Saturday, 24 October 2020

ग्राम पंचायत का तालाब ...लेने वंशानुगत मछुआरा आज भी लगा रहा कार्यालयों के चक्कर ..

 ग्राम पंचायत का तालाब ...लेने वंशानुगत मछुआरा आज भी लगा रहा कार्यालयों के चक्कर ..



राष्ट्र चंडिका (अमर नोरिया) नरसिंहपुर जिले की करेली तहसील की ग्राम पंचायत है मिड़ली इस ग्राम पंचायत में माझी समाज के लोगों का एक गांव है धरमपुरी इस गांव में शासन की योजनाओं के नाम पर यहां के ग्रामीणों को कितना लाभ मिला है यह यथार्थ सत्य  उस गांव में जाकर बड़ी आसानी से देखा जा सकता है । बतौर उदाहरण जिस नर्मदातटीय गांव  रेत खदान हो और उसमें रेतखनन को लेकर शासन प्रशासन तक की जानकारी में सब बातें हो उसी धरमपुरी गांव में जब सीसी रोड का निर्माण रेत की खरीदी कर किया गया हो तो लगता है की जिन्हें जनता सत्ता की कमान सौंपती हैं उनके जनप्रतिनिधियों की असली मंशा क्या होती है यह समझ आता है यह तो एक बात हुई ...!मिड़ली ग्राम पंचायत में ही पवित्र नगरी बरमान से लगकर एक तालाब होने चर्चा स्थानीय वाशिंदों ने बताई,उस जगह पर की गई मिट्टी की खुदाई से बने गड्ढे में पानी भरा होने से माना भी गया हो सकता है यह तालाब ही हो इस बात को लेकर गांव के ही एक ढीमर समाज के व्यक्ति हीरालाल कहार जो कि वंशानुगत मछुआरे की श्रेणी में आता है उसने इस तालाब को लेने के लिए बाकायदा आवेदन के माध्यम से जिला पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत तक निवेदन किया पर उसे तालाब देने की बात तो दूर आज तक उसका आवेदन न जिला पंचायत ने लिया न ग्राम पंचायत ने ऐसे में लगता है सरकारी कार्यालयों में होने वाली बैठकों में जो योजनाएं बनती हैं उनका लाभ आखिर जब पात्र और जरूरतमंदों को नहीं मिलता तो फिर ग्राम स्वराज और सबका साथ सबका विकास के दावे आखिर किस लिये हैं . ....?

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