छोटे कद के ब्लेकमेलर पत्रकार
राष्ट्रचंडिका सुना है सिवनी में अब ब्लेकमेलर पत्रकार भी पैदा हो गये हैं जो पहले यदा-कदा ही देखने को मिलते थे। नगर का एक मिड डे अखबार (राष्ट्रचंडिका नही) जो लोगों की वाणी कहलाता था जिस पर अब ब्लेकमेलिंग का धब्बा लग गया है। यूं तो सिवनी में ऐसे भी पत्रकार है जिनके पास अखबार न होते हुए भी वह डंके की चोट में वसूली अभियान चलाते हैं। राष्ट्रचंडिका ने पहले भी कई ऐसे पत्रकारों के काले कारनामें सामने लायें हैं जिनका कोई वजूद (अखबार) ही नहीं है। ऐसे पत्रकारों को हम 'छोटे कद केÓ पत्रकार कहेंगे जिनका कद वास्तविकता में लंबा क्यों न हो लेकिन पत्रकारिता में छोटे कद के नाम से ही जाने जायेंगे।
अभी कुछ दिनों से एक पत्रकार की ब्लेकमेलिंग किस्से लोग ठहाके मार-मारके सुन-सुना रहे हैं। चर्चाओं के आधार पर सुनने को मिल रहा है कि बीते दिनों केवलारी/उगली के एक पत्रकार जो एक मिड डे अखबार का संवाददाता भी है, ने रेत ठेकेदार से मैनेज करने की बात कही थी जिसका आडियों वाट्सअप में वायरल हो गया। इस आडियों में यह ब्लेकमेलर पत्रकार कह रहा है कि साहब, आप तो हमें मैनेज ही नहीं कर रहे, हमारे बॉस के साथ रेस्टहाऊस में बैठकर मैनेजमेंट की बात कर लो। इस तुच्छ शब्दों से ऐसा लगता है मानों जैसे भूखे मर रहे हो, पत्रकारिता में पैसा लेना जायज है लेकिन ब्लेकमेलिंग का नहीं। इतना ही नहीं इस ब्लेकमेलर पत्रकार के बॉस (उस्ताद) तो पहले से ही चर्चाओं में रहते हैं। सिवनी छोड़ मंडला, बालाघाट जैसे दूसरे जिलों में इनके द्वारा जमकर धनउगाही की गई है, ऐसा मंडला के लोग बताते हैं। इतना ही नहीं इनका चेला तो ऑडियो में अपने अपने अखबार को भोपाल से प्रकाशित होना बताकर रेत ठेकेदार को धौंस दे रहा है। यही नहीं आडियों में तो रेत ठेकेदार ने चेले के उस्ताद को 05 हजार रूपये महीना देने की बात भी कही।
धीरे-धीरे अब इनके गढ़े मुर्दे उखडऩे लगे हैं जिसके बाद चर्चा यह भी चल रही है कि 01 से 10 तारीख के बीच इनके पास एक जुआं खिलाने वाले नालकट का पैसा भी पहुंचता है।
इन चंद ब्लेकमेलरों की वजह से पूरी मीडिया बदनाम हो रही है। कभी पत्रकार संगठन के नाम से तो कभी सदस्य बनाने के नाम पर 'छोटे कदÓ के पत्रकार वसूली करते फिरते हैं। बहरहाल ऐसे पत्रकारों को अच्छा खासा सबक मिल गया है जो अब अपना मुंह छिपाए लोगों को सफाई देते फिर रहे हैं।
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