Saturday, 29 April 2017

सडक़ के निर्माण से उड़ रही धूल से लोग परेशान गुणवत्तायुक्त हो निर्माण

सडक़ के निर्माण से उड़ रही धूल से लोग परेशान गुणवत्तायुक्त हो निर्माण 


 राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर -   एन एच 26 खेदा पुल के पास से सुभाष पार्क  चौराहे से स्टेशन से होते हुये खमतरा वायपास तक  साढ़े बारह करोड रूपयों की लागत से बनाये जाने वाली लगभग साढ़े पांच किलोमीटर सीमेंट कंक्रीट सडक़ का निर्माण कार्य को प्रारंभ हुये लगभग 7-8 माह बीत चुके हैं इस दौरान यह सडक़ खेदा पुल के पास से बनते हुये खैरी नाका के पास तक पहुंची है किंतु इसके निर्माण में उपयोग किये जाने वाली पीली मिटटी की धूल से सडक़ किनारे व उसके आसपास रहने वालों को पिछले कई महीनों से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है नतीजतन उनके स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ रहा है तो उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है ।
 आम नागरिकों व आम राहगीरों को हो रही परेशानियो ंको लेकर गत दिवस सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक ज्ञापन कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग के नाम सौँपकर इस मार्ग पर दिन रात उडऩे वाली धूल से हो रही परेशानी को तत्काल ही निराकृत किये जाने की मांग की व इस सडक़  का निर्माण गुणवत्तायुक्त हो सके इस हेतु सडक़ निर्माण से संबंधित सूचना पटल जिसमें सडक़ के निर्माण से संबंधित पूर्ण जानकारी अंकित हो उन्हें लगाये जाने,सडक़ निर्माण हेतु अभी तक उपयोग किये गये मटेरियल की लैब रिपोर्ट उपलब्ध कराये जाने,सडक़ निर्माण मटेरियल की शासन द्वारा मान्यता प्राप्त लेैब से जांच कर इस निर्माण की डीपीआर की कापी उपलब्ध कराये जाने की  मांग की गई है  जिससे की इसकी समस्त जानकारी आमलोगों को होने पर इस सडक का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। गौरतलब है कि खेदापुल के पास से सुभाष पार्क चौराहे तक बनाई जाने वाली इस सडक़ का निर्माण कार्य इतनी मंथर गाति से किया जा रहा है जिससे की एक पटरी पर कार्य चालू होने के कारण दूसरी पटरी पर बिछाई गई पीली मिटटी आते जाते वाहनों के चलते इतनी अधिक उड़ती है कि मोटर साइकिल सहित अन्य छोटे वाहनों से आने जाने वाले लोगों को भारी परेशानी हो रही है वहीं नाम मात्र का पानी सींचने के चलते इस पर पूरी तरह से नियंंत्रण नहीं हो पा रहा है जबकि प्राप्त जानकारी अनुसार सडक़ निर्माण कार्य के दौरान इस तरह से धूल उडऩे से रोकने के पुख्ता प्रबंध किये जाने के निर्देश भी निर्माण कार्य की शर्तो के अधीन हैं ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से बाबूलाल पटैल,ब्रजेश घारू,विमल वानगात्री,बबलू मेहरा,अरूण शर्मा,मंजीत छाबड़ा,राजेंद्र चौरसिया आदि उपस्थित थे । 

नपा के अधिकारी भी करते हैं माल सप्लाई व ठेकेदारी


ठेकेदारी की मलाई में गोते खा रहे नपा के कर्मचारी

अधिकारियों के कृपापात्र है करोसिया

नगर पालिका सिवनी में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है यहां पर काम करने वाले कर्मचारियों की मानो मोनोपल्ली चल रही है। नगर को स्वच्छ बनाने के लिये लगभग डेढ़ सौ से 200 (सफाईकर्मी) दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्य करते हैं और ये कर्मचारी कहां काम करते हैं कोई नहीं जानता। इन लोगों का वेतन निकालने का दायित्व संतोष करोसिया का है चूंकि सभी कर्मचारी संतोष करोसिया के आपने कुछ परिजन है इसलिए इन्हें उपकृत कर बिना ड्यूटी के वेतन निकाला जाता है।

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। अनेक कर्मचारी तो ऐसे भी है जो ड्यूटी में आते ही नहीं लेकिन उनका वेतन इसलिए निकाला जाता है कि उसमें सीएमओ और संतोष करोसिया की मिलीभगत होती है, किसी के घर कोई कार्यक्रम हो अथवा कोई पर्व के अवसर पर ड्यूटी लगाने के लिये सीएमओ और संतोष करोसिया द्वारा वार्ड जमादार को कहा जाता है, वार्ड जमादार संतोष करोसिया के इशारे पर ऐसे लोगों की ड्यूटी लगाते हैं जो उन्हें किसी प्रकार से कमीशन या लाभ प्रदान नहीं करते। नगर पालिका की स्टेशनरी खरीदना हो गया सफाई के लिये उपयोग आने वाली सामग्री सभी के बिल भी संतोष करोसिया द्वारा आसानी से पास किये जाते हैं और इन बिलों में कमीशन के रूप में मिलने वाली राशि का बंदरबांट करना आम बात हो गयी है। कलेक्टर के निकट होने का सीएमओ किशन ठाकुर द्वारा भरपूर लाभ उठाया जा रहा है चूंकि संतोष करोसिया सभी को लाभ पहुंचाते हैं इसलिए कोई उनका विरोध करने से डरते हैं जब कोई व्यक्ति उनकी शिकायत लेकर जाता है तो वे कहते हैं कि आप शिकायत दे दें उस पर कार्यवाही होगी लेकिन उस शिकायत को दबा दिया जाता है क्या ऐसे व्यक्ति को नगर पालिका के केशियर जैसे पद पर रहने का अधिकार है।
देखने एवं बातचीत करने में इतने भोले भाले दिखते हैं मानो पानी को पानी ना कहकर मम कहते हों लेकिन इनके क्रियाकलाप चांदनी रात में उस अमावश की तरह है जो चांदनी की रोशनी को भी दबा देती है। क्या नगर पालिका परिषद के पास कोई और कर्मचारी नहीं जो वास्तव में लोगों को इस पद की गरिमा के अनुकूल सुविधा दिला सके तथा भ्रष्टाचार को समाप्त कर सके।

नपा के अधिकारी भी करते हैं माल सप्लाई व ठेकेदारी

सिवनी नगरपालिका अपने आप में एक अनूठी नगरपालिका है। यहाँ इसके पूर्व तक पार्षदों के ठेकेदारी का काम करने की खबरें गाहे बगाहे आते रहती थी। अब जो खबरे आ रही है वो तो बहुत ही आश्चर्य में डालने वाली है, जानकारी अनुसार यहाँ के अधिकारी सप्लाई और कर्मचारी ठेकेदारी में मग्न है। अपने नैतिक कत्र्तव्य शासकीय सेवा को छोडक़र खुद ही माल काटने में जब ये लग जाते है तो आप समझ सकते है कि गुणवत्ता का पैमाना क्या होता होगा। यहाँ तो खुद ही काम करो, खुद ही बिल बनाओ और खुद ही मनचाहा चेक काटो ऐसी स्तिथि बानी हुई है। एक कर्मचारी विशेष रूप से इन सभी कामो में महारत रखता है और वो है *संतोष करोसिया*। पूर्व में भंडारी पद पर रहते सभी सप्लायर्स से सांठ गाँठ थी, पर जबसे प्रभारी लेखपाल हुए है तो एक सोनी ठेकेदार के माध्यम से गली गली में रोड़ और नालियों का दोयम दर्जे का निर्माण भी कर रहे है। इनकी दबंगता के आगे मुख्य नपा अधिकारी किशन सिंग ठाकुर समेत सभी इंजिनियर मौन नजर आते है। हो सकता है कि ये अधिकारी भी कुछ प्रतिशत के सांझेदार हो इन कामो में, किंतु सिवनी को गर्त में डालने और जनता के पैसे को पलीता जिस प्रकार से लगाया जा रहा है उसका कोई सानी है। भाजपा की शासन में इस प्रकार हो रही अंधेर गर्दी और स्वयं को पाक साफ बताने वाले विधायक भी आँखे मूंदे हुए है।

Sunday, 23 April 2017

पत्रकारिता को बदनाम कर रहे है तथाकथित पत्रकार

पत्रकारिता को बदनाम कर रहे है तथाकथित पत्रकार

राष्ट्रचंडिका/समाज के समाजिकरण तथा समय समय पर समाज के सन्दर्भ में सजग रहकर नागरिको तथा शासनकर्ता व बुद्धिजीवी वर्गो में दायित्व बोध करने की कला को पत्रकारिता की संज्ञा दी गयी है। समाजहित, राष्ट्रहित में सम्यक प्रकाशन को पत्रकारिता कहा जाता है असत्य अशिव असुन्दर पर सत्यम शिवम् सुन्दरम की शंख ध्वनि ही पत्रकारिता है।
मनुष्य स्वाभाव के हीन व्यक्तियेां को उत्तेजना देकर, हिंसा द्वेश फैलाकर, बडों की निंदाकर, लोगों की घरेलू बातो पर कुत्सित टीका टिप्पणी कर, अमोद प्रमोद का अभाव, अश्लीलता से पूर्ण करने की चेेष्टा कर तथा ऐसे ही अन्य उपायों से समाचार पत्रों की बिक्री और चैनलों का क्रेज तो बढाया जा सकता है। महामूर्ख धनी की प्रसशा की पुल बांध कर तथा स्वार्थ विशेष के लोगो के हित चिंतक बनकर भी रूपया कमाया जा सकता है।
देश भक्त बनकर भी स्वार्थ सिद्धि की जा सकती है। लेेकिन सब कुछ अगर पत्रकारिता के आड मे हो तो कितना शर्मनाक है। सिवनी क्षेत्र में कुकुरमुत्तों की तरह फैले तथाकथित, पत्रकार, पत्रकार शब्द के गौरव को नष्ट करने के लगे हुये है। क्षेत्र मे दर्जनों ऐसी गाडियाँ है जिनमें प्रेस अथवा पत्रकार लिखा हुआ है। वास्तविकता यह है। कि ऐसे लोग न किसी समाचार पत्र से जुडे हुये है। और न ही व पत्रकार है न उनका अकबार क्षेत्र में आता हैै। दलाली में जुटे तथाकथित पत्रकारों ने कर्मठ और निष्ठावान पत्रकारों को बदनाम करने की ठान ली है। कहीं लकडी कटान से अवैध वसूली तो कही लोगों को गुमराह कर दलाली से क्षेत्र के लोग देखकर हैरान है।
कुछ तथाकतिथ ऐसे भी पत्रकार पनप चुके है। जो कि अपने लच्छेदार बातो से हाईफाई बताकर किसी का शस्त्र लाइसेंस बनवाने, जमीन का पट्टा करवाने, ठेका दिलाने, स्थानान्तरण करवाने अथवा रूकवाने आदि बहुत से कार्य करवाने आदि का ठेका लेकर अच्छी खासी दलाली चमाका रहे है। दिलचस्प बात यह है। कि इनके बिछायें हुये जाल में वहीं फसते है। जो अपने को सबसे बड़ा सयाना समझते है। इन सयानों को यही तथकथित पत्रकार चपटे की तरह खून चूस कर छोड देते है। जबकि इनकी असलियत की जांच की जाये तो यह तथाकथित पत्रकार लिखने में जीरो है और तालमेल मिलाने में हीरो है। क्षेत्र में तो कुुछ ऐसे पत्रकार पनप चुके हैं जो पत्रकारिता की आण में गाडिय़ां चलवाते हैं।
पत्रकारिता का रौब दिखाकर पंचायत सेक्रेट्रियों से विज्ञापन के नाम पर वसूली करते हैं। जब कि देखा जाए तो इन्ही तथाकथित पत्रकारों की यह घिनौनी करतूत असली पत्रकारों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। जब कभी पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। तो प्रेस व पत्रकार लिखा होने का फायदा उठाकर यह तथाकथित पत्रकार बच जाते हैं। क्योंकि यह तथाकथित पत्रकार इतने सातिर है की इनकी लच्छेदार भाषा शैली तथा मिल बाट कर खाने वाली प्रणाली के चलते इनकी पुलिस विभाग से लेकर सभी महत्वपूर्ण विभागों तक इनकी पहुँच होती है। जबकी न तो इनके पास लाइसेन्स रहता है और न ही जिस गाड़ी से चलते है उसका बीमा।
कई बार इन तथाकथित पत्रकारों पर नकेल कसने के लिए पुलिस अधिक्षक द्वारा पहल की बात कही गई। लेकिन फिल हाल अभीतक अमल में नही आया है इन फर्जी पत्रकारों तथा पत्रकारिता की आड़ में कर रहे दलाली वाले तथाकथित पत्रकारों की वजह से अपने पेसे को मिशन मान कर जुटे पत्रकारों की कलम भी कलंकित हो रही है।

जनता हलाकान-परेशान, मौज में है नगर पालिका के पहलवान

जनता हलाकान-परेशान, मौज में है नगर पालिका के पहलवान

राष्ट्रचंडिका/इतिहास में नगरपालिका के गठन से लेकर आज तक की सबसे भ्रष्ट नगरपालिका अगर वर्तमान परिषद् को कहे, तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। यह पहली ऐसी नगरपालिका है जहाँ जनप्रतिनिधि अपने कामो के लिए रोते और अधिकारी मौज में नजर आ रहे है। बताया तो यहाँ तक जाता है कि यहाँ वर्षो से जमे अधिकारी अब ठेकेदारी से लेकर सप्लाई के काम तक स्वयं कर रहे है। अफसरशाही की शिकायत समय समय पर मीडिया के माध्यम से बाहर आती रही है किंतु भाजपा की सरकार के होते भाजपा के जनप्रतिनिधियों की हालत बहुत खऱाब है। सडक़ नाली निर्माण प्रकाश पानी और सफाई जैसी मुलभूत आवश्यकता भी अब पूरी नहीं हो रही है। बताया जाता है कि कुछ ख़ास पार्षदों को जो अधिकारियो के करीब है उनको आँख बंद करके रेवड़ी बांटी जा रही है। जैसे शहीद वार्ड में अवैध निजी कालोनियो में नपा सिवनी विधुत पोल लगा दिए है, अगर इस मामले की प्रारम्भ से जांच की जाये तो इतना बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा की आंखे फट जायेगी। नपा ने वर्तमान जल आवर्धन की पाइप लाइन भी अवैध कालोनियों में कालोनाइजर से साठगांठ कर बिछा दी है। ज्ञात होवे की उक्त खर्च जो नपा ने किया है वो कालोनाइजर का कार्य है, पर नगद नारायण के आगे सब ढेर हो गए। सीएमओ के सामने ही लोकायुक्त ने एक कर्मचारी को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा, ये वर्तमान नपा की उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि आज तक ऐसा हुआ नहीं था। शिकायते इतनी है कि यदि हर स्तर पर कार्यवाही की जाती है तो हर टेबल पर समस्या आ पड़े। गर्मी के मौसम में पानी की समस्या प्रति वर्ष आती है पर जिस प्रकार से निश्चिन्त इस वर्ष नपा थी वो समझ के परे है हर वार्ड में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। जबकि मोटर सुधार के नाम पर इतने पैसे निकाल जा चुके है कि कचड़ा मशीनों की जगह नई टेक्निक की मशीनें उतने व्यय में ली जा सकती थी। मोटर सुधार भी नपा के अधिकारियों की आय मुख्य जरिया बताया जाता है। जनता को खून के आँशु बहाने पर मजबूर करने वालो को जनता शायद ही भूले और इसका परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों में पुन: देखने को मिल सकते है।

आरोप के बाद भी करोसिया पर मेहरबानी

लग चुके हैं कई गंभीर आरोप, पूरी नगर पालिका है मौन

आरोप के बाद भी करोसिया पर मेहरबानी

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। नगर पालिका परिषद सिवनी में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है उसका मुख्य कारण है कि अधिकारी तो अधिकारी लिपिक एवं बाबुओ का राज चल रहा है। नगर पालिका में हाल ही में दो बाबुओ पर लोकायुक्त एवं अन्य कार्यवाही में गाज गिरी लेकिन आज भी यहां की व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। नगर पालिका में अगर आपको कोई कार्य कराना है तो आप कहीं और ना जाकर अगर यहां के वरिष्ठ लिपिक का प्रभार संभाल रहे संतोष करोसिया के पास चले जायेंगे तो आप के सारे आड़े-तिरछे सभी काम आसानी से हो जायेंगे।
करोसिया के पास हर काम कराने की मास्टर की है वे नगर पालिका के के हर विभाग में काम सुलभता से कराना जानते है और इसके एवज में आपको क्या करना है यह बताने की आवश्यकता नहीं है। करोसिया के पूर्व केसियर का दायित्व महेश यादव संभालते थे और उन्होंने अपनी बेदाग छवि के साथ सेवानिवृत भी हुए लेकिन उनके रिटायरमेंट के बाद सीएमओ और अन्य अधिकारियों की एप्रोच से इन्हें मुख्य लिपिक का दायित्व सौंपा गया और अपनी कार्यकुशलता मे ंनिपुण कोई भी सही गलत कार्य को अंजाम तक पहुंचाने में इनके साथ साथ अधिकारी भी शामिल है।
संतोष करोसिया की कार्यप्रणाली से तंग आकर अनेक कर्मचारियों ने इनका विरोध भी किया लेकिन पालिका के अधिकारियों ने एक ना सुनी और ना तो इन्हें हटाया और ना कार्यवाही की। अनेक ऐसे बिल है जिन्हें बड़ी सफाई के साथ पास करना और अपने साथ साथ अधिकारियों को भी उपकृत करना आम बात है। चाहे मजदूरों को सफाई कर्मचारियों के पेमेंट के मामले में इतनी सफाई के साथ फर्जी बिल बाऊचर बनाये जाते है कि सूक्ष्मता से जांच करने पर भी कोई इनकी चोरी ना पकड़ सके।
अपने खिलाफ कोई बात ना उठे इसलिए कुछ गिने चुने समाचार पत्रों को भी विज्ञापन के माध्यम से उपकृत करते रहते हैं। आखिर इतनी भ्रष्ट कर्मचारी के खिलाफ आखिर पार्षद, उपयंत्री एवं जनप्रतिनिधि या विपक्षी दल आवाज कयों नहीं उठाते। अगर समय रहते इन्हेंं नही ंहटाया गया तो ये सुरसा की तरह पूरी नगर पालिका को चट कर जायेगा।

Friday, 14 April 2017

भ्रष्टाचार के पर्याय बने सीएमओ


भ्रष्टाचार के पर्याय बने सीएमओ

सिवनी राष्ट्र चंडिका/ नगर को सुविधा प्रदान करना और सुंदर बनाना नगर पालिका का काम है लेकिन जब से सीएमओ किशनसिंह ठाकुर आये हैं तब से यहां पर लोगों को सुविधा और सौंदर्यीकरण की कल्पना भी करना मुश्किल हो गया है। जगजाहिर है कि नगर में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है नगर पालिका परिषद के दो कर्मचारी इस मामले में लोकायुक्त एवं अन्य जांच में दोषी भी पाये गये। प्रश्र यह है कि अगर सीएमओ ने लंबे समय से हो रहे इन मामलो को संज्ञान लिया होता तो इन मामलो में भी दूध का दूध पानी का पानी होने में समय नहीं लगता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर में वाटर सप्लाई से पूर्व पानी की शुद्धता के लिये जिस कंपनी का प्रमाण पत्र लगाकर मानक पानी की बात कही जा रही है उस मामले में भी अगर सूक्ष्मता से जांच की जाती है तो जो तथ्य सामने आयेंगे वे चौकाने वाले हो सकते हैं क्योंकि ऐसी कंपनी ही नहीं है जिसका प्रमाण पत्र इस हेतु लगाया गया है।
सीएमओ ठाकुर पर यह भी आरोप है कि वे उच्चाधिकारियों के साथ उठते बैठते हैं इसलिए उन पर कोई कार्यवाही एवं जांच नही बैठायी जाती। अपने निकटतम ठेकेदारो उपयंत्रियों को निर्माण के कार्य देकर उपकृत कर इसके एवज में अपना निश्चित कमीशन लेना आम बात है। पार्षद दलों के सम्मिलन में अनेको बार पार्षदों ने भी यह आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल में ना तो समय सीमा में कोई कार्य पूर्ण हो पाता है और जो स्वीकृत कार्य है उन्हें भी सीएमओ द्वारा अनुमति नहीं दी जाती। ज्ञात हो कि सीएमओ श्री ठाकुर का स्थानांतरण दमोह हो जाने के बाद भी आखिर किसके इशारे पर टिके है और वे स्वयं यहां से क्यो नहीं जाना चाहते? ऐसे अनेक सवाल है।
नगर की सफाई व्यवस्था और इसके लिए उपयोग किये जाने वाले वाहनों में डाला जाने वाला डीजल की लाकबुक देखने पर शहरवासियों को भी सीएमओ के भ्रष्टाचार की कलई खुलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। नगर को नंबर 1 बनाने एवं स्वच्छ भारत के नाम पर शासन के करोड़ो रूपये आने के बाद भी नगर पालिका के निकट ही गंदगी का आलम बना हुआ है जिसका उदाहरण नगर पालिका के सामने बहने वाला नाला के रूप में देखा जा सकता है इतना ही नहीं थोक सब्जी मंडी जो नगर पालिका के ठीक पीछे होने के बावजूद यहां पर फेंकी जाने वाली सब्जी का निष्ठावान ना होने से नगर पालिका सहित आसपास क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है इसके लिए भी सीएमओ दोषी है अगर वे चाहते तो स्वच्छता अभियान की शुरूआत वही से करते लेकिन उन्हें तो यहां पर पैसे कमाने से फुर्सत नहीं है।

Sunday, 9 April 2017

सिटी में बिक रहा है धीमा जहर

- फलों को चमकाने के लिए हो रहा ग्रीस का उपयोग - कार्बाइट और दूसरे केमिकल्स से पकाए जा रहे फल

सिटी में बिक रहा है धीमा जहर

राष्ट्रचंडिका/ शहर के बाजार में इन दिनों फल के दाम आसमान पर हैं। इसके बावजूद शहर में इनसे बना जूस सस्ते में मिल रहा है। इस बात से स्पष्ट है कि जूस के नाम पर लोगों को दुकानदार एसेंसयुक्त जूस बेच रहे हैं। शहर में खुलेआम सेहत से खिलवाड़ होने के बावजूद अधिकारी कोई कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। बाजार में 10 से 20 रुपए तक में फल के जूस के नाम पर एसेंस बिक रहा है।
गर्मी के कारण इन दिनों किसी भी बाजार या शहर के प्रमुख मार्ग पर चले जाइए, हर जगह शीतल पेय व जूस की दुकानें नजर आ जाएंगी। दोपहर से देर रात तक इन दुकानों पर लोग आ रहे हैं। ये सस्ते जूस लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं।विभिन्न चौराहों व मार्गों पर जूस, मिल्क शेक, शर्बत आदि की कई दुकानें हैं। सभी में एसेंस व कलर वाला जूस ही बिक रहा है।
मिलावटी जूस का गणित
बाजार में 20 से 30 रुपए में एसेंस कलर की 5 से 10 ग्राम की शीशी आती है। यह ओरेंज, केवड़ा, पाइनेपल, मैंगो सभी फ्लेवर में उपलब्ध हैं। एसेंस कलर की एक शीशी से 20 लीटर तक शर्बत-जूस तैयार हो सकता है। जिसको 10 और 20 रुपए प्रति एक गिलास के हिसाब से दुकानदार मीठे पानी में घोलकर बेच रहे हैं। बाजार में मौसमी 60 से 70 रुपए किलो है।
एक किलो मौसमी में तीन गिलास जूस बनता है। वह भी अच्छी किस्म के हो तब। वहीं अनार 60 से 80 रुपए किलो के भाव बिक रहा है। यदि घर में जूस निकालें तो एक किलो अनार में तीन गिलास जूस ही निकलता है। आम वर्तमान में 80 से 120 रुपए किलो तक बिक रहे हैं। एक किलो आम से 5 गिलास जूस बन सकता है। वहीं एक किलो आम रस में दूध मिलाने पर 5 से 6 ग्लास शेक बनता है। दूध, आम और चीनी की कीमत जोड़ें तो एक गिलास कम से कम 25 रुपए में पड़ता है, जबकि बाजार में 10 और 20 रुपए प्रति गिलास बाजार में बेचा जा रहा है।
लस्सीआज कल मार्केट में सिंथेटिक लस्सी का चलन भी बढ़ा है। दूध गर्म करते समय ब्लॉटिंग पेपर डालकर आंच में घुमाया जाता है इससे वह गाढ़ा हो जाता है। फिर इससे दही जमाने से कम दूध से भी अधिक दही बन जाती है। लस्सी को और अधिक गाढ़ा करने के लिए उसमें आरारोट व पोस्टर कलर का इस्तेमाल कर लेते हैं। शक्कर की बढ़ती कीमत के कारण दुकानदार सेक्रिन का इस्तेमाल करने से नहीं चूकते। इस तरह से तैयार होने वाली लस्सी स्वास्थ्य को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाती है।
मैंगो जूस
आम के नाम पर मिलने वाले मैंगो जूस में भी मिलावट होती है। मैंगो जूस में मैंगो एसेंस, सिंथेटिक दूध, सेक्रिन, अधिक मात्रा में बर्फ व पानी डाला जाता है। ये मैंगो जूस कुछ समय के लिए तो स्वादिष्ट लगता है लेकिन पेट में जाने के बाद यह कई तरह की बीमारियों को जन्म देता है। सिंथेटिक दूध में न तो कैल्शियम होता है और न ही विटामिन। कई लोगों को सिंथेटिक दूध से बनी चीजें पीने से एलर्जी भी हो सकती है। सेक्रिन बहुत ज्यादा मीठा करने के लिए होता है। कैलोरी होती है। इसके साथ ही जूस में प्रयोग होने वाला सेक्रिन के थोड़े से प्रयोग से ही ड्रिंक बहुत ज्यादा मीठा हो जाता है। पर सेक्रिन में मिला केमिकल जब शरीर में जाता है तो आंत और डाइजेशन सिस्टम को बिगाड़ता है।
गर्मी का मौसम आ चुका है। धूप में घूमते हुए सिटी के चौराहों पर बिक रहे जूस को पीने का मन तो करता ही होगा। अगर आप भी गर्मी मिटाने और सेहत बनाने के लिए जूस पी रहे हैं तो ये आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्योंकि इसमें मिलावट का रंग मिलने लगा है।
फलों में इंजेक्शन
केले, पपीता, आम, चीकू को पकाने के लिए इसमें कार्बाइट समेत अन्य केमिकलों का इस्तेमाल तेजी से किया जा रहा है। यही नहीं फलों को चमकाने के लिए ग्रीस, गाडिय़ों से निकल रहे आइल और मोम का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है।

जूस भी खतरनाक
केमिकल में पकाए जाने वाले फलों का जूस भी उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है जितने फल। ये आपको बीमारियां दे सकता है। असल में जूस को बनाने के लिए जो पानी उपयोग किया जाता है, वो भी शुद्ध नहीं है। इसमें मिलाई जाने वाली बर्फ भी साफ नहीं होती है। वहीं इसमें मिलाए जाने वाले फ्लेवर और कलर भी आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं।
हो सकता है कैंसर
डॉक्टर्स की मानें तो जिस तरह से फलों में कार्बाइट समेत अन्य केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनसे कैंसर रोग भी हो सकता है। वैक्सीनेशन के लिए उपयोग किए गए केमिकल्स और आयल में हाइड्रोकार्बनहोता है। ये धीमी गति से लेकिन गहरा असर करते हैं और बाद में गंभीर बिमारियों का कारण बन सकते हैं। इनसे लीवर डैमेज, कैंसर, नोजिया, गैस्ट्रोएंट्राइटिस आदि होता है। फूड पाइजनिंग से अस्थमा, लीवर की बीमारियां, आंतों का कैंसर होता है।
कैसे बनता है मिलावटी जूस -
रूड्डठ्ठद्दश जूस बनाने में धड़ल्ले से केमिकल एसेंस और सैकरीन का प्रयोग किया जा रहा है।
स्नस्स््रढ्ढ के नियम के अनुसार शक्कर की जगह सैकरीन का प्रयोग नहीं कर सकते।
कैसे बनाता है मिलावटी जूस :
दुकानदार कुछ आम के टुकड़े , ढेर सारा बर्फ, फिर मिलते है केमिकल (एसेंस ) जो टेस्ट को बड़ा देता है और जूस का रंग आम से भी ज्यादा पिला कर देता है और सैकरीन जो चीनी से सस्ता होता है।

Saturday, 1 April 2017

यथावत चलाई जायें शटल व फास्ट पैसेंजर

 साधारण गाड़ी के बदले एक्सप्रेस चलाकर किराये वसूलने के फार्मूले का विरोध 

  यथावत चलाई जायें शटल व फास्ट पैसेंजर 

अमर नौरिया/राष्ट्रचंडिका/ नरसिंहपुर/इटारसी जबलपुर रेलखंड पर चलायी जा रही इटारसी सतना शटल गाड़ी एवं इटारसी कटनी फास्ट पैंसेजर को आगामी 1 अप्रैल 2017 से एक नई गाड़ी एक्सप्रेस के रूप में चलायी जायेगी ।  क्षैत्र के लोगों को साधारण किराये के रूप में शटल व फास्ट पैंसेजर के बदले एक्सप्रेस गाड़ी  चलाकर उनसे साधारण किराये के बदले एक्सप्रेस दर से किराये बसूले जाने के विरोध में जिले भर में विरोध प्रदर्शन का दौर चल पड़ा है । 
नरसिंहपुर जिला मुख्यालय पर रेलसंघर्ष समिति व कांग्रेस दल के अनेक पदाधिकारियों सहित  अनेक आम जनों ने इस बात को लेकर स्टेशन अधीक्षक नरसिंहपुर के माध्यम से रेल मंडल प्रबंधक वाणिज्य के नाम एक ज्ञापन सौंपकर शटल व फास्ट पैसेजर गाडी को यथावत चलाये जाने की मांग की और इस तरह से अगर रेल विभाग द्वारा जनता के हितों की अनदेखी की गई तो भविष्य में बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई 
इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार रेल मंत्रालय के एप्रूवल रेल्वे बोर्ड के एक पत्र के अनुसार दिनांक 14 मार्च 2017 की अनुशंसा के आधार पर रेल मंत्रालय से 51671/72 इटारसी कटनी  51767/68 इठारसी  सतना गाड़ी को समायोजित करते हुये इटारसी सतना इटारसी एक्सप्रेस  11273/11274 गाड़ी का संचालन किया जावेगा । 
इटारसी जबलपुर रेलखंड पर संचालित की जा रही शटल व फास्ट पैसेंजर आम जनता जिसमें मजदूर पेशा सहित कम दूरी की यात्रा करने वाले व इलाज आदि जाने वाले लोगों के लिये यह गाडिय़ा काफी किफायती रहती थी किंतु जिस तरह से रेल विभाग ने इन दोनों गाडिय़ों को बंद कर इनके स्थान पर एक्सप्रेस गाड़ी के रूप में किराये बसूले जाने की जो प्रक्रिया अपनाई गई है व आम जनता के गले नहीं उतर रही है । और इससे होने वाली परेशानियों को लेकर आम जनता में रेल विभाग के इस तुगलकी निर्णय का विरोध स्पष्ट तौर पर देखने को मिल रहा है वहीं इस मामले में क्षैत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी जले पर नमक छिड़क रही है । 

सिवनी में तेल के अवैध कुएं

सिवनी में तेल के अवैध कुएं

राष्ट्रचंडिका/सिवनी /सिवनी के बाज़ार में ब्रांडेड ऑईल के बदले नकली  तेल की पैकिंग की खबरें वाकई चिंता का कारण बनती जा रही हैं। कहा जा रहा है कि टैंकर्स के जरिये तेल सिवनी पहुंच रहा है और फिर उसे चुनिंदा कंपनियों के पांच से लेकर पंद्रह लिटर तक के डिब्बों में पैक कर बेचा जा रहा है। यह स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ही माना जा सकता है।

पिछले साल पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा में अनेक व्यवसायियों के पास से नकली तेल जप्त किया गया था। इस आशंका को निराधार कतई नहीं माना जा सकता है कि सिवनी में भी छिंदवाड़ा के मानिंद ही तेल की पैकिंग हो रही हो। पिछले साल ही लखनादौन में एक व्यवसायी के प्रतिष्ठान से बड़ी तादाद में तेल और कंटेनर्स जप्त किये गये थे।
देखा जाये तो इस तरह से तेल का व्यवसाय करने वाले लोग तो मोटा माल काटते हैं पर इससे सरकारी राजस्व को करों की जो चोट लगती है उसकी भरपाई शायद नहीं हो पाती हो। हो सकता है कि इसके लिये व्यवसायियों द्वारा खाद्य, औषधि प्रशासन आदि जिम्मेदार विभागों को लक्ष्मी आदि के जरिये साध लिया जाता हो किन्तु व्यवसायी यह भूल जाते हैं कि इस तरह के अपमिश्रित तेल से लोगों के स्वास्थ्य प्रर कितना प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाये तो बुधवारी बाज़ार, गंज, शंकर मढिय़ा सहित अनेक स्थानों पर ब्रांडेड कंपनियों के पांच से पंद्रह लिटर के कंटेनर्स में नकली अपमिश्रित तेल को पैक कर उसमें बाकायदा कंपनी की सील लगा दी जाती है। यह तेल नागपुर के जरिये सिवनी पहुंच रहा है। यह बात कितनी सच है यह तो कहा नहीं जा सकता है कि पर अगर कहीं धुंआ दिख रहा है तो कहीं न कहीं आग अवश्य ही लगी होगी।
यक्ष प्रश्न तो यह है कि नागपुर से सिवनी आते वक्त इन टैंकर्स को खवासा एवं मेटेवानी की विक्रय कर, पुलिस, परिवहन विभाग, मण्डी आदि की जांच चौकियों पर से होकर गुजऱना होता होगा। अगर ये खबरें सही हैं तो आम जनता अंदाज़ा लगा सकती है कि प्रदेश के सरकारी सिस्टम में किस तरह घुन लग चुका है कि एक दो नहीं आधा दजऱ्न विभागों की आँखों में कथित तौर पर धूल झोंककर व्यवसायियों द्वारा इस तरह के कार्य को अंज़ाम दिया जा रहा है।
अगर इन बातों में दम नहीं है तो खाद्य एवं औषधी प्रशासन ही अपना पक्ष स्पष्ट कर जनसंपर्क विभाग के माध्यम से इस बात को सार्वजनिक करे कि पिछले एक वर्ष में उसके द्वारा कितनी ब्रांडेड कंपनियों के तेल के कंटेनर्स को सील कर परीक्षण के लिये प्रयोग शाला में भेजा गया है? जाहिर है इस सवाल के जवाब में फूड एण्ड ड्रग्स डिपार्टमेंट को पसीना आ जायेगा।
संवेदनशील जिला कलेक्टर धनराजू एस. से अपेक्षा ही की जा सकती है कि इस दिशा में संज्ञान लेकर संबंधित महकमों को निर्देशित करें कि वे समय सीमा में सैंपल लेकर, छापेमारी कर इस तरह के घिनौने काम को रूकवायें।