Monday, 16 January 2017

सालों से अपने गांव छोड़ परिवार के साथ कर रहा है गौवंशो की देखभाल  
साधु के कहने पर आज भी कर रहा है गौसेवा धर्म का पालन 
अमर नौरिया
राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर। प्रदेश सरकार भले ही गौपालन सहित गौवंशो के संवर्धन के लिये अपनी ओर से किये जा रहे प्रयासों की बात करे किंतु किसी एक नर्मदापरिक्रमा वासी साधुसंत की बात को अपना  धर्म वाक्य  समझकर कोई व्यक्ति पिछले कई साल से बिना किसी सरकारी सहायता व सहयोग के कई दर्जनों गौवंशो का पालन पोषण सहित  देखभाल करे तो अपने आप में यह एक सच्ची गौसेवा है जो परेशानियों से जूझते हुये एक गरीब द्वारा की जा रही है । 
नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर  रीछई पंयायत के पास जंगल किनारे मृगन्नाथ धाम के पास लगभग 5 साल से उमरिया चिनकी निवासी नन्हेलाल यादव एक छोटी सी झोपड़ी के सहारे बेसहारा व अवारा घूमती गायों को लेकर उनकी देखभाल अपने परिवार सहित कर रहा है ।  गौसेवा के प्रति उसके इस सेवाभाव को लेकर हमने रीछई गांव जाकर उससे मुलाकात कर उसके द्वारा की जा रही गौसेवा करने का जो कार्य किया जा रहा था उसकी जानकारी ली तो उसने बताया कि वह उमरिया चिनकी गांव का रहने वाला है कुछ सालो ंपूर्व चिनकी के पास हथियाघाट पर एक परिक्रमावासी साधु आया था जिसको को किसी ने दो गाय दान दे दें थी उन गायों की सेवा करने के दौरान हाथियाघाट पर ही उसे 20-22 अन्य और दान में मिली व बेसहारा घूमती गायों की देखभाल करने की जिम्मेदारी उन साधु ने सौप दी थी । गायों की संख्या अधिक होने से उनक ी खाने पीने  में आने वाली परेशानी को ध्यान में रखते हुये साधु ने उन सभी गायों को लेकर जंगल से लगे क्षैत्र में उन गायों की देखभाल कर उनके खाने पीने का अच्छा इंतजाम हो सके इस हेतु रीछई गांव के पास मृगन्नाथधाम के पास एक जगह चुनी और वहां पर एक कुटिया व बाड़ा बनाकर वहां पर गौवंशों की देखभाव व उनके खाने पीने की व्यवस्था की जाने लगी इस सारे कार्य को करने के दौरान लगभग 3 साल पहले  साधु ने अपनी नर्मदापरिक्रमा की राह पकड़ ली तब से लेकर आज तक नन्हेलाल उक्त स्थान पर संसाधन जुटाकर व आसपास के लोगों से सहायता  प्राप्त कर दर्जनों गौवंशो की देखभाल कर रहा हे उसके इस काम में हाथ बंटाने के लिये उसका एक साथी जम्मन मेहरा जो कि समनापुर बरेला गांव का रहने वाला है वह भी उसका हाथ बटाता है ।  महत्वपूर्ण बात यह कि इस दौरान नन्हेलाल की पत्नि भी उसके साथ गौवंशो की सेवा में निस्वार्थ भाव से लगी रही जिसकी मृत्यु लगभग 2 साल पूर्व हो चुकी है । 
नन्हेलाल का एक लडक़ा है जिसका नाम सोनू है जो कि कद्वाा आठवीं तक पढ़ा है वह भी अपने पिता के साथ इन गौवंशो की देखभाल करता है । वर्तमान में इन लोगों के पास एक सैकड़ा के करीब गौवंंश है जिनको को सुबह होते ही जंगल में चारा आदि खाने के लिये छोड़ दिया जाता है इसके बाद शाम को उन्हें बनाये गये एक बाड़े में सुरक्षित कर दिया जाता हेै ।  इनके पास अधिकतर संख्या में गायों की ही संख्या ज्यादा है जिनमें से एक गाया मथुरा ने एक सुंदर बछड़े को  जन्म दिया है । 
इनके द्वारा इस तरह से गौवंशो की सेवा को लेकर गौशाला को खोलने के लिये भी प्रयास किये जा रहें हैं किंतु शासन व प्रशासन के पास अभी तक इनकी बात नहीं पहुंची अलबत्ता नमामि देवि नर्मदे ,नर्मदा सेवा यात्रा जब समनापुर गांव में रूकी थी तो नन्हेलाल के द्वारा प्रदेश के वनमंत्री गौरीशंकर शेजवार जी व गौसंवर्धन बार्ड के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वारानंद जी महाराज जो कि इस यात्रा के दौरान समनापुर में थे उन्हें एक आवेदन देकर गौशााला खोलने हेतु शासन की ओर से सहयोग व मदद किये जाने की मांग की गई थी । 
 नन्हेलाल यादव व उसके साथी जम्मन मेहरा की आज के दौर में गौसेवा के प्रति लगन व उत्साह को देखते हुये हमें भी यह लगता हे कि बिना किसी भी तामझाम के इन ग्रामीणों ने गौसेवा को जो संकल्प लिया है अपने आप में वह एक मिसाल है । 

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