कुर्सी बचाने की जुगत में लगे मोहन चंदेल
क्या चल पायेगा हरवंश का जादू..?
राष्ट्र्रचंडिका/ पूर्ण बहुमतों से जिला पंचायत पर काबिज कांग्रेस में अध्यक्ष मोहन चंदेल से खफा सदस्यों ने एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाकर पूरी कांग्रेस पर भूचाल ला दिया है और वहीं स्कार्पियों बांटने जैसी हास्याप्रद विज्ञप्ति भी कांग्रेस ही किरकिरी कर रही है। मजे की बात तो यह है कि अविश्वास प्रस्ताव की पूरी लड़ाई में कांग्रेस ही कांग्रेस आपस में भिड़ रही है। यह बात सभी लोग जानते हैं कि 19 सदस्यों में से 15 सदस्य कांग्रेस के हैं और इसी पूर्ण बहुमत के चलते कांग्रेस के भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनकर आये थे, उस समय कांग्रेस के नेताओं में यह बात जोरों पर चल रही थी कि संभवत: इस बार बिना किसी विवाद के जिला पंचायत का पूरा कार्यकाल कांग्रेसी शांतिपूर्वक निभा पायेंगे। क्योंकि पिछली पंचवर्षीय पर प्रीता ठाकुर के खिलाफ वर्तमान अध्यक्ष मोहन चंदेल ने अविश्वास लाकर कांग्रेस के बीच घमासान छेड़ दिया था, लेकिन अपनी राजनैतिक योग्यता दिखाते हुए मोहन चंदेल के द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को धराशायी कर दिया था, लेकिन मोहन चंदेल को शायद यह नहीं पता था कि वह भविष्य में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद में विराजमान होंगे और उनके द्वारा किये गये अविश्वास प्रस्ताव की पेशकश पुन: इतिहास दोहरायेगा।
03 नवंबर को अविश्वास प्रस्ताव की बैठक कमिश्रर दीपक खांडेकर के द्वारा दी गई है, जिसमें राजनैतिक हल्को पर यह चर्चा जोरो पर है कि यह प्रस्ताव पास होने के आसार कम है। क्योंकि मोहन चंदेल ने अपनी गोटियां फिट करते हुए सदस्यों को अपने पाले में ले रखा है। सूत्र बताते हैं कि कम पड़ रहे सदस्यों मे मोहन चंदेल ने उन सदस्यों की भारी कीमत लगाई है तो वहीं रामगोपाल जायसवाल ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करके प्रस्ताव के पक्ष में पूर्ण रूप से यह हामी भरी है कि यह प्रस्ताव संभवत: पास होगा। साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद से मोहन चंदेल के द्वारा सदस्यों की नीलामी की बोली लगा रहे हैं। यही नहीं सदस्यों का विश्वास खोने वाले मोहन चंदेल पर यह भी आरोप लगाये गये हैं कि इनके कार्यकाल का पूरा सिस्टम ही भ्रष्ट है। इतनी संगीन आरोपों से नगर में तीखी प्रतिक्रिया मिल रही है साथ ही दो कांग्रेसियों की बीच की इस लड़ाई में तीसरे मजे मार रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए अनिल चौरसिया को अध्यक्ष पद का लालीपाप थमाकर यह प्रस्ताव को पास किया जा सकता है, क्योंकि उपाध्यक्ष अनिल चौरसिया के पास पर्याप्त जिला पंचायत सदस्य है और रामगोपाल जायसवाल ने अपने पाले के मोहरो को इस बिसात पर जमा चुका है। अगर ये दोनों एक होते हैं तो मोहन चंदेल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होना तय है। क्या चल पायेगा हरवंश का जादू?
सिवनी की राजनीति में हरवंश सिंह को राजनीति का चाणक्य कहा जाता है, यह बात शत- प्रतिशत सत्य भी है कि कांग्रेस के शासनकाल में त्रिविभगाीय मंत्री और भाजपा शासन काल में भी इस चाणक्य को लालबत्ती से नवाजा गया है, जिससे कि यह भाजपा के खिलाफ ज्यादा जहर न उगल सके। यही नही कांग्रेस में दादा की बात काटने की हिमाकत कोई कांग्रेसी नहीं कर सकता। जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष बनाने में भी दादा का खासा रोल था, चूंकि अब अविश्वास प्रस्ताव पेश हो चुका है तो एक तरफ जायसवाल पूरी
शेष 0 ताकत के साथ अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए लगा रहे हैं तो वहीं अपनी अध्यक्ष पद की कुर्सी बचाने के लिए मोहन चंदेल सदस्यों को मना- पटाकर अपनी कुर्सी बचाने के लिए लगे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि मोहन चंदेल कांग्रेस के चाणक्य की शरण में जा पहुंचे हैं और वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए दादा से हर अदृश्य समझौता कर चुकी हैं। इसी समझौते के कारण कई कांग्रेसी जो जिला पंचायत के सदस्य है, वह इस अविश्वास प्रस्ताव की बैठक के पूर्व ही दिल्ली की विशाल आमसभा में शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरी गणित के पीछे विधानसभा उपाध्यक्ष की ताकत लगी हुई है, तो वहीं ठा. हरवंश सिंह का मोहन चंदेल का सपोर्ट करना इसलिए भी मजबूत माना जा रहा है, क्योंकि अनिल चौरसिया अपनी प्रारंभिक राजनीति से ही हरवंश विरोधी रहे हैं। अब ऐसे में यह बात तो तय है कि दादा अपने विरोधी को अध्यक्ष पद पर बैठने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि रामगोपाल जायसवाल के द्वारा पूरे विश्वास से लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव धराशायी होता है या फिर पास होकर मोहन चंदेल की कुर्सी छीनने में सफल होता है?

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