बीजेपी कांग्रेस ने नकली इंजेक्शन के उपयोग पर हुई मौतों पर जांच की मांग की
राष्ट्र चंडिका (अमर नोरिया) नरसिंहपुर - गुजरात पुलिस के द्वारा नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर की गई कार्रवाई और मध्यप्रदेश में नकली रेमडेसीविर इंजेक्शन की सप्लाई और उपयोग किये जाने के मामले में पुलिस ने जबलपुर के सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा सहित उसके साथ देवेश चौरसिया को गिरफ्तार किया, इसी मामले को लेकर कुछ गिरफ्तारियां मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से भी की गई पूरा मामला गुजरात के मोरबी में पकड़े गए नकली इंजेक्शन के एक कारखाने संचालित करने के बाद सामने आया था जिस पर कार्रवाई करते हुए गुजरात पुलिस ने मध्यप्रदेश इंदौर और जबलपुर में इस पूरे नेटवर्क के में लिप्त लोगों को पकड़ा उसके बाद जबलपुर पुलिस ने इस मामले में कार्यवाही करते हुए एफआईआर दर्ज की महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कार्रवाई के दौरान जबलपुर पुलिस की जो भूमिका है वह लचर दिखाई रही है, जबलपुर में जिस सिटी अस्पताल में सैकड़ों नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन को बुलाए जाने और इन्हें उपयोग किए जाने की बात सामने के आने के बाद जबलपुर पुलिस व प्रशासन को इस मामले में गंभीरता बरती जानी थी वह नहीं बरती गई है । जबलपुर पुलिस की इस कार्यवाही को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर चल रहा है । सिटी अस्पताल संचालक मोखा की गिरफ्तारी जिस अंदाज में की गई है और नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग की जांच को लेकर गठित प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में जिस सख्ती से आगे आना था वह अपनी इस भूमिका में नजर नहीं आये जिम्मेदारी जिसकी चर्चा जारी है । जबलपुर में आईजी सहित कमिश्नर भी बैठे हैं और इस मामले को लेकर जबलपुर आये प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान भी अपनी ओर से स्पष्ट संकेत दे चुके हैं उन्होंने तो यह तक कहा था कि नकली दवाओं और इंजेक्शन का उपयोग करने वालों को जानवर भी नहीं कहा जा सकता है इसके बाद भी अगर जबलपुर पुलिस ने मौखा के मामले में जिस तरह से कार्रवाई की है तो कई प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, ध्यान देने योग्य बात यह है कि मौखा के ऊपर मामला दर्ज किए जाने के बाद उसपर रासुका की कार्यवाही नहीं की गई थी जब आमजनों ने सोशल मीडिया सहित अन्य स्तर पर मामला उठाया व जबलपुर में इसके खिलाफ प्रदर्शन किये तब कहीं जाकर पुलिस ने इस मामले में रासुका लगाने की कार्यवाही की वहीं मौखा को गिरफ्तार करने के बाद उसे रिमांड पर न लिया जाना और फिर सीधा जेल भेज दिये जाना अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़े करता है वहीं इस पूरे मामले में जबलपुर प्रशासन और जबलपुर पुलिस की कार्यवाही के चलते अभी तक सिटी अस्पताल से एक भी नकली इंजेक्शन का खोखा तक जप्त न किये जाने की बाते सामने आ रही हैं तो गुजरात से जबलपुर मौखा को लेने आई गुजरात पुलिस को भी खाली हाथ वापिस जाना पड़ा उसको लेकर भी कई तरह के सवाल आम जनता उठा रही है । ऐसे में लोग कह रहे हैं कि इतने गंभीर मामले में अगर जबलपुर पुलिस जिस तरह लापरवाही बरत रही है तो क्या मानवता के दुश्मन मौखा को उसके सही अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है यह सवाल सबके मन में बना हुआ है । इसी फर्जीवाड़े में जांच को लेकर नरसिंहपुर में बीजेपी और कांग्रेस के नेता व जनप्रतिनिधियों ने अपने अपने स्तर से पत्र व ज्ञापन दिये हैं । सिटी हॉस्पिटल जबलपुर में नकली रेमडेसीवीर इंजेक्शन के गोरखधंधे की सीबीआई जांच कराने एवं जिले में पीड़ित मरीजों को क्षतिपूर्ति राशि दिलाने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी नरसिंहपुर द्वारा मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन के नाम एक ज्ञापन जिला कलेक्टर नरसिंहपुर को दिया गया इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पंडित मैथिली शरण तिवारी, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री पूर्व विधायक सुनील जायसवाल युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अतुल चौरसिया एनएसयूआई के विधानसभा अध्यक्ष ईशान राय उपस्थित थे । इसके पूर्व सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के द्वारा सिटी हॉस्पिटल में होने वाली अनिमितताओं की जांच कर कड़ी कार्रवाई किये जाने को लेकर कमिश्नर जबलपुर, पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर को पत्र लिखकर पूर्व राज्य मंत्री व नरसिंहपुर विधायक जालम सिंह पटैल ने आरोप लगाते हुए सिटी हॉस्पिटल जबलपुर में नकली रेमडिसिवर इंजेक्शन लगा कर सुनियोजित तरीके से मृत कर पैसे वसूलने का आरोप लगाया l विधायक श्री पटैल ने अपने पत्र में लिखा है कि सिटी हॉस्पिटल जबलपुर में एवं अन्य सहयोगियों द्वारा नकली रेमडिसिवर इंजेंक्शन लगाकर पेशेटों को मृत करके एवं पुनः दूसरे पेशेंट को एडमिट किए जाते थे l जबलपुर के इस रैकेट को माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेश पर धराशाई कर दिया है l सिटी हॉस्पिटल में अनेक राजनीतिक साइलेंट पाटर्नर है जो हॉस्पिटल को अपराध करने में ताकत दे रहे हैं , सिटी हॉस्पिटल में पेशेंट एडमिट होने से पहले सबसे कम 1एक लाख से 5 लाख रुपये तक जमा कराया जाता है, कितने दिन में कौन सा पेशेंट मृत होगा यह अस्पताल प्रबंधन तय करता था, नरसिंहपुर जिले से जबलपुर लगा हुआ है हजारों की संख्या में लोग जबलपुर इलाज कराने प्रत्येक हॉस्पिटल में जाते हैं ,सैकड़ों की संख्या में जिला नरसिंहपुर के लोगों ने सिटी हॉस्पिटल में इलाज करवाया है, अस्पताल प्रबंधन द्वारा पेशेंट से लाखों रुपए लूट लिए गए हैं सैकड़ों की संख्या में सिटी हॉस्पिटल जबलपुर में नरसिंहपुर जिला के पैशेन्टो की मृत्यु हुई है सिटी हॉस्पिटल जबलपुर में नरसिंहपुर जिला के कितने लोग एडमिट हुए कितनी की मृत्यु हुई एवं कितने पैशेटो से कितने-कितने पैसे लिए गए हैं l जानकारी उपलब्ध कराये इस पत्र के माध्यम से उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि विगत 10 वर्षों से सिटी हॉस्पिटल प्रबंधन सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान , राज्य बीमारी सहायता ,पीएम सीएम केयर फंडों से बिना किसी बीमारी के बीमारी दर्शा कर पैसों की हेरा फेरी करता आ रहा है, बिना चोट या कम चोट को अधिक चोट एवं घातक दिखाकर एवं फौजदारी एवं एक्सीडेंट कैंसर किडनी एवं अन्य योजनाओं में फर्जीवाड़ा जाता है इसके और भी अन्य अपराध है सिटी हॉस्पिटल जबलपुर ने किये हैं,जिसमें उन्होंने उक्त दोषियों पर एनएसए एवं पर्दे के पीछे से मदद करने वालों की जांच करा कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की ।


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