''स्व. श्री मूलचंद दुबे ÓÓ
एक अद्वितीय व्यक्तित्व
(जन्म- 26.12.1949, शांति- 04.11.2002)
स्व. श्री मूलचंद दुबे अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति थे, जो कि हर जाति धर्म सम्प्रदाय में एक बराबर लोकप्रिय थे, उन्होंने अपनी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा सिवनी के साथ- साथ कई शहरों से पूरी की, क्योंकि वे शिक्षा प्राप्त करने के लिऐ अपने फूफाजी के साथ रहते थे, जो मप्र के पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे। उच्च शिक्षा की प्राप्ति उन्होंने राबर्असन कॉलेज जबलपुर से की और यही वह समय था, जब उनकी राजनीति के प्रति प्रेम व समाजसेवा का भाव सामने आया। वर्ष 1969 में आपने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता स्वीकार और अपने राजनैतिक कौशल के चलते 1974 में राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के पद निर्वाचित भी हुए। यह वह वर्ष था, जब उनकी युवा कांग्रेस की टीम से 10 व्यक्तियों को पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया गया और 08 लोग स्वयं उन्हें मिलाकर विजयी भी रहे। वे उन विशिष्ट व्यक्तियों में से थे, जो पदो को सुशोभित किया करते थे। हर बार अपने कार्य में इतनी कुशलता रखते थे कि हर अगले आने वाले व्यक्ति के लिये वे एक मील का पत्थर साबित होते थे, किसी तरह कारवां बढ़ता गया और वे जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष वर्ष 1980-90 मप्र थोक उपभोक्ता भंडार के प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, महात्मागांधी शिक्षण प्रशिक्षण शोध संस्थान के प्रदेश समिति के संचालक मंडल सदस्य, जिला उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष रहे हैं। शासकीय कार्यो और शासकीय कर्मचारियों में आपकी पकड़ से सभी लोग वाकिफ थे। चपरासी से लेकर प्रमुख अधिकारी आपका सम्मान करते थे, जो कि एक जनसेवा के लिये अतिआवश्यक होता है। जनसेवा के लिए इसी के चलते वर्ष 1993 में नगरपालिका कर्मचारी संघ के लगभग 02 हजार कर्मचारियों का कांग्रेस के बैनर तले समस्याओं का निराकरण भी किया। विद्युत कर्मचारी संगठन, सिवनी संभाग के संरक्षक कृषि उपज मंडी सिवनी कर्मचारी के संरक्षक, जिला द्विसूत्रीय कार्यक्रम के सक्रिय सदस्य, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के सदस्य रहे। जमीनी स्तर में आप काम करने की मिसालें पेश करते हुए आदिवासी विकास खंड कुरई में एक शिविर का आयोजन कर लगभग तीन किमी सड़क का निर्माण भी किया, जिसमें उनके साथ हजारों युवा कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।
वर्षो कांग्रेस की सेवा करने के बाद भी उचित स्थान प्राप्त न होने के चलते आपने विद्रोह भी किया, क्योंकि आप मानते थे कि अगर आपके साथ न्याय न हो तो अन्याय सहन भी जुल्म है। आपे दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सिवनी विधानसभा से चुनाव लड़ा और उसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस और आप में दूरियां बढ़ती चली गई। आपके आघात से कांग्रेस विजयी न हो सकी। खैर आपकी नागरिक मोर्चे में सक्रियता बढ़ी और आपने एक ऐसा विकल्प निकाला, जो कि जनता के लिए सटीक था।
वर्ष 1999-2000 में प्रदेश में सीधे तौर पर नगर पालिका परिषद चुनाव संपन्न होने थे, आपने नागरिक मोर्चे की ओर से अपना नामांकन पत्र भरा, आपको चुनाव चिन्ह के रूप में पीपल का पत्ता आवंटित हुआ और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास में अंकित है। सिवनी नगर की जनता ने आपको अभूतपूर्व समर्थन प्रदान करते हुए आपको सिवनी नपा का अध्यक्ष चुना। आपने अपने कार्यकाल में सभी वार्डों का विकास किया और आप हर दिल अजीत बन गये। चहुंओर आपके अच्छे कार्यों और सहृदय होने की चर्चायें होने लगी, पर शायद नियती को कुछ और ही मंजूर था। नवंबर माह की 04 तारीख को आपको हृदयघात हुआ और हम सभी को रोता बिलखता छोड़कर चले गये। आपने मात्र दो वर्षों में नई ऊंचाईयों को छू लिया था। सारी उम्र अविवाहित रहकर समाज के प्रति इस दिये गये योगदान के लिए आपको सदैव याद रखा जायेगा। मेरी खुशनसीबी है कि मुझ आप जैसे व्यक्तिव को इतने करीब से जानने का मौका मिला। आपकी बारात तो नहीं निकली थी, पर आपकी अंतिम यात्रा का वह मंजर जीवन के अंतिम क्षण तक नहीं भुलाए जा सकते, क्योंकि शहर का हर छोटा बड़ा उस दिन आपको श्रद्धांजलि देने हाथों में फूल और आंखों में आंसू लिये कतारबद्ध खड़ा हुआ था, आपको पुन: श्रृद्धासुमन अर्पित करते हैं.......... -अखिलेश दुबे-
एक अद्वितीय व्यक्तित्व
(जन्म- 26.12.1949, शांति- 04.11.2002)
स्व. श्री मूलचंद दुबे अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति थे, जो कि हर जाति धर्म सम्प्रदाय में एक बराबर लोकप्रिय थे, उन्होंने अपनी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा सिवनी के साथ- साथ कई शहरों से पूरी की, क्योंकि वे शिक्षा प्राप्त करने के लिऐ अपने फूफाजी के साथ रहते थे, जो मप्र के पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे। उच्च शिक्षा की प्राप्ति उन्होंने राबर्असन कॉलेज जबलपुर से की और यही वह समय था, जब उनकी राजनीति के प्रति प्रेम व समाजसेवा का भाव सामने आया। वर्ष 1969 में आपने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता स्वीकार और अपने राजनैतिक कौशल के चलते 1974 में राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के पद निर्वाचित भी हुए। यह वह वर्ष था, जब उनकी युवा कांग्रेस की टीम से 10 व्यक्तियों को पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया गया और 08 लोग स्वयं उन्हें मिलाकर विजयी भी रहे। वे उन विशिष्ट व्यक्तियों में से थे, जो पदो को सुशोभित किया करते थे। हर बार अपने कार्य में इतनी कुशलता रखते थे कि हर अगले आने वाले व्यक्ति के लिये वे एक मील का पत्थर साबित होते थे, किसी तरह कारवां बढ़ता गया और वे जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष वर्ष 1980-90 मप्र थोक उपभोक्ता भंडार के प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, महात्मागांधी शिक्षण प्रशिक्षण शोध संस्थान के प्रदेश समिति के संचालक मंडल सदस्य, जिला उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष रहे हैं। शासकीय कार्यो और शासकीय कर्मचारियों में आपकी पकड़ से सभी लोग वाकिफ थे। चपरासी से लेकर प्रमुख अधिकारी आपका सम्मान करते थे, जो कि एक जनसेवा के लिये अतिआवश्यक होता है। जनसेवा के लिए इसी के चलते वर्ष 1993 में नगरपालिका कर्मचारी संघ के लगभग 02 हजार कर्मचारियों का कांग्रेस के बैनर तले समस्याओं का निराकरण भी किया। विद्युत कर्मचारी संगठन, सिवनी संभाग के संरक्षक कृषि उपज मंडी सिवनी कर्मचारी के संरक्षक, जिला द्विसूत्रीय कार्यक्रम के सक्रिय सदस्य, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के सदस्य रहे। जमीनी स्तर में आप काम करने की मिसालें पेश करते हुए आदिवासी विकास खंड कुरई में एक शिविर का आयोजन कर लगभग तीन किमी सड़क का निर्माण भी किया, जिसमें उनके साथ हजारों युवा कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।
वर्षो कांग्रेस की सेवा करने के बाद भी उचित स्थान प्राप्त न होने के चलते आपने विद्रोह भी किया, क्योंकि आप मानते थे कि अगर आपके साथ न्याय न हो तो अन्याय सहन भी जुल्म है। आपे दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सिवनी विधानसभा से चुनाव लड़ा और उसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस और आप में दूरियां बढ़ती चली गई। आपके आघात से कांग्रेस विजयी न हो सकी। खैर आपकी नागरिक मोर्चे में सक्रियता बढ़ी और आपने एक ऐसा विकल्प निकाला, जो कि जनता के लिए सटीक था।
वर्ष 1999-2000 में प्रदेश में सीधे तौर पर नगर पालिका परिषद चुनाव संपन्न होने थे, आपने नागरिक मोर्चे की ओर से अपना नामांकन पत्र भरा, आपको चुनाव चिन्ह के रूप में पीपल का पत्ता आवंटित हुआ और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास में अंकित है। सिवनी नगर की जनता ने आपको अभूतपूर्व समर्थन प्रदान करते हुए आपको सिवनी नपा का अध्यक्ष चुना। आपने अपने कार्यकाल में सभी वार्डों का विकास किया और आप हर दिल अजीत बन गये। चहुंओर आपके अच्छे कार्यों और सहृदय होने की चर्चायें होने लगी, पर शायद नियती को कुछ और ही मंजूर था। नवंबर माह की 04 तारीख को आपको हृदयघात हुआ और हम सभी को रोता बिलखता छोड़कर चले गये। आपने मात्र दो वर्षों में नई ऊंचाईयों को छू लिया था। सारी उम्र अविवाहित रहकर समाज के प्रति इस दिये गये योगदान के लिए आपको सदैव याद रखा जायेगा। मेरी खुशनसीबी है कि मुझ आप जैसे व्यक्तिव को इतने करीब से जानने का मौका मिला। आपकी बारात तो नहीं निकली थी, पर आपकी अंतिम यात्रा का वह मंजर जीवन के अंतिम क्षण तक नहीं भुलाए जा सकते, क्योंकि शहर का हर छोटा बड़ा उस दिन आपको श्रद्धांजलि देने हाथों में फूल और आंखों में आंसू लिये कतारबद्ध खड़ा हुआ था, आपको पुन: श्रृद्धासुमन अर्पित करते हैं.......... -अखिलेश दुबे-

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