Friday, 20 November 2015

                                                                       सावधान! 

                                                             फर्जी पत्रकारों का गिरोह सक्रिय
                                            फिर धराया एक फर्जी पत्रकार, चंडिका अखबार के नाम से कर रहा था वसूली
सिवनी  /गत दिवस भी चंडिका अखबार के नाम से एक युवक को रंगे हाथों दबोचा गया जिसने अपना नाम संजय दीक्षित बताया। इस युवक ने पहले तो अपने अखबार का नाम चंडिका बताया जब उससे कड़ाई से पूछा गया तो वह नागपुर से प्रकाशित होने वाले विदर्भ चंडिका का नाम बताने लगा। सिवनी के एक जागरूक पत्रकार ने युवक की बात काटते हुए सीधे विर्दभ चंडिका नागपुर के कार्यालय में फोन कर दिया जहां पता चला कि सिवनी में उनका फिलहाल कोई संवाददाता नहीं है। युवक दिखने में लाचार और मजबूर नजर आ रहा था जिसके चलते उसे समझाईश देकर छोड़ दिया गया। इससे पहले भी यह युवक कुछ सरकारी विभागों में वसूली करते देखा गया था तब भी इसकी शिकायत जनसंपर्क कार्यालय में की गई थी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ने इस ओर ध्यान हीं नहीं दिया। 
खैर यह तो था एक युवक का कारनामा, जबकि नगर में अवैध वसूली करने वाले तथाकथित पत्रकारों का एक गिरोह घूम रहा है जो नये-नये अखबारों का नाम बताकर खबर प्रकाशन की धौंस देकर धनउगाही करता है। कुछ ऐसे भी फर्जी पत्रकार है जो पत्रकारिता की आड़ मे गैरकानूनी कार्य करते हैं जिससे वास्तविक पत्रकारों की छवि धूमिल हो रही है। अब लोग तो पत्रकारों को खुले रूप से ब्लेकमेलर कहने से भी नहीं चूक रहे। 
बहरहाल जिले के जनसंपर्क विभाग का यह दायित्व है कि वह ऐसे तथाकथित पत्रकारों को चिन्हित कर उनकी एफआईआर करायें ताकि नगर में स्वच्छ पत्रकारिता का वातावरण बन सके। 

Sunday, 13 September 2015

खाकी 24 घंटे और सफेद मात्र सुबह- शाम

खाकी 24 घंटे और सफेद मात्र सुबह- शाम

ट्रेफिक क्या पुलिस से अलग है?
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। सत्यमेव जयते के मूल पंच लाईन को लेकर समाज की सुरक्षा में तैनात राष्ट्रकवि मैथिलिशरण गुप्त के धनुर्धर अर्थात 'पोलिसÓ जो पुलिस कहलाती है के लिए क्या विभिन्न तैनाती के लिये अलग-अलग मानदण्ड निर्धारित है? यह सोच और शोध का विषय हेै क्योंकि जब समान आचार संहिता की बात जबरदस्त रूप से जारी है समान कार्य समान वेतन? समान रूप से पदोन्नति? समान अवसर कील बात हो रही है तो ऐसे में 'पुलिस महकमेÓ में यह विसंगतियां क्यों देखी जा रही है। प्रशासन की इस विसंगति से दूसरे तो क्या पुलिस महकमे के कर्मचारी भी नाराज है, यह बात अलग है कि वे कथित तौर पर थोपे गए अनुशासन की लगाम से कसे हुए हैं।
बात करें पुलिस संगठन के विभिन्न प्रभारों की जिसमें एसबी, आईबी और 'ट्रेफिकÓ भी आते हैं। इन ब्रांचों में भी वे ही पुलिसकर्मी होते हैं जो सामान्य तौर पर थाना कोतवाली में हुआ करते हैं। 

बत्ती नहीं सम्मान चाहिए: शंकराचार्य

बत्ती नहीं सम्मान चाहिए: शंकराचार्य
भड़के शंकराचार्य, पुलिस ने मुझे फंसाने की रची थी साजिश
जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज हिन्दु धर्म के सबसे बड़े गुरू कहलाते हैं और इनके साथ त्रयम्बकेश्वर पुलिस ने जो अभद्रता की है वह माफी के लायक भी नहीं है। इस घटना के बाद पूरे देशभर के हिन्दु समुदाय में आक्रोश उपजना शुरू हो गया है। पीठाधीश्वर कहलाने वाले स्वामी शंकराचार्य के वाहन से लालबत्ती उतारना और उनके वाहन को चेकिंग के लिए ले जाने की जिद करना पुलिस की मूर्खता को दर्शाता है।
राष्ट्रचंडिका/ असल में गत दिवस त्रयम्बकेश्वर स्थित अपने चातुर्मास कैम्प में स्वामी शंकराचार्य महाराज ठहरे हुए थे जहां  पुलिस ने अपनी मूर्खता का परिचय देते हुए स्वामी जी के वाहन को अपने साथ थाने ले जाकर चैकिंग करने की जिद पर अड़ गई। इतना ही नहीं नासिक पुलिस ने उनके वाहन से लालबत्ती भी उतरवा दी। स्वामी शंकराचार्य ने प्रेसवार्ता के दौरान इस बात की निंदा करते हुए कहा कि उनके गाड़ी में बम या कोई आपत्तिजनक पदार्थ रखकर पुलिस उन्हें फंसाने के षडय़ंत्र के तहत गाड़ी को थाना ले जाना चाहती थी। द्वारिका एवं ज्योतिष पीठाधीश्वर ने पत्रकारों के सामने अपनी वेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह कितना निंदनीय है कि हिन्दु धर्म के सबसे बड़े गुरू के साथ किसी षडय़ंत्र के तहत आधी रात के दौरान अपमानजनक व्यवहार करने वाले पुलिस विभाग का कोई भी अधिकारी अब तक यह बता पाने में असक्षम है कि आखिरकार उनकी गाड़ी किसके आदेश पर त्रयंबकेश्वर पुलिस जांच के लिये ले जाना चाहती थी।
पालकमंत्री ने लादी बेशर्मी
नासिक के पालकमंत्री गिरीश महाजन ने उस समय बेशर्मी की हदें पार कर दी जब उनके द्वारा कहा गया कि इस छोटे से मामले को इतना तूल न दिया जाये। पालकमंत्री को यह सोचना चाहिए कि यह कोई छोटा मामला नहीं है बल्कि पूरे देश के धर्मगुरू स्वामी शंकराचार्य पर सवालियां निशान लगाना है।  पालकमंत्री गिरीश ने शंकराचार्य महाराज के सहयक सौरभ तिवारी से कहा कि आपकी गाड़ी से जो लालबत्ती उतारी गई है उसे मैं पुलिस के हाथों आप के यहां भेज देता हूं। आप लोग इस छोटी घटना को इतना तूल ना दें। पालकमंत्री के इस प्रस्ताव को शंकराचार्य के सहायकों एवं समर्थकों ने यह कहकर रद्द कर दिया कि मुझे बत्ती नहीं खोया हुआ सम्मान वापिस चाहिए। 500 रू. की बत्ती तो हम बाजार से खरीदकर भी लगवा सकते हैं।
रख सकते थे बम
स्वामी शंकराचार्य जी महाराज ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि अब तो मुझे यह संभावना दिख रही है कि अगर उस दिन मेरी गाड़ी पुलिस थाने ले जाने में सफल हो जाती तो वह षडय़ंत्र के तहत गाड़ी में बम या कोई भी ऐसी आपत्तिजनक पदार्थ रख देती जिससे मेरे पद के अनुसार सनानत धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचती। 

स्कूल खुले नहीं कि बढ़ चली गाईडों की मांग

स्कूल खुले नहीं कि बढ़ चली गाईडों की मांग
क्या यह शिक्षा व्यवस्था का बंटाधार नहीं?
स्कूल खुले वर्तमान शिक्षा सत्र के अभी जुमे-जुमे तीसरा महीना ही चल रहा है कि अभी से विभिन्न कक्षाओं मे पढऩे वाले बच्चे अपने अभिभावकों पर 'गाईडÓखरीदवाने की जिद थोपते देखे जा रहे हैं। प्रश्र यह उठता है कि जब विभिन्न विषयों से संबंधित पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध है, वर्ग विशेष के छात्रों के लिए नि:शुल्क भी तो फिर ऐसे में बच्चे उन्हें पढऩे और ज्ञानवर्धन के लिये क्योंकर उसके स्थान पर शार्टकर्ट अपनाने में लगे हुए हैं। इसस तो साफ झलकता है कि छात्र ज्ञानवर्धन नहीं बल्कि अगली कक्षा में थोथा प्रवेश ही चाहने लगे हैं। वैसे भी शासन की नीतियों के तहत कक्षा एक से आठ तक अब किसी को अनुत्तीर्ण घोषित नहीं किया जा रहा है। परीक्षाएं महज खानापूर्ति बनकर रह गई हैं। ग्रेड ए, बी, सी  आदि देकर गली कक्षा में भेज दिया जा रहा है। इसका खामियाजा यह कि कक्षा 9 वी में पहुंचने वाले अधिकांश छात्र लगभग उसके लिये अयोग्य ही साबित हो रहे हैं। काम्पीटिशन की उत्कंठा में ऐसे कर्मण्य छात्र जो काफी हद तक फिसड्डी होते हैं वे अपनी हीनभावना से ग्रसित हो बजाय विस्तृत अध्ययन के गाइडों के मकडज़ाल और तो और श्योर-सक्सेस कथित टवेंटी कलेक्शन को ही मात्र साल भर रट्टा लगाकर अपनी शैक्षणिक योग्यता पर प्रश्रचिन्ह लगा रहे हैं।
गाईडों के इस प्रेरक प्रसंग में स्कूल के अध्यापकों का भी कमतर योगदान नहीं है। वे स्वयं ढंग से पढ़ाने की बजाय छात्रों को अमुक-अमूक गाईडें खरीदने उकसा रहे हैं, ऐसे में अभिभावकों की यहां महति जिम्मेदारी बन पाती है कि वे अपने बच्चों को गाईडों के प्रयोग पर अंकुश लगा पाठ्यपुस्तकों की ओर प्रेरित करें। शालाओं खासकर शासकीय में तो प्रिंसीपल सहित अध्यापको को सख्त निर्देश जारी किये जाये कि वे सौहार्दपूर्ण वास्तविक अध्ययन के लिये प्रेरित करें। 

Sunday, 2 August 2015

कोचिंग सेंटर बने ईश्कबाजी का अड्डा

कोचिंग सेंटर बने ईश्कबाजी का अड्डा
राष्ट्रचंडिका/ शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही मजनुओं का मौसम भी शुरू हो जाता है। इन दिनों मजनुओं को छात्राओं का पीछा व छेडख़ानी करते आसानी से देखा जा सकता है। इतना ही नहीं व्हीआईपी इलाकों में चलने वाले कोचिंग सेंटर भी मजनुओं के लिए जन्नत से कम नही हैं।
हम बात कर रहे हैं नगर में बढ़ रही छेडख़ानी की घटनाओं पर। हम आपकों यहां बता दें कि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। कुछ असामाजिक तत्व (मजनू) छात्राओं के स्कूल जाने वाले मार्ग पर बढिय़ा टीप-टॉप होकर खड़े हो जाते हैं और उनके ऊपर तंज कसने से भी बाज नहीं आते। कई बार तो यह देखा जाता है कि यह टपोरी किस्म के लड़के लड़कियों को राह चलते प्रपोच भी कर देते हैं और जब लड़की द्वारा इसका विरोध किया जाता है तो वह दूसरे दिन रास्ता ही बदल देते हैं।
ट्यूशन सेंटर भी बनने लगे ईश्कबाजी का अड्डा
प्रेमी छात्रों के लिए ट्यूशन ही मिलने के लिए सर्वोत्तम स्थान है, इस बहाने ट्यूशन चलाने वाले मास्टरों की दाल भी गल जाती है और प्रेमी युगलों का मिलन भी हो जाता है। नगर के बाबूजी नगर, एसपी बंगले के पास, बबरिया रोड, भैरोगंज, शुक्रवारी, मिलन चौक, जबलपुर रोड में भी ऐसे कई ट्यूशन संचालक है जो सिर्फ छात्रों से मोटी रकम  लेना ही जानते हैं। शिक्षकों को इस बात की खबर नहीं होती कि प्रेमी युगल उनके कोचिंग सेंटर को अपना मिलाप का अड्डा बन चुके हैं और यदि मालूम भी हो जाये तो उन्हें उससे क्या मतलब, उन्हें तो मतलब है सिर्फ ट्यूशन के नाम पर मोटी फीस लेने से।
मुंह में कपड़ा बांधकर होता है मिलाप
जागरूक नागरिकों ने हमें बताया कि छात्र-छात्राएं फलां-फलां गली में खड़े रहते हैं, जो ट्यूशन न जाकर सूनसान गलियों में घंटों प्रेमवार्ता करते रहते हैं। इन छात्रों के परिजनों को इस बात की खबर शायद ही हो कि उनके जिगर के टुकड़े पढ़ाई छोड़ ईश्कबाजी में मशगूल हैं...। अक्सर सुनसान गलियों में (एसपी बंगले के पीछे) प्रेमी युगलों की जोड़ी मुंह में कपड़ा बांधे घंटो बात करते रहते हैं ताकि उन्हें कोई पहचान न सके।
धनपिशाच ट्यूशन सेंटर खामोश
दिनों-दिन बढ़ रही छेडख़ानी व बलात्कार की घटनाएं वाकई चिंतनीय है लेकिन इसका समाधान भी है। नगर के धनपिशाच शिक्षक (ट्यूशन संचालक) यदि अपने छात्रों की सही निगरानी करें तो ऐसी घटनाएं कम ही होगी। ऐसे शिक्षकों को केवल मोटी फीस से ही मतलब होता है। 

नशामुक्ति अभियान को ठेंगा दिखा रहे युवा अध्यक्ष

नशामुक्ति अभियान को ठेंगा दिखा रहे युवा अध्यक्ष
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। राष्ट्रचंडिका की कलम सच्चाई उगलने के लिए जानी जाती है। राष्ट्रचंडिका पर पहले भी सच्चाई को छुपाने का दबाव आ चुका है लेकिन हमारी कलम बिकाऊ नहीं है। थानों मेें झूठी शिकायत करने, डंपर से कुचलवाने और हमकों ब्लेकमेलर कहने वाले पहले अपने गिरेबां में झांक लें कि वे कितने पाक है।
ब्राम्हण समाज एक पवित्र और सभ्य समाज कहलाता है लेकिन इस समाज में भी कुछेक ऐसे कलंक है जो समाज के सामने अपने आपको स्वच्छ छवि का साबित करने में लगे रहते हैं लेकिन उनका मन कोयले से भी काला है। बताते हैं कि ब्राम्हण समाज के युवा (प्रौढ़ हो चले)अध्यक्ष अजय मिश्रा इन दिनों शराब लॉबी में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। जबकि ब्राम्हण समाज का उद्देश्य नशामुक्ति व सुंस्कृत भारत का निर्माण करना है लेकिन जब इसके पदाधिकारी ही ऐसी ओछी हरकत करने लगे तो इसे कलंक ही कहना बेहतर होगा। पं. अजय की महात्वाकांक्षा को जो रातो रात 'धनपशुओंÓ में शामिल होने की कवायद में लगभग हर प्रकार के धंधो में टांग अड़ाए बैठे हैं। अब कुछ चुनिंदा व्यवसाय के क्षेत्र बचे हैं। कभी ये छोटे-मोटे स्कूल, छात्रावास बनाते थे, रोड बनाने लगे फिर भी मन नहीं माना तो पत्रकार बन बैठे लेकिन यहां भी उनकी दाल नहीं गली तो उन्होंने शराब लॉबी में पर्दापण करना ही उचित समझा।
जिला ब्राम्हण समाज के जिलाध्यक्ष पंडित महेश प्रसाद तिवारी व ब्राम्हण समाज की सेवा के लिए तत्पर रहने वाले ओमप्रकाश तिवारी को भी ये नजर नहीं आ रहा है कि उनके समाज का ही युवा अध्यक्ष अजय मिश्रा गलत राह में चल बैठा है।  ब्राम्हण समाज में चर्चा यह भी है कि युवा अध्यक्ष के नये धंधे में इन दोनों ही (पदाधिकारी) की राशि लगी है। बहरहाल एक ओर जहां जगदगुरू शंकराचार्य नशामुक्ति अभियान चलाकर शराब से लोगों को दूर कर रहे हैं।
ऐसा लगता है कि जिला ब्राम्हण समाज के जिलाध्यक्ष एवं श्री तिवारी जी जगदगुरू शंकराचार्य के इस नशामुक्ति अभियान को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं।
बताते हैं कि इनके चाटुकार राष्ट्रचंडिका के संपादक को कुत्ते की मौत मरने की बात कहते हैं। चाटुकार कहते हैं कि टुचपुंदिया पत्रकार 500 -1000 रूपए के लिए हमारे आका के आगे-पीछे गिड़गिड़ाते रहते हैं। चाटुकार तो यह भी कहते हैं कि मंडला के एक व्यक्ति को संपादक की सुपारी भी देने की भी चर्चा है। 

गांव से आने वालें ग्रामीणों को बरघाट विधायक का करना पड़ता है घंटो इंतेजार

गांव से आने वालें ग्रामीणों को बरघाट विधायक का करना पड़ता है घंटो इंतेजारv.i.p  बन गए कमल

राष्ट्रचंडिका/ डॉ. कलाम ने सही ही कहा है- 'सपना वो नहीं नहीं जो नींद में आये, बल्कि सपना वो है जिसे पूरा किये बिना नींद न आयेÓ। लेकिन बरघाट विधायक कमल मर्सकोले थोड़ा उल्टा ही चलते हैं। वे रात भर मंत्री बनने के सपनों में खोये रहते हैं और शायद इसी के चलते उनकी नींद दोपहर 12 बजे के बाद ही खुलती है। उनसे मिलने वाले ग्रामीण दोपहर तक उनका इंतेजार करते रहते हैं लेकिन विधायक जी सपनों में ही खोये रहते हैं। जब दूरस्थ ग्राम से आये ग्रामीणों द्वारा पूछा जाता है कि विधायक साहब कहां है तो उनके मातहत कर्मी सभी को रटा-रटाया जवाब देते हैं कि- साहब तो अभी किसी कार्यक्रम में गये हुए हैं, थोड़ी देर बाद आ जाना।
अपना सारा काम-काज छोड़ ग्रामीण सुबह से अपनी परेशानी लेकर विधायक साहब के पास पहुंचते हैं लेकिन उन्हें घंटो इंतेजार करवाया जाता है। चूंकि ग्राम से आने वाले ग्रामीण भोले-भाले होते हैं और इसी का फायदा उठाते हुए विधायक साहब भी उन्हें घंटो इंतेजार करवाते हैं।
अपने आपको जिले का व्हीआईपी विधायक समझने वाले कमल मर्सकोले शायद अब जनता की परेशानी न समझ रहे हों लेकिन जनता ने उन्हें खूब समझा था और विधायक चुना था लेकिन अब वे पूरी तरह से नेता बन चुके हैं। शायद विधायक जी अपना बीता हुआ कल भूल गये हैं कि वे भी किसी टपरे की चाय दुकान में बैठकर टाईमपास किया करते थे। अपनी तरह ही विधायक जी सबकों समझ रहे हैं। हम बता दें कि विधायक जी जनता के पास इतना फालतू समय नहीं है जो आपके दरबार में घंटो खड़ी रही। यदि जनता किसी को विधायक चढ़ाना जानती है तो उसे उतारना भी अच्छी तरह आता है।
मुखिया जी, नॉट रिचेबल विधायक को कवरेज में लाओ
नॉट रिचेबल विधायक के नाम से मशहूर हो चुके बरघाट विधायक हमेंशा कवरेज के बाहर ही रहते हैं। अपने आपको किसान पुत्र बताने वाले मुखिया शिवराज सिंह ऐसे नॉट रिचेबल विधायकों को क्या अपने मंत्रीमंडल में जगह देंगे या उन्हें स्वीच ऑफ (बाहर) कर देंगे...? यह तो समय की गर्त में है।

Friday, 10 July 2015

नरसिंह तालाब के पानी में अचानक मर रही हैं मछलियां

नरसिंह तालाब के पानी में  अचानक मर रही हैं मछलियां
                  अमर नौरिया
राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर- नगर के प्राचीन नरसिंह मंदिर से लगे हुये नरसिंह तालाब में लगातार दो दिनों से मछलियां मर रही है इस बात को लेकर इस तालाब में मछली बीज डालकर उसके माध्यम से अपनी जीविका चला रहे मछुआरों के परिवारों के लिये जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है और इस बात को लेकर उनके द्वारा इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराते हुये नरसिंह तालाब में बढ रहे प्रदूषण व अन्य गंदगी के चलते उनके रोजी रोटी के एक मात्र सहारे को बचाने की गुहार लगाई है ।  इस संबंध में उनके द्वारा बताया गया कि आदर्श मछुआ सहकारी समिति के 84 सदस्यों जिनमें 22 महिलायें भी हैं उनके द्वारा शासन से इस तालाब क ो लेकर उसमें मछली बीज डालकर एक समय पश्चात मछली निकाली जाती है इस समय उनके डाले गये मत्स्य बीज से उत्पन्न मछली लगभग 1 किलों के आसपास हो गई हैं किंतु विगत दो दिन से लगातार एक से दो क्विटंल मछली तालाब में अपने आप मर हुई मिल रही है इस बात को लेकर उन्हें आशंका है कि तालाब में मिलने वाले गंदे पानी के नाले से यह स्थिति बन रही है अत: इस बात की शीघ्र ही जांच कर उनकी रोजी रोटी को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो इसकी व्यवस्था की जावे । 

दिल फेंक डॉक्टर 'बाबाÓ

दिल फेंक डॉक्टर 'बाबाÓ
  नगर के एक डॉक्टर की पढिय़े प्रेमकहानी
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। जहां एक ओर डॉक्टर को धरती का भगवान माना जाता है वहीं सिवनी नगर में एक ऐसा भी डॉक्टर है जो अपने पेशे से हटकर  ज्यादातर ध्यान इश्कबाजी में लगाता है। इस डॉक्टर के कुछ लवलेटर भी हमारे हाथ लगे हैं जिससे पढ़कर ऐसा लगा मानो ये डॉक्टर नहीं बल्कि मजनूबाज हो..। लवलेटर में इस महाशय ने अपने जन्मदिवस का उल्लेख करते हुए एक युवती को अनोखा गिफ्ट देने की बात भी कही। अब यह अनोखा गिफ्ट क्या है? यह तो हमे भी नहीं मालूम। इतना ही नहीं डॉक्टर साहब की प्रेमकहानी भी बड़ी लाजवाब है जो पुराने गानों के शौकीन समझ आते हैं। उन्होंने अपने लवलेटर में कुछ मनपसंद गानों का भी उल्लेख किया है। खैर ये तो डॉक्टर बाबा का ट्रेलर है पिक्चर तो अभी बाकी है। यानि कि हम आगामी अंकों में इस मजनूबाज डॉक्टर की पूरी कहानी एवं लवलेटरों का खुलासा करेंगे। हमारी टीम अभी डॉक्टर साहब के प्रेमपत्रों व प्रेमकहानी को एकत्रित करने में जुटी हुई है।
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पुलिस को चिढ़ा रहे घनश्याम के जुआ फड़

क्या जुआरियों का पैदल जुलूस निकालोगे एसडीओपी साहब
पुलिस को चिढ़ा रहे घनश्याम के जुआ फड़
राष्ट्रचंडिका/ जुआं खिलाने में माहिर घनश्याम अब जगह-जगह बदलकर जुआं खिलाने लगा है, इसके द्वारा आधा दर्जन से अधिक फड़ चलाये जा रहे हैं जिसका संचालन इसके साथ घूमने वाले कुछ गुण्डेनुमा लोग कर रहे हैं। राष्ट्रचंडिका द्वारा समाचार प्रकाशन के बाद से ही घनश्याम राष्ट्रचंडिका के संपादक का पता पूछते नजर आया।
पुलिस को अपनी जेब में रखकर धड़ल्ले से जुआं चलाने में माहिर घनश्याम युवाओं को बिगाड़ रहा है जिसकी ओर पुलिस भी ध्यान नहीं दे रही। इन दिनों युवाओं मे सूदखोरी, ब्याज, जुआं, सट्टा जैसे शौक सिर चढ़कर बोल रहे हैं। युवा शार्टकट से पैसे कमाने के लोभ में घनश्याम जैसे जुआरियों की चपेट में आकर बर्बाद हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों एसडीओपी ने सटोरियों के ऊपर कड़ी कार्यवाही की थी और उनका पैदल जुलूस भी निकाला था। कुछ समय तक तो सट्टा बंद रहा लेकिन अब पुन: मोबाईल में सट्टा लिखते लोगों को देखा जा सकता है। लोगों में चर्चा चल रही है कि यदि एसडीओपी साहब जुआरियों पर भी सख्ती से कार्यवाही कर उनका जुलूस निकाले तो वाकई यह बात काबिले तारीफ होगी।
सूत्र बताते हंैं कि घनश्याम अब जंगलों में भी दस्तक दे चुका है और रात के अंधेरे मे जुआं फड़ सचालित कर रहा है। नगर की सीमा से लगे क्षेत्रों खासकर छिडिय़ा पलारी रोड में जुएं के फड़ जम रहे हैं।
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मामा अब हम कक्षा 9वी में पहुंच गये...

मामा अब हम कक्षा 9वी में पहुंच गये...
प्रवेश शुल्क की ऊंची दर देती नकारात्मक सोच
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल के सफलतम संचालन के साथ हैट्रिक की ओर अग्रसर शिवराज सिंह चौहान घोषणाएं तो करते हैं पर कभी कभी ऐसा लगने लगता है कि वे उस पर दूरगामी निगाहें नहीं रख पाते और आगे की घोषणाओं की ओर चल निकलते हैं, ऐसी फेहरिस्त दिनों दिन लंबी होते जा रही है। कन्या जन्म प्रोत्साहन के लिये उनके द्वारा संचालित की जा रही 'लाडली लक्ष्मीÓयोजना काफी हद तक फलीभूत रही जिसके सार्थक परिणाम भी आने लगे हैं। पर यह उल्लेख करने से राष्ट्रचडिका को गूरेज नहीं है कि शिवराज 'मामाÓ की 'लाडलियांÓ अब अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा पूर्ण कर माध्यमिक स्तर पर कक्षा 9 में प्रवेश कर चुकी है और उनके सामने है। एकमुश्त भारी-भरकम 'प्रवेश शुक्लÓ की राशि, जो लाडलियां अब तक निश्चित हो शिक्षा ले रही थी। मामा जी की दी गई साईकिलों पर फर्राटे से दूरदराज के स्कूलों मं आ जा रही थी। अब उनके और उनके पालकों की पेशानी पर पसीने की बूंदे चुहचुहा रही है। बेचारे अपनी सीमित आम से अपनी लक्ष्मियो को आगे की शिक्षा दिलाने कृत संकल्पित है। यह
शिवराज मामा के पहल की सार्थकता मानी जा सकती है पर जैसा कि 'राष्ट्रचंडिकाÓ टीम को अपने व्यापक सर्वेक्षण में ज्ञात हुआ है कि कमजोर आय वर्ग मे प्रवेश शुल्क की अधिकता नकारात्मक संदेश दे रही है। कहने में संकोच नहीं होगा कि (प्रतिशत की बात न की जाए) 'शैक्षणिक शाला पलायनÓ का दौर जारी हो सकता है।
लिहाजा संवेदनशील मामा स्वरूप मुख्यमंत्री शिवराज से अपेक्षा है कि वे अपनी महत्वाकांक्षी सोच 'लाडली लक्ष्मीÓ और 'शिक्षित बिटियाÓ की अनूठी कवायद के सामने आ रही भारी-भरकम प्रवेश शुल्क पर सहानुभूति पूर्ण एवं गंभीर मंत्रणा कर आगे की योजना को अंजाम देवे जिससे उनकी लाडलियां इस आर्थिक चक्कर से मुक्त हो आगे और आगे की शिक्षाग्रहणकरने स्वस्र्फूत अग्रसर है...
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Sunday, 5 July 2015

गली-गली में पैर पसार रहा

गली-गली में पैर पसार रहा
घनश्याम का जुआं
सिवनी राष्ट्रचंडिका। किसी जमाने में जुआं फड़ो की चौकीदारी करना वाला घनश्याम आज खुद का जुआ फड़ चला रहा है। फडऩवीशो की माने तो घनश्याम  नामक यह जुआंरी अब गली-गली में जुआं खिलाने लगा है जिसका जीता जागता उदाहरण हड्डीगोदाम जैसे क्षेत्र में देखने को मिला जहां बीते दिनों 11 जुआंरी रंगे हाथ जुआं खेलते पकड़ाये थे। 
जुआरियों को देता है फुल सुविधा
सबसे मजे की बात तो यह है कि घनश्याम अपने फड़ में आने वाले जुआरियों को पूरी सुविधाएं मुहैया कराता है। चाहे वह पुलिस में पकड़ाने की भय हो या किसी तरह की कोई परेशानी, सबका हल घनश्याम ही निकालकर देता है। चर्चा चल रही है कि बीते दिनों हड्डीगोदाम में पकड़ाये जुएं में भी घनश्याम का हाथ था। जुआं पकड़ाने के बाद घनश्याम थाने के चक्कर काटता भी नजर आया और उसने मुचलके पर सभी जुआरियों को छुड़ा भी लिया। 
पुलिस के चंद ठुल्लो से है सेटिंग
घनश्याम की पुलिस थाने में भी तगड़ी सेटिंग है। घनश्याम के फड़ में पुलिस द्वारा बहुत कम ही दबिश दी जाती है। चूंकि पुलिस विभाग के कुछ बिके हुए ठुल्लों का इसे संरक्षण प्राप्त है। खाकी की दलाली करने वाले इन ठुल्लों का नाम हम शीघ्र ही प्रकाशित किया जिसकी जांच पड़ताल हमारे द्वारा की जा रही है लेकिन हम बता दें कि घनश्याम का पैसा पुलिस के कुछ उच्चाधिकारी को भी जाता है।  इतना ही नहीं घनश्याम और एक पुलिस वाले की रिकार्डिंग भी इसी के फड़ में जुआ खेलने वाले एक खिलाड़ी ने की है जो हमें बताने से कतरा रहा था। बहरहाल जो भी हो यह तो जांच का विषय है कि कौन सा पुलिस का आरक्षक घनश्याम से सेट है। 

रजवाड़ा मे ही क्यों पकड़ाये

रजवाड़ा मे ही क्यों पकड़ाये 
थे प्रेमी युगल?
राष्ट्रचंडिका/ बीते दिनों रात्रि के समय लूघरवाड़ा स्थित रजवाड़ा होटल में एक प्रेमी जोड़े पकड़ाने की खबर मिली थी जिसके बाद सवाल यह उठता है कि आखिर रजवाड़ा में ही यह प्रेमीजोड़े क्यों पकड़ाये? इन जोड़ों को रजवाड़ा लॉज के मालिक ने क्यों पनाह दी? ऐसे कई सवाल है जो नगर की लॉजो में चलने वाले गंदे कामों को उजागर करते हैं। नगर में ऐसी कई लॉजे हैं जो अय्याशियों का अड्डा बन चुकी है। कुछ लॉज मालिका का मानना है कि ऐसे मामले सामने आने से उनकी लॉज का नाम फेमस होता है और वे अखबारों के जरिये भी बिना पैसे के सुर्खियां बटोर लेती है, ऊपर से पुलिस भी इन पर कोई कार्रवाही नहीं करती। 

पुलिस की सक्रियता प्रशंसा योग्य: तथ्यों से मुकम्मल परदा उठना शेष

 पुलिस की सक्रियता प्रशंसा योग्य: तथ्यों से मुकम्मल परदा उठना शेष
 क्यो बनता जा रहा शहर अपराध टापू?
पिछले लगभग एक साल के दरमियान जिले की फिजाओ में अपराधों का बोलबाला सा बना नजर आ रहा है। ऐसा नही कि पहले अपराध नहीं घटित होते थे पर उल्लेखित वर्ष के दौरान यदि घटित अपराधों के ग्राफ पर नजर डाली जाये तो सनसनीखेज खुलासे होते हैं। महानगरों की तर्ज पर 'ऑनर किलिंग, 'सशस्त्र डकैतीÓ जैसे अपराध कारित किये गये हैं वह तो गनीमत है कि लगभग सुस्त मानी जाने वाली जिला पुलिस के भाग से छीका टूट गया और देर सबेर अपराधी पकड़ लिये गये।
 बात की जाए 08 महीने पहले जिला पुलिस अधीक्षक के शासकीय आवास एसपी बंगले के समीप रहने वाले ठेकेदार सुरेंद्र राय की हत्या की। इसे उसके घर के अंदर घुसकर गोली मार दी गई थी। इतने माह बीत गये थे, मीडिया समेत नगर में इस कांड को लेकर तरह-तरह की अटकलों का बाजार गर्म हो चला था। रोज ही एक नये सभावित हत्यारे का नाम सामने आ रहा था। एसपी दर एसपी बदले पहले बीपी चंद्रवंशी थे तब तक मामला न जाने क्यो ठंडे बस्ते में रहा, अब एसपी आरपी सिंह का है, शायद उनकी कार्यप्रणाली से इस हत्याकांड का खुलासा हो सका है। मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम में बुलाई गई पत्रकारवार्ता मे 27 और 28 अक्टूबर 2014 की दरमियानी रात हुए गोलीकाड का खुलासा किया गया है। कोतवाली पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इसमें मृतक सुरेंद्र राय की पत्नि अर्चना राय,एक ढोंगी बाबा संजय नायक और उसके चेले निशीकात मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चलिए यह कोतवाली पुलिस की बड़ी सफलता कहा जा सकता है, इसके लिये वह प्रशंसा की हकदार है।
दूसरी घटना का जिक्र भी लाजमी होगा। घटना 20 जून की है जब समीपी औद्योगिक क्षेत्र भुरकल खापा में आरएच साल्वेंट प्लांट में करेली से आये तेल व्यवसायी के मुनीम से दिन दहाड़े हथियारबंद लुटेरो ने 7 लाख 71 हजार लूट लिये गये। पुलिस ने सक्रियता दिखाई और 4 मे से तीन आरोपी 24 जून को धर लिये गये, एक मास्टर माइंट फरार था जिसे रेलवे स्टेशन सिवनी से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी भागने की फिराक में था उसके कब्जे से लूट की रकम भी जप्त की गई है। चलिए इसे भी हम पुलिस की सफलता मान लेते हैं पर एक तथ्य अब भी नहीं खुल पाया है कि इतनी बड़ी लूट की योजना कहां किसके घर पर बनाई गई। सूत्रों की माने तो घटना की योजना आमाझिरिया के एक ड्रायवर के घर में बनाई गई थी। इस ड्रायवर के बारे में बताया जाता है कि वह पहले नगर के एक तथाकथित युवा (प्रौढ़) प्रतिष्ठित संभ्रात नागरिक का चोला ओढ़ बैठे व्यक्ति का ड्रायवर हुआ करता था। खैर इसके आगे की तहकीकात पुलिस का काम है, मीडिया सूत्रों से जानकारियां ही प्रकाशित कर सकता है। 
बहरहाल आखिर क्यों महानगरों की भांति संगठित अंजाम सिवनी जैसे छोटे नगरो मे दिये जा रहे है। इसे तो यह भी माना जा सकता है कि अब जिले की पुलिस का शिकंजा कमजोर हो चला है क्योंकि क्या कारण है जो अन्य शहरो के संगठित अपराधी सिवनी को अपराध की चारागाह मान बैठे हैं और बेखौफ हो तरह-तरह के अपराधो को अजाम दे रहे है।

Wednesday, 24 June 2015

होर्डिग्स लगाये जाने की क्या है नीति ?

होर्डिग्स लगाये जाने कीहोर्डिग्स लगाये जाने की क्या है नीति ? क्या है नीति ?
राष्ट्रचंडिका/  अमर नौरिया  नरसिंहपुर- होर्डिंग्स लगाये जाने की अनुमति को लेकर उच्च न्यायालय में एक मामला अभी कुछ दिन पूर्व तक सुर्खियों में रहा था और उस मामले के चलते ही पूरे प्रदेश में होर्डिंग्स की अनुमति को लेकर नगर पालिका परिषद और गलत तरीके से होर्डिंग्स लगाये गये हैं तो उस बात को लेकर पुलिस विभाग को इस तरह के मामले में कार्यवाही करने के निर्देश जारी किये गये थे , उसके बाद नरसिंहपुर नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर ने भी शहर में लगाई गई होर्डिग्सों की अनुमतियों के न होने पर उन्हें निकाले जाने की कार्यवाही भी की थी 
 नरसिंहपुर नगर पालिका परिषद में होर्डिंग्स लगाये जाने की क्या नीति है इस बात को लेकर सूचना के अधिकार के तहत लगाये गये आवेदन में नगरपालिका परिषद नरसिंहपुर ने अभी तक उक्त जानकारी नहीं दी गई । वहीं इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान में लगभग आधाा  सैकड़ा होर्डिंग्स शहर में विभिन्न स्थानों पर लगाई गई हैं जब इन होर्डिंग्सों को लगाये जाने की अनुमति दी गई है तो वह किस नीति के तहत दी गई है इस बात की जानकारी देने में नगरपालिका परिषद आखिर बच क्यों रही है ।
 पहले हटवाई थी होर्डिग्स -पूर्व नपाध्यक्ष के कार्यकाल के समय नगरपालिका परिषद नरसिंहपुर ने अपने एक पत्र क्रं. 1719/लो.नि.वि./2010 नरसिंहपुर दिनांक 10/9/10 के तहत एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह प्रचारित और प्रसारित किया था कि नगर में यातायात सुव्यवस्था एवं नगर सौन्दर्यकरण को ध्यान में रखते हुये नगरपालिका परिषद शहर में लगी समस्त अवैध होर्डिंग्स को हटवाने की कार्यवाही कर रहा है । तथा इसके बाद जिन व्यक्तियों / एजेंसियों को होर्डिग्स लगाना है आवेदन का प्रारूप प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण कर स्वीकृत प्राप्त कर होर्डिंग्स स्थापित कर सकते हैँ । और इसक पश्चात नगर में होर्डिग्स लगाये जाने की अनुमति नगरपालिका परिषद ने अपने स्तर से जारी कर होर्डिग्स लगाये जाने की अनुमति प्रदान की थी । और पूर्व से लगाई गई      लगभग दर्जनों होर्डिग्स को नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर ने अवैध मानकर उन्हें उखड़वाकर उसका सारा मटेरियल्स अपने कब्जे में रखवा लिया जो आज नगर पालिका में रखा है कि नहीं इसकी जानकारी भी नहीं है ।
अब नगरपालिका परिषद नरसिंहपुर न्यायालय के निर्देश पर पूर्व में शहर से अवैध होर्डिग्स भी हटवा चुकी और जो आधा सैकड़ा होर्डिग्स शहर में लगी हैं उन्हें वैध भी मान लिया जाये तो फिर आखिर नरसिंहपुर नगर पालिका में होर्डिग्स लगाये जाने की क्या नीति है इसका जबाब देने से क्यों बच रही है ।  

09 माह में भी खाली नहीं हुआ मस्के का बंगला

09 माह में भी खाली नहीं हुआ मस्के का बंगला


राष्ट्रचंडिका/ अधिकारी वर्ग के लिए सिवनी जन्नत की तरह है, यहां जो भी आता है वह यहीं का होना चाहता है। एक ऐसे ही पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यपालन यंत्री हैं एस.के. मस्के। जिनका ट्रांसफर 09 माह पूर्व ग्वालियर किया जा चुका है लेकिन इन्होंने अपना बंगला अब तक खाली नहीं किया है। इन्हें अभी भी आस बाकी है कि वह अपना ट्रांसफर पुन: सिवनी करवा सकते हैं। इससे पहले भी इनका ट्र्रांसफर बैतूल व बालाघाट हो चुका था लेकिन इन्होंने वहां चंद माह बिताकर पुन: अपना तबादला सिवनी करवा लिया। मस्के को सिवनी में ऐसा क्या नजर आता है जिसके कारण वह सिवनी में रहना पसंद करते हैं।
09 माह हो चुके हैं लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग मस्के से बंगला खाली नहीं करवा पाया। हमारे सूत्र तो यह भी बताते हैं कि मस्के अपने सिवनी दौरे के दौरान जब भी यहां आते हैं तब वह अपने बंगले में ही रात गुजारते हैं। जब इस संबंध में श्री मस्के से बंगला खाली करवाने के संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा कि हमारे पैकिंग लगभग पूरी हो चुके हैं और संभवत: एक दो दिन में मैं यह बंगला खाली कर दूंगा। 

Monday, 22 June 2015

छोटे कद के ब्लेकमेलर पत्रकार

छोटे कद के ब्लेकमेलर पत्रकार

राष्ट्रचंडिका  सुना है सिवनी में अब ब्लेकमेलर पत्रकार भी पैदा हो गये हैं जो पहले यदा-कदा ही देखने को मिलते थे। नगर का एक मिड डे अखबार (राष्ट्रचंडिका नही) जो लोगों की वाणी कहलाता था जिस पर अब ब्लेकमेलिंग का धब्बा लग गया है। यूं तो सिवनी में ऐसे भी पत्रकार है जिनके पास अखबार न होते हुए भी वह डंके की चोट में वसूली अभियान चलाते हैं। राष्ट्रचंडिका ने पहले भी कई ऐसे पत्रकारों के काले कारनामें सामने लायें हैं जिनका कोई वजूद (अखबार) ही नहीं है। ऐसे पत्रकारों को हम 'छोटे कद केÓ पत्रकार कहेंगे जिनका कद वास्तविकता में लंबा क्यों न हो लेकिन पत्रकारिता में छोटे कद के नाम से ही जाने जायेंगे।
अभी कुछ दिनों से एक पत्रकार की ब्लेकमेलिंग किस्से लोग ठहाके मार-मारके सुन-सुना रहे हैं। चर्चाओं के आधार पर सुनने को मिल रहा है कि बीते दिनों केवलारी/उगली के एक पत्रकार जो एक मिड डे अखबार का संवाददाता भी है, ने रेत ठेकेदार से मैनेज करने की बात कही थी जिसका आडियों वाट्सअप में वायरल हो गया। इस आडियों में यह ब्लेकमेलर पत्रकार कह रहा है कि साहब, आप तो हमें मैनेज ही नहीं कर रहे, हमारे बॉस के साथ रेस्टहाऊस में बैठकर मैनेजमेंट की बात कर लो। इस तुच्छ शब्दों से ऐसा लगता है मानों जैसे भूखे मर रहे हो, पत्रकारिता में पैसा लेना जायज है लेकिन ब्लेकमेलिंग का नहीं। इतना ही नहीं इस ब्लेकमेलर पत्रकार के बॉस (उस्ताद) तो पहले से ही चर्चाओं में रहते हैं। सिवनी छोड़ मंडला, बालाघाट जैसे दूसरे जिलों में इनके द्वारा जमकर धनउगाही की गई है, ऐसा मंडला के लोग बताते हैं। इतना ही नहीं इनका चेला तो ऑडियो में अपने अपने अखबार को भोपाल से प्रकाशित होना बताकर रेत ठेकेदार को धौंस दे रहा है। यही नहीं आडियों में तो रेत ठेकेदार ने चेले के उस्ताद को 05 हजार रूपये महीना देने की बात भी कही।
 धीरे-धीरे अब इनके गढ़े मुर्दे उखडऩे लगे हैं जिसके बाद चर्चा यह भी चल रही है कि 01 से 10 तारीख के बीच इनके पास एक जुआं खिलाने वाले नालकट का पैसा भी पहुंचता है।
इन चंद ब्लेकमेलरों की वजह से पूरी मीडिया बदनाम हो रही है। कभी पत्रकार संगठन के नाम से तो कभी सदस्य बनाने के नाम पर 'छोटे कदÓ के पत्रकार वसूली करते फिरते हैं। बहरहाल ऐसे पत्रकारों को अच्छा खासा सबक मिल गया है जो अब अपना मुंह छिपाए लोगों को सफाई देते फिर रहे हैं। 

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

अब पत्रकार पर हमले की फिराक में स्वयंभू युवा अध्यक्ष 
सच्चाई छापने वाले पत्रकार कभी मरते और डरते नहीं लेकिन बीते दिनों उत्तरप्रदेश के एक निष्पक्ष पत्रकार को जिंदा जला दिया गया। इस पत्रकार ने सिर्फ इतनी हिम्मत जुटाई कि उसने काला धंधा करने वालों की खाल उधेड़ दी जिसके बाद उसे पुलिस की अभिरक्षा में जिंदा जला दिया गया।  इस हादसे के बाद अब नेता, मंत्री, दबंगों व ठेकेदारों के हौंसले बुलंद हो गये हैं। वे तो खुलेआम पत्रकारों को धमकी देते हैं कि तुझे और तेरे परिवार को उठवा लेंगे मगर निष्पक्ष व ईमानदार पत्रकार की इनकी धमकी कुत्ते की भौंक के समान लगती है। 
/ सिवनी। सिवनी में भी ऐसे एक पत्रकार है अजय मिश्रा जो राष्ट्रचंडिका के संपादक को पहले भी जान से मारने की धमकी दे चुके हैं, बावजूद इसके राष्ट्रचंडिका इनकी बखिया उधेड़ते आ रहा है और आगे भी उधड़ेगा। अजय मिश्रा (स्वयंभू) के बारे में कहा जाता है कि ये ब्राम्हण समाज में अपनी धाक जमाकर समाज के लोगों को अपने इशारें पर नचाना चाहते हैं लेकिन हम ऐसा कदापि नहीं होने देंगे। मिश्रा जी हैं तो ठेकेदार लेकिन ये अवैध कब्जा करने के मामले में भी बदनाम हो चुके हैं। 
पत्रकार बनने का भी रखते हैं शौक
समाज में अपना एकछत्र राज जमाने की चाह रखने वाले अजय मिश्रा पत्रकारिता में खासी रखते हैं भले इन्हे पत्रकारिता का 'पÓ नहीं मालूम लेकिन अखबार की आड़ में अपने काम निकालना इन्हे अच्छी तरह आता है। पत्रकारों को अक्सर अखबार से दूर रहने की हिदायत देने वाले अजय मिश्रा ने खुद एक दबंग अखबार लाया लेकिन वह ज्यादा दिनों तक इनके हाथ में नहीं रहा और इनके पास से अखबार छीनकर किसी और को दे दिया गया। 
ब्राम्हण समाज में बैठकों का दौर जारी
राष्ट्रचंडिका अपने विगतांको में ब्राम्हण समाज के स्वयं भू युवा अध्यक्ष की मानसिकता को प्रकाशित करते आ रहा है जिसके बाद ब्राम्हण समाज भी सतर्क होता दिख रहा है और जगह-जगह बैठकों का दौर जारी है। हमारे सूत्र बताते हैं कि कुछ बैठकों से युवा अध्यक्ष अजय मिश्रा को दूर रखा गया जिसके बाद यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि ब्राम्हण समाज में जल्द ही कोई बदलाव आ सकता है और चुनाव हो सकते हैं। 
राष्ट्रचंडिका के संपादक ने दिया सिवनी कोतवाली में आवेदन
सिवनी । उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हुए हमलों की ही तरह सिवनी में पत्रकारों पर हमले होने की बातें फिजां में तैर रही हैं। इस आशय का एक आवेदन बीते दिवस राष्ट्रचंडिका के सपंादक ने कोतवाली सिवनी में दिया है। सिवनी में भी मीडिया जगत द्वारा कुछ लोगों के अनैतिक कामों को अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है। इससे झुझलाकर कुछ लोगों के द्वारा मीडिया पर्सन्स पर हमले की तैयारियां भी की जा रही है। हमारे द्वारा कोतवाली में दिए आवेदन मेें उल्लेख किया गया है कि अजय मिश्रा के खिलाफ लगातार सच्चाई छापने के बाद सूचना मिल रही है कि राष्ट्रचंडिका के संपादक या उनके परिवार पर कोई हमला कर सकता है। इसी के चलते थाना कोतवाली को इसकी इत्तला दे दी गई है। यदि संपादक या उसके परिवार को कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार अजय मिश्रा होंगे। 

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

अब पत्रकार पर हमले की फिराक में स्वयंभू युवा अध्यक्ष 
सच्चाई छापने वाले पत्रकार कभी मरते और डरते नहीं लेकिन बीते दिनों उत्तरप्रदेश के एक निष्पक्ष पत्रकार को जिंदा जला दिया गया। इस पत्रकार ने सिर्फ इतनी हिम्मत जुटाई कि उसने काला धंधा करने वालों की खाल उधेड़ दी जिसके बाद उसे पुलिस की अभिरक्षा में जिंदा जला दिया गया।  इस हादसे के बाद अब नेता, मंत्री, दबंगों व ठेकेदारों के हौंसले बुलंद हो गये हैं। वे तो खुलेआम पत्रकारों को धमकी देते हैं कि तुझे और तेरे परिवार को उठवा लेंगे मगर निष्पक्ष व ईमानदार पत्रकार की इनकी धमकी कुत्ते की भौंक के समान लगती है। 
/ सिवनी। सिवनी में भी ऐसे एक पत्रकार है अजय मिश्रा जो राष्ट्रचंडिका के संपादक को पहले भी जान से मारने की धमकी दे चुके हैं, बावजूद इसके राष्ट्रचंडिका इनकी बखिया उधेड़ते आ रहा है और आगे भी उधड़ेगा। अजय मिश्रा (स्वयंभू) के बारे में कहा जाता है कि ये ब्राम्हण समाज में अपनी धाक जमाकर समाज के लोगों को अपने इशारें पर नचाना चाहते हैं लेकिन हम ऐसा कदापि नहीं होने देंगे। मिश्रा जी हैं तो ठेकेदार लेकिन ये अवैध कब्जा करने के मामले में भी बदनाम हो चुके हैं। 
पत्रकार बनने का भी रखते हैं शौक
समाज में अपना एकछत्र राज जमाने की चाह रखने वाले अजय मिश्रा पत्रकारिता में खासी रखते हैं भले इन्हे पत्रकारिता का 'पÓ नहीं मालूम लेकिन अखबार की आड़ में अपने काम निकालना इन्हे अच्छी तरह आता है। पत्रकारों को अक्सर अखबार से दूर रहने की हिदायत देने वाले अजय मिश्रा ने खुद एक दबंग अखबार लाया लेकिन वह ज्यादा दिनों तक इनके हाथ में नहीं रहा और इनके पास से अखबार छीनकर किसी और को दे दिया गया। 
ब्राम्हण समाज में बैठकों का दौर जारी
राष्ट्रचंडिका अपने विगतांको में ब्राम्हण समाज के स्वयं भू युवा अध्यक्ष की मानसिकता को प्रकाशित करते आ रहा है जिसके बाद ब्राम्हण समाज भी सतर्क होता दिख रहा है और जगह-जगह बैठकों का दौर जारी है। हमारे सूत्र बताते हैं कि कुछ बैठकों से युवा अध्यक्ष अजय मिश्रा को दूर रखा गया जिसके बाद यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि ब्राम्हण समाज में जल्द ही कोई बदलाव आ सकता है और चुनाव हो सकते हैं। 
राष्ट्रचंडिका के संपादक ने दिया सिवनी कोतवाली में आवेदन
सिवनी । उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हुए हमलों की ही तरह सिवनी में पत्रकारों पर हमले होने की बातें फिजां में तैर रही हैं। इस आशय का एक आवेदन बीते दिवस राष्ट्रचंडिका के सपंादक ने कोतवाली सिवनी में दिया है। सिवनी में भी मीडिया जगत द्वारा कुछ लोगों के अनैतिक कामों को अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है। इससे झुझलाकर कुछ लोगों के द्वारा मीडिया पर्सन्स पर हमले की तैयारियां भी की जा रही है। हमारे द्वारा कोतवाली में दिए आवेदन मेें उल्लेख किया गया है कि अजय मिश्रा के खिलाफ लगातार सच्चाई छापने के बाद सूचना मिल रही है कि राष्ट्रचंडिका के संपादक या उनके परिवार पर कोई हमला कर सकता है। इसी के चलते थाना कोतवाली को इसकी इत्तला दे दी गई है। यदि संपादक या उसके परिवार को कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार अजय मिश्रा होंगे।