ब्राम्हण समाज का बसंत पंचमी आयोजन...प्रज्ञानानंद जी की उपस्थिति में कौन ब्राम्हण आये
पल्लू कांड को भूला ब्राम्हण समाज
मजे की बात तो यह है कि जिस पल्लू कांड को ब्राम्हण समाज ने मुद्दा बनाया था और विधायक दिनेश राय मुनमुन के विरोध में सडक़ पर उतरकर धरना दिया था आज उसी पल्लू कांड को शायद ब्राम्हण समाज भूल चुका है या भुलाने की कोशिश कर रहा है। बीते दिनो बसंत पंचमी के मौके पर हुए विधायक के सम्मान को देखकर लोग यही कहते रहे कि ब्राम्हण समाज शायद पल्लू कांड को भूल चुका है। इस कांड के बाद मुनमुन की जमकर किरकिरी भी हुई थी लेकिन उन्होंने नीता पटेरिया को अपनी भाभी का दर्जा देते हुए लोगों को समझाने की कोशिश भी की थी। इतना ही नहीं विधायक श्री राय ने एक लंबी चौड़ी रैली निकालकर अपने ऊपर लगे आरोपो को झूठा बताया था।
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। परम आदरणीय पंडित जी और जिले के तथाकथित रूप से प्रौढ़ होने के बावजूद ‘युवा’ कहना पसंद करने वाले ठेकेदार (समाज के भी होने का दंभ) पं. अजय मिश्रा क्या कर रहे हैं ? सामाजिक और खासकर निजी सामाजिक जो कि एक समाज विशेष का रहा में किस राजनैतिक लाभ के तहत पर विजातीय व्यक्ति का ‘सामाजिक राजतिलक’ किया गया।उल्लेखनीय होगा कि गत दिवस बसंत पंचमी के दिवस सर्व ब्राम्हण समाज के तत्वावधान में डूंडासिवनी में प्रस्तावित श्री परशुराम परिसर में एक सामाजिक आयोजन किया गया। इस सामाजिक उत्थान आंदोलन में समाज के 16 बटुको ने जीवन प्रयाण दीक्षा (जनेऊ) ली जो पूर्व के आयोजनों से कमतर आंका जा रहा है जहां पहले यह संख्या सैकड़ों में होती थी वह अब बमुश्किल दर्जन ही पार कर सकी।
राष्ट्रसंत के रूप में घोषित व परम विभूषित जगदगुरू स्वामी शंकराचार्य के चहेते शिष्य प्रज्ञानानंद जी (केवलारी वाले) के सानिध्य में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस तथाकथित कार्यक्रम में जिसमें समूचे दिवस भोज भी आयोजित था उसमें कहने को तो जिले के समस्त ब्लाकों के लोगों ने सहभागिता दर्शाई पर गौर करें तो इस आयोजन में जिला तो क्या शहर के एक बड़े तबके का ‘ओरिजनल ब्राम्हण समाज’ नदारद रहा। प्रौढ़ हो चले युवा ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष और उनके प्रवक्ता को सोचना चाहिए? एक और यक्ष प्रश्र कि जब आप अपने आयोजन को सर्ववर्गीय ब्राम्हण समाज का होना बता रहे हैं तो फिर दुर्गा चौक और उसके आसपास दशकों से निवास कर स्थाई नागरिक बन युवा ‘राजस्थानी ब्राम्हण’ समाज इसका भागीदार क्यों ना बन सका?यह बानगी है जिले के ब्राम्हण समाज के युवा अध्यक्ष पं. अजय मिश्रा की। उन्होंने अखबारों में विज्ञप्तियां जारी कर अपने अस्तित्व को जगा दिया पर इसके पीछे देखा जाये कि क्यों ‘राष्ट्रसंत’ अब भी इनके पीछे नजरे इनायत किये हुए है। विदित हो कि इसके पूर्व भी इन युवा अध्यक्ष की विशेष टोली जो जयपुर आश्रम गई थी कि कथित टोली ने वहां दर्शन के नाम पर एक होटल में रूककर सरेआम शराबखोरी की थी। होटल के उस कमरे में शराब की खाली बोतले और आपत्तिजनक चीजें पाई गई थी यह खुलासा होटल के बेयरे ने किया था। राष्ट्रचंडिका ने पूर्व में भी इसका खुलासा किया था।
अब बात की जाये राष्ट्र संत के इस चहेते शिष्य की। क्या कारण है कि बार बार घोषणाएं होने के बावजूद समाज के प्रवक्ता जी अपने अध्यक्ष और कार्यकारिणी की सहमति नहीं ले पा रहे हैं उनके द्वारा हमेशा विज्ञप्तियों के माध्यम से कहा जा रहा है कि शीघ्र ही समाज की कार्यकारिणी के युगत होकर नवीन पदाधिकारी यर्थात किये जायेंगे पर ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है यह एक शोध का विषय है। क्या ऐसा तो नहीं कि वर्तमान ब्राम्हण समाज अध्यक्ष, उनके संरक्षक, प्रवक्ता और स्वामी जी किसी मानसिक रूप से प्रौढ़ युवा को संरक्षण तो नहीं दे रहे हैं।
इस समाचार के परिपेक्ष्य में यह बताना जरूरी है कि हम किसी व्यक्ति विशेष से दुर्भावना नहीं रख यह खुलासा कर रहे हैं हमें समाज के ही इनसे प्रताडि़त अनके बंधुओं ने इससे अवगत कराया है। ‘राष्ट्रचंडिका’ द्वारा इन प्रौढ़ हो चले तथाकथित जिला युवा ब्राम्हण समाज के स्वयंभू अध्यक्ष पं. अजय मिश्रा ठेकेदार के बारे में समाचार प्रकाशित किये गये। इससे तिलमिलाकर पंडित जी अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) से शिकायत की गयी थी बल्कि उनके द्वारा अखबार के सर्वोच्च कार्यालय दिल्ली के आरएनआई में भी जोर आजमाईश की गई नतीजा जीरो निकला। इस बौखलाहट के बाद पंडित जी संपादक और उसके परिजनों पर गुंडई का दबाव डालने से भी नहीं चूक रहे हैं। देखना यह है कि इस खुलासे के बाद समाज के रहनुमा क्या कदम उठाते हैं।
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