Wednesday, 5 May 2021

सीएचएमओ पांडे के कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवा चरमराई

 जिला चिकित्सालय में ईलाज के लिये तड़प रहे मरीज, विकट परिस्थितियों में विधायक, कलेक्टर और सीएचएमओ निभाव अपनी जिम्मेदारी- आम जनता पूछ रही सवाल



राष्ट्र चंडिका,बालाघाट(पंकज डहरवाल)। कोरोना काल मे जिले में स्वास्थ्य सेवा इतनी बदहाल हो चुकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर की मार से मौतो का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों और नर्स की मनमानी के चलते मरीज प्राइवेट हॉस्पिटल का रुख करने में विवस हो रहे है । कहा जाता हैं कि विकट परिस्थितियों में जिम्मेदार प्रशासन अब तो जिम्मेदारी निभाओ की केवल इस संकट में भी चांदी काटने के लिए काम करोंगे। विकट परिस्थितियों में तो डॉक्टरों को भगवान कहा जाता है लेकिन लगता है अब भी जिम्मेदारों को भगवान भी माफ नहीं करेगा ? मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा मनोज पांडेय के द्वारा पद संभालते ही स्वास्थ्य सेवा चरमराई हुई है ऐसा नही है कि यह अपनी जिम्मेदारी से कार्य नही कर रहे हैं लेकिन वर्तमान में कोरोना के कहर से देश ही नहीं अपितु विश्व में आर्थिक व्यवस्था से लेकर स्वायस्थ सेवा में कोई सुधार नहीं किया जा रहा है। जिससे आम जनता स्वास्थ्य के लिये दर दर की ठोकर खा रहे और करोड़ों खर्च जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवा में हो रहा हैं जो सवालों के घेरे में हैं? वीडियो वायरल हो रहीं हैं जिसमे तड़पते हुये मरीज देखे जा रहे हैं। अगर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य सेवा में कोई सुधार किए बिना ही ट्रामा सेंटर, चिकित्सक की लापरवाही सहित अन्य जिले के ग्रामीणों क्षेत्र में भवन तो बनाया गया हैं। उप स्वास्थ्य केंद्रों में ग्रामीणो को प्राथमिक उपचार के लिए भी जिला मुख्यालय में आना पड़ रहा हैं उस समय गम्भीर हालातो में मरीज की जान चली जाती हैं उसका कारण है कि अगर ग्रामीणों क्षेत्रों के उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर होने से मरीजो को प्राथमिक उपचार मिल जाता।
बड़ते कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में ऑक्सीजन, बेड और डॉक्टर की कमी होने से मरीजो को जान गवानी पड़ रही है। अगर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा मनोज पांडेय, जिला कलेक्टर दीपक आर्य और क्षेत्रीय विधायक व पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन के द्वारा अपनी जिम्मेदारियों से स्वास्थ्य सेवा के प्रति सक्रियता दिखाते दो जरूर ही जिले की स्वास्थ्य सेवा चरमराई नहीं होती। वाट्सएप ग्रुपो में जिले के लोग क्षेत्रीय विधायक को इसका जिमेवार मान रहे है और जन चर्चाओं में कहा भी जा रहा है कि केवल जिम्मेदार राजनेता वाहवाही लूटने के लिए कोरोना काल मे घरों से बाहर जनता के प्रति सेवा का भाव नही दिखाई दे रहे बल्कि वह अपने रिश्तेदारों को बचाने में लगे हुए हैं। अब ऐसे में स्वास्थ्य सेवा में कैसे सुधार हो पायेगा यह सवाल उठ रहे है ?
जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है, लोग इलाज कराने भटक रहे है, बेड नही है, ऑक्सिजन की कमी हो रही है, ऐसे हालात में यह मांग उठ रही है कि शासन, प्रशासन शासकीय के साथ ही निजी चिकित्सकीय संस्थान को अधिग्रहित कर उसे कोरोना हॉस्पिटल में कन्वर्ट कर कोविड मरीजो को इलाज उपलब्ध कराए। दूसरी ओर यह भी देखने, सुनने और महसूस किया जा रहा है कि शासकीय अस्पताल में इलाज और स्वास्थ्य सुविधा में कमी के कारण लोग अपनो को बचाने स्वयं का सबकुछ बेचकर बालाघाट और शहर के निजी कोविड अस्पताल में भर्ती करा रहे है, ताकि अपनो को बचा सके। ऐसे हालात में बेहतर और कम राशि मे कोविड मरीजो का इलाज कर रहे निदान हॉस्पिटल को बंद किये जाने की कोई ठोस वजह सामने नही आ रही है और ना ही जारी आदेश में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कोई वजह बताई है। फिर हॉस्पिटल को बंद किये जाने पर सवाल खड़े हो रहे।  अस्पताल को बंद करने की वजह मीडिया से तो शेयर की जा सकती है। 
ऑक्सीजन की कमी से मर रहे और हो गई सिलेंडर चोरी
सहायक कलेक्टर दलीप कुमार द्वारा 23 अप्रैल को   जिला चिकित्सालय बालाघाट में जांच के दौरान आक्सीजन के डी-टाईप 20 सिलेंडर कम पाये गये है। इस पर उनके द्वारा गायब पाये गये सिलेंडर के यूनिक नंबर सहित जांच प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर दीपक आर्य के समक्ष कार्यवाही के लिए प्रस्तुत किया गया है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण सिलेंडर चोरी हो गए जिसमे जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की होती हैं लेकिन वह भी अपनी जिम्मेदारी में लापरवाह नजर आए। जानकारी अनुसार जिसने पुलिस द्वारा 3 चोर को गिरफ्तार तो किया गया लेकिन सूत्रों बसे मिली जानकारी अनुसार केवल एक सिलेंडर जप्त किया है और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नही किया गया है। इसमें कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि किया इस गम्भीर मामले को सुलझा पाएगी और बाकी के सिलेंडर मिल पाएंगे?


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