मामा अब हम कक्षा 9वी में पहुंच गये...
प्रवेश शुल्क की ऊंची दर देती नकारात्मक सोच
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल के सफलतम संचालन के साथ हैट्रिक की ओर अग्रसर शिवराज सिंह चौहान घोषणाएं तो करते हैं पर कभी कभी ऐसा लगने लगता है कि वे उस पर दूरगामी निगाहें नहीं रख पाते और आगे की घोषणाओं की ओर चल निकलते हैं, ऐसी फेहरिस्त दिनों दिन लंबी होते जा रही है। कन्या जन्म प्रोत्साहन के लिये उनके द्वारा संचालित की जा रही 'लाडली लक्ष्मीÓयोजना काफी हद तक फलीभूत रही जिसके सार्थक परिणाम भी आने लगे हैं। पर यह उल्लेख करने से राष्ट्रचडिका को गूरेज नहीं है कि शिवराज 'मामाÓ की 'लाडलियांÓ अब अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा पूर्ण कर माध्यमिक स्तर पर कक्षा 9 में प्रवेश कर चुकी है और उनके सामने है। एकमुश्त भारी-भरकम 'प्रवेश शुक्लÓ की राशि, जो लाडलियां अब तक निश्चित हो शिक्षा ले रही थी। मामा जी की दी गई साईकिलों पर फर्राटे से दूरदराज के स्कूलों मं आ जा रही थी। अब उनके और उनके पालकों की पेशानी पर पसीने की बूंदे चुहचुहा रही है। बेचारे अपनी सीमित आम से अपनी लक्ष्मियो को आगे की शिक्षा दिलाने कृत संकल्पित है। यह
शिवराज मामा के पहल की सार्थकता मानी जा सकती है पर जैसा कि 'राष्ट्रचंडिकाÓ टीम को अपने व्यापक सर्वेक्षण में ज्ञात हुआ है कि कमजोर आय वर्ग मे प्रवेश शुल्क की अधिकता नकारात्मक संदेश दे रही है। कहने में संकोच नहीं होगा कि (प्रतिशत की बात न की जाए) 'शैक्षणिक शाला पलायनÓ का दौर जारी हो सकता है।
लिहाजा संवेदनशील मामा स्वरूप मुख्यमंत्री शिवराज से अपेक्षा है कि वे अपनी महत्वाकांक्षी सोच 'लाडली लक्ष्मीÓ और 'शिक्षित बिटियाÓ की अनूठी कवायद के सामने आ रही भारी-भरकम प्रवेश शुल्क पर सहानुभूति पूर्ण एवं गंभीर मंत्रणा कर आगे की योजना को अंजाम देवे जिससे उनकी लाडलियां इस आर्थिक चक्कर से मुक्त हो आगे और आगे की शिक्षाग्रहणकरने स्वस्र्फूत अग्रसर है...
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प्रवेश शुल्क की ऊंची दर देती नकारात्मक सोच
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल के सफलतम संचालन के साथ हैट्रिक की ओर अग्रसर शिवराज सिंह चौहान घोषणाएं तो करते हैं पर कभी कभी ऐसा लगने लगता है कि वे उस पर दूरगामी निगाहें नहीं रख पाते और आगे की घोषणाओं की ओर चल निकलते हैं, ऐसी फेहरिस्त दिनों दिन लंबी होते जा रही है। कन्या जन्म प्रोत्साहन के लिये उनके द्वारा संचालित की जा रही 'लाडली लक्ष्मीÓयोजना काफी हद तक फलीभूत रही जिसके सार्थक परिणाम भी आने लगे हैं। पर यह उल्लेख करने से राष्ट्रचडिका को गूरेज नहीं है कि शिवराज 'मामाÓ की 'लाडलियांÓ अब अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा पूर्ण कर माध्यमिक स्तर पर कक्षा 9 में प्रवेश कर चुकी है और उनके सामने है। एकमुश्त भारी-भरकम 'प्रवेश शुक्लÓ की राशि, जो लाडलियां अब तक निश्चित हो शिक्षा ले रही थी। मामा जी की दी गई साईकिलों पर फर्राटे से दूरदराज के स्कूलों मं आ जा रही थी। अब उनके और उनके पालकों की पेशानी पर पसीने की बूंदे चुहचुहा रही है। बेचारे अपनी सीमित आम से अपनी लक्ष्मियो को आगे की शिक्षा दिलाने कृत संकल्पित है। यह
शिवराज मामा के पहल की सार्थकता मानी जा सकती है पर जैसा कि 'राष्ट्रचंडिकाÓ टीम को अपने व्यापक सर्वेक्षण में ज्ञात हुआ है कि कमजोर आय वर्ग मे प्रवेश शुल्क की अधिकता नकारात्मक संदेश दे रही है। कहने में संकोच नहीं होगा कि (प्रतिशत की बात न की जाए) 'शैक्षणिक शाला पलायनÓ का दौर जारी हो सकता है।
लिहाजा संवेदनशील मामा स्वरूप मुख्यमंत्री शिवराज से अपेक्षा है कि वे अपनी महत्वाकांक्षी सोच 'लाडली लक्ष्मीÓ और 'शिक्षित बिटियाÓ की अनूठी कवायद के सामने आ रही भारी-भरकम प्रवेश शुल्क पर सहानुभूति पूर्ण एवं गंभीर मंत्रणा कर आगे की योजना को अंजाम देवे जिससे उनकी लाडलियां इस आर्थिक चक्कर से मुक्त हो आगे और आगे की शिक्षाग्रहणकरने स्वस्र्फूत अग्रसर है...
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