Saturday, 10 November 2012

त्यौहार के चलते हो रही मिलावट खोरी

त्यौहार के चलते हो रही मिलावट खोरी

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। (अखिलेश दुबे)दीपोत्सव पर्व के चलते जहां चारों ओर बाजार में रौनक छाई हुई है वहीं खोवा व मिष्ठान व्यापारी अपनी-अपनी चांदी काटने मंे लगे हुए हैं। त्यौहारों के चलते एक ओर जहां मिठाई के भाव आसमान छू रहे हैं वहीं दूसरी ओर मिलावट भी जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर जिले का स्वास्थ एवं खाद्य विभाग गहरी नींद मंे सो रहा है। विगत वर्षो मंे शहरी क्षेत्र की कुछ दुकानों मंे जहां इन विभागो नें दबिश दी भी थी वहीं इस वर्ष पता नहीं क्यों ये जानबूझकर अनजान बनें बैठे हैं देश के कोने-कोने से जहां मिलावटी मावा की खबरें आ रही हैं चाहे वे जबलपुर हो या नागपुर, कानपुर  हो या चंडीगढ पर सिवनी में अब तक कोई कार्यवाही न होना दाल में काले की ओर इंगित करता है। नागपुर के विधायक अनिल देशमुख तो स्वयं ही मिठाई की दुकानों में असली और नकली के सेंपल लेने निकल पडे थे जबकि हमारे क्षेत्र से एक भी जनप्रतिनिधि इस ओर जागरूक नहीं हैं। मिठाई ही नहीं बल्कि आसमान के दाम छूती सब्जियां भी वर्तमान में बासी और दूषित होने के बाद भी बाजार मंे बिक रही है। जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं है जो प्रतिदिन सुबह शाम आम आदमी अपनी थाली मंे चाहता ही है। इतना ही नहीं दूध और पानी के पैकेट  ठंडा रखने के नाम पर 3 -3 रू. अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं।     वहीं नापतौल में भी इन दिनों भारी गोलमाल किया जाता है क्योंकि ग्राहकों की लंबी-लंबी कतारें लगी होती हैं, शासन का नियम है कि प्रत्येक दुकान का पंजीकृत होना आवश्यक है साथ ही उस दुकान मंे लगे तौल कांटे का प्रतिवर्ष नापतौल विभाग से निरीक्षण करवाकर अनापत्ति लेना आवश्यक है। पर यह सब इन विभागांे के कर्मचारियों के द्वारा किया जाना संभव नहीं जान पडता क्योंकि कई बडी बडी दुकानें और उनके तौल कांटे तो इन अधिकारियों के लिये हमेशा खुले रहते हैं। प्रशासन से सिवनी के वे नागरिक जो इस लूट खसोट से त्रस्त्र हैं उन्होनें अपील की है कि सिवनी ही नहीं वरन केवलारी, बरघाट, छपारा, लखनादौन और धूमा के साथ-साथ भारी मात्रा में खोवा उत्पादन क्षेत्र भोमा की प्रत्येक दुकान का सेंपल एकत्रित कर जांच कराई जावे। ताकि आम जनता के स्वास्थ पर स्वयं के पैसों से खरीदे जा रहे इस मीठे जहर से बचाव हो सकें।

लक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चनलक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चनलक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चन

 

लक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चन

श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बस स्टैण्ड सिवनी में भगवान लक्ष्मीनारायण जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एवं कलशारोहण के आयोजन को लेकर एक आवश्यक बैठक 10 नवंबर को रात्रि 8 बजे मंदिर परिसर में ही रखी गई है। ज्ञात हो कि अक्षयातृतीया के अवसर पर श्री जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में उक्त आयोजन होना है। साथ ही आत्यात्मिक ऊर्जा एवं शारीरिक षक्ति संग्रह करने में कार्तिक मास का विषेश महत्व है। कार्तिक मास के दौरान विषेश तौर पर श्री लक्ष्मी-नारायण पूजा एवं तुलसी पूजा से सादक का कल्याण होता है। कार्तिक मास के चलते दिव्य धाम श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर बस स्टैण्ड सिवनी में दिनांक 11, 12, 13 नवम्बर को होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में सुबह 6 बजे से विधिवत श्री लक्ष्मी-नारायण जी की वैदिक नित पूजन, सुबह 7 बजे से श्री लक्ष्मी-नारायण जी सहस्त्र अर्चन, सुबह 9 बजे दीपदान के पष्चात् आरती प्रसाद वितरण, षाम 4 बजे से श्री लक्ष्मी-नारायण जी का पूजन, वैदिक ब्राम्हणों द्वारा श्रीसूक्त पूजन, पुरूशसूक्त पूजन, कनक धारा स्त्रोत, लक्ष्मी स्त्रोत, श्री नारायण गायत्री एवं लक्ष्मी गायत्री का जाप एवं दीपदान आदि कार्यक्रम के पष्चात् षाम 7ः30 बजे आरती, प्रसाद वितरण। यह कार्यक्रम निरंतर धनतेरस दिन रविवार से दीपावली दिन मंगलवार तक प्रतिदिन समयानुसार पंडित राजेष मिश्र जी, पंडित हेमंत त्रिवेदी जी एवं पंडित विजय मिश्र जी के द्वारा पूजन-अर्चन किया जावेगा। इस इस पूजन में सुबह 6 बजे से पति-पत्नि एवं अन्य श्रृद्धालु भी पूजन में षामिल हो सकते हैं। अतः आप सभी धर्मप्रेमी और समस्त गणमान्य नागरिकों से लक्ष्मी-नारायण मंदिर पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पूजा एवं सहस्त्र अर्चन में षामिल होने हेतु श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में

Thursday, 1 November 2012

कुर्सी बचाने की जुगत में लगे मोहन चंदेल


कुर्सी बचाने की जुगत में लगे मोहन चंदेल
क्या चल पायेगा हरवंश का जादू..?
राष्ट्र्रचंडिका/ पूर्ण बहुमतों से जिला पंचायत पर काबिज कांग्रेस में अध्यक्ष मोहन चंदेल से खफा सदस्यों ने एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाकर पूरी कांग्रेस पर भूचाल ला दिया है और वहीं स्कार्पियों बांटने जैसी हास्याप्रद विज्ञप्ति भी कांग्रेस ही किरकिरी कर रही है। मजे की बात तो यह है कि अविश्वास प्रस्ताव की पूरी लड़ाई में कांग्रेस ही कांग्रेस आपस में भिड़ रही है। यह बात सभी लोग जानते हैं कि 19 सदस्यों में से 15 सदस्य कांग्रेस के हैं और इसी पूर्ण बहुमत के चलते कांग्रेस के भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनकर आये थे, उस समय कांग्रेस के नेताओं में यह बात जोरों पर चल रही थी कि संभवत: इस बार बिना किसी विवाद के जिला पंचायत का पूरा कार्यकाल कांग्रेसी शांतिपूर्वक निभा पायेंगे। क्योंकि पिछली पंचवर्षीय पर प्रीता ठाकुर के खिलाफ वर्तमान अध्यक्ष मोहन चंदेल ने अविश्वास लाकर कांग्रेस के बीच घमासान छेड़ दिया था, लेकिन अपनी राजनैतिक योग्यता दिखाते हुए मोहन चंदेल के द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को धराशायी कर दिया था, लेकिन मोहन चंदेल को शायद यह नहीं पता था कि वह भविष्य में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद में विराजमान होंगे और उनके द्वारा किये गये अविश्वास प्रस्ताव की पेशकश पुन: इतिहास दोहरायेगा।
03 नवंबर को अविश्वास प्रस्ताव की बैठक कमिश्रर दीपक खांडेकर के द्वारा दी गई है, जिसमें राजनैतिक हल्को पर यह चर्चा जोरो पर है कि यह प्रस्ताव पास होने के आसार कम है। क्योंकि मोहन चंदेल ने अपनी गोटियां फिट करते हुए सदस्यों को अपने पाले में ले रखा है। सूत्र बताते हैं कि कम पड़ रहे सदस्यों मे मोहन चंदेल ने उन सदस्यों की भारी कीमत लगाई है तो वहीं रामगोपाल जायसवाल ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करके प्रस्ताव के पक्ष में पूर्ण रूप से यह हामी भरी है कि यह प्रस्ताव संभवत: पास होगा। साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद से मोहन चंदेल के द्वारा सदस्यों की नीलामी की बोली लगा रहे हैं। यही नहीं सदस्यों का विश्वास खोने वाले मोहन चंदेल पर यह भी आरोप लगाये गये हैं कि इनके कार्यकाल का पूरा सिस्टम ही भ्रष्ट है। इतनी संगीन आरोपों से नगर में तीखी प्रतिक्रिया मिल रही है साथ ही दो कांग्रेसियों की बीच की इस लड़ाई में  तीसरे मजे मार रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए अनिल चौरसिया को अध्यक्ष  पद का लालीपाप थमाकर यह प्रस्ताव को पास किया जा सकता है, क्योंकि उपाध्यक्ष अनिल चौरसिया के पास पर्याप्त जिला पंचायत सदस्य है और रामगोपाल जायसवाल ने अपने पाले के मोहरो को इस बिसात पर जमा चुका है। अगर ये दोनों एक होते हैं तो मोहन चंदेल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होना तय है। क्या चल पायेगा हरवंश का जादू?
सिवनी की राजनीति में हरवंश सिंह को राजनीति का चाणक्य कहा जाता है, यह बात शत- प्रतिशत सत्य भी है कि कांग्रेस के शासनकाल में त्रिविभगाीय मंत्री और भाजपा शासन काल में भी इस चाणक्य को लालबत्ती से नवाजा गया है, जिससे कि यह भाजपा के खिलाफ ज्यादा जहर न उगल सके। यही नही कांग्रेस में दादा की बात काटने की हिमाकत कोई कांग्रेसी नहीं कर सकता। जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष बनाने में भी दादा का खासा रोल था, चूंकि अब अविश्वास प्रस्ताव पेश हो चुका है तो एक तरफ जायसवाल पूरी
शेष 0 ताकत के साथ अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए लगा रहे हैं तो वहीं अपनी अध्यक्ष पद की कुर्सी बचाने के लिए मोहन चंदेल सदस्यों को मना- पटाकर अपनी कुर्सी बचाने के लिए लगे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि मोहन चंदेल कांग्रेस के चाणक्य की शरण में जा पहुंचे हैं और वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए दादा से हर अदृश्य समझौता कर चुकी हैं। इसी समझौते के कारण कई कांग्रेसी जो जिला पंचायत के सदस्य है, वह इस अविश्वास प्रस्ताव की बैठक के पूर्व ही दिल्ली की विशाल आमसभा में शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरी गणित के पीछे विधानसभा उपाध्यक्ष की ताकत लगी हुई है, तो वहीं ठा. हरवंश सिंह का मोहन चंदेल का सपोर्ट करना इसलिए भी मजबूत माना जा रहा है, क्योंकि अनिल चौरसिया अपनी प्रारंभिक राजनीति से ही हरवंश विरोधी रहे हैं। अब ऐसे में यह बात तो तय है कि दादा अपने विरोधी को अध्यक्ष पद पर बैठने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि रामगोपाल जायसवाल के द्वारा पूरे विश्वास से लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव धराशायी होता है या फिर पास होकर मोहन चंदेल की कुर्सी छीनने में सफल होता है?

कांग्रेस नहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस से होगा विधानसभा प्रत्याशी?


कांग्रेस नहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस से होगा    विधानसभा प्रत्याशी?
राष्ट्र्रचंडिका / सिवनी।  2013 के विधानसभा चुनावों में सिवनी सीट से चुनाव लडऩे के इच्छुक सभी कांग्रेसी नेताओं के लिए एक बुरी खबर यह है कि सिवनी सीट पुन: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में जा सकती है। इसके पहले 2008 के विधानसभा चुनाव में भी सिवनी सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को एक अदृश्य समझौते के तहत दी गयी थी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2013 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की बुरहानपुर, इटारसी एवं सिवनी की विधानसभा सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस की झोली में जा सकती है। सूत्र बताते हैं कि इस खबर को पाकर राकांपा के स्थानीय नेताओं में उत्साह बढ़ गया है और सभी अपने- अपने स्तर पर गोटी फिट करने की कवायद में जुट गये हैं।
                            ज्ञातव्य है कि पिछले 2008 के विधानसभा चुनाव में जिले के कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावना और इच्छा को नजरअंदाज करते हुए जिला मुख्यालय सिवनी की सीट रांकापा
शेष 0 को दी गयी थी, जिसे ददुआ पटेल को घड़ी चुनाव चिन्ह के साथ अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि इस चुनाव में ददुआ पटेल को कुछ हजार वोट मिले थे। चुनाव के दौरान ददुआ पटेल ने कांग्रेस पर समझौता तोडऩे का आरोप लगाया था।
उल्लेखनीय है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में सिवनी सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दिये जाने के बाद राष्ट्र के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर जिले के सर्वमान्य एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ठा. हरवंश सिंह का पुतला भी दहन किया था। हालांकि इस चुनाव में नामांकन के ऐन पहले कांग्रेस के युवा नेता इंजी. प्रसन्न मालू स्वयं को कांग्रेस पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाने में सफल हो गये थे, परंतु तत्कालीन परिस्थिति और विभिन्न कारणों के चलते वे चुनाव में अपनी जमानत नहीं बचा पाये थे।
पिछली बार 2008 के विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले सिवनी सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को देने की खबर के सामने आने पर सिवनी के लगभग सभी कांग्रेसी नेताओं ने इसे मजाक के तौर पर लिया था। संभवत: इस बार भी ऐसा ही हो, परंतु सूत्रों की माने तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के स्थानीय खेमे में 2013 के विधानसभा चुनाव में सिवनी सीट से कौन लड़ेगा? इसका आंकलन और तौल मौल प्रारंभ हो गया है।
सिवनी जिले में कमलनाथ, सुरेश पचौरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं राहुल गांधी से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा नेता 2013 के विधानसभा चुनाव में अपनी- अपनी दावेदारी को प्रस्तुत करने को तैयार है, ऐसे में यह खबर उनके प्रयासों पर कुठाराघात साबित होगी। जबकि सूत्रों की माने तो पुन: कांग्रेस के एक कद्दावार नेता सिवनी विधानसभा सीट में रांकापा की घड़ी को टिक-टिक सुनवाने के लिए अभी से चाबी भरकर सिवनी में कांग्रेस को बीते समय का इतिहास बनाने को तैयार है।

''स्व. श्री मूलचंद दुबे ÓÓ

''स्व. श्री मूलचंद दुबे ÓÓ
एक अद्वितीय व्यक्तित्व
(जन्म- 26.12.1949, शांति- 04.11.2002)
स्व. श्री मूलचंद दुबे अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति थे, जो कि हर जाति धर्म सम्प्रदाय में एक बराबर लोकप्रिय थे, उन्होंने अपनी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा सिवनी के साथ- साथ कई शहरों से पूरी की, क्योंकि वे शिक्षा प्राप्त करने के लिऐ अपने फूफाजी के साथ रहते थे, जो मप्र के पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे। उच्च शिक्षा की प्राप्ति उन्होंने राबर्असन कॉलेज जबलपुर से की और यही वह समय था, जब उनकी राजनीति के प्रति प्रेम व समाजसेवा का भाव सामने आया। वर्ष 1969 में आपने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता स्वीकार और अपने राजनैतिक कौशल के चलते 1974 में राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के पद निर्वाचित भी हुए। यह वह वर्ष था, जब उनकी युवा कांग्रेस की टीम से 10 व्यक्तियों को पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया गया और 08 लोग स्वयं उन्हें मिलाकर विजयी भी रहे। वे उन विशिष्ट व्यक्तियों में से थे, जो पदो को सुशोभित किया करते थे। हर बार अपने कार्य में इतनी कुशलता रखते थे कि हर अगले आने वाले व्यक्ति के लिये वे एक मील का पत्थर साबित होते थे, किसी तरह कारवां बढ़ता गया और वे जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष वर्ष 1980-90 मप्र थोक उपभोक्ता भंडार के प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, महात्मागांधी शिक्षण प्रशिक्षण शोध संस्थान के प्रदेश समिति के संचालक मंडल सदस्य, जिला उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष रहे हैं। शासकीय कार्यो और शासकीय कर्मचारियों में आपकी पकड़ से सभी लोग वाकिफ थे। चपरासी से लेकर प्रमुख अधिकारी आपका सम्मान करते थे, जो कि एक जनसेवा के लिये अतिआवश्यक होता है। जनसेवा के लिए इसी के चलते वर्ष 1993 में नगरपालिका कर्मचारी संघ के लगभग 02 हजार कर्मचारियों का कांग्रेस के बैनर तले समस्याओं का निराकरण भी किया। विद्युत कर्मचारी संगठन, सिवनी संभाग के संरक्षक कृषि उपज मंडी सिवनी कर्मचारी के संरक्षक, जिला द्विसूत्रीय कार्यक्रम के सक्रिय सदस्य, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के सदस्य रहे। जमीनी स्तर में आप काम करने की मिसालें पेश करते हुए आदिवासी विकास खंड कुरई में एक शिविर का आयोजन कर लगभग तीन किमी सड़क का निर्माण भी किया, जिसमें उनके साथ हजारों युवा कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।
वर्षो कांग्रेस की सेवा करने के बाद भी उचित स्थान प्राप्त न होने के चलते आपने विद्रोह भी किया, क्योंकि आप मानते थे कि अगर आपके साथ न्याय न हो तो अन्याय सहन भी जुल्म है। आपे दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सिवनी विधानसभा से चुनाव लड़ा और उसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस और आप में दूरियां बढ़ती चली गई। आपके आघात से कांग्रेस विजयी न हो सकी। खैर आपकी नागरिक मोर्चे में सक्रियता बढ़ी और आपने एक ऐसा विकल्प निकाला, जो कि जनता के लिए सटीक था।
वर्ष 1999-2000 में प्रदेश में सीधे तौर पर नगर पालिका परिषद चुनाव संपन्न होने थे, आपने नागरिक मोर्चे की ओर से अपना नामांकन पत्र भरा, आपको चुनाव चिन्ह के रूप में पीपल का पत्ता आवंटित हुआ और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास में अंकित है। सिवनी नगर की जनता ने आपको अभूतपूर्व समर्थन प्रदान करते हुए आपको सिवनी नपा का अध्यक्ष चुना। आपने अपने कार्यकाल में सभी वार्डों का विकास किया और आप हर दिल अजीत बन गये। चहुंओर आपके अच्छे कार्यों और सहृदय होने की चर्चायें होने लगी, पर शायद नियती को कुछ और ही मंजूर था। नवंबर माह की 04 तारीख को आपको हृदयघात हुआ और हम सभी को रोता बिलखता छोड़कर चले गये। आपने मात्र दो वर्षों में नई ऊंचाईयों को छू लिया था। सारी उम्र अविवाहित रहकर समाज के प्रति इस दिये गये योगदान के लिए आपको सदैव याद रखा जायेगा। मेरी खुशनसीबी है कि मुझ आप जैसे व्यक्तिव को इतने करीब से जानने का मौका मिला। आपकी बारात तो नहीं निकली थी, पर आपकी अंतिम यात्रा का वह मंजर जीवन के अंतिम क्षण तक नहीं भुलाए जा सकते, क्योंकि शहर का हर छोटा बड़ा उस दिन आपको श्रद्धांजलि देने हाथों में फूल और आंखों में आंसू लिये कतारबद्ध खड़ा हुआ था, आपको पुन: श्रृद्धासुमन अर्पित करते हैं..........    -अखिलेश दुबे-

Sunday, 28 October 2012

जगतगुरू शंकराचार्य के सानिध्य में होगी विष्णु व महालक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा


जगतगुरू शंकराचार्य के सानिध्य में होगी विष्णु व महालक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा

राष्ट्र्रचंडिका/ नगर के बस स्टैण्ड मंदिर लक्ष्मी नारायण दिव्यधाम में विराजित भगवान विष्णु एवं भगवती महालक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा व कलशारोहण का भव्य आयोजन आगामी अक्षय तृतीया के पुण्य अवसर पर अनंत श्री विभूषित जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में होगा। इस अविस्मरणीय और गौरवशाली अवसर पर स्
वयं महाराज श्री के साथ ही दण्डी स्वामी पूज्य सदानंद सरस्वती जी महाराज, अमरकंटक के महामण्डलेश्वर जी, संत सुबुद्धानंद जी महाराज सहित अनेक संतो की उपस्थिति की अनुमति महाराज श्री द्वारा प्रदान कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि नगर के धार्मिक, सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कुछ उत्साही युवकों द्वारा काफी दिनों से इस बात का प्रयास किया जा रहा था कि मंदिर में विराजित जगधापति भगवान लक्ष्मीनारायण जी की दिव्य प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम अनेक संयोगो से सुसज्जित ऐसे अनूठे अवसर पर संपन्न हो, जब ग्रह नक्षत्र और तिथियां तो अनुकूलहो ही बल्कि स्वयं श्री अनंत विभूषित जगतगुरू स्वामी शंकराचार्य जी की उपस्थिति भी इस धार्मिक अनुष्ठान को अलौकिकता प्रदान करें। इन धर्म परायण युवाओं का संकल्प उनकी श्रद्धा, लगन और विश्वास का ही प्रतिफल है कि 2013 में पडऩे वाली अक्षय तृतीय के पावन अवसर पर महाराज श्री अपनी उपस्थिति की अनुमति प्रदान कर उन्हें कृतार्थ कर दिया है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान लक्ष्मी नारायण का नैमेतिक पूजन अर्चन इस मंदिर में चल रहा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विशाल शोभायात्रा, प्राण प्रतिष्ठा एवं कलशारोहण होंगे। जगत के पालनकर्ता, ग्रह और नक्षत्रों के स्वमी भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, अक्षय तृतीय जैसी सर्वश्रेष्ठ तिथि और संत समागम एक ऐसा अनुपम एवं दुर्लभ सुसंयोग है जो जन्मो की साधना और अनेक पुण्य कर्मो के फलस्वरूप मानव जीवन को प्राप्त होता है।

लता रानी पुलिस को पिला रही पानी


लता रानी पुलिस को पिला रही पानी
सिवनी में जहां रोजगार के अवसर न के बराबर है, वहीं गुण्डागर्दी, वसूली के साथ साथ सट्टे का भरा पूरा कारोबार चल रहा है। आज हर कोई इस काम में हाथ डालकर रातों-रात करोड़पति बनने की जुगत भिड़ा रहा है और अगर आज का युवा ऐसा सोचता है तो उसकी गलती भी नहीं है। इस सोच के पीछे उसके सामने कई उदाहरण है। उनमें से एक प्रत्यक्ष ही सामने ही, जिसमें एक महिला जो 5-6 वर्षो पहले एक छोटी सी
लकड़ी और सब्जी की दुकान बुधवारी बाजार में लगाया करती थी, इनका पति मैकेनिक था और आज उसका अपना एम्पायर खड़ा हुआ है। कार, बंगला, बैंक बैलेंस और लठैत ये सभी चीजें चंद वर्षों के भीतर सट्टा खिलाने के चलते उसके पास आ गई। इतना ही नहीं पुलिसिया संरक्षण जितना उक्त महिला को मिला है, उतना शायद ही इतिहास में किसी काले काम करने वाले को प्राप्त हुआ होगा।
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। हम बात कर रहे हैं लता नामक एक सट्टा लिखाने वाली महिला की, जिसका फेसबुक पर पुलिस के साथ सांठगांठ कर सट्टा खिलाने का वीडियो भी डला हुआ है। उक्त महिला के द्वारा खटीकी मोहल्ले में 09 लाख रू. का भवन, भैरोगंज क्षेत्र में दो मंजिला लगभग 10 लाख रू. का भवन, एक शिफ्ट कार और अनेको प्लॉट इस काले धंधे के द्वारा बना लिये गये हैं। जब हमारे रिपोर्टर ने इसका स्टिंग ऑपरेशन किया तो उस महिला के द्वारा अपने कुछ गुर्गे रिपोर्टर के पीछे लगा दिये गये। आये दिन रिपोर्टर के मोबाईल पर जान से मारने की धमकियां तक मिल रही हैं। इतना सब होने के बाद भी नगर कोतवाली के एक पुलिस अधिकारी इनके किरायेदार के रूप में निवासरत हैं।
इस महिला की शिकायत पुलिस विभाग तो दूर हमारे जिला कलेक्टर को तक की जा चुकी है, जिसमें यह बताया गया था कि उक्त महिला बुधवारी क्षेत्र में खुलेआम सट्टे का काला कारोबार चला रही है और इस पर त्वरित कार्यवाही नहीं की गई तो इसके गंभीर परिणाम मिल सकते हैं। भैरोगंज क्षेत्र के नागरिक भी उक्त महिला से त्रस्त हो चुके हैं और जल्द ही एक दल के साथ शिकायत करने पहुंच रहे हैं। किंतु प्रश्र यह है कि हमारा सिवनी एक शांत और दहशतमुक्त नगर है, जहां ऐसे काले कामों को करने वालों के लिये कोई जगह नहीं है। फिर भी इस प्रकार के धंधे खुले रूप से चल रहे हैं, जिसमें चलते कई घर टूट चुके हैं और कई घर टूटने की कगार पर है। अपनी महिने भरे की गाढ़ी कमाई आदमी सट्टे में खर्च कर घर में भूखे मरने की नौबत ला रहा है। क्या इतने पर भी हमारा पुलिस विभाग सोया रहेगा? अपने गौरवशाली 150 वें वर्ष को मना रही पुलिस क्या अपनी शपथ को तक भूल चुकी है? जो ऐसे लोग फल-फूल रहे हैं।

कौन है लता बाई......?
सिवनी नगर में सट्टा क्वीन के नाम से प्रचलित महिला सट्टा व्यवसायी लता बाई इन दिनों सट्टा खेलने वालों की जुबान पर बखूबी सुनने को मिलती है। किसी समय में कर्जे से लैस लता बाई एक वक्त की रोटी के लिए मोहताज हुआ करती थी। सूत्र बताते हैं कि उस समय उसका भाई मदन सट्टा पट्टी का काम करता था और लता बाई को इस लाईन में लाने के लिये मदन का खासा रोल रहा है, लेकिन देखते ही देखते बहन ने अपने ही भाई के साथ विश्वासघात करके सट्टे का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया कि मदन तो गुमनामी के समुंदर में समा गया, लेकिन सट्टा साम्राज्य की महारानी लता बाई अब इस साम्राज्य की क्वीन मानी जाती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अपराधियों को दुश्मन समझने वाली पुलिस भी इन अपराधियों के साथ पूरी मित्रता का भाव रखती है और लताबाई के साथ खाकीधारक एसआई और सिपाही चाय-पान की दुकान में चाय- नाश्ता करते हुए देखे जाते हैं और अगर इनके सबूत कोई समाचार पत्र के रिपोर्टर एकत्रित करें तो ऐसे खबरची को लताबाई के गुर्गे को ढूंढकर चमकाने से बाज भी नहीं आते। सूत्र बताते हैं कि किसी समय में रोड पर रहने वाली यह महिला आज करोड़पति बनने की कगार पर है और पैसे के मोह के कारण सट्टा जैसे अवैध व्यवसाय को छोडऩे का नाम नहीं ले रहीहै। इसके एक कारण यह भी है कि पुलिस प्रशासन के निकृष्ट और बेईमान एसआई व सिपाही इसे खुला संरक्षण देकर इसके हौंसले बुलंद कर रहे हैं। बड़े ही शर्म की बात है कि पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे यह सब चल रहा है, फिर भी पुलिस के आला कमान अपने ही विभाग पीठ थपथापने और छोटी मोटी उपलब्धि को बढ़ाचढ़ाकर बताने से बाज नहीं आते। प्रश्र यह उठता है कि आखिर लता बाई के इस साम्राज्य पर कौन सच्चा और ईमानदार अफसर गाज गिराकर इसे धराशायी करेगा? या फिर पुलिस प्रशासन में ऐसा कोई सच्चा ईमानदार अफसर ही नही है? यह प्रश्र यथावत आज भी जनता के जहन में उभर रहा है।

हिल गया लता का साम्राज्य


हिल गया लता का साम्राज्य
राष्ट्रचंडिका पर लगाया 2000 रू. मांगने का झूठा आरोप, एएसआई पंद्रे की गाड़ी में घूमती थी लता बाई
नगर में सट्टा व्यवसाय का संचालन करने वाली और सट्टा क्वीन के नाम से विख्यात प्राप्ति लता कुल्हाड़े देर सही लेकिन पुलिस क
े जाल में फंस ही गई। पुलिस कार्यवाही में एसआई श्रीमती प्रीति विजय तिवारी ने जाल बिछाकर इसे एक बोरा सट्टा पट्टी और 05 हजार रू. नगद के साथ रंगे हाथ दबोच लिया। एसआई प्रीति तिवारी की यह कार्यवाही काबिले तारीफ है, जिसने पुलिस की छवि पर लगते दाग को कुछ हद तक साफ किया है, लेकिन प्रश्र यह उठता है कि क्या इस कार्यवाही में लता के पास बचने के लिए कोई दूसरा उपाय था, क्योंकि यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि सट्टा क्वीन के नाम से प्रसिद्ध रही यह महिला पुलिस प्रशासन के कुछ कर्मचारी और अधिकारियों से गहरा तालुक्क रखती है। यहीं नहीं पुलिस प्रशासन के सिपहे सालारों को अपने मकान में किराये से रखना और फिर उन्हीं का संरक्षण लेना इसकी पुरानी फितरत है।
राष्ट्रचंडिका। अब चूंकि लता बाई पुलिस शिंकजे में कसी जा चुकी थी, तो थाने में इस भीगी बिल्ली ने निर्भिकता से समाचार प्रकाशित करने वाले और जनहित में समाचार प्रकाशित करने का संकल्प लेने वाले हमारे राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रधान संपादक को ही दागदार बनाने की कोशिश की है। जबकि यह सभी लोग जानते हैं कि राष्ट्रचंडिका ने लता कुल्हाड़े की हर अपराधिक गतिविधियों को पूरी निष्पिक्षता के साथ समय- समय पर जिला प्रशासन और जनता के सामने रखी है।
यहां हम अपने सुधि पाठकों को यह अवश्य बताना चाहेंगे कि लता बाई ने अपने घर पर एक एसआई को मकान किराये पर दे रखा था। इस बात को पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखते हुए समाचार ''अपराधी के यहां रह रहे एसआई ÓÓ शीर्षक से प्रकाशित किया था। जुलाई माह के अंक क्रं. 34 पर समाचार प्रकाशन के बाद श्री जैन से राष्ट्रचंडिका ने दूरभाष पर भी चर्चा की थी। एसआई बैस जो कि लता बाई के यहां किराये से रहते थे, उन पर कार्यवाही करने की हामी भी श्री जैन ने भरी थी। राष्ट्रचंडिका की सट्टा और अपराधियों के खिलाफ यह पहली मुहिम थी। इसके पश्चात इसी मुहिम पर सितंबर माह के अंक. क्रं. 45 के पृष्ठ क्रं. 08 पर 'आजाद वार्ड में सट्टा कारोबारÓ शीर्षक से पुन: समाचार प्रकाशित किया। इस समाचार प्रकाशन के बाद भी पुलिस प्रशासन अपनी कुंभकरणीय नींद में सोये रहा और सट्टा नगरिया पर कोई कार्यवाहीं नही किया। तो राष्ट्रचंडिका ने फिर पुलिस प्रशासन को कुंभकरणीय नींद से जगाने के लिए अक्टूबर माह के अंक क्रं. 48 पर 'लता रानी पुलिस को पिला रही पानीÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। समाचार प्रकाशन के बाद ही जिले में पहली बार अनुविभागीय पुलिस अधिकारी के रूप में पदस्थ सिद्धार्थ बहुगुणा ने इस सट्टा नगरिया को संज्ञान में लेकर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को कार्यवाही के आदेश दिये। तो थाना कोतवाली में कुंभकरणीय नींद पर सोए अधिकारी भी जाग गये और ऐन-केन- प्रकरेण लता के साम्राज्य को हिलाने की कोशिश में लग गये, जिस पर महिला एसआई श्रीमती प्रीति विजय तिवारी ने सफलता भी प्राप्त की।
मजे की बात तो यह है कि अपने धंधे में आंच आते देख और पुलिस शिंकजे में कसी लता बाई ने अपने आपको बचाने के लिए राष्ट्रचंडिका के प्रधान संपादक पर ही झूठा आरोप लगाना प्रारंभ कर दिया, जो सरासर निराधार है। माह जुलाई से अक्टूबर तक जिला प्रशासन को लता बाई के इस अवैध कारोबार पर कार्यवाही करने के लिए और अपनी निष्पक्षता पर अडिग राष्ट्रचंडिका यह चाहता था कि जिले से सट्टा जैसे कारोबार को खत्म किया जा सके और खून पसीने की कमाई को धनवान बनने के शार्टकर्ट रास्ते पर गरीब जनता न उजड़ सके। पुलिस प्रशासन की इस कार्यवाही के बाद लता रानी के आतंक में कुछ तो कमी आई है, लेकिन अब भी नगर में ऐसे दर्जनों सट्टा खाईबाज अब भी सक्रिय है, जो अपने इस कारोबार को यथावत जारी रखे हुए हैं।
प्रश्र यह उठता है कि लता कुल्हाड़े पर तो पुलिस प्रशासन ने कार्यवाही करके अपने दाग धोने की कोशिश की है, लेकिन उन पुलिस अधिकारियों का क्या होगा जो सामने से लता बाई के इस सट्टा कारोबार को देखकर भी इसे संरक्षण देते आए हैं? क्या उन एसआई और पुलिस कर्मियों पर कभी गाज गिर पायेगी? नेट पर अपलोड उस वीडियों पर खाकीधारक पंद्रे और शुक्ला स्पष्ट नजर आ रहे हैं, जो सट्टा क्वीन के साथ चाय की चुश्कियां लेकर क्वीन के व्यवसाय के हाल-चाल जान रहे हैं, क्या इन पर कोई कार्यवाही होगी? क्या एसपी महोदय ऐसे भ्रष्ट और निकृष्ठ अधिकारियों को सबक सिखा पायेंगे? जो खाकी को दागदार बनाते हैं?

5555 की मालकीन पंद्रे
नगर में यह चर्चा जोरों पर है कि किसी समय में कौड़ी को मोहताज लता बाई आज करोड़ों की मालकीन है और देखते ही देखते इसकी आर्थिक स्थिति आसमान छू रही है। कई लाखों का बैंक बैलेंस और नगर में महंगे- महंगे मकानों की मालकिन बन चुकी यह महिला किसी समय में पैदल चलती थी। सट्टे के व्यापार में कमाये काले धन से पहले यह दोपहिया वाहन पर उतरी और फिर देखते ही देखते चारपहिया वाहन में घूमने लगी। एमपी 28/ 5555 पर लता बाई को नगर में अक्सर घूमते देखा गया है, लेकिन पाठकों को यह जानकर हैरानी होगी कि एमपी 28/5555 एक खाकीधारक की पत्नी के नाम पर है। आरटीओ विभाग छिंदवाड़ा में यह वाहन एएसआई पंद्रे की श्रीमती के नाम पर रजिस्टर्ड है। इन बातों से स्पष्ट होता है कि लता बाई को पंद्रे का खुला संरक्षण था। यहीं नहीं सूत्र तो यह भी बताते हैं कि पंद्रे लताबाई के साथ सट्टा के इस व्यापार में पार्टनरशिप भी चाहता था। इस पार्टनरशिप के ही लालच के कारण ही वह लताबाई पर इतना मेहरबान था और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को लता के इस कारोबार पर कार्यवाही करने से रोकता था। इन तथ्यों के उजागर होने के बाद अब देखना है कि क्या उच्चाधिकारियों की जांच पंद्रे पर गिरेगी? यह भविष्य की गर्त पर है।

Sunday, 18 March 2012

सत्ता बदलनें पर सिर्फ चेहरे बदलते हैं व्यवस्था नहीं



राष्ट्रचंडिका। सत्ता बदलने पर सिर्फ चेहरे बदलते हैं व्यवस्था नहीं यह एहसास मध्यप्रदेश की जनता को भलीभांती ज्ञात हो गया है, कहते हैं जनता सत्ता बदलने से धनबली, बाहुबली, भुजबली और रसूखदार को कोई फ र्क नहीं पडता है। दिग्गी राजा के जमाने का भ्रष्टाचार शिवराज सरकार में रौद्र रूप ले चुका है। आलम यह है कि भ्रष्टाचार में भी शिष्टाचार नहीं बचा है। प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले एवं विधानसभा क्षेत्र में खनिज माफिया ने तांडव मचा कर रखा है। निवृत्तमान पुलिस महानिदेशक और राज्य शासन के मुख्य सचिव को पुर्नस्थापना देकर शिवराज सिंह ने जता दिया है कि प्रदेश के नौकरशाह उनपर किस तरह हावी हैं सत्ता का सुख भोगने की आदी कांग्रेस विपक्ष के रूप में तब जागने का प्रयास कर रही है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म का क्लाईमेक्स चल रहा है।
मध्यप्रदेश की जनता के दुर्भाग्य से यहां तीसरे मोर्चे की उपस्थिति नगण्य है आजादी के बाद से आज तक प्रदेश की जनता को कांग्रेस या भाजपा दोनो में से किसी एक को भी चुनना पडता है उक्त दोनो पार्टी के नेता प्रदेश की जनता की यह मजबूरी अच्छी तरह से समझते हैं एवं '' पिछली बार तुम इस बार हम ÓÓ के भरोसे पर राजनीति और नेतागिरी की दुकान निरंतर चला रहे हैं।
अवैध उत्खनन के मामले में महाराष्ट्र, कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश तीसरे नबंर पर है। भूमाफि या पूरे प्रदेश में नगा नाच कर रहे हैं। चपरासी, बाबूओं से लेकर आईएसआई अधिकारियों के पास करोडो अरबों की संपत्ति का खुलासा लोकायुक्त लगभग हर महीनें कर रहा है बिहार जैसे राज्य सुधरने की राह पर चले पडे हैं। हमारा मप्र बिहार बनने की रास्ते पर चल पडा है।
इन सबका जिम्मेदार कौन है मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान या अलसाया सा फाईव स्टार सांस्कृतिक वाला विपक्ष या प्रदेश की जनता ? अब समय आ गया है कि इन प्रश्रों के उत्तर सभी को तलाशनें होंगेे नहीं तो देश के सबसे पिछडे राज्यों में से एक मध्यप्रदेश स्वर्णिम तो बहुत दूर की बात है बीमार रोगग्रस्त होकर एवं जंगलराज्य बनकर रह जायेगा। समय आ गया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह नायक की जीवंत भूमिका प्रदेश के रंगमंच पर निभाएं अन्यथा ................