंजता रहा है और आज भी अपराधिक गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही है लेकिन प्रशासन मौन है।
थर्मल पावर प्लांट से जुड़े प्रबंधक एवं अन्य अधिकारी गणों को इस बात की जरा भी चिंता नहीं है कि जो संयत्र यहां लगाया गया है उसकी चिमनी से निकलने वाले धुएं से आसपास के 10 से 20 किमी तक के लोग भी प्रदूर्षण के कारण प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा। जब भी प्रदूर्षण को लेकर यहां चिंता की जाती है तो यहां के प्रबंधक एवं साथियों द्वारा प्रदूर्षण मुक्ति के लिये 10-20 वृक्षों को रोपण कर इतिश्री कर लेते हैं।
इस पावर प्लांट में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिये मेडिकल सुविधा के कोई इंतेजाम नहीं है अगर कोई घटना होती है तो श्रमिक को घंसौर लाने के दौरान श्रमिक दम तोड़ सकता है इसी तरह श्रमिकों के परिवारजनों की सुख सुविधा के लिये अच्छी शाला प्लेग्राउंड, बगीचा आदि के इंतेजाम भी नहीं है अगर समय रहते ये व्यवस्था नहीं की गयी तो आने वाली पीढ़ी हमसे सवाल करेगी कि आपने हमारे लिये क्या किया?
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