
राष्ट्रचंडिका/इतिहास में नगरपालिका के गठन से लेकर आज तक की सबसे भ्रष्ट नगरपालिका अगर वर्तमान परिषद् को कहे, तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। यह पहली ऐसी नगरपालिका है जहाँ जनप्रतिनिधि अपने कामो के लिए रोते और अधिकारी मौज में नजर आ रहे है। बताया तो यहाँ तक जाता है कि यहाँ वर्षो से जमे अधिकारी अब ठेकेदारी से लेकर सप्लाई के काम तक स्वयं कर रहे है। अफसरशाही की शिकायत समय समय पर मीडिया के माध्यम से बाहर आती रही है किंतु भाजपा की सरकार के होते भाजपा के जनप्रतिनिधियों की हालत बहुत खऱाब है। सडक़ नाली निर्माण प्रकाश पानी और सफाई जैसी मुलभूत आवश्यकता भी अब पूरी नहीं हो रही है। बताया जाता है कि कुछ ख़ास पार्षदों को जो अधिकारियो के करीब है उनको आँख बंद करके रेवड़ी बांटी जा रही है। जैसे शहीद वार्ड में अवैध निजी कालोनियो में नपा सिवनी विधुत पोल लगा दिए है, अगर इस मामले की प्रारम्भ से जांच की जाये तो इतना बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा की आंखे फट जायेगी। नपा ने वर्तमान जल आवर्धन की पाइप लाइन भी अवैध कालोनियों में कालोनाइजर से साठगांठ कर बिछा दी है। ज्ञात होवे की उक्त खर्च जो नपा ने किया है वो कालोनाइजर का कार्य है, पर नगद नारायण के आगे सब ढेर हो गए। सीएमओ के सामने ही लोकायुक्त ने एक कर्मचारी को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा, ये वर्तमान नपा की उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि आज तक ऐसा हुआ नहीं था। शिकायते इतनी है कि यदि हर स्तर पर कार्यवाही की जाती है तो हर टेबल पर समस्या आ पड़े। गर्मी के मौसम में पानी की समस्या प्रति वर्ष आती है पर जिस प्रकार से निश्चिन्त इस वर्ष नपा थी वो समझ के परे है हर वार्ड में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। जबकि मोटर सुधार के नाम पर इतने पैसे निकाल जा चुके है कि कचड़ा मशीनों की जगह नई टेक्निक की मशीनें उतने व्यय में ली जा सकती थी। मोटर सुधार भी नपा के अधिकारियों की आय मुख्य जरिया बताया जाता है। जनता को खून के आँशु बहाने पर मजबूर करने वालो को जनता शायद ही भूले और इसका परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों में पुन: देखने को मिल सकते है।
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