Thursday, 22 December 2016

प्रेस कार्ड के लिए बन रही है नियमावली ...

प्रेस कार्ड के लिए बन रही है नियमावली ... 




राष्ट्रचंडिका/ नई दिल्ली : पत्रकारिता के गिरते स्तर तथा पत्रकारिता जगत में असामाजिक तत्वों के प्रवेश से चिंतित केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा समाचार पत्रों के पंजीकरण, समाचार पत्र/पत्रिका व टीवी चैनल तथा न्यूज एजेंसी द्वारा जारी प्रेस कार्ड के लिए नियमावली तैयार की जा रही है तथा मौजूदा नियमावाली में संशोधन किए जाने पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार देशभर में बढ़ रहे अखबारी आंकड़े और पत्रकारों की बढ़ रही संख्यां से पाठकों की जागरूकता में वृद्धि हुई है। वहीं कुछ ऐसे चेहरों ने भी पत्रकारिता जगत में दस्तक दे दी है, जिसके कारण पत्रकारिता पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए है। 
पत्रकारिता क्षेत्र में होगी शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य ...
बता दें कि समाचार पत्र, पत्रिका के पंजीकरण के बाद प्रकाशक व संपादक एक-दो अंक प्रकाशित कर अनगिनत लोगों को प्रेस कार्ड जारी कर देते है, जिनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं होता। ऐसे चेहरों की बदौलत पत्रकारिता पर जरूर उंगलियां उठती है।
हर गावं शहर मे कुछ तथाकथित पत्रकार या समाचार पत्र मालिको ने कुछ लोगो को पैसे लेकर प्रेस कार्ड जारी कर रखे है जो पुलिस एवं टोलटेक्स नाको पर धोंस जमाते हैं. ऐसे तथाकथित पत्रकारो से असली पत्रकार भी परेशान हो रहे है । पुलिस, प्रशासन एवं टोलटेक्स नाके वाले असली नकली मे फर्क नही कर पाते है। अब इस नियम के लागू होने पर तथाकथित फर्जी पत्रकारो से पुलिस प्रशासन पुछताछ कर उन सरगनाओ तक पहुचं सकेगी जिन्होने पैसे लेकर प्रेसकार्ड जारी कर रखे हैं.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समाचार पत्र, पत्रिका के पंजीकरण के लिए आवेदक की शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता में डिग्री की शर्त को अनिवार्य करने जा रहा है।  दैनिक समाचार पत्रों, न्यूज एजेंसियों व टीवी चैनल के रिपोर्टर के लिए संबंधित जिला मैजिस्ट्रेट की स्वीकृति उसकी पुलिस वैरीफिकेशन होने उपरांत जिला सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा प्रेस कार्ड तथा प्रैस स्टीकर जारी किए जाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अन्य समाचार पत्र, पत्रिकाओं के प्रकाशक व संपादक का प्रैस कार्ड सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी किया जाएगा। सरकारी तंत्र द्वारा जारी प्रेस कार्ड व प्रेस स्टीकर ही मान्य होंगे। केंद्र सरकार द्वारा उन समाचार पत्र व पत्रिकाओं का प्रकाशन बंद किया जा सकता है जिन्होंने पिछले तीन वर्ष से अपनी वार्षिक रिपोर्ट जमा नहीं करवाई। चर्चा तो यह भी है कि किसी भी क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने वाला दैनिक समाचार पत्र, न्यूज चैनल, न्यूज एजेंसीज को प्रतिनिधि नियुक्त करने के लिए जिला मैजिस्ट्रेट को आवेदन करना होगा, जो जिला सूचना व संपर्क अधिकारी की तस्दीक उपरांत स्वीकृति प्रदान करेंगे। जिला सूचना व संपर्क अधिकारी अपनी रिपोर्ट में दर्शाएंगे कि अमूक दैनिक समाचार पत्र, न्यूज चैनल, न्यूज एजेंसीज को इस क्षेत्र से प्रतिनिधि की जरूरत है। संशोधित नियमावाली के चलते प्रैस कार्ड की खरीदों-फरोख्त तथा प्रैस लिखे  वाहनों पर सरकारी तंत्र की नजर रहेगी। तथ्य पाए जाने उपरांत अपराधिक मामला कार्ड धारक, कार्ड जारी करने वाले हस्ताक्षर तथा प्रैस लिखे वाहन के मालिक पर दर्ज होगा। जाहिर है केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इस संभावित योजना पर अमल होने से पत्रकारिता का मानचित्र बदल जाएगा। हम खुद प्रेस कार्ड वालो से परेशान है कैसे पता किया जाये की कौन सही पत्रकार है और कौन फर्जी इसके लिये जैसे ही आदेश आते है प्रेस लिखे सभी वाहनों की जाँच की जायेगी और जो भी सूचना जनसम्पर्क विभाग की लिस्ट मै नही होगा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा।

आज भी नहीं हुआ विकास का सबेरा

                      जिस गांव में 8 साल पहले रात गुजारी उस गांव में 

                                 आज भी नहीं हुआ विकास का सबेरा 

 चीचली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सिलेहटी में एक गरीब परिवार के घर रात गुजारने रूके प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को लगभग 8 वर्ष बीत चुके हैं किंतु इन 8 वर्षों में उस गांव के लोगों के मन में आज भी मुख्यमंत्री द्वारा गांव के लोगों को दिये गये आश्वासनों को पूर्ण होने की आशा आज भी कम नहीं हुई है इस बात को लेकर गत दिवस हमने सिलेहटी गांव जाकर वहां के लोगों से बातचीत  तो हमने पाया कि आज भी सिलेहटी के लोगों के मन में शिवराज जी के प्रति अटूट् विश्वास आज भी दिखाई दिया वहीं सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर उन्हें आज भी उनके हक न मिलने का दर्द भी वयां किया । 
अमर नौरिया/राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर-21 दिसंबर 2009 को प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान नरसिंहपुर जिले की चीचली जनपद पंचायत के सिलेहटी ग्राम पंचायत में एक गरीब कमलेश भरिया के घर में रात गुजारने को रूके थे इस  दौरान शिवराज जी ने कमलेश के घर में खाना खाया व गंाव के लोगों के बीच ढोल मजीरें से गीत संगीत का आनंद भी लिया था इस दौरान उन्होनें ग्रांव के लोगों के सामने गांव की तस्वीर बदलने की बात कहकर कहा था कि इस गांव के हर घर को पक्का करवा दूंगा,सब घरों में पीने के पानी की व्यवस्था होगी तथा बिजली के खंबों पर लाइट भी लगवाई जायेगीं तथा अस्पताल और हाईस्कूल भी खोला जायेगा बच्चों के खेलने के लिये स्टेडियम का निर्माण भी किया जायेगा । 
जिस कमलेश के घर रात गुजारी थी उसकी पत्नी हक्कीबाई को अपनी मुहंबोली बहिन बताकर उसका घर भी पक्का बनवाने का बादा किया था ।  समय बीतता गया और सिलेहटी गांव के लोगों के जीवन में विकास का जो रूपरेखा प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह जी उन ग्रामीणों के बीच तय करके गये थे उसे लगभग 8 साल बीत गये इन आठ सालों में सिलेहटी गांव की हालत में जो बदलाव व विकास होना था वह कहीं भी दिखाई नहीं देता ।
गांव में आज भी पीने के पानी की समस्या बनी हुई थी अधिकांश लोगों को हेंडपंपो के सहारे ही पेयजल की सुविधा प्राप्त है तो जिन लोगों के पक्के आवास बनाये जाने की प्रक्रिया की जा रही थी उनमें से किसी भी हितग्राही को एक किस्त के बाद दूसरी किस्त नहीं प्राप्त हो पायी है और तो और जिस घर में मुख्यमंत्री जी ने रात गुजारी थी उस कमलेश का मकान भी उनके द्वारा उसके खाते में एक ही बार 35 हजार रूपये की किस्त के बाद आज तक अधूरा पड़ा है इस संबंध में जब हमने कमलेश की पत्नि हक्कीबाई से पूछा कि शिवराज जी तो आपके भाई हैं उन्हें क्या इस बात की जानकारी दी है कि आपका अधूरा मकान अभी तक अपूर्ण पड़ा है इसे कब पूर्ण कराया जायेगा तो हक्की बाई का कहना था कि भैया शिवराज बहुत ही व्यस्त रहतें हैं उनने तो पैसा अवश्य भेजा होगा  हमारे यहां के अधिकारियों व कर्मचारियों ने उल्टी सीधी रिपोर्ट भेजकर यह लिखकर भेज दिया कि कमलेश के घर में छत डल गई है और उसका मकान बन गया है इसलिये हमें अब मकान बनाने  दूसरी किस्त  नहीं मिल पायी  है ।
गांव में बाह्य शौच मुक्त किये जाने को लेकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों का निर्माण भी किया जा रहा है किंतु जिस गुणवत्ता का कार्य किया जाना था वैसा न होने के कारण शौचालयों को लेकर भी ग्रामीण शिकायतें करने की बात कह रहें हैं तो पात्र लोगों के नाम गरीबी रेखा ने न जोड़े जाने और दो माह का राशन एक माह में देने की बात भी अंधिकांश लोगों ने कही,लोगों को कई महीने से पेंशन भी न मिलर्ने  व गांव में क ेवल 8 घंटे ही बिजली मिलती है ऐसा बताया ।
लगभग 130 परिवार इस गांव में रहते हेैं कुछ दिनों पूर्व जिला कलेक्टर के भी गांव में आने को लेकर ग्रामीणों ने बताया और कहा कि कलेक्टर साहब को हम अपनी समस्यायें बताते किंतु उन्हें कलेक्टर साब के पास तक ही नहीं जाने देते कुछ लोग ही अगुवा बनकर सब सही होने की बात कहते हेैं जिससे कलेक्टर साब के पास भी सही बात नहीं पहुंच पाई ।
्चीचली जनपद का यह गांव काफी कुछ पिछड़ा हुआ है और जिस गांव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने ग्रामीणों के बीच रात गुजारी हो उसकी यादें आज भी उनके दिमाग में हैं और उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जी तो हमारे लिये काफी कुछ कहकर गये हेैं किंतु हमारे अपने लोगों ने हमारी सुध लेने में कोर कसर छोड़ रखी है जिससे हमें आज भी अपना जीवन परेशानियों से गुजारना पड़ रहा है ।  सिलेहटी गांव के लोगों का जीवन यापन मूलत: खेती मजदूरी व अन्य छोटे मोटे कामों से ही गुजारा हो रहा हेै यहां के स्कूल के शिक्षक देवी सिंह चौधरी बताते हेैं कि अत्यंत पिछड़ापन होने के कारण यहां के अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल आदि भेजने में ध्यान नहीं देते जिससे अंधिकांश बच्चे 8 वीं तक पढऩे के बाद मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरणपोषण करने में लग जातें हैं । विकास के तमाम दाबों के बाद सिलेहटी गांव के लोगों के मन में आज भी शिवराज जी के दिये गये आश्वासनों को पूर्ण होने की उम्मीद कायम है वहीं प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही लापरवाही से अधूरे पड़े कई आवासों को लेकर गं्रामीणों का दर्द बयां करता फुददीलाल का वह अधूरा मकान है जिसकी दूसरी किस्त की आशा करता हुआ वह स्वर्ग सिधार गया और उसका एक लडक़ा जो मानसिक रूप से कमजोर हेै गांव में कहीं भी रात गुजार कर अपने अधूरे घर को पूरा होने की आशा में भटकता रहता  है ।




Saturday, 17 December 2016

मां राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की शोभायात्रा में धर्ममय हुआ जिला

मां राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की शोभायात्रा में धर्ममय हुआ जिला
नोटबंदी की जगह गौमांस बंदी होना चाहिये थी - शंकराचार्य जी
अमर नौरिया
राष्ट्रचंडिका/ नरसिंहपुर-  भगवान नरसिंह की नगरी में लगभग 23 साल बाद राजराजेश्वरी  मां त्रिपुर सुंदरी की शोभायात्रा को लेकर ज्योतिपीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का शुभागमन हुआ तो पूरे नरसिंहपुर शहर में धर्म का भाव भक्तिपूर्ण उल्लास देखने को मिला मां त्रिपुर सुंदरी के दर्शनार्थ बूढ़े से लेकर बच्चों और सभी धर्म के अनुयायियों ने इस शोभायात्रा के दर्शन लाभ प्राप्त कर पुण्य लाभ प्राप्त किया महत्वपूर्ण यह कि मां राजराजेश्वरी की परमहंसी गंगा झोैतेश्वर जिला नरसिंहपुर में स्थापना क े पाटोत्सव के 34 वे वर्ष पूर्ण होने  पर मां की शोभायात्रा निकाली जा रही है।
इस आयोजन के दौरान आयोजित की गई एक विशाल धर्मसभा में महाराज श्री ने उपस्थित हजारों धर्मानुरागी जनों को प्रवचनों के माध्यम से धर्म के अनुसार आचरण न किये जाने को लेकर समाज में अपराधों की प्रवृति बढऩे पर धर्म के मार्ग पर चलने की बात कही वहीं समाज में नशे के दुष्परिणामों का फल समाज के लोगों को ही भोगना पड़ता है इसके लिये सरकार व पुलिस कुछ नहीं कर सकती इसके खिलाफ केवल जनजागरूकता से ही अंकुश लगाया जा सकता है ।
नोटबंदी को लेकर महाराजश्री ने सरकार क ी तीखी आलोचना करते हुये इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि जब  उसके द्वारा कमाये गये धन पर ही उसका अधिकार नहीं तो फिर उसे कहां की स्वतंत्रता है कोई भी धन काला पीला नहीं होता उसके कमाये जाने की प्रवृति ही उसके काले और सफेद का निर्णय करती है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा नोटबंदी को लेकर जिस तरह से आतंकवाद को खत्म होने की बात की जा रही थी उस पर महाराज श्री ने कहा कि आंतकवादी हमारे नोटों से हथियार नहीं खरीदते वे डालरों से लेते हैं और वह डालर उन्हें अमेरिका देता है जिससे वे अपनी उन्नति करें किंतु वे इसका इस्तेमाल आंतकवाद के लिये करते हैं हमारे अन्य पड़ौसी देश हैं लेकिन केवल पाकिस्तान ही क्यों हमारा दुश्मन है उसकी वजह यह कि वह कश्मीर लेना चाहता है और कश्मीर हमारे भारत का मुकुट है जिसे हम कभी दे नहीं सकते । इस दौरान महाराजश्री ने कहा कि अगर नोटबंदी की वजाय गौमांस बंदी की जाती तो आज मोदी अजर अमर हो जातें किंतु ऐसा नहीं किया गया जिससे आम जनता आज भी परेशान हो रही है ।
स्कूली पाठयक्रमों में अब गीता ओर रामचरित मानस नहीं पढ़ाई जा रही है जिससे लोग धर्म का अनुसरण नहीं कर रहें हैं वहीं सांई पूजा को लेकर महाराज श्री ने कहा कि आज सांई को हमारे देवी देवताओं के मंदिरों में स्थापित कर वहां पर उसे विराट रूप में दिखाया जा रहा है सांई भक्तों ने सनातन धर्म को ठैस पहुंचाई है जो उचित नहीं हैं हम शिरडी में लगभग 35 एकड़ में एक विशाल सुदर्शन मंदिर का निर्माण करने वाले हैं जिसमें गौशाला आदि का भी निर्माण किया जायेगा ।  वहीं महाराज श्री ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि सांई के विरोध करने का कारण हमारी चढौत्री कम हो गई ऐसा नहीं है ऐसा होता तो हम विरोध ही नहीं करते हमारा काम धर्म की रक्षा करना है और वह दायित्व हमारे द्वारा निभाया जा रहा है ।
मां त्रिपुर सुंदरी की यह शोभायात्रा करेली और गाडरवारा शहर में भी बड़ी धूमधाम से निकाली गई जिसमें आस पास के क्षैत्रों के हजारों ग्रामीणों ने भी धर्मलाभ प्राप्त किया । 

ट्रंासपोर्टरों की लापरवाही

ट्रंासपोर्टरों की लापरवाही
किसानों का मक्का ना उठने के कारण
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। मक्का खरीदी का कार्य जिले की सोसायटियों में बंद होने के कारण किसान चिंतित है क्योंकि कई वर्षो तक उन्हें अच्छी फसल प्राप्त हुई लेकिन मंडी/ सोसायटी में ले जाने के बाद किसानों की फसल नहीं खरीदी गयी कि उनकी मक्का गीली है। लगभग 15 दिनों तक मक्का सुखाने के बाद में जांच मशीन यही दिखाती रही कि फसल गीली है। समय सीमा समाप्त हो गयी और बेचारे किसानों की फसल रखी की रखी रह गयी।
अब नोअबंदी के चक्कर में प्रायवेट व्यापारी भी माल नहीं खरीद रहे हैं ऐसे में किसानों के सामने भारी समस्या बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि उनकी फसल की सोसायटी में ना तो एंट्री की गयी और ना ही खरीदी की गयी जिसके कारण किसानों को परेशान होना पड़। खरीदी की तिथि समाप्त होने के बाद अब किसानों की कम दामों में मक्का बेचना पड़ रहा है वह केसबंदी के कारण किसानों के सामने लाकर खड़ा है। किसान आगामी दिनों में इस बात को लेकर आंदोलन के लिये भी रणनीति तैयार कर रहा है।  ज्ञात रहे कि पहले नर्मदा गु्रप ट्रांसपोर्टिंग का कार्य करता था लेकिन हाल ही में मोदी ट्रांसपोटिंग इस कार्य में लगा हुआ है जो कि समय पर माल ना उठाने के कारण नयी खरीदी भी बंद रही यह कारण भी किसानों की खरीदी ना होने का कारण बताया जा रहा है। अत: उक्त मामले में तिथि बढ़ाये जाने की मांग किसानों ने की है। 

डी ब्लॉक वाले पत्रकारों को विभाग ने क्या नहीं हटाया

    डी ब्लॉक वाले पत्रकारों को विभाग ने क्या नहीं हटाया

राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। जिले में अनेक लोग है जो किसी ना किसी व्यवसाय में लगे हुए है लेकिन हाल ही में पत्रकारिता जगत के अनेक संगठन है जो अपने आपको मजबूत करने के लिये इन व्यवसायियों को अपने संगठन का कार्ड देकर अवैध एवं अनैतिक कार्य के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। 
क्या पत्रकार जगत के लिये यह शर्म की बात नहीं है कि जिन हाथों में किताब या कलम है उनकी उपेक्षा कर ऐसे लोगों को हम महत्व दे रहे हैं जो कि अखबार को काला अक्षर भैंस मानते हैं। किसी भी कार्यालय में जाकर अफसरों के सामने अफसरशाही बताना और मैं ये छाप दूंगा वो छाप दूंगा जैसी धमकी देकर उन्हें अपना महत्व बताने का फैशन चल रहा है। सुरसा की तरह ये पत्रकार कहीं भी उग जाते हैं और अपने को सर्वमान्य बताने का प्रयास करते हैं। जिला जनसंपर्क विभाग को भी हम इसके लिए दोषी मानते हैं जहां पर ऐसे ऐसे समाचार पत्रों के नाम अंकित है जो कई वर्षो पहले बंद हो चुके हैं या फिर नियमित प्रकाशित नहीं होते लेकिन विभाग द्वारा आज तक इन समाचार पत्रों को अपडेट नहीं किया गया। आज भी समाचार पत्रों की सूची में डी ब्लॉक में आने वाले समाचार पत्रों के संपादक एवं अन्य लोग अपनी धौंस जमाने में पीछे नहीं रहते लेकिन इन पर समय रहते अगर लगाम नहीं लगायी गयी तो ये पूरे पत्रकारिता जगत को ही गंदा कर देंगे।

आज स्थिति यह है कि विभागों में फर्जी कार्डधारी एवं फर्जी पत्रकारों के कारण सम्मानजनक पत्रकारो को ही सही जानकारी नहीं मिलती और राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार विभागों में जाने से भी कतराने लगे हैं। आखिर पत्रकार संगठन इन पर अंकुश लगाने के स्थान पर इन्हें बढ़ावा क्यों दे रहा है। अगर जिला प्रशासन इन पर लगाम नहीं लगायेगा तो यह विकास के मार्ग में अवरोध पैदा करेंगे। 

Saturday, 10 December 2016

                                                                                                 प्रेस की आड़ में धौंस
ाष्ट्रचंडिका/ यदि देश भर में यह सर्वेक्षण किया जाए कि दो चक्कों और चार चक्कों वाली गाडिय़ों पर सबसे अधिक कौन सा स्टीकर चिपकाया गया होता है? मेरा विश्वास है कि सबसे आगे ‘प्रेस’ ही होगा। गांवों, कस्बो, शहर और महानगर तक में आपकों बड़ी छोटी गाडिय़ों पर प्रेस लिखी गाडिय़ां आसानी से मिल  जाएंगी। कुछ लोग अपनी गाड़ी पर प्रेस लिखवाने के लिए और प्रेस लिखा परिचय पत्र पाने के लिए पैसा खर्च करने को भी तैयार होते हैं। मैंने सुना था, दिल्ली के गुरु तेग बहादुर नगर में कोई संस्था पांच सौ-हजार रुपए लेकर छह महीने-साल भर के लिए प्रेस परिचय पत्र जारी करती थी। यदि महीने में उसने पच्चीस-तीस लोगों का परिचय पत्र भी बनाया तो उसके महीने की आमदनी हो गई पन्द्रह से तीस हजार रुपए की। खैर, यहां मेरा उद्देश्य उनकी आमदनी पर बात करना नहीं है। मैं सिर्फ इतना समझना चाहता हूं कि अपनी गाड़ी पर प्रेस लिखने की ऐसी कौन सी अनिवार्यता है, जो प्रेस लिखे बिना पूरी नहीं होती।
क्यों किसी गाड़ी पर ‘प्रेस’ लिखा होना चाहिए? क्या आज किसी गाड़ी पर आपने पलम्बर, हेयर डिजायनर, एक्टर, सिंगर लिखा देखा है? सिर्फ प्रेस और पुलिस जैसे कुछ पेशे वाले ही अपनी गाड़ी पर अपना परिचय लिखवाते हैं। कुछ सालों से विधायक, सांसद, जिला पार्षद लिखने की परंपरा भी शुरु हुई है। क्या यह स्टीकर सिर्फ रोड़ पर मौजूद दूसरे लोगों पर धौंस जमाने के लिए होता है। या इसकी दूसरी भी कोई उपयोगिता है। किसी गाड़ी पर एम्बुलेन्स लिखा हो तो समझ में आता है। चूंकि एम्बुलेन्स के साथ कई लोगों की जिन्दगी और मौत जुड़ी होती है। यह मामला फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों के साथ भी जुड़ा है।
वैसे कुछ पत्रकार मित्र यह भी कहेंगे कि रिपोर्टिंग के लिए जाते समय वे किसीवास्तव में प्रेस के स्टीकर के साथ यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि व्यक्ति उस संस्था का नाम भी साथ में जरुर लिखे, जहां से वह ताल्लुक रखता है। या फिर इस तरह के नियम बनने चाहिए कि प्रेस लिखा स्टीकर अपने पत्रकारों के लिए संस्थान ही जारी करें। इससे सडक़ पर प्रेस स्टीकर की अराजकता कम होगी। इसी प्रकार अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए खरीदी गई गाड़ी पर कोई व्यक्ति पुलिस का स्टीकर लगा रहा है? तो यह समझने की बात है कि इसके पीछे उसका क्या उद्देश्य हो सकता है? इस तरह की स्टीकर बाजी पर वास्तव में कुछ नीति बननी चाहिए।  सिवनी से प्रकाशित होने वाले ऐसे कई अखबारों के रिपोर्टरों की यहां भरमार है जो उन अखबारों के नाम पर अवैध वसूली करते घूमते हैं। मजे की बात यह है ?कि सिवनी  के अखबार का रिपोर्टर होने का एक रौब रहता है और राजधानी के उन तथाकथित अखबारों की स्थिति भी वैसी ही है जैसे यहां पर उनके फर्जी रिपोर्टरों की। ये तथाकथित अखबार यहां अपने पत्रकार के रूप में वसूली एजेन्ट बना देते हैं जोकि भोले-भाले लोगों को प्रेस का रौब दिखाकर थाने, कचहरी की दलाली और अपराधियों को संरक्षण देने में लगे हुए हैं कुछ तो ऐसे हैं कि वे स्वयं ही यही धंधा कर रहे हैं। इस तरह के लोग पुलिस की भी आय का अच्छा जरिया बने हुए हैं। सिवनी  में अब यह भी होने लगा है कि प्रेस के कार्ड बनाकर एक-एक हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं जिन्हें कोई भी ले सकता है चाहे वे पत्रकार हो या नही हो। ये लोग जिला, शहर, कस्बा आदि का सम्वाददाता कार्ड मुहैया कराते हैं और उनको गाडिय़ों या अन्य वाहन पर प्रेस लिखने का मौका देते हैं। बरेली में कुछ तथाकथित पत्रकार संगठन भी पैदा हो गए हैं जिनमें इस तरह के लोगों को अपना सदस्य बनाने और इस प्रकार प्रशासन के सामने शक्ति-प्रदर्शन की होड़ रहती है।

ढ़े पिता को आज भी पता नहीं कि उसके बंदी बेटे की मौत कैसे हुई थी?

बूढ़े पिता को आज भी  पता नहीं कि उसके बंदी बेटे की मौत कैसे हुई थी?
नरसिंहपुर जिला जेल में चार साल पहले हुई थी बंदी दिनेश की मौत 
अमर नौरिया
राष्ट्रचंडिका/ नरसिंहपुर- भोपाल जेल ब्रेक के बाद जिस तरह से प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कवायद की जा रही हैं और जेल के अंदर बंद कैदियों का हाल चाल पूछा व परखा जा रहा है किंतु यह कवायद कितने दिनों तक अपने आप में जेल प्रबंधन रख पायेगा यह अपने आप में जेल के अंदर बंद केैदियों से अच्छा कोई नहीं जान सकता कुछ इसी तरह के एक मामले में वर्ष 2012 में नरसिंहपुर केंद्रीय जेल में बंद एक बंदी दिनेश की मौत के बाद आज तक उसकी मौत का कारण क्या था इस बात की जानकारी उसके बूढ़े हो चुके पिता व उसकी दो मासूम बेटियों के जेहन में आज भी एक सवाल बनकर कौंध रहा है । 
नरसिहपुर जिला जेल में दिनांक 16 अक्टूबर 2012 को सुबह 9 बजे के करीब अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट रहे बंदी दिनेश पिता चन्नी लाल की मौत जेल के अंदर बिजली के खंबे पर चढक़र कूदने से होने की बात कही जा रही थ्ज्ञी किंतु जब उसके बूढ़े पिता को अपने बेटे की  मृत्यु का प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई तो उसे जारी किये जाने क ो लेकर जो  बात सामने आयी तो उसकी मौत को लेकर  उसकी मृत्यु का स्थान किस जगह था इस बात को लेकर अनेक आवेदन देने के बाद उसे उसके बेटे की मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया गया । 
जिला जेल में बंद बंदी दिनेश की मौत जेल के अंदर किस प्रकृति की हूुई है इस बात को लेकर जेल अधीक्षक नरसिंहपुर के पत्र क्रंमाक 607/बारंट/नरसिंहपुर दिनांक 11/02/2012 के अनुसार दिनेश आत्मज चन्नीलाल सत्र न्यायाधीश महोदय नरसिंहपुर के सत्र प्रकरण क्रं 188/11 अपराध धारा 302 भादवि निण्र्रय दिनांक 26/6/2012 आजीबन काराबास की सजा काट रहा था जो कि दिनांक 16/10/2012 को जेल के अं्रदर एक बिजली के खंये पर चढ गया था और खंबे से कूदने से गिरने के कारण उसकी मौत हुई थी  जिसकी न्यायिक जांच की जा रही थी किंतु बंदी दिनेश की मौत किस कारण और किस बजह से उसने बिजली के खंबे से कूदकर अपनी जान दे दी थी इसकी जानकारी आज दिनांक तक उसके बूढ़े पिता को नहीं लग पाई है । 
 गत दिनों जेलों की व्यवस्थाओं व बंदियों की पूछ परख को लेकर बंदी दिनेश के पिता चन्नीलाल से हमने फोन कर उसके मृतक बैटे दिनेश की मौत को लेकर की जा रही जांच को लेकर किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त होने के संबेंध मेें जानकारी चाही गई तो उन्होने ंबताया कि चार साल हो गये  उसके बेटे दिनेश की मौत जेल के अंदर किन परिस्थितियों के चलते हुई थी इसके बारे में उसे अभी तक किसी भी प्रकार की जानकारी नहींं मिल पाई है ऐसे में भोपाल जेल बेंक के बाद जिस तरह से जेलों की व्यवस्थाओं को लेकर जो जांच पड़ताल की जा रही है यह कितनी कारगर व जेल में बंद कैदियों के लिये कितनी सार्थक है यह बंदी दिनेश की मौत के चार साल बाद भी जेल की व्यवस्थाओं और जेल के अंदर एक कैदी की मौत से स्पष्ट तौर पर सामने आती है । 

भगवान भरोसे चल रहा शिक्षा विभाग

जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनता प्रशासन
भगवान भरोसे चल रहा शिक्षा विभाग
राष्ट्रचंडिका/ जिला कलेक्टर एस धनराजू शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और वे लगातार अन्य विभागों की तुलना में शिक्षा विभाग की समीक्षा में ज्यादा समय देते हैं यह अच्छा भी है आखिर शिक्षा के नाम पर उनके लिए चंद शालायें ही महत्वपूर्ण नजर आती हैं। अन्य शालाओं के प्रति वे कभी सुध लेना भी उचित नहीं समझते।
जब से वे सिवनी आये हैं उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट विद्यालय में चल रही गतिविधियों को देखना भी उचित नहीं समझा जबकि मठ कन्या शाला, उर्दू हायर सेकेण्डरी एवं नेताजी सुभाषचंद बोस उच्च. माध्य. शाला में अनेको बार जाकर संज्ञान लिया इसके अतिरिक्त अनेक शालाएं जर्जर पड़ी है जिनमें हिन्दी मेन बोर्ड, जिला स्कूल कन्या शाला महावीर वार्ड जो जर्जर हो चुकी है इस ओर आपका ध्यान नहीं है। शासन द्वारा सर्वशिक्षा अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के अंतर्गत इनका जीर्णोद्धार किया जा सकता है लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किये गये।
शालाएं शिक्षकों की कमी के कारण जूझ रही है इस ओर आपका जरा भी ध्यान नहीं है। जनप्रतिनिधियों ने भी मानो शिक्षा विभाग को भगवान भरोसे छोड़ दिया है अब तो यह चर्चा भी होने लगी है कि जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात को महत्व नहीं देता आज तक जनप्रतिनिधियों ने जो भी बात रखी उसे जिला प्रशासन की निष्क्रियता के चलते अनदेखा किया गया।
जिला शिक्षा विभाग में खुलेआम डीईओ द्वारा मनमानी की जा रही है वेतन भुगतान बिल पास कराने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है ना देने पर कई महीनो तक चक्कर लगाना पड़ता है लेकिन जिला प्रशासन उन पर ना तो कार्यवाही करता और ना ही दबाव बनाता है ऐसे में समस्या विकराल होते जा रही है।
हाल ही में परीक्षाएं नजदीक है और शाला के प्राचार्य शिक्षक छात्रवृत्ति सहित अनेक कार्यो के कारण परेशान है और उन्हें अच्छे परिणाम के लिये दबाव बनाया जा रहा है क्या ऐसी स्थिति में कोई अच्छे परिणाम की आशा कर सकता है। 

युवा पीढ़ी को कर रही बर्बाद लता कुल्हाड़े

                                              युवा पीढ़ी को कर रही बर्बाद लता कुल्हाड़े

किसी भी नगर के लिए सट्टा एक ऐसा अभिशाप है जो कैंसर की तरह का रोग है जो व्यक्ति का जीवन बर्बाद कर देता है। सिवनी नगर में इसका संचालन लता कुल्हाड़े द्वारा किया जाता है उक्त महिला के कारण अनेक पुलिसकर्मियों की नौकरी और चरित्र का पतन तक की स्थिति निर्मित हुई लेकिन पुलिस भी उसका कुछ नहीं कर पाती। अनेक बाद उसे जेल पहुंचाया गया लेकिन पैसो की दम पर वह छूटकर अपने व्यवसाय को प्रारंभ कर देती है अब तो स्थिति यह है कि वह यह कहती है कि मीडिया वालों को भी मैं पैसे देती हूं इसलिए वे भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। वैसे तो जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन छुटभैय्या तत्वों पर लगाम लगाने की कार्यवाही करता है लेकिन सट्टे का कारोबार करने वाली लता पर आखिर कब लगाया जायेग लगाम। लता के तार सिवनी ही नहीं बालाघाट जिले के कटंगी एवं छिंदवाड़ा के चौरई सहित अेनक जिलों से जुड़े है अगर इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो ये सुरसा की तरह बढ़ता जायेगा और युवा पीढ़ी को अपने गिरफ्त में ले लेगा। 
   राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। सट्टे का कारोबार खूब फलफूल गया है। कई घर अब तक इस सट्टे के कारण तबाह हो चुके हैं और कई उजडऩे की कगार पर हैं। चंद सैकेंड में अमीर बनने की लालसा में अंधे होकर लोग इस सट्टे रूपी जुए के खेल को खेलते हैं। इस धंधे से जुड़े लोग कई गरीबों के घर उजाडऩे में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
ये लोगों को रातोंरात अमीर होने का सब्जबाग दिखाते हैं और उनसे 1 से 100 तक किसी भी एक अक्षर पर सट्टा लगाने को कहते हैं। रातोंरात अमीर बनने की चाह में लोग अपनी मेहनत की कमाई सट्टे में लगाकर अपना सब कुछ बर्बाद कर बैठते हैं। एक रुपए के 90 रुपए वही अंक आने पर मिलते हैं। यदि अंक न निकले तो लालच में वे दोबारा फिर से दूसरे अंक पर रुपया लगा देते हैं।
सबसे ज्यादा सट्टा मजदूर वर्ग लगाता है। वे दिन भर मेहनत करते हैं और शाम के समय घर पर कुछ सब्जी लेकर जाएं न जाएं लेकिन सट्टे रूपी जुए का नम्बर जरूर लगाकर जाएंगे। उनके घर पर भी इस बात को लेकर क्लेश रहता है लेकिन ये लोग सुधरने की बजाय सट्टे की गेम खेलने में लगे रहते हैं। सारा दिन काम करते समय भी इनका ध्यान नम्बर बनाने में रहता है।
 स्कूली छात्र भी अब इस गेम में अपना भाग्य आजमाने लग पड़े हैं। सट्टा माफिया इनका जीवन बर्बाद करने में आगे ही है। वह भी स्कूली छात्रों को पर्ची लगाने से इंकार करने की बजाय उनको इस खेल में फायदे बता रहा है। खाइवाल पूरी तरह से सट्टा रूपी जुए से सबके घर तबाह करने में जुट गए हैं। उनको पुलिस के डंडे का भी डर इसलिए नहीं होता क्योंकि इस केस में जमानत मौके पर ही हो जाती है। उसके बाद वे लोग फिर से अपने कार्य को अंजाम देना शुरू कर देते हैं। कई ढोंगी बाबे भी सट्टे का नम्बर देने के लिए मशहूर हो चुके हैं। उनके पास पिछले कई वर्षों का रिकार्ड रहता है, जिसमें प्रत्येक दिन के आए नम्बर का हिसाब रहता है। उन्हीं के आधार पर सट्टे का नम्बर देकर वे लोगों से पैसे ऐंठ कर ले जाते हैं। जिसका नम्बर निकल आया उसके लिए तो बाबा सब कुछ हो जाता है। वे बाबा की खातिरदारी में कोई कमी शेष नहीं छोड़ते हैं।
लता के अंगने में चल रहा तीन पत्ती का खेल 
इतना ही नहीं सट्टे के बाद इस महिला किंग ने तीन पत्ती नामक जुएं का खेल भी अपने घर में शुरू करवा दिया है जहां धड़ल्ले से युवा वर्ग जमावड़ा लगाकर अपना भाग्य आजमाता है। इतना ही नही नई पीढ़ी के युवा इस किस्मत के खेल में हाथ आजमाकर जल्दी अमीर बनना चाहते हैं लेकिन यहां आकर कई युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। लता की इस दुकानदारी का विरोध अब तक किसी भी सामाजिक संगठन या जनप्रतिनिधि ने नहीं किया जो बात बात पर समाज सुधारने की बात करते हैं। बहरहाल अब यह पुलिस के लिए जांच का विषय है कि वह कब तक लता के इस काले साम्राज्य पर लगाम लगाती है वरना युवा पीढ़ी बेरोजगारी के साथ साथ कर्ज की खाई में धंसते जायेगी।
वाट्सएप गु्रप में भी लिखते हैं ओपन-क्लोज
पुलिस लाख दावे कर ले, लेकिन सट्टा बाजार पर वह अंकुश लगाने में विफल रही है। पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए शहर का 40 फीसदी से अधिक सट्टा मार्केट अब इंटरनेट के माध्यम से वॉट्सएप पर आ गया है। सट्टा रैकेट के सरगनाओं ने एजेंट्स के वॉट्सएप ग्रुप बनाकर नया जाल बिछा दिया है। जिसके बाद सट्टे के अड्डे पर आकर पर्चियां लगाने की जरुरत नहीं है सिर्फ एक मैसेज टाइप कर एजेंट्स को भेजा जाता है और उधर से ओके का मैसेज आते ही नंबर लग जाता है। नंबर खुलने पर अड्डे पर आकर पैमेंट ले जाओ नहीं तो 5 से 7 परसेंट पर कमीशन पर एजेंट पैमेंट लेकर आ जाता है। जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है वह साधारण मोबाइल से मैसेज के जरिए रैकेट से जुड़े हैं। न पुलिस का झंझट और न बार-बार सट्टा अड्डे पर जाने की टेंशन। शहर के 35 से 40 फीसदी इलाके में और पेशेवर ग्राहकों के बीच ही वॉट्सएप व मैसेजिंग सेवा के माध्यम से सट्टा खिलाया जा रहा है। जिस स्पीड से सट्टेबाज अपना क्षेत्र बढ़ा रहे हैं उससे लगता है कि आने वाले एक से दो सालों में पूरा सट्टा मार्केट इंटरनेट और ऐप के सहारे आ जाएगा। यहां खास बात यह है कि अच्छी गुडविल और पेशेवर सट्टा ग्राहक को ही एजेंट्स वॉट्सएप या मैसेज सर्विस से कनेक्ट कर रहे हैं। यदि कोई नया ग्राहक एजेंट्स की सेवा से जुडऩा चाहता है तो उसे पहले किसी गुडविल वाले ग्राहक का रिफरेंस नंबर देना पड़ता है। इसके बाद भी कुछ महीनों तक उसे 7 से 15 दिन की एडवांस मनी जमा करानी होगी।
 सट्टे का अवैध काला कारोबार शहर की गलियों से निकलकर गांव व कस्बों की गलियों तक फैल चुका है. नौजवान व महिलाएं तथा बच्चे भी सट्टे के मकडज़ाल में फंसते चले जा रहे है. ईमानदार पुलिस अधीक्षक व प्रदेश सरकार की छवि भी धूमिल होती जा रही है. पुलिस चैकी प्रभारियों व बीट सिपाहियों का खुला संरक्षण सट्टे के काले कारोबारियों को मिलता देखा जा सकता है. संभ्रांत नागरिकों के अनुसार सट्टे के काले कारोबार के कुप्रभाव से घातक परिणाम निकल सकते हैं.जानकारों की माने तो बीस प्रतिशत के सीधे लाभ पर लौट फेर कर पांचवें दिन उक्त काले कारोबार मे लगा सारा धन सट्टे के काले कारोबारियों का हो जाना चाहिए, परन्तु अशिक्षित नौजवान व महिलाएं तथा बच्चे सट्टे की उक्त गणित को समझ नही पा रहे है, क्योंकि अशिक्षा, गरीबी व लालच के कारण कभी कभार उनके घर का चूल्हा तक नही जल पाता है. और तो और सट्टे में कंगाल हो चुके नवयुवक अपराधिक रास्तों पर निकल कर चोरी व राहजनी जैसा अपराधों में संलिप्त हो रहे बताए जा रहे है.
शहर में व्यस्ततम चौराहों और कई मार्गों पर चाय की होटलों की आड़ में सट्टे का कारोबार फल फूल रहा है। चाय की थडिय़ों और उसके इर्द-गिर्द सटोरियों का जमावड़ा लगा रहता है। यह लोग बुकी के पास सट्टा बुक कराने के बाद चाय की होटलों पर खबर आने का इन्तजार करते दिखाई पड़ते है। इन दिनों सट्टे के काले कारोबार को संचालित करने के लिये काले धन का प्रयोग किया जा रहा है। राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आये इस काले कारोबार के लालच में गरीब परिवार भी गिरफ्त में आने लगा हैं।  पुलिस विभाग भी जान कर अंजान बना हुआ है। देखा जा रहा है कि सट्टे का काला कारोबार शहर के कुछ स्थानों से बढ़ते हुए दर्जनों चौराहों पर पहुंच चुका है और अपराधियों व पूंजीपतियों ने सट्टे के रूप में अपनी काली कमाई को इस व्यापार में निवेश के तौर पर लगाया हुआ है। काले कारोबार के कारिंदे लोगों को सट्टे के मकडज़ाल में फांस लेते हैं। और लालच में फंसकर लोग बर्बाद हो रहे हैं। पुलिस सब कुछ जानकर खामोश बैठी है। पुलिस सटोरियों को हर प्रकार का संरक्षण देती नजर आ रही है। जिसके कारण सट्टेबाजों की हौसला आफजाई हो रही है। सट्टा बाजार न केवल गरीबों, मजदूरों व बेरोजगार लोगों को बर्बादी की दिशा में ले जाने में सहायक होगा बल्कि अगर इसी तरह यह काला कारोबार और पर्चियों पर धन का लेन-देन किया जाता रहा तो इससे कानून व्यवस्था बिगडऩे की भी संभावना है।
शहर में कई स्थानों पर सट्टे का कारोबार चाय की होटलों की आड़ में धड़ल्ले से चल रहा है। सट्टे की बुकिंग के बाद सटोरिये शहर की होटलों पर इन्तजार के दौरान असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने से भी बाज नहीं आते है। इन चाय की होटलों पर चाय-सिगरेट के साथ ही अन्य नशीली वस्तुओं का भी खुले आम प्रयोग किया जाता है। जिन्हें कोई रोकने-टोकनें वाला नहीं है। चौराहों पर इस तरह की गतिविधियों के संचालन से राह चलता व्यक्ति भी एक-आध बार अपना भाग्य आजमाने की सोचता है और फिर वह इस मायाजाल में फंस जाता है जो चाह कर भी नहीं निकल पाता है। जुओं और सट्टों में हजारों परिवार बर्बाद हो जाने के बाद भी इसे बन्द करवाने के जिम्मेदार आंखें मुन्दकर बैठें है। जिन क्षेत्रों में सट्टे का कारोबार फल फूल रहा है उन क्षेत्रों से पुलिस के वाहनों की दिन भर आवाजाही रहती है लेकिन इनकी नजऱ सट्टे के कारोबारियों पर नहीं पड़ती है। इससे सट्टे के कारोबारी भी बिना किसी दबाव के बेखोफ होकर हजारों लोगों को बर्बाद कर रहे है।