Sunday, 9 April 2017

सिटी में बिक रहा है धीमा जहर

- फलों को चमकाने के लिए हो रहा ग्रीस का उपयोग - कार्बाइट और दूसरे केमिकल्स से पकाए जा रहे फल

सिटी में बिक रहा है धीमा जहर

राष्ट्रचंडिका/ शहर के बाजार में इन दिनों फल के दाम आसमान पर हैं। इसके बावजूद शहर में इनसे बना जूस सस्ते में मिल रहा है। इस बात से स्पष्ट है कि जूस के नाम पर लोगों को दुकानदार एसेंसयुक्त जूस बेच रहे हैं। शहर में खुलेआम सेहत से खिलवाड़ होने के बावजूद अधिकारी कोई कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। बाजार में 10 से 20 रुपए तक में फल के जूस के नाम पर एसेंस बिक रहा है।
गर्मी के कारण इन दिनों किसी भी बाजार या शहर के प्रमुख मार्ग पर चले जाइए, हर जगह शीतल पेय व जूस की दुकानें नजर आ जाएंगी। दोपहर से देर रात तक इन दुकानों पर लोग आ रहे हैं। ये सस्ते जूस लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं।विभिन्न चौराहों व मार्गों पर जूस, मिल्क शेक, शर्बत आदि की कई दुकानें हैं। सभी में एसेंस व कलर वाला जूस ही बिक रहा है।
मिलावटी जूस का गणित
बाजार में 20 से 30 रुपए में एसेंस कलर की 5 से 10 ग्राम की शीशी आती है। यह ओरेंज, केवड़ा, पाइनेपल, मैंगो सभी फ्लेवर में उपलब्ध हैं। एसेंस कलर की एक शीशी से 20 लीटर तक शर्बत-जूस तैयार हो सकता है। जिसको 10 और 20 रुपए प्रति एक गिलास के हिसाब से दुकानदार मीठे पानी में घोलकर बेच रहे हैं। बाजार में मौसमी 60 से 70 रुपए किलो है।
एक किलो मौसमी में तीन गिलास जूस बनता है। वह भी अच्छी किस्म के हो तब। वहीं अनार 60 से 80 रुपए किलो के भाव बिक रहा है। यदि घर में जूस निकालें तो एक किलो अनार में तीन गिलास जूस ही निकलता है। आम वर्तमान में 80 से 120 रुपए किलो तक बिक रहे हैं। एक किलो आम से 5 गिलास जूस बन सकता है। वहीं एक किलो आम रस में दूध मिलाने पर 5 से 6 ग्लास शेक बनता है। दूध, आम और चीनी की कीमत जोड़ें तो एक गिलास कम से कम 25 रुपए में पड़ता है, जबकि बाजार में 10 और 20 रुपए प्रति गिलास बाजार में बेचा जा रहा है।
लस्सीआज कल मार्केट में सिंथेटिक लस्सी का चलन भी बढ़ा है। दूध गर्म करते समय ब्लॉटिंग पेपर डालकर आंच में घुमाया जाता है इससे वह गाढ़ा हो जाता है। फिर इससे दही जमाने से कम दूध से भी अधिक दही बन जाती है। लस्सी को और अधिक गाढ़ा करने के लिए उसमें आरारोट व पोस्टर कलर का इस्तेमाल कर लेते हैं। शक्कर की बढ़ती कीमत के कारण दुकानदार सेक्रिन का इस्तेमाल करने से नहीं चूकते। इस तरह से तैयार होने वाली लस्सी स्वास्थ्य को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाती है।
मैंगो जूस
आम के नाम पर मिलने वाले मैंगो जूस में भी मिलावट होती है। मैंगो जूस में मैंगो एसेंस, सिंथेटिक दूध, सेक्रिन, अधिक मात्रा में बर्फ व पानी डाला जाता है। ये मैंगो जूस कुछ समय के लिए तो स्वादिष्ट लगता है लेकिन पेट में जाने के बाद यह कई तरह की बीमारियों को जन्म देता है। सिंथेटिक दूध में न तो कैल्शियम होता है और न ही विटामिन। कई लोगों को सिंथेटिक दूध से बनी चीजें पीने से एलर्जी भी हो सकती है। सेक्रिन बहुत ज्यादा मीठा करने के लिए होता है। कैलोरी होती है। इसके साथ ही जूस में प्रयोग होने वाला सेक्रिन के थोड़े से प्रयोग से ही ड्रिंक बहुत ज्यादा मीठा हो जाता है। पर सेक्रिन में मिला केमिकल जब शरीर में जाता है तो आंत और डाइजेशन सिस्टम को बिगाड़ता है।
गर्मी का मौसम आ चुका है। धूप में घूमते हुए सिटी के चौराहों पर बिक रहे जूस को पीने का मन तो करता ही होगा। अगर आप भी गर्मी मिटाने और सेहत बनाने के लिए जूस पी रहे हैं तो ये आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्योंकि इसमें मिलावट का रंग मिलने लगा है।
फलों में इंजेक्शन
केले, पपीता, आम, चीकू को पकाने के लिए इसमें कार्बाइट समेत अन्य केमिकलों का इस्तेमाल तेजी से किया जा रहा है। यही नहीं फलों को चमकाने के लिए ग्रीस, गाडिय़ों से निकल रहे आइल और मोम का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है।

जूस भी खतरनाक
केमिकल में पकाए जाने वाले फलों का जूस भी उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है जितने फल। ये आपको बीमारियां दे सकता है। असल में जूस को बनाने के लिए जो पानी उपयोग किया जाता है, वो भी शुद्ध नहीं है। इसमें मिलाई जाने वाली बर्फ भी साफ नहीं होती है। वहीं इसमें मिलाए जाने वाले फ्लेवर और कलर भी आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं।
हो सकता है कैंसर
डॉक्टर्स की मानें तो जिस तरह से फलों में कार्बाइट समेत अन्य केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनसे कैंसर रोग भी हो सकता है। वैक्सीनेशन के लिए उपयोग किए गए केमिकल्स और आयल में हाइड्रोकार्बनहोता है। ये धीमी गति से लेकिन गहरा असर करते हैं और बाद में गंभीर बिमारियों का कारण बन सकते हैं। इनसे लीवर डैमेज, कैंसर, नोजिया, गैस्ट्रोएंट्राइटिस आदि होता है। फूड पाइजनिंग से अस्थमा, लीवर की बीमारियां, आंतों का कैंसर होता है।
कैसे बनता है मिलावटी जूस -
रूड्डठ्ठद्दश जूस बनाने में धड़ल्ले से केमिकल एसेंस और सैकरीन का प्रयोग किया जा रहा है।
स्नस्स््रढ्ढ के नियम के अनुसार शक्कर की जगह सैकरीन का प्रयोग नहीं कर सकते।
कैसे बनाता है मिलावटी जूस :
दुकानदार कुछ आम के टुकड़े , ढेर सारा बर्फ, फिर मिलते है केमिकल (एसेंस ) जो टेस्ट को बड़ा देता है और जूस का रंग आम से भी ज्यादा पिला कर देता है और सैकरीन जो चीनी से सस्ता होता है।

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