Sunday, 2 August 2015

गांव से आने वालें ग्रामीणों को बरघाट विधायक का करना पड़ता है घंटो इंतेजार

गांव से आने वालें ग्रामीणों को बरघाट विधायक का करना पड़ता है घंटो इंतेजारv.i.p  बन गए कमल

राष्ट्रचंडिका/ डॉ. कलाम ने सही ही कहा है- 'सपना वो नहीं नहीं जो नींद में आये, बल्कि सपना वो है जिसे पूरा किये बिना नींद न आयेÓ। लेकिन बरघाट विधायक कमल मर्सकोले थोड़ा उल्टा ही चलते हैं। वे रात भर मंत्री बनने के सपनों में खोये रहते हैं और शायद इसी के चलते उनकी नींद दोपहर 12 बजे के बाद ही खुलती है। उनसे मिलने वाले ग्रामीण दोपहर तक उनका इंतेजार करते रहते हैं लेकिन विधायक जी सपनों में ही खोये रहते हैं। जब दूरस्थ ग्राम से आये ग्रामीणों द्वारा पूछा जाता है कि विधायक साहब कहां है तो उनके मातहत कर्मी सभी को रटा-रटाया जवाब देते हैं कि- साहब तो अभी किसी कार्यक्रम में गये हुए हैं, थोड़ी देर बाद आ जाना।
अपना सारा काम-काज छोड़ ग्रामीण सुबह से अपनी परेशानी लेकर विधायक साहब के पास पहुंचते हैं लेकिन उन्हें घंटो इंतेजार करवाया जाता है। चूंकि ग्राम से आने वाले ग्रामीण भोले-भाले होते हैं और इसी का फायदा उठाते हुए विधायक साहब भी उन्हें घंटो इंतेजार करवाते हैं।
अपने आपको जिले का व्हीआईपी विधायक समझने वाले कमल मर्सकोले शायद अब जनता की परेशानी न समझ रहे हों लेकिन जनता ने उन्हें खूब समझा था और विधायक चुना था लेकिन अब वे पूरी तरह से नेता बन चुके हैं। शायद विधायक जी अपना बीता हुआ कल भूल गये हैं कि वे भी किसी टपरे की चाय दुकान में बैठकर टाईमपास किया करते थे। अपनी तरह ही विधायक जी सबकों समझ रहे हैं। हम बता दें कि विधायक जी जनता के पास इतना फालतू समय नहीं है जो आपके दरबार में घंटो खड़ी रही। यदि जनता किसी को विधायक चढ़ाना जानती है तो उसे उतारना भी अच्छी तरह आता है।
मुखिया जी, नॉट रिचेबल विधायक को कवरेज में लाओ
नॉट रिचेबल विधायक के नाम से मशहूर हो चुके बरघाट विधायक हमेंशा कवरेज के बाहर ही रहते हैं। अपने आपको किसान पुत्र बताने वाले मुखिया शिवराज सिंह ऐसे नॉट रिचेबल विधायकों को क्या अपने मंत्रीमंडल में जगह देंगे या उन्हें स्वीच ऑफ (बाहर) कर देंगे...? यह तो समय की गर्त में है।

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