Friday, 14 April 2017

भ्रष्टाचार के पर्याय बने सीएमओ


भ्रष्टाचार के पर्याय बने सीएमओ

सिवनी राष्ट्र चंडिका/ नगर को सुविधा प्रदान करना और सुंदर बनाना नगर पालिका का काम है लेकिन जब से सीएमओ किशनसिंह ठाकुर आये हैं तब से यहां पर लोगों को सुविधा और सौंदर्यीकरण की कल्पना भी करना मुश्किल हो गया है। जगजाहिर है कि नगर में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है नगर पालिका परिषद के दो कर्मचारी इस मामले में लोकायुक्त एवं अन्य जांच में दोषी भी पाये गये। प्रश्र यह है कि अगर सीएमओ ने लंबे समय से हो रहे इन मामलो को संज्ञान लिया होता तो इन मामलो में भी दूध का दूध पानी का पानी होने में समय नहीं लगता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर में वाटर सप्लाई से पूर्व पानी की शुद्धता के लिये जिस कंपनी का प्रमाण पत्र लगाकर मानक पानी की बात कही जा रही है उस मामले में भी अगर सूक्ष्मता से जांच की जाती है तो जो तथ्य सामने आयेंगे वे चौकाने वाले हो सकते हैं क्योंकि ऐसी कंपनी ही नहीं है जिसका प्रमाण पत्र इस हेतु लगाया गया है।
सीएमओ ठाकुर पर यह भी आरोप है कि वे उच्चाधिकारियों के साथ उठते बैठते हैं इसलिए उन पर कोई कार्यवाही एवं जांच नही बैठायी जाती। अपने निकटतम ठेकेदारो उपयंत्रियों को निर्माण के कार्य देकर उपकृत कर इसके एवज में अपना निश्चित कमीशन लेना आम बात है। पार्षद दलों के सम्मिलन में अनेको बार पार्षदों ने भी यह आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल में ना तो समय सीमा में कोई कार्य पूर्ण हो पाता है और जो स्वीकृत कार्य है उन्हें भी सीएमओ द्वारा अनुमति नहीं दी जाती। ज्ञात हो कि सीएमओ श्री ठाकुर का स्थानांतरण दमोह हो जाने के बाद भी आखिर किसके इशारे पर टिके है और वे स्वयं यहां से क्यो नहीं जाना चाहते? ऐसे अनेक सवाल है।
नगर की सफाई व्यवस्था और इसके लिए उपयोग किये जाने वाले वाहनों में डाला जाने वाला डीजल की लाकबुक देखने पर शहरवासियों को भी सीएमओ के भ्रष्टाचार की कलई खुलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। नगर को नंबर 1 बनाने एवं स्वच्छ भारत के नाम पर शासन के करोड़ो रूपये आने के बाद भी नगर पालिका के निकट ही गंदगी का आलम बना हुआ है जिसका उदाहरण नगर पालिका के सामने बहने वाला नाला के रूप में देखा जा सकता है इतना ही नहीं थोक सब्जी मंडी जो नगर पालिका के ठीक पीछे होने के बावजूद यहां पर फेंकी जाने वाली सब्जी का निष्ठावान ना होने से नगर पालिका सहित आसपास क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है इसके लिए भी सीएमओ दोषी है अगर वे चाहते तो स्वच्छता अभियान की शुरूआत वही से करते लेकिन उन्हें तो यहां पर पैसे कमाने से फुर्सत नहीं है।

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