Sunday, 28 October 2012

हिल गया लता का साम्राज्य


हिल गया लता का साम्राज्य
राष्ट्रचंडिका पर लगाया 2000 रू. मांगने का झूठा आरोप, एएसआई पंद्रे की गाड़ी में घूमती थी लता बाई
नगर में सट्टा व्यवसाय का संचालन करने वाली और सट्टा क्वीन के नाम से विख्यात प्राप्ति लता कुल्हाड़े देर सही लेकिन पुलिस क
े जाल में फंस ही गई। पुलिस कार्यवाही में एसआई श्रीमती प्रीति विजय तिवारी ने जाल बिछाकर इसे एक बोरा सट्टा पट्टी और 05 हजार रू. नगद के साथ रंगे हाथ दबोच लिया। एसआई प्रीति तिवारी की यह कार्यवाही काबिले तारीफ है, जिसने पुलिस की छवि पर लगते दाग को कुछ हद तक साफ किया है, लेकिन प्रश्र यह उठता है कि क्या इस कार्यवाही में लता के पास बचने के लिए कोई दूसरा उपाय था, क्योंकि यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि सट्टा क्वीन के नाम से प्रसिद्ध रही यह महिला पुलिस प्रशासन के कुछ कर्मचारी और अधिकारियों से गहरा तालुक्क रखती है। यहीं नहीं पुलिस प्रशासन के सिपहे सालारों को अपने मकान में किराये से रखना और फिर उन्हीं का संरक्षण लेना इसकी पुरानी फितरत है।
राष्ट्रचंडिका। अब चूंकि लता बाई पुलिस शिंकजे में कसी जा चुकी थी, तो थाने में इस भीगी बिल्ली ने निर्भिकता से समाचार प्रकाशित करने वाले और जनहित में समाचार प्रकाशित करने का संकल्प लेने वाले हमारे राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रधान संपादक को ही दागदार बनाने की कोशिश की है। जबकि यह सभी लोग जानते हैं कि राष्ट्रचंडिका ने लता कुल्हाड़े की हर अपराधिक गतिविधियों को पूरी निष्पिक्षता के साथ समय- समय पर जिला प्रशासन और जनता के सामने रखी है।
यहां हम अपने सुधि पाठकों को यह अवश्य बताना चाहेंगे कि लता बाई ने अपने घर पर एक एसआई को मकान किराये पर दे रखा था। इस बात को पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखते हुए समाचार ''अपराधी के यहां रह रहे एसआई ÓÓ शीर्षक से प्रकाशित किया था। जुलाई माह के अंक क्रं. 34 पर समाचार प्रकाशन के बाद श्री जैन से राष्ट्रचंडिका ने दूरभाष पर भी चर्चा की थी। एसआई बैस जो कि लता बाई के यहां किराये से रहते थे, उन पर कार्यवाही करने की हामी भी श्री जैन ने भरी थी। राष्ट्रचंडिका की सट्टा और अपराधियों के खिलाफ यह पहली मुहिम थी। इसके पश्चात इसी मुहिम पर सितंबर माह के अंक. क्रं. 45 के पृष्ठ क्रं. 08 पर 'आजाद वार्ड में सट्टा कारोबारÓ शीर्षक से पुन: समाचार प्रकाशित किया। इस समाचार प्रकाशन के बाद भी पुलिस प्रशासन अपनी कुंभकरणीय नींद में सोये रहा और सट्टा नगरिया पर कोई कार्यवाहीं नही किया। तो राष्ट्रचंडिका ने फिर पुलिस प्रशासन को कुंभकरणीय नींद से जगाने के लिए अक्टूबर माह के अंक क्रं. 48 पर 'लता रानी पुलिस को पिला रही पानीÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। समाचार प्रकाशन के बाद ही जिले में पहली बार अनुविभागीय पुलिस अधिकारी के रूप में पदस्थ सिद्धार्थ बहुगुणा ने इस सट्टा नगरिया को संज्ञान में लेकर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को कार्यवाही के आदेश दिये। तो थाना कोतवाली में कुंभकरणीय नींद पर सोए अधिकारी भी जाग गये और ऐन-केन- प्रकरेण लता के साम्राज्य को हिलाने की कोशिश में लग गये, जिस पर महिला एसआई श्रीमती प्रीति विजय तिवारी ने सफलता भी प्राप्त की।
मजे की बात तो यह है कि अपने धंधे में आंच आते देख और पुलिस शिंकजे में कसी लता बाई ने अपने आपको बचाने के लिए राष्ट्रचंडिका के प्रधान संपादक पर ही झूठा आरोप लगाना प्रारंभ कर दिया, जो सरासर निराधार है। माह जुलाई से अक्टूबर तक जिला प्रशासन को लता बाई के इस अवैध कारोबार पर कार्यवाही करने के लिए और अपनी निष्पक्षता पर अडिग राष्ट्रचंडिका यह चाहता था कि जिले से सट्टा जैसे कारोबार को खत्म किया जा सके और खून पसीने की कमाई को धनवान बनने के शार्टकर्ट रास्ते पर गरीब जनता न उजड़ सके। पुलिस प्रशासन की इस कार्यवाही के बाद लता रानी के आतंक में कुछ तो कमी आई है, लेकिन अब भी नगर में ऐसे दर्जनों सट्टा खाईबाज अब भी सक्रिय है, जो अपने इस कारोबार को यथावत जारी रखे हुए हैं।
प्रश्र यह उठता है कि लता कुल्हाड़े पर तो पुलिस प्रशासन ने कार्यवाही करके अपने दाग धोने की कोशिश की है, लेकिन उन पुलिस अधिकारियों का क्या होगा जो सामने से लता बाई के इस सट्टा कारोबार को देखकर भी इसे संरक्षण देते आए हैं? क्या उन एसआई और पुलिस कर्मियों पर कभी गाज गिर पायेगी? नेट पर अपलोड उस वीडियों पर खाकीधारक पंद्रे और शुक्ला स्पष्ट नजर आ रहे हैं, जो सट्टा क्वीन के साथ चाय की चुश्कियां लेकर क्वीन के व्यवसाय के हाल-चाल जान रहे हैं, क्या इन पर कोई कार्यवाही होगी? क्या एसपी महोदय ऐसे भ्रष्ट और निकृष्ठ अधिकारियों को सबक सिखा पायेंगे? जो खाकी को दागदार बनाते हैं?

5555 की मालकीन पंद्रे
नगर में यह चर्चा जोरों पर है कि किसी समय में कौड़ी को मोहताज लता बाई आज करोड़ों की मालकीन है और देखते ही देखते इसकी आर्थिक स्थिति आसमान छू रही है। कई लाखों का बैंक बैलेंस और नगर में महंगे- महंगे मकानों की मालकिन बन चुकी यह महिला किसी समय में पैदल चलती थी। सट्टे के व्यापार में कमाये काले धन से पहले यह दोपहिया वाहन पर उतरी और फिर देखते ही देखते चारपहिया वाहन में घूमने लगी। एमपी 28/ 5555 पर लता बाई को नगर में अक्सर घूमते देखा गया है, लेकिन पाठकों को यह जानकर हैरानी होगी कि एमपी 28/5555 एक खाकीधारक की पत्नी के नाम पर है। आरटीओ विभाग छिंदवाड़ा में यह वाहन एएसआई पंद्रे की श्रीमती के नाम पर रजिस्टर्ड है। इन बातों से स्पष्ट होता है कि लता बाई को पंद्रे का खुला संरक्षण था। यहीं नहीं सूत्र तो यह भी बताते हैं कि पंद्रे लताबाई के साथ सट्टा के इस व्यापार में पार्टनरशिप भी चाहता था। इस पार्टनरशिप के ही लालच के कारण ही वह लताबाई पर इतना मेहरबान था और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को लता के इस कारोबार पर कार्यवाही करने से रोकता था। इन तथ्यों के उजागर होने के बाद अब देखना है कि क्या उच्चाधिकारियों की जांच पंद्रे पर गिरेगी? यह भविष्य की गर्त पर है।

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