Saturday, 24 September 2016

गरबा के कोरयोग्राफर के पास नहीं डिग्री

गरबा के कोरयोग्राफर के पास नहीं डिग्री

फीस लेने के बाद भी मांगते है सहयोग
गरबा सिखाने के नाम प्रशिक्षणार्थियों से मोटी फीस तो ही ली जाती है इसके अलावा आयोजन के नाम पर शहर के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों नेताओं व गणमान्य नागरिकों से तरह-तरह की मदद ली जाती है जबकि गरबे में उतना खर्च नहीं हो पाता। साल भर अपना पेट पालने के लिये कुछ लोगों ने गरबे को व्यवसय बनाकर रख दिया है।
गरबे के नाम पर 
चंदा वसूली
इन दिनों देखा जा रहा है कि गरबा आयोजन के नाम पर शहर में चंदा वसूली भी शुरू हो चुकी है। आयोजकों के द्वारा बकायदा घरो-घरो व प्रतिष्ठानों में उनका प्रचार करने व पास मुहैया कराने के एवज में चंदा उगाही की जा रही है। 

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। हमारा समाचार पत्र आपके हाथ में होगा और तब तक गरबा की गूंज पंडालों में गूंजने लगेगी। श्रद्धालु भक्ति तप उपवास में डूबे रहेंगे और भक्ति का ही रूप गरबा की आड़ में फिर प्रेम प्रसंग और भोग विलास का नंगा नाच प्रारंभ होगा।
हमारे पाठकों को बता दें कि पूर्व के अंक में गरबा पर हमने जो लिखा उस पर लोगों ने हमारा उत्साह बढ़ाया हम बता देना चाहते हैं कि गरबा की आड़ में कुछ संस्थाओं ने तो अब इसे कुछ माह के लिए नहीं बल्कि वर्ष भर का व्यवसाय बना लिया है और जन्माष्टमी पर्व हो या नवदुर्गा या फिर अन्य किसी भी समाज के पर्वो में गरबे के कार्यक्रम में कोरयोग्राफी करना या फिर प्रशिक्षण देने के नाम पर लोगों का समय बर्बाद करना इनकी फितरत में शामिल हो गया है। युवा वर्ग की चाहे बालक हो या बालिकाएं ये गरबा को भक्ति की दृष्टि से कम बल्कि अपना प्रेम प्रसंग चलाने का साधन बनाने के लिये इन गरबा प्रशिक्षण केंद्रो की शरण लेते हैं और गरबा में बालक बालिकाओं का एक साथ नृत्य प्रेम प्रसंग में बदल जाता है, बाद में इसके परिणाम आते हैं उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
गरबा का प्रशिक्षण देने वाले लोगों के पास ना तो कोई ऐसी संस्था की डिग्री या डिप्लोमा होता जिससे यह सिद्ध हो सके कि वास्तव में गरबा या अन्य नृत्यों के संबंध में ये जानकार है। इनके यहां प्रशिक्षण लेने वालो को यह कहा जाता है कि वे उन्हें टेलीविजन स्टारों के साथ या कोई नामी हस्ती के साथ गरबा कने का मौका देंगे और उनके इस प्रलोभन में आकर प्रशिक्षण के नाम पर लोगों का आर्थिक शोषण का सिलसिला चलता रहता है इन पर समय रहते लगाम नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में ये समाज के लिए नासूर बन जायेंगे और चाहकर भी हम कुछ नहीं कर पायेंगे।

कबाड़ी चंद दिनों में बन जाते हैं करोड़पति

कबाड़ी चंद दिनों में बन जाते हैं करोड़पति
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। बचपन से कबाड़ा बेचने वाले बालक बालिकाओं में धीरे धीरे ज्यादा लाभ कमाने को लेकर चोरी की प्रवृत्ति बढऩे लगती है और ये लोग कबाड़े की आड़ में घरों में घुस चोरियां भी करने में पीछे नहीं नहीं रहते, अनेकों बार इन्हें लोगों ने रंगे हाथो पकड़ा लेकिन इन्हें गरीब मानकर बिना थाने पहुंचाये ही छोड़ दिया जाता है जिसके कारण इनकी सह निरंतर बढ़ती जा रही है।
कहने को तो शासन से बाल अधिकार अधिनियम के तहत ऐसे बच्चों को मार्गदर्शन के लिये सामाजिक न्याय विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग को दायित्व सौंपा है जो इन बच्चों को कबाड़ा बीनने के स्थान पर शिक्षा ग्रहण करने के लिये प्रेरित करे लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम को सिर्फ कागजों और फाईलों तक ही सीमित कर दिया गया है।
अगर पुलिस विभाग इन कबाड़ा बीनने वालो से लेकर कबाड़ा का व्यवसाय करने वालों का इतिहास और वर्तमान की सूक्ष्मता से जांच करेगी तो कई चोरी और कई रहस्यों पर पड़ा पर्दा की हकीकत सामने आ सकती है लेकिन पुलिस विभाग नहीं चाहता कि उनकी मासिक चढ़ोत्तरी पर आंच आये और यह सिलसिला बंद हो।
्आखिर बेलगाम हो चुके इन कबाडिय़ों पर अंकुश कब लगेगा। अब तो आम आदमी को एक या दो दिन के लिये घर से बाहर जाने में चिंता सताने लगती है कि कहीं घरों में चोरी ना हो जाये क्योंकि कबाड़ा बीनने की आड़ में ये लोग घरों की रेगिंग करते हैं और फिर संतुष्ट होने पर धावा बोल देते हैं।
पुलिस का है इनको संरक्षण
नगर मुख्यालय इन दिनों चोरों की नर्सरी बन गया है, पैदा होने के बाद कुछ साल के बच्चों के हाथों में कबाड़ा बीनने का थैला पकड़ा देना और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना कोई नयी बात नहीं। कबाड़ा बीनने वाले ये युवक इस कार्य में इसलिए लिप्त रहते हैं क्योंकि कबाड़ा बेचने के बाद कबाड़ा मालिक उहें तुरंत भुगतान कर देता है। कबाड़े का थोक व्यवसाय करने वालों को इससे कोई सरोकार नहीं होता कि जिसने उसके पास सामान बेचने लाया है वह कहा से लाया है, यहां तक कि शासकीय विभागों में लगी हुई सामग्री भी ये चुराने में बाज नहीं आते हैं और इस कार्य में लगे लोगों को पुलिस का खुला संरक्षण होने की वजह से ये लोग बेधड़क होकर कबाड़ बेच चांदी काटते हैं।
कबाड़ो में खपता है सरकारी सामान
सूत्रों की माने तो नगर के दो बड़े कबाडख़ानों में शासकीय सामान खपने की खबर आये दिन मिलते रहती है लेकिन इनका कुछ नहीं होता। सूत्रों की माने तो बीते माहों में चौरसिया मोहल्ला गुरूनानक वार्ड में स्थित एक कबाड़ा दुकान में सरकारी विभाग के पाईप व अन्य पाट्र्स रखे होने की खबर लगी थी लेकिन कबाड़ा संचालक यह माल रातोरात उठाकर अन्य जगह पर रखवा दिया था। वहीं दूसरा बड़ा कबाडख़ाना बुधवारी बाजार में चल रहा है जहां भी कई प्रतिबंधित सामान खरीदे जाते हैं जिसकी भनक पुलिस को ना लगे इसके लिए इनके द्वारा अलग से गोदाम बनाये गये हैं। यदि इनके गोदामों में पुलिस छापामार कार्यवाही करती है तो एक बड़ा जखीरा बरामद होगा लेकिन पुलिस इस तरफ ध्यान क्यों नहीं देती यह तो वही जाने। 

खनिज माफिया ने फूंका अधिकारी शासकीय वाहन

खनिज माफिया ने फूंका अधिकारी शासकीय वाहन

खनन माफियाओं के खिलाफ लगातार कर रहे थे कार्यवाही 
अमर नौरिया/राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर- जिले में अवैध खनन को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा की जा रही कार्यवाही को लेकर खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है और इस बात के चलते प्रशासनिक अधिकारियों को डराने और धमकाने का सिलसिला भी लगातार जारी है और कुछ इसी तरह की बात को लेकर जिला खनिज अधिकारी ओ पी बघेल के शासकीय वाहन को गत २१-२२ ङ्क्षसंतबर की दरम्यानी रात को कुछ अज्ञात तत्वों ने आग लगा दी जिससे शासकीय वाहन जीप पूरी तरह से जल गई ।
 जिले में कुछ समय पूर्व गोटेगांव विधायक कैलाश जाटव व कांग्रेस महामंत्री सुरेन्द्र राय के द्वारा पत्रकारवार्ता कर जिले में नर्मदा नदी में लगातार किये जा रहे अवैध खनन को लेकर सत्तापक्ष के लोगों पर सवाल उठाये जा रहे थे जिस बात को लेकर जिला प्रशासन द्वारा गत दिनों से कुछ कार्यवाही गोटेगांव तहसील के अंतगर्त की जा रही थी इस बात को लेकर अधिकारियों धमकी भी मिल रही थी और इसी की परिणिती यह हुई की उनके निजी निवास धनारे कालोनी सांई मंदिर के पास उनके शासकीय वाहन को आग के हवाले कर दिया गया ।
गौरतलब है कि जिले में नर्मदा नदी में लगातार अवैध खनन किये जाने से नर्मदा नदी के संरक्षण व उसके पर्यावरणीय स्वरूप को नुकसान पहुंचाये जाने से चिंतित गोटेगांव विधायक कैलाश जाटव ने अवैध खनन व जिले में प्रशासनिक मशीनरी को भ्रष्टायार में लिप्त बताते हुये अवैध खनन पर कार्यवाही न किये जाने की बात कही थी इसके बाद कांग्रेस महामंत्री सुरेन्द्र राय ने भी जिले में समानंातर सरकार के माध्यम से अवैध खनन व अन्य अवैध धंधो को लेकर सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधाा था । 

Saturday, 17 September 2016

गरबा प्रशिक्षण बना व्यवसाय

                                 गरबा प्रशिक्षण बना व्यवसाय

                            प्रशिक्षण की आड़ में काट रहे चांदी
      पार्टनरों का सहारा लेती हैं बालिकाएं
                   02 से 20 हजार फीस

नौरात्रि पर्व वैसे तो श्रृद्धा और भक्ति का पर्व है लोग अपने अपने अंदाज में मां शारदा की भक्ति में लीन रहते हैं लेकिन आजकल इस श्रृद्धा भक्ति को भी व्यवस्था से जोड़कर देखा जाने लगा है। लगभग 10-15 वर्षो से सिवनी में गरबा महोत्सव को लेकर प्रचलन बढ़ गया है। गरबा की रासलीला दिन ब दिन बढ़ते जा रही है। लोग गरबा की आड़ में अब चांदी काट रहे हैं। जिन संस्थाओं का वर्ष भर अता पता नहीं रहता अचानक नवरात्रि के पहले प्रचार प्रसार कर लोगों को और खास कर कुछ महिलाओं को जोड़कर प्रशिक्षण देने के नाम पर लूटने का प्रयास करते हैं।
राष्ट्रचंडिका/सिवनी/02 महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान 2 से 20 हजार रूपये की राशि प्रति प्रशिक्षक से वसूल की जाती है तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को सब्जबाग दिखाये जाते हैं उन्हें टेलीविजन एवं फिल्मों में होने वाले गरबा की तरह उनके गरबा महोत्सव में नृत्य करने का मौका मिलेगा जो संस्थाएं गरबा का प्रशिक्षण देती है ना तो उनका रजिस्ट्रेशन होता है और ना ही अता पता। बस प्रचार के नाम पर पाम्पलेट और अखबारों में विज्ञप्ति प्रकाशित कर लाखो ंकी कमाई करते हैं।
गरबा का आयोजन का इतिहास भगवान श्री कृष्ण और मां शारदा देवी की भक्ति के लिये किया जाता था लेकिन वर्तमान गरबा मॉडलिंग और फैशन बनकर रह गया है जिसके प्रति समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि गरबा की आड़ में लोग इस महोत्सव को व्यवसाय ना बनाये।
इतना ही नहीं अधिकांश बालिकाएं जो व्यस्क और अव्यस्क है वे गरबा सीखने के आर्थिक तंगी के चलते अपने पार्टनर पुरूष का सहारा लेती है और आर्थिक सहारा लेने के पश्चात आगे क्या होता है वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
गरबा महोत्सव की परंपरा हमारे नगर में जोर शोर से बढ़ी है और चाहे गरबा करने वाले हो या गरबा देखने वाले युवा सभी इसकी आड़ में गलत कामों को अंजाम  देते है भले ही सिवनी में ऐसे मामले प्रकाश में ना आये हो लेकिन कई महानगरों के मामले हमें सचेत करते हैं कि हमें हमें भी संभलकर चलना चाहिए नहीं तो गरबा का स्वरूप हमें पतन की ओर ले जायेगा और हम अपनी आने वाली पीढ़ी को जवाब नहीं दे पायेंगे।
वैसे भी देर रात्रि तक होने वाले आयोजनों को लेकर प्रशासन को नवरात्रि में भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है जिससे भक्ति का वातावरण से पूरा जिला गूंजायमान हो। 

स्वच्छता की रेंकिंग में नरसिंहपुर देश में 37 वें पायदान पर

                स्वच्छता की रेंकिंग में नरसिंहपुर देश में 37 वें पायदान पर 

अमर नौरिया/ राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर- देश में स्वच्छता को लेकर एकत्रित की गई जानकारी में नरसिंहपुर जिले को पूरे देश में 37 वां तथा प्रदेश में 2 स्थान प्राप्त हुआ है जिले को स्वच्छता अभियान को लेकर मिली इस उपलब्धि पर यह गौरव की बात है किं तु इस उपलब्धि क ो मिलने के चंद रोज पूर्व ही जिले के गोटेगांव विधायक कैलाश जाट बाह्य शौचमुक्त घोषित की गई प्रदेश की प्रथम जनपद पंचायत चांवरपाठा के अंतगर्त आने वाली ग्राम पंचायतों में निर्मित किये गये शौचालयों के निर्माण कार्यों को लेकर उच्च स्तरीय समिति से जांच कराये जाने की मांग कर चुके  हैं देश में 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान का शुभारंभ किया गया था । व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण को लेकर वर्ष 2014 में नरसिंहपुर जिला प्रदेश में तीसरे पायदान पर था । 

-शिकवा शिकायतों को दरकिनार कर प्रदेश में स्वच्छता के मामले में नंबर 2 पर नरसिंहपुर 
 स्वच्छता के मामले में जिले को यह उपलब्धि भारत सरकार के स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय द्वारा जारी की गई है इसके लिये नरसिंहपुर जिले को हैदराबाद में आयोजित कार्यशाला के दौरान प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है । स्वच्छता के लिये निर्धारित बिंदुओं को लेकर  रेंकिंग में जिले क ो 77.7 अंक प्राप्त हुये हैं और इन्हीं अंको के आधार पर जिले को स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश में दूसरा  व पूरे देश में 37 वें स्थान पर रखा गया है । जिले को मिली यह रैंकिंग जिसमें शौचालयों और उनके उपयोग,घरों के आसपास स्वच्छता,कूडें कर्कट का निपटारा,साफ सुथरे सार्र्वजनिक स्थान,गंदे पानी का जमाव नहीं होने देने जैसे बिंदुओं पर मिले अंको के आधार पर निर्धारित की गई है । 
स्वच्छता अभियान को लेकर स्वच्छता एवं पेयजल  मंत्रालय ने जो जानकारी अपने आधार पर जिन बिंदुओं पर जुटाई गई है उसको लेकर देश व  प्रदेश में स्वच्छता अभियान को लेकर सुर्खियों में आने वाला नरसिंहपुर जिले की शौचालयों के निर्माण को लेकर जमीनी हकीकत कुछ और ही है शौचालयों के निर्माण को लेकर आज भी ग्रामीणों के मन में संतुष्टि का भाव नहीं है और यही इस पूरे अभियान की वास्तविकता को दर्शाता है । 
नरसिंहपुर जिले को जब बाह्य शौचमुक्त घोषित किये जाने का अभियान चलाया जा रहा था तब ही जनपद पंचायत चांवरपाठा को प्राथमिकता देते हुये जिले की अन्य जनपद पंचायतों के अधिकारियों व कर्मचारियों को चांवरपाठा जनपद क े गांवों में शौचालयों के निर्माण कार्यों हेतु दिशा निर्देश देकर लक्ष्य प्राप्त क रने की कवायदें की जाने लगी थी इसका नतीजा यह हुआ कि चांवरपाठा जनपद के गांवो में दिनरात लोगों के मन में अपने अपने घरों में शौचालयों को बनाये जाने का ऐसा माहौल बनाया गया कि बच्चे हों या बुढ़े हों सभी अपने अपने घरों में शौचालयों के गडडे खोंदनें लगे और इन शौचालयों के गडडों को लेकर जो लोग आनाकानी करते अधिकारियों व कर्मचारियों की फौज उन्हें शासकीय योजनाओं सहित अन्य बातों का डर दिखाकर दो तीन दिन के अंदर शोैचालय के निर्माण के लिये तैयार कर लेती थी जिसका नतीजा यह हुआ कि आनन फानन में तैयार किये और बनाये गये शौचालयों की स्थिति यह हुई की कहीं किसी शौचालय का दरवाजा सही ढंग से नहीं लग पाया तो किसी का शौचालय बनाये जाने में केवल एक ही गड्डा खोदकर उस शौचालयों को पूर्ण किये जाने का प्रमाणपत्र दे दिया गया । 
जनपद पंचायत चांवरपाठा सहित जिले की अन्य जनपदों की ग्राम पंचायतों में भी शौचालयों के निर्माण को लेकर लक्ष्य पाने की ऐसी आपाधापी मची की अगर घटिया निर्माण या अन्य कोई परेशानी बताकर शौचालयों की अनमितिताओं की बात या शिकायतें जिला पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक की जाने लगी किंतु जांच के नाम पर उनसभी शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । 
 जब पूरे जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण का काम किया जा रहा था इस दौरान सूचना के अधिकार के तहत जिले की कुछ जनपदों से पूर्ण अपूर्ण शौचालयों को लेकर  जानकारी मांगी गई तो इन शौचालयों की जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी इससे अंदाजा लगाया जा सकता था कि इस फर्जीबाड़ा को किसी न किसी रूप में सामने आने से बचाया जाये इसका नतीजा यह हुआ कि सूचना के अधिकार के तहत आवेदनों को भी रद्दी की टोकरी में डाल कर इस अभियान को अपनी मनमर्जी से जमीनी हकीकत को धता बताकर  श्रेय लूटने की होड़ में पूर्ण करा दिया । 
बाह्य शौचमुक्त घोषित जनपद पंचायत चांवरपाठा की ग्राम पंचायतों में निर्मित किये गये शौचालयों के निर्माण कार्यो पर  खर्च की गई राशि को लेकर भी कई तरह बातें सामने आई कभी कोई 40 करोड़ रूपये खर्च होने की बात कहता तो कभी अपूर्ण  शौचालयों की संख्या व नवनिर्मित शौचालयों के आंकड़ो की बात की जाती तो वह बात स्पष्ट रूप से कभी सामने नहीं आई । वहीं शौचालयों के निर्माण की राशि को लेकर भी पेंच फंसा रहा इस अभियान के प्रारंभिक चरणों में आयोजित पत्रकारवार्ता में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जीर्ण शीर्ण शौचालयों के निर्माण के लिये जिला स्तर से 5000 हजार रूपये की राशि प्रदान कर मरम्मत कराये जाने व हितग्राही द्वारा स्वंय के द्वारा शौचालयों के निर्माण किये जाने पर 12000 हजार रूपये सीधे उसके खाते में प्रदान किये जाने की बात कही थी । 
लेकिन बाद में पता चला कि ग्राम पंचायतों में शौचालयों के निर्माण कार्यों को लेकर ठेका देकर काम करवाया गया है इस तरह का ठेका किसने कितने में दिया और कब दिया इसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाई । 
         जिले को स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश में मिली इस उपलब्धि को लेकर गौरव की बात है किंतु इस मिशन को लेकर जो आशंकायें आमजनमानस में पहले थे वह आज भी जस की तस बनी हुई हैं अलबत्ता जनपद पंचायत चांवरपाठा की 82 ग्राम पंचायतों में शौचालयों के निर्माण को लेकर 
17 करोड़ 43 लाख 71 हजार 586 रूपये खर्च होने की बात सामने आई है किंतु इसमें से भी जो जानकारी सूत्रों से मिल रही है उसके अनुसार कई ग्राम पंचायतों में अभी भी शौचालयों के निर्माण कार्यों की राशि का भुगतान नहीं हुआ है वहीं अनेक हितग्राही भी ऐसे हैं जिनके द्वारा स्वंय के द्वारा शौचालयों का निर्माण किये जाने के बाद भी उनके खातों में राशि नहीं भेजी गई है ।  वहीं चांवरपाठा जनपद के बाह्य शौचमुक्त घोषित होने पर भारतीय प्रबंध संस्थान ,इंदौर के 138 छात्र-छात्राओं....
शेष 03 पर

Tuesday, 13 September 2016

जमकर फलफूल रहा है भ्रष्टाचार-जाटव


  • जमकर फलफूल रहा है भ्रष्टाचार-जाटव

  • बाह्य शौचमुक्त घोषित चांवरपाठा जनपद के शौचालयों के निर्माण पर भी की जांच की मांग जिले में राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर-अमर नौरिया/ गोटेगांव विधानसभा क्षैत्र के विधायक डा कैलाश जाटव ने एक प्रेसवार्ता के माध्यम से जिला प्रशासन सहित पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर जिले में भ्रष्टचार सहित अन्य निर्माण कार्यौं आदि में की जा रही हीलाहवाली को लेकर जमकर निशाना साधा ।  इस दौरान उन्होंने बताया कि हमारे जिले में शासन की अनेक योजनाओं का कार्य चल रहा है लेकिन सीधे जनता से जुड़े कुछ ऐसे विभाग हैं जिनमें आचरण और कार्यप्रणाली से भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है। पुलिस विभाग को लेकर उन्होनें बताया कि कई दिनों से नशामुक्ति के शिविर लगाये जा रहें हैं मैं इसके खिलाफ नहीं हूँ किंतु इससे म प्र भर में जिले की छवि को गहरा धक्का लगा है । मेरी विधानसभा के कुछ गांव नशे के प्रभाव में हो सकते हैं किंतु पूरी गोटेगांव विधानसभा के गांवों को नशामुक्त करने अपने आप में सही इसलिये नहीं हो सकता क्योंकि कई सामाजिक जतिवर्गों में बगैर नशे के उनके धार्मिक आयोजन एवं विवाह आदि नहीं हो सकते यह एक परम्परा को नशे के रूप में नहीं लिया जा सकता । गोटेगांव के कुछ नेताओं पर आज भी सांमतशाही व्यवस्था से शासन चलाना चाह रहें हैं पर उनसे निवेदन है कि राजनीति करने के लिये पूरा जीवन पड़ा है हम समाज के नेता होने के नाते समाजनीति का क्या संदेश देना चाहते हैं । गांवों में ग्राम रक्षा समितियों के गठन को लेकर पुलिस अधीक्षक को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देकर मजबूत किये जाने की बात क ही गई थी किंतु 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी बैठकें तक नहीं हो पाई और तो और वर्तमान पुलिस अधीक्षक को तो इनकी जानकारी तक नहीं है । ग्राम रक्षा समितियों के मजबूत होने से पुलिस प्रशासन का बहुत बड़ा नुकसान यह होगा कि उनका महीना और हप्ता बसूली बंद हो जायेगी इसलिये इनके गठन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं की जा रही है । 

  • जिले में भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र एवं खनन शराब सहित शुगर माफियाओं की मिली भगत से विकास कार्यो में रूकावट है जिनमें आदिमजाति कल्याण विभाग,पीएचई,पीडब्लूडी,आरईएस आदि विभाग सहित शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग प्रमुख हैं । 
  • इसके अलावा विधायक ने जिला पंचायत के द्वारा बाह्य  शौचमुक्त घोषित जनपद पंचायत चांवरपाठा को लेकर भी सवाल उठाये और कहा कि जिला पंचायत के अधिकारियों के द्वारा भी वहां भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है अभी तक कई पंचायतों का शौचालयों का निर्माण कार्यों का भुगतान नहीं हुआ है जिन शौचालयों का निर्माण कार्य किया गया है एक साल में उनकी दुर्दशा हो चुकी है मेरी मांग है कि 

बरेला पावर प्लांट में बढ़ा अपराधों का ग्राफ

                                 बरेला पावर प्लांट में बढ़ा अपराधों का ग्राफ

                                               जनप्रतिनिधियों की क्यों है दिलचस्पी
                                                    प्रदूर्षण से कैसे बचेंगे आदिवासी
राष्ट्रचंडिका/थम्रली पावर प्लांट घंसौर (बरेला) का कार्य जब से प्रारंभ हुआ है तब से यहां पर मानो राहू ग्रह के साथ साथ साढ़े साती शनि ने भी यहां पर अजगर की तरह कुण्डली मारकर अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है। बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिये पूंजी लगाई थी लेकिन इस पावर प्लांट का दुर्भाग्य है कि इतने प्रयास के बाद भी यह सफल नहीं हो पा रहा है।
पावर प्लांट प्रारंभ करने के लिये प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस प्लांट को प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की थी इस उद्योग के लिये अनाप शनाप दामों मे ंआदिवासियों से जमीन खरीदी गयी जिसको लेकर आदिवासियों ने जब विरोध प्रारंभ किया तो उन्हें पैसे देकर कंपनी ने चुप करा दिया लेकिन वे आदिवासी आज भी अपने आपको ठगा सा महसूस करते हैं और इस सारे मामले में क्षेत्र के वरिष्ठ नेता बताने वाले शक्तिसिंह का विशेष हाथ रहा जिन्होंने कंपनी और आदिवासियों से दलाल के रूप में अच्छा मुनाफा कमाया।
इस कंपनी ने कच्चा माल पहुंचाने के लिये सड़क का निर्माण तो किया लेकिन इसकी आड़ में खनिज विभाग से बिना अनुमति के करोड़ो रूपये की मुरम एवं अन्य सामग्री  का वारा न्यारा कर सड़क का निर्माण कार्य कराया। गौर करने वाली बात यह है कि सड़क मार्ग से आने वाले वाहनों में प्रतिदिन अन्य राज्यों से लोगों का आना जाना भी लगा रहा जिसके चलते इस क्षेत्र में अपराधिक गतिविधियों का ग्राफ जिले से (दिल्ली) राजधानी तक गूंजता रहा है और आज भी अपराधिक गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही है लेकिन प्रशासन मौन है। 
थर्मल पावर प्लांट से जुड़े प्रबंधक एवं अन्य अधिकारी गणों को इस बात की जरा भी चिंता नहीं  है कि जो संयत्र यहां लगाया गया है उसकी चिमनी से निकलने वाले धुएं से आसपास के 10 से 20 किमी तक के लोग भी प्रदूर्षण के कारण प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा। जब भी प्रदूर्षण को लेकर यहां चिंता की जाती है तो यहां के प्रबंधक एवं साथियों द्वारा प्रदूर्षण मुक्ति के लिये 10-20 वृक्षों को रोपण कर इतिश्री कर लेते हैं।
इस पावर प्लांट में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिये मेडिकल सुविधा के कोई इंतेजाम नहीं है अगर कोई घटना होती है तो श्रमिक को घंसौर लाने के दौरान श्रमिक दम तोड़ सकता है इसी तरह श्रमिकों के परिवारजनों की सुख सुविधा के लिये अच्छी शाला प्लेग्राउंड, बगीचा आदि के इंतेजाम भी नहीं है अगर समय रहते ये व्यवस्था नहीं की गयी तो आने वाली पीढ़ी हमसे सवाल करेगी कि आपने हमारे लिये क्या किया? 

विवेक के दाता गणेश की बने रहे गरिमा

                        विवेक के दाता गणेश की बने रहे गरिमा

                                   चंदा वसूल कर शौक पूरा करते हैं कमेटी के लोग
                                        बाध्ययंत्र से आमजन होते हैं परेशान

राष्ट्रचंडिका/भगवान गणेश को बुद्धि एवं विवेक के दाता के रूप में पूजा जाता है लेकिन दस दिनों तक मनाये जाने वाले इस पर्व के दौरान गणोशोत्सव मनाने वाले लोग विवेक का जरा भी ध्यान नहीं रखते जिसके कारण बिना विवेक से की जाने वाली पूजा का प्रतिफल हमें अनेक रूप से देखने को मिलता है। 
अक्सर देखा जाता है कि गली चौराहों में गणेश प्रतिमा स्थापित करने वाले मण्डपों में समिति के सदस्यगण मदिरापान करते हैं और अपने क्षेत्र में अशांति का वातावरण निर्मित करते हैं और जब पुलिस शाांति बनाने पहुंचती हे तो ये शांति के बाधक बन जाते हैं। क्या इस तरह गणोशोत्सव पर्व मनाना उचित है। 
इस उत्सव को मनाने वाले लोग अक्सर मण्डपों में अनलिमिट साउंड में बाध्ययंत्रों को बजाकर बुजुर्गो एवं घरों में बीमार लोगों के लिये सिरदर्द बन जाते हैं जब इन समितियों से इन बाध्ययंत्रों पर कम साउंड या बंद करने की बात कही जाती है तो ये लोग अपना अपमान समझते हैं वे भूल जाते हैं कि उनके तेज बाध्ययंत्र बजाने से आपके एवं अन्य परिवार के लोगों को भी तकलीफ होती है।
गणेशोत्सव पर्व वैसे तो आजादी के पहले से मनाया जा रहा है और इस त्यौहार ने लोगों को एकजुट होने में काफी मदद भी की थी लेकिन उस समय के हालात और आज के हालातों में अंतर आ गया है। पहले शास्त्र सम्मत रीति रिवाज से इस त्यौहार को मनाया जाता था लेकिन वर्तमान में गणेशोत्सव मनाने वाले ना तो शास्त्र सम्मत तरीके से समय पर प्रतिमा को स्थापित करते हैं और ना ही समय पर विसर्जन करते हैं जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि आयोजक इस उत्सव की आड़ में हमारे इष्टदेवता का माखौल उड़ा रहे हैं और विसर्जन यात्रा के दौरान शोभायात्रा में शराब का सेवन कर पुरानी रंजिश भुनाना और शांति भंग करने की घटनाएं आम हो गयी है इसके लिये पुलिस प्रशासन की सक्रियता हमें त्यौहार की गरिमा बनाने में मदद कर सकती है।  सबसे गंभीर बात यह है कि इस उत्सव की आड़ में लोगों से अनाप शनाप चंदा वसूल करना आज का फैशन बन गया है और इस चंदे को मदिरा पान में खर्च करना भी फैशन बन गया है जिसको लेकर आमजनों को सक्रिय होने की जरूरत है वे चंदा देने से पहले जान ले कि जिसे आप उत्सव के नाम पर सहयोग कर रहे हें वास्तव में आपकी दी हुई दान की राशि का उपयोग उत्सव में हो रहा है या अन्य में।

Sunday, 4 September 2016

राष्ट्र चंडिका



राष्ट्र  चंडिका



पार्टी के लिये वरदान है राजा

पार्टी के लिये वरदान है राजा
स्तीफा ना मंजूर, विरोधियों के मंसूबों पर फिरा पानी
हाईकमान चाहता है राजा को दिया जाये मौका
राजा को डॉमीनेट करने का रचा था षडय़ंत्र

राष्ट्रचंडिका/जिला कांग्रेस कमेटी सिवनी में पिछले दिनों हुए घटनाक्रमों को लोग पचा नहीं पा रहे हैं। युवा कार्यकर्ता राजा बघेल ने जैसे ही अपना स्तीफा सौंपा था वैसे ही कांग्रेस के एक खेमे में उत्सव मनाते हुए मिठाई तक बांटी और पार्टी भी दी थी लेकिन जिलाध्यक्ष हीरा आसवानी एवं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें मनाने की जो पहल की उसमें वे सफल भी रहे लेकिन जिन लोगों ने उत्सव मनाया था उनके इरादों पर पानी फिर गया। 

यह सर्वविदित है कि राजा बघेल ना केवल अच्छे वक्ता के रूप में जाने पहचाने जाते हैं बल्कि उनके द्वारा सभी कांग्रेसियों का मनोबल बढ़ाने के हमेशा प्रयास किया गया लेकिन राजा बघेल के प्रयासों और बढ़ते कदम को लेकर यह बात कांग्रेस के ही एक विरोधी गु्रप को हजम नहीं हो रहा था जिसके चलते उन्होंने श्री बघेल के खिलाफ षडय़ंत्र रचने का प्रयास किया जब इसकी भनक श्री बघेल के खिलाफ षडय़ंत्र रचने का प्रयास किया जब इसकी भनक श्री बघेल को लगी तो उन्होंने तत्काल अपनी स्तीफा देते हुए यह बताने का प्रयास किया कि वे कांग्रेस के कार्यकर्ता है और पार्टी में बिना पद के भी वे अपनी सेवाएं देते रहेंगे। 
विरोधी खेमे द्वारा रचा गया षडय़ंत्र ताश के पत्तों की तरह ढह गया है लेकिन हाइकमान चाहती है कांग्रेस की भलाई के लिए राजा  बघेल जैसे होनहार कार्यकर्ता की जरूरत है और इन्हें पार्टी से अगर दायित्व सौंपती है तो उसका निर्वहन करना भी इन्हें आता है आज भी कांग्रेस के कार्यकर्ता राजा बघेल के एक इशारे पर हर आंदोलन के लिये आगे आ जाते हैं।
अगर यूं कहे कि कांग्रेस का भूत भविष्य और वर्तमान राजा बघेल पर है तो अतिश्योंक्ति नहीं होगी। राजा के लिये हाईकमान के नेतागण भी हर समय समर्पित रहते हैं यहां तक कि अनेक नेताओं ने तो राजा को यह तक आश्वासन दिया है कि अगर सिवनी में कोई आंदोलन होगा तो हम तुम्हारे साथ है।
यह सब जानते हैं कि राजा ने हमेशा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का सम्मान किया है और उन्हें आदर भी दिया है चाहे स्व. हरवंश सिंह रहे हो या ठा. रजनीश सिंह या फिर सुश्री विमला वर्मा, आशुतोष वर्मा, राजकुमार खुराना, प्रसन्न मालू या फिर वरिष्ठ कांग्रेसीजन सभी के प्रति आदर का भाव रखना इनकी फितरत में है, इन्होंने कभी किसी की चाटुकारिता नहीं की। हाईकमान ने देश के किसी कोने में भी इनकी उपयोगिता समझी और आदेश दिया इन्होंने इस आदेश को सिरोधार करते निभाया जिसमें हाईकमान ने अनेकों बार प्रदेश के विभिन्न पदों का दायित्व सौंपा। आज जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं का जो सम्मान बचा है उसका श्रेय भी राजा को जाता है क्योंकि आंदोलनों के दौरान जिन कार्यकर्ताओं को संगठित कर विरोध प्रदर्शन किया जाता है परदे के पीछे राजा बघेल की अहम भूमिका होती है।
सड़कों पर आकर आंदोलन करने के दौरान किसी भी परिणामों की चिंता ना करना और आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाना इनका स्वभाव है। बेहतर है ऐसे कार्यकर्ता का पार्टी सम्मान करे तभी पार्टी में ऊर्जा आयेगी।

गाडरवारा पशु बाजार में गौवंशो के नाम पर चल रही है

गाडरवारा पशु बाजार में गौवंशो के नाम पर चल रही है 
                     अवैध वसूली 
राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर - यूं तो नरसिहपुर जिले की पुलिस गौवंशो की सुरक्षा को लेकर काफी मुस्तैद है और कई थाना क्षैत्रों में गौवंशो की सुरक्षा के नाम पर उचित कार्यवाही भी कर रही है किंतु कई ऐसे  भ्रष्ट पुलिस अधिकारी और कर्मचारी हैैं जो गोवंशों की रक्षा के नाम पर कटने जा रहे गौवंशो के परिवहन से अपनी जेबे भर रहें हैं शर्मनाक बात यह भी है कि तथाकथित रूप से गौवंशो की रक्षा का भार जो लोग अपने ऊपर लेकर समाज में परचम लहरा रहें हैं उनका डर  भी इन अवैध वसूली करने वालों के मन में कहीं दिखाई नहीं देता है इससे यह सवाल उठता हेै कि आखिर इसके पीछे कहीं न कहीं एक संगठित गिरोह तो इस पूरे गोरखधंधे में जिले में सक्रिय तो नहीं हैं । 
पुलिस विभाग,नगरपालिका व अन्य के गोरखधंधे का स्ंिटग आया सामने 
गत जून माह में नरसिंहपुर थाना कोतवाली के अंतगर्त अपने पालतू गौवंशो को आर्थिक तंगी से बेचने डांगीढाना बाजार ले जा रहे गरीबों के साथ जिस तरह से हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओ ने मारपीट कर उनके दो बैल छुड़ाकर उन्हें गौतस्करी का आरोपी बनाते हुये जिस तरह की कार्यवाही पुलिस से करवाते हुये उन्हें जेल भिजवाया था वह अब इस तरह से खुलेआम हो रही गौवंशो के  परिवहन की बसूली और उन्हें कौन कहां ले जा रहा है इसकी पूछताछ कर उन पर कार्यवाही करने का दबाब डालकर गाडरवारा में की जा रही अवैध बसूली बंद कराने का प्रयास करेगें ेै । 
गाडरवारा में इस तरह से हो रही गौवंशो की अवैध वसूली को लेकर वहां के जनप्रतिनिधियों के द्वारा मौन साधे रहना भी अपने आप में इन मूक गौवंशो की दर्दशा के लिये काफी हद तक जिम्मेदार है । सत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गाडरवारा में काफी लंबे समय से पशुओं के व्यापार में अवैध वसूली की जा रही है और इसमें पुलिस विभाग नगरपालिका सहित अन्य लोगों का जमकर हिस्सा वांट होता है जिसके चलते कभी भी इस मामले में किसी पर कार्यवाही तक नहीं की गई है । 
गाडरवारा में प्रति रविवार भरने वाले पशुओं के बाजार में गौवंशो के परिवहन को लेकर की जा रही अवैध वसूली पर हमारी टीम द्वारा किये गये स्टिंग के दौरान हुये वार्तालाप - 
दिनांक 28 अगस्त 2016 
स्थान - गाडरवारा पशु बाजार की सड़क 
(जहां पर पुलिस विभाग का एक कर्मचारी बगैर वर्दी के अपने एक साथी के साथ खड़ा है )
तभी एक टाटा एसी वाहन जिसमें कुछ गौवंश जा रहे थे उसे हाथ देकर रोका जाता है उसमें बैठा शख्स पुलिसकर्मी से कहता है - अपनई है घरे ले जा रहे हैं , 
पुलिसकर्मी - ठीक है 50 देओ और आगे बढ़ाओ । 
तभी भोपाल के नंबर की एक बोलेरो पिकअप गाड़ी जिसमें एक पार्टी का झंडा सामने बोनट के पास लगा है उसे रोका जाता है वाहन में बैठा हुआ व्यक्ति कहता है । 
व्यक्ति - नइ जा रये यार हम तो देके जात हैं,कक्का तुम्हई बताओं आर शक्ल देख के पहचान जात है 
(तभी उक्त पुलिसकर्मी वाहन के नजदीक जाता है वाहन में बैठा व्यक्ति कुछ रूपये देता हेै जिसे पुलिसकर्मी अपनी जेब में रख लेता हेै ) 
 रिपोर्टर- काय कैसे हो बाजार ?
पुलिसकर्मी - कछ़ नई अब तो गुजरयाई है, वो अभे तुमरे सामने पचास को दे गओ है । 
(पुलिस कर्मी के साथ खड़ा व्यक्ति भी हां में हां मिलाता है और कहता है कि अब तो गजरयाई बाजार चल  रहे है )
इसके बाद अचानक पुलिसकर्मी अपने साथी से कहता है कि अरे जाओ आज वा आई है भर गई हुई है वाहे देख लो और ने होये तो 400 में ठेका करा दइयो । 
रिपोर्टर - देखलो नइ तो कौन है वाहे अंदर करा    दो । 
पुलिसकर्मी - मुस्करा देता है और कहता है कि भोपाल जा रई है आत रहत है । इसके बाद पुलिसमकर्मी का साथी मोटर साइकिल स्टार्ट कर वहां से चला जाता है । इस प्रकार से अन्य वाहनों से भी  जिनमें गौवंशो को भरकर ले जाया जाता है उनसे इसी  प्रकार की अवैध वसूली का क्रम जारी रहता है । अन्य वातें करते हुये हमारे स्टिंग रिर्पोटर वहां से अन्य  स्थान पहुंचता हेै जहां पर नगरपालिका का एक कर्मचारी कुसी लगाकर बेठा है जिसे मोटर साइकिलों से आये कई लोग गंदी गंदी गालियां देते हुये गंड़ई से पैसे वसूलने के लिये मना कर रहें हैं तथा उसे सम्मानीय जाति का होने से जूता नहीं मारने की कह रहे हेँ । 
( गाडरवारा पशु बाजार में इस तरह से प्रति रविवार को की जाने वाली अवैध वसूली को लेकर नगरपालिका,पुलिस प्रशासन सहित अन्य लोगों के द्वारा किये जा रहे गौवंशो के इस व्यापार की  आड़ में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन न किये जाने पर समाजहित में हमने यह स्ंिटग किया था  )