शौक नहीं, उद्योग के अभाव में करते हैं एजेंट का कार्य
एजेंट प्रथा बंद का निर्णय
200 परिवारों पर बज्रपात
युवाओं का रक्त नालियों में नहीं नाडिय़ों में बहना चाहिए यह वाक्य स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को उनकी शक्ति से अवगत कराते हुए आव्हान किया था लेकिन विडम्बना है कि आज भी युवा शक्ति इस देश को समृद्ध और खुशहाल भारत बनाना चाहता है मगर उसे अपनी दिशा तय करने का अवसर नहीं मिल रहा है, मजबूर होकर उसे बसों का एजेंट बनकर उन्हें अपना जीवन गुजारना पड़ता है लेकिन एजेंटों के इस कार्य को जिला प्रशासन ने बंद करने का जो आदेश जारी किया है वह कहां तक लाजिमी है।
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। जिला मुख्यालय में बसों के एजेंट के रूप में कार्य करने वाले एजेंटों की आय से 200 परिवारों का जीवन चलता है लेकिन एजेंट के कार्य से बेदखल करने से अब वे अपने परिवार का गुजर बसर कैसे करेंगे। हम यहां पर यह भी स्वीकार करते हैं कि यदा-कदा इनके बीच मतभेद भी होते हैं लेकिन प्रबुद्ध वर्ग की समझाईश के बाद हमेशा विवाद का समाधान भी हो जाता है लेकिन प्रशासन का यह निर्णय चिंतनीय है।
जिला प्रशासन की यह पहल मात्र सिवनी में की गयी है अगर इन युवकों को इस कार्य से हटाया ही जाना था तो पहले इन युवाओं के लिये रोजगार के अवसर उपलब्ध कराया जाता तो इस पहल की लोग सराहना करते इतना ही नहीं किसी भी युवक को दिन या रात में एजेंट का कार्य करने का शौक नहीं है लेकिन जिला उद्योगविहीन होने के कारण मजबूरीवश लोग इस कार्य में लगे रहते हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में उद्योग खोले जाने के नाम पर इन्वेस्टर मीटिंग तो प्रदेश स्तर पर अनेको बार खोली गयी लेकिन उद्योग के नाम से औद्योगिक क्षेत्र भुरकलखापा को बनाया गया लेकिन यहां पर संशाधन का अभाव एवं सुरक्षा के अभाव में युवकों को रोजगार नहीं मिला है।
एजेंटों के साथ प्रशासन ने कभी बातचीत तक नहीं की और ना ही उनकी समस्या के समाधान की दिशा में कोई पहल की गयी और ऊपर से उनको बसों के इस कार्य से मिलने वाला रोजगार छीना जाना कहां तक न्यायोचित है। अगर इन 200 परिवारों के लोगों का परिवार पालने वालों से रोजगार छीना गया है तो ऐसी स्थिति में ये युवक दिशा भ्रमित हो सकते हैं और हो सकता है अपना आक्रोश किसी अपराधिक गतिविधि में संलग्र होकर व्यक्त करें इसलिए प्रशासन को इस निर्णय पर पुन: विचार करना चाहिए।
हाल ही में कैसलेश के कारण हर वर्ग का व्यक्ति हो या व्यापार उसकी स्थिति प्रभावित हुई है ऐसी स्थिति में इसके असर से युवा वर्ग के सामने भी संकट खड़ा है और इस संकट की घड़ी में पुलिस विभाग के अधिकारी का एजेंटो से उनका रोजगार छीना जाना किसी वज्रपात से कम नहीं है इस संबंध में उच्चाधिकारियों को विचार करते हुए निर्णय लेना जनहित में होगा।
एजेंट प्रथा बंद का निर्णय
200 परिवारों पर बज्रपात
युवाओं का रक्त नालियों में नहीं नाडिय़ों में बहना चाहिए यह वाक्य स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को उनकी शक्ति से अवगत कराते हुए आव्हान किया था लेकिन विडम्बना है कि आज भी युवा शक्ति इस देश को समृद्ध और खुशहाल भारत बनाना चाहता है मगर उसे अपनी दिशा तय करने का अवसर नहीं मिल रहा है, मजबूर होकर उसे बसों का एजेंट बनकर उन्हें अपना जीवन गुजारना पड़ता है लेकिन एजेंटों के इस कार्य को जिला प्रशासन ने बंद करने का जो आदेश जारी किया है वह कहां तक लाजिमी है।
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। जिला मुख्यालय में बसों के एजेंट के रूप में कार्य करने वाले एजेंटों की आय से 200 परिवारों का जीवन चलता है लेकिन एजेंट के कार्य से बेदखल करने से अब वे अपने परिवार का गुजर बसर कैसे करेंगे। हम यहां पर यह भी स्वीकार करते हैं कि यदा-कदा इनके बीच मतभेद भी होते हैं लेकिन प्रबुद्ध वर्ग की समझाईश के बाद हमेशा विवाद का समाधान भी हो जाता है लेकिन प्रशासन का यह निर्णय चिंतनीय है।जिला प्रशासन की यह पहल मात्र सिवनी में की गयी है अगर इन युवकों को इस कार्य से हटाया ही जाना था तो पहले इन युवाओं के लिये रोजगार के अवसर उपलब्ध कराया जाता तो इस पहल की लोग सराहना करते इतना ही नहीं किसी भी युवक को दिन या रात में एजेंट का कार्य करने का शौक नहीं है लेकिन जिला उद्योगविहीन होने के कारण मजबूरीवश लोग इस कार्य में लगे रहते हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में उद्योग खोले जाने के नाम पर इन्वेस्टर मीटिंग तो प्रदेश स्तर पर अनेको बार खोली गयी लेकिन उद्योग के नाम से औद्योगिक क्षेत्र भुरकलखापा को बनाया गया लेकिन यहां पर संशाधन का अभाव एवं सुरक्षा के अभाव में युवकों को रोजगार नहीं मिला है।
एजेंटों के साथ प्रशासन ने कभी बातचीत तक नहीं की और ना ही उनकी समस्या के समाधान की दिशा में कोई पहल की गयी और ऊपर से उनको बसों के इस कार्य से मिलने वाला रोजगार छीना जाना कहां तक न्यायोचित है। अगर इन 200 परिवारों के लोगों का परिवार पालने वालों से रोजगार छीना गया है तो ऐसी स्थिति में ये युवक दिशा भ्रमित हो सकते हैं और हो सकता है अपना आक्रोश किसी अपराधिक गतिविधि में संलग्र होकर व्यक्त करें इसलिए प्रशासन को इस निर्णय पर पुन: विचार करना चाहिए।
हाल ही में कैसलेश के कारण हर वर्ग का व्यक्ति हो या व्यापार उसकी स्थिति प्रभावित हुई है ऐसी स्थिति में इसके असर से युवा वर्ग के सामने भी संकट खड़ा है और इस संकट की घड़ी में पुलिस विभाग के अधिकारी का एजेंटो से उनका रोजगार छीना जाना किसी वज्रपात से कम नहीं है इस संबंध में उच्चाधिकारियों को विचार करते हुए निर्णय लेना जनहित में होगा।
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