राष्ट्र चण्डिका,बालाघाट(पंकज डहरवाल)।कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इस वर्ष रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी और ईद-उल-जुहा का त्यौहार सार्वजनिक रूप से नहीं मनाया जा सकेगा। चीन से चले आ रहे विवाद के बीच रक्षाबंधन के मौके पर भाईयों की कलाई पर बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र के जरिये बहनें चीन के व्यापार को टक्कर देने की तैयारी में हैं। जहां भारत और चीन बॉर्डर पर उत्पन्न तनाव कम करने में जुटे हैं, तो वहीं चीन के विरुद्ध भारत में अभी एक विशाल लहर उमड़ी हुई है। अब वे किसी भी स्थिति में चीन में बनी राखियों को हाथ नहीं लगाएंगे, जिससे चीन को करोड़ के नुकसान होने का अंदेशा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापारियों ने निर्णय लिया है कि वे किसी भी हालत में चीनी राखियों को नहीं स्वीकार करेंगे, और उसके बजाए स्वदेशी राखियों को ही बढ़ावा देंगे। “इस रक्षा बंधन पर हम चाहते हैं कि स्वदेशी राखियों को हम बढ़ावा दें। इससे देश के हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा और इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा भी मिलेगा”।
भाइयों की कलाई पर बंधेगी देशी राखी- भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन तीन अगस्त को है। बाजार में अभी से राखियां नजर आने लगी हैं। पर्व के लिए इस बार देशी राखियों की मांग बढ़ी है। इस बार चाइनीज राखियों की तुलना में लोगों की पसंद देशी राखी बनी हुई है। दुकानों पर नाममात्र की ही चाइनीज राखियां देखने को मिल रही है। लोगों का रूझान सबसे ज्यादा देश में बनी राखियों की ओर है। राखियों में जरदोजी, मोती और मिरर वर्कवाली राखियां आर्कषण का केन्द्र बनी हुई हैं।
चाइनीस राखी के नई मिल रहे खरीदार मिल रहे खरीदार-
चाइना का विरोध और स्वदेशी के प्रचार प्रसार का असर बाजार पर साफ दिख रहा है। पिछले यह पहला मौका है जब रक्षाबंधन पर्व पर चाइनीज के बजाय स्वदेशी राखी की धूम मची हुई है। ऐसा नहीं है कि बाजार में चाइनीज राखी मौजूद नहीं है। दुकानदारों ने पूर्व की तरह चाइनीज राखी दुकानों पर सजा रखी है लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं। राखी दुकानदार अमित खरे ने बताया कि देश में बनी स्टोन, मौली, इलेक्ट्रानिक और कार्टून राखियों को बड़े और बच्चे पसंद कर रहे हैं। राखियों में भाई-भाभी की जोड़ी वाली राखियों के साथ ही कड़े वाली, ब्रेसलेट समेत अनेक प्रकार की डिजाइनर राखियां पारंपरिक वर्क की राखियों की डिमांड है। पूजन वाली राखियां भी बाजार में आई हैं। बाजार में 5 रुपए से 100 रुपए तक की राखियां मौजूद हैं।
बाजार में देसी राशियों के दाम दाम के दाम- व्यापारियों ने बताया कि चावलवाली राखी 10 रुपए से लेकर 20 रुपए तक, स्टोन वाली राखी 10 रुपए से लेकर 100 रुपये तक, कार्टून राखी पांच रुपए से लेकर 30 रुपए तक में मिल रही है। इसी तरह स्पीनर लाइट राखी 30 रुपए से लेकर 70 रुपए तक, मौली राखी पांच रुपए से लेकर 20 रुपए तक, थाली रक्षा रोल राखी 30 रुपये से लेकर 100 रुपए तक, लुंबा पेपर राखी 10 रुपए से लेकर 50 रुपए तक, फोम राखी दो रुपए से लेकर पांच रुपए तक, रुद्राक्ष राखी पांच रुपए से लेकर 25 रुपए पीस के दाम पर बाजार में मौजूद है।
चाइना के दूसरे प्रोडक्ट से परहेज नहीं- गलवान घाटी विवाद के बाद से भारत में चाइनीज सामान के बहिष्कार की मुहिम सी चल रही है। लेकिन लोग चाइनीज सामान में राखी का बहिष्कार तो कर रहे हैं। लेकिन चाइनीज गजेट, मोबाइल की डिमांड अभी भी बनी हुई है। स्थानीय निवासी आशीष जगधारी का कहना है कि मोबाइल में देसी विकल्पों की कमी है, इसलिए लोग चाइना के मोबाइल व एसेसरीज का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन जहां तक जिन वस्तुओं के देसी विकल्प हैं, वहां लोग देसी को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। जानकारी अनुसार हमारी दिनचर्या से जुड़ी ज्यादातर सामग्री में चाइना जुड़ा हुआ है, लोग जहां तक संभव है, चाइना के सामान को कम से कम ले रहे हैं। लेकिन जहां विकल्प की कमी है, वहां चाइना सामान का पूर्ण बहिष्कार नहीं हो पा रहा है। लोग मोबाइल, गजेट, मोबाइल एसेसरीज, ऐप, इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान में सस्ता विकल्प न होने से चाइना के प्रोडक्ट अभी भी इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन ये भी सही है कि लोग अब चाइना के सामान की खपत पहले से धीरे-धीरे कम करते जा रहे हैं।
रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्तत-राखी बांधने का मुहूर्त-
09:27:30 से 21:11:21 तक। रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त-
13:45:16 से
16:23:16 तक। रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त-
19:01:15 से 21:11:21 तक।
मुहूर्त अवधि : 11 घंटे 43 मिनट।
जानिए शुभ संयोग के बारे मेंं-इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इसके पहले यह संयोग साल 1991 में बना था। इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।