गरबा के कोरयोग्राफर के पास नहीं डिग्री
फीस लेने के बाद भी मांगते है सहयोग
गरबा सिखाने के नाम प्रशिक्षणार्थियों से मोटी फीस तो ही ली जाती है इसके अलावा आयोजन के नाम पर शहर के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों नेताओं व गणमान्य नागरिकों से तरह-तरह की मदद ली जाती है जबकि गरबे में उतना खर्च नहीं हो पाता। साल भर अपना पेट पालने के लिये कुछ लोगों ने गरबे को व्यवसय बनाकर रख दिया है।
गरबे के नाम पर
चंदा वसूली
इन दिनों देखा जा रहा है कि गरबा आयोजन के नाम पर शहर में चंदा वसूली भी शुरू हो चुकी है। आयोजकों के द्वारा बकायदा घरो-घरो व प्रतिष्ठानों में उनका प्रचार करने व पास मुहैया कराने के एवज में चंदा उगाही की जा रही है।
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। हमारा समाचार पत्र आपके हाथ में होगा और तब तक गरबा की गूंज पंडालों में गूंजने लगेगी। श्रद्धालु भक्ति तप उपवास में डूबे रहेंगे और भक्ति का ही रूप गरबा की आड़ में फिर प्रेम प्रसंग और भोग विलास का नंगा नाच प्रारंभ होगा।
गरबा सिखाने के नाम प्रशिक्षणार्थियों से मोटी फीस तो ही ली जाती है इसके अलावा आयोजन के नाम पर शहर के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों नेताओं व गणमान्य नागरिकों से तरह-तरह की मदद ली जाती है जबकि गरबे में उतना खर्च नहीं हो पाता। साल भर अपना पेट पालने के लिये कुछ लोगों ने गरबे को व्यवसय बनाकर रख दिया है।गरबे के नाम पर
हमारे पाठकों को बता दें कि पूर्व के अंक में गरबा पर हमने जो लिखा उस पर लोगों ने हमारा उत्साह बढ़ाया हम बता देना चाहते हैं कि गरबा की आड़ में कुछ संस्थाओं ने तो अब इसे कुछ माह के लिए नहीं बल्कि वर्ष भर का व्यवसाय बना लिया है और जन्माष्टमी पर्व हो या नवदुर्गा या फिर अन्य किसी भी समाज के पर्वो में गरबे के कार्यक्रम में कोरयोग्राफी करना या फिर प्रशिक्षण देने के नाम पर लोगों का समय बर्बाद करना इनकी फितरत में शामिल हो गया है। युवा वर्ग की चाहे बालक हो या बालिकाएं ये गरबा को भक्ति की दृष्टि से कम बल्कि अपना प्रेम प्रसंग चलाने का साधन बनाने के लिये इन गरबा प्रशिक्षण केंद्रो की शरण लेते हैं और गरबा में बालक बालिकाओं का एक साथ नृत्य प्रेम प्रसंग में बदल जाता है, बाद में इसके परिणाम आते हैं उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
गरबा का प्रशिक्षण देने वाले लोगों के पास ना तो कोई ऐसी संस्था की डिग्री या डिप्लोमा होता जिससे यह सिद्ध हो सके कि वास्तव में गरबा या अन्य नृत्यों के संबंध में ये जानकार है। इनके यहां प्रशिक्षण लेने वालो को यह कहा जाता है कि वे उन्हें टेलीविजन स्टारों के साथ या कोई नामी हस्ती के साथ गरबा कने का मौका देंगे और उनके इस प्रलोभन में आकर प्रशिक्षण के नाम पर लोगों का आर्थिक शोषण का सिलसिला चलता रहता है इन पर समय रहते लगाम नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में ये समाज के लिए नासूर बन जायेंगे और चाहकर भी हम कुछ नहीं कर पायेंगे।
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