राष्ट्र चंडिका सिवनी. बीते 15 वर्षों में मोबाइल का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ा है, प्रारंभ में मोबाइल का उपयोग नगरी क्षेत्रों में लोग ज्यादा किया करते थे किंतु आज यह दूरस्थ अंचल तक प्रत्येक जिले में पहुंच चुका है। जहां मोबाइल के उपयोग से एक और क्रांति आई है वहीं कई जगह इनका दुरुपयोग भी किया जा रहा है। साथ ही देखने में आ रहा है कि मोबाइल के सुचारू संचालन के लिए लगाए जाने वाले टावर से पर्यावरण का बहुत नुकसान हो रहा है, जो मानक भारत सरकार के द्वारा निर्धारित किए गए हैं उन मानकों के अनुसार यह मोबाइल टावर नहीं चल रहे हैं। होता यह है कि उन मानकों के अनुरूप जो शासन के निर्धारित हैं टावर लगा लिया जाता है किंतु इन टावरों की शक्ति बढ़ाने के लिए बाद में कंपनी के द्वारा अन्य "इक्विपमेंट्स" लगा दिए जाते हैं जिसके चलते इन टावरों की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है ।
यह काम कंपनी के लिए तो फायदेमंद होता है किंतु प्रकृति के लिए यह काम बहुत ही घातक साबित हो रहा है। देखने में यह जा रहा है कि जब भी मौसम नासाज होता है और बिजली कड़कती है तब इन टावरों के आसपास स्थित घरों की महंगी से महंगी टीवी उड़ जाती है और मोबाइल के स्क्रीन भी लोगों के खराब होने की शिकायतें आई हैं। ऐसा ही विगत दिवस सिवनी में देखने में आया है कि अधिकतर जिन जिन घरों के पास टॉवर है वहां टीवी की स्क्रीन उड़ चुकी है और मोबाइल भी खराब हुए हैं। शासन प्रशासन से अपेक्षा है कि प्रत्येक टावर की क्षमता की जांच करवा करयेगा, अगर क्षमता अनुरूप नहीं पाए गए तो उन्हें सील किए जाने की कार्रवाई आगामी समय में करेगा और अन्य नए टावर को अपनी ओर से अनुमति नहीं प्रदान करेगा।
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