लता रानी पुलिस को पिला रही पानी
सिवनी में जहां रोजगार के अवसर न के बराबर है, वहीं गुण्डागर्दी, वसूली के साथ साथ सट्टे का भरा पूरा कारोबार चल रहा है। आज हर कोई इस काम में हाथ डालकर रातों-रात करोड़पति बनने की जुगत भिड़ा रहा है और अगर आज का युवा ऐसा सोचता है तो उसकी गलती भी नहीं है। इस सोच के पीछे उसके सामने कई उदाहरण है। उनमें से एक प्रत्यक्ष ही सामने ही, जिसमें एक महिला जो 5-6 वर्षो पहले एक छोटी सी
सिवनी में जहां रोजगार के अवसर न के बराबर है, वहीं गुण्डागर्दी, वसूली के साथ साथ सट्टे का भरा पूरा कारोबार चल रहा है। आज हर कोई इस काम में हाथ डालकर रातों-रात करोड़पति बनने की जुगत भिड़ा रहा है और अगर आज का युवा ऐसा सोचता है तो उसकी गलती भी नहीं है। इस सोच के पीछे उसके सामने कई उदाहरण है। उनमें से एक प्रत्यक्ष ही सामने ही, जिसमें एक महिला जो 5-6 वर्षो पहले एक छोटी सी
लकड़ी और सब्जी की दुकान
बुधवारी बाजार में लगाया करती थी, इनका पति मैकेनिक था और आज उसका अपना
एम्पायर खड़ा हुआ है। कार, बंगला, बैंक बैलेंस और लठैत ये सभी चीजें चंद
वर्षों के भीतर सट्टा खिलाने के चलते उसके पास आ गई। इतना ही नहीं पुलिसिया
संरक्षण जितना उक्त महिला को मिला है, उतना शायद ही इतिहास में किसी काले
काम करने वाले को प्राप्त हुआ होगा।
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। हम बात कर रहे हैं लता नामक एक सट्टा लिखाने वाली महिला की, जिसका फेसबुक पर पुलिस के साथ सांठगांठ कर सट्टा खिलाने का वीडियो भी डला हुआ है। उक्त महिला के द्वारा खटीकी मोहल्ले में 09 लाख रू. का भवन, भैरोगंज क्षेत्र में दो मंजिला लगभग 10 लाख रू. का भवन, एक शिफ्ट कार और अनेको प्लॉट इस काले धंधे के द्वारा बना लिये गये हैं। जब हमारे रिपोर्टर ने इसका स्टिंग ऑपरेशन किया तो उस महिला के द्वारा अपने कुछ गुर्गे रिपोर्टर के पीछे लगा दिये गये। आये दिन रिपोर्टर के मोबाईल पर जान से मारने की धमकियां तक मिल रही हैं। इतना सब होने के बाद भी नगर कोतवाली के एक पुलिस अधिकारी इनके किरायेदार के रूप में निवासरत हैं।
इस महिला की शिकायत पुलिस विभाग तो दूर हमारे जिला कलेक्टर को तक की जा चुकी है, जिसमें यह बताया गया था कि उक्त महिला बुधवारी क्षेत्र में खुलेआम सट्टे का काला कारोबार चला रही है और इस पर त्वरित कार्यवाही नहीं की गई तो इसके गंभीर परिणाम मिल सकते हैं। भैरोगंज क्षेत्र के नागरिक भी उक्त महिला से त्रस्त हो चुके हैं और जल्द ही एक दल के साथ शिकायत करने पहुंच रहे हैं। किंतु प्रश्र यह है कि हमारा सिवनी एक शांत और दहशतमुक्त नगर है, जहां ऐसे काले कामों को करने वालों के लिये कोई जगह नहीं है। फिर भी इस प्रकार के धंधे खुले रूप से चल रहे हैं, जिसमें चलते कई घर टूट चुके हैं और कई घर टूटने की कगार पर है। अपनी महिने भरे की गाढ़ी कमाई आदमी सट्टे में खर्च कर घर में भूखे मरने की नौबत ला रहा है। क्या इतने पर भी हमारा पुलिस विभाग सोया रहेगा? अपने गौरवशाली 150 वें वर्ष को मना रही पुलिस क्या अपनी शपथ को तक भूल चुकी है? जो ऐसे लोग फल-फूल रहे हैं।
कौन है लता बाई......?
सिवनी नगर में सट्टा क्वीन के नाम से प्रचलित महिला सट्टा व्यवसायी लता बाई इन दिनों सट्टा खेलने वालों की जुबान पर बखूबी सुनने को मिलती है। किसी समय में कर्जे से लैस लता बाई एक वक्त की रोटी के लिए मोहताज हुआ करती थी। सूत्र बताते हैं कि उस समय उसका भाई मदन सट्टा पट्टी का काम करता था और लता बाई को इस लाईन में लाने के लिये मदन का खासा रोल रहा है, लेकिन देखते ही देखते बहन ने अपने ही भाई के साथ विश्वासघात करके सट्टे का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया कि मदन तो गुमनामी के समुंदर में समा गया, लेकिन सट्टा साम्राज्य की महारानी लता बाई अब इस साम्राज्य की क्वीन मानी जाती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अपराधियों को दुश्मन समझने वाली पुलिस भी इन अपराधियों के साथ पूरी मित्रता का भाव रखती है और लताबाई के साथ खाकीधारक एसआई और सिपाही चाय-पान की दुकान में चाय- नाश्ता करते हुए देखे जाते हैं और अगर इनके सबूत कोई समाचार पत्र के रिपोर्टर एकत्रित करें तो ऐसे खबरची को लताबाई के गुर्गे को ढूंढकर चमकाने से बाज भी नहीं आते। सूत्र बताते हैं कि किसी समय में रोड पर रहने वाली यह महिला आज करोड़पति बनने की कगार पर है और पैसे के मोह के कारण सट्टा जैसे अवैध व्यवसाय को छोडऩे का नाम नहीं ले रहीहै। इसके एक कारण यह भी है कि पुलिस प्रशासन के निकृष्ट और बेईमान एसआई व सिपाही इसे खुला संरक्षण देकर इसके हौंसले बुलंद कर रहे हैं। बड़े ही शर्म की बात है कि पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे यह सब चल रहा है, फिर भी पुलिस के आला कमान अपने ही विभाग पीठ थपथापने और छोटी मोटी उपलब्धि को बढ़ाचढ़ाकर बताने से बाज नहीं आते। प्रश्र यह उठता है कि आखिर लता बाई के इस साम्राज्य पर कौन सच्चा और ईमानदार अफसर गाज गिराकर इसे धराशायी करेगा? या फिर पुलिस प्रशासन में ऐसा कोई सच्चा ईमानदार अफसर ही नही है? यह प्रश्र यथावत आज भी जनता के जहन में उभर रहा है।
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। हम बात कर रहे हैं लता नामक एक सट्टा लिखाने वाली महिला की, जिसका फेसबुक पर पुलिस के साथ सांठगांठ कर सट्टा खिलाने का वीडियो भी डला हुआ है। उक्त महिला के द्वारा खटीकी मोहल्ले में 09 लाख रू. का भवन, भैरोगंज क्षेत्र में दो मंजिला लगभग 10 लाख रू. का भवन, एक शिफ्ट कार और अनेको प्लॉट इस काले धंधे के द्वारा बना लिये गये हैं। जब हमारे रिपोर्टर ने इसका स्टिंग ऑपरेशन किया तो उस महिला के द्वारा अपने कुछ गुर्गे रिपोर्टर के पीछे लगा दिये गये। आये दिन रिपोर्टर के मोबाईल पर जान से मारने की धमकियां तक मिल रही हैं। इतना सब होने के बाद भी नगर कोतवाली के एक पुलिस अधिकारी इनके किरायेदार के रूप में निवासरत हैं।
इस महिला की शिकायत पुलिस विभाग तो दूर हमारे जिला कलेक्टर को तक की जा चुकी है, जिसमें यह बताया गया था कि उक्त महिला बुधवारी क्षेत्र में खुलेआम सट्टे का काला कारोबार चला रही है और इस पर त्वरित कार्यवाही नहीं की गई तो इसके गंभीर परिणाम मिल सकते हैं। भैरोगंज क्षेत्र के नागरिक भी उक्त महिला से त्रस्त हो चुके हैं और जल्द ही एक दल के साथ शिकायत करने पहुंच रहे हैं। किंतु प्रश्र यह है कि हमारा सिवनी एक शांत और दहशतमुक्त नगर है, जहां ऐसे काले कामों को करने वालों के लिये कोई जगह नहीं है। फिर भी इस प्रकार के धंधे खुले रूप से चल रहे हैं, जिसमें चलते कई घर टूट चुके हैं और कई घर टूटने की कगार पर है। अपनी महिने भरे की गाढ़ी कमाई आदमी सट्टे में खर्च कर घर में भूखे मरने की नौबत ला रहा है। क्या इतने पर भी हमारा पुलिस विभाग सोया रहेगा? अपने गौरवशाली 150 वें वर्ष को मना रही पुलिस क्या अपनी शपथ को तक भूल चुकी है? जो ऐसे लोग फल-फूल रहे हैं।
कौन है लता बाई......?
सिवनी नगर में सट्टा क्वीन के नाम से प्रचलित महिला सट्टा व्यवसायी लता बाई इन दिनों सट्टा खेलने वालों की जुबान पर बखूबी सुनने को मिलती है। किसी समय में कर्जे से लैस लता बाई एक वक्त की रोटी के लिए मोहताज हुआ करती थी। सूत्र बताते हैं कि उस समय उसका भाई मदन सट्टा पट्टी का काम करता था और लता बाई को इस लाईन में लाने के लिये मदन का खासा रोल रहा है, लेकिन देखते ही देखते बहन ने अपने ही भाई के साथ विश्वासघात करके सट्टे का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया कि मदन तो गुमनामी के समुंदर में समा गया, लेकिन सट्टा साम्राज्य की महारानी लता बाई अब इस साम्राज्य की क्वीन मानी जाती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अपराधियों को दुश्मन समझने वाली पुलिस भी इन अपराधियों के साथ पूरी मित्रता का भाव रखती है और लताबाई के साथ खाकीधारक एसआई और सिपाही चाय-पान की दुकान में चाय- नाश्ता करते हुए देखे जाते हैं और अगर इनके सबूत कोई समाचार पत्र के रिपोर्टर एकत्रित करें तो ऐसे खबरची को लताबाई के गुर्गे को ढूंढकर चमकाने से बाज भी नहीं आते। सूत्र बताते हैं कि किसी समय में रोड पर रहने वाली यह महिला आज करोड़पति बनने की कगार पर है और पैसे के मोह के कारण सट्टा जैसे अवैध व्यवसाय को छोडऩे का नाम नहीं ले रहीहै। इसके एक कारण यह भी है कि पुलिस प्रशासन के निकृष्ट और बेईमान एसआई व सिपाही इसे खुला संरक्षण देकर इसके हौंसले बुलंद कर रहे हैं। बड़े ही शर्म की बात है कि पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे यह सब चल रहा है, फिर भी पुलिस के आला कमान अपने ही विभाग पीठ थपथापने और छोटी मोटी उपलब्धि को बढ़ाचढ़ाकर बताने से बाज नहीं आते। प्रश्र यह उठता है कि आखिर लता बाई के इस साम्राज्य पर कौन सच्चा और ईमानदार अफसर गाज गिराकर इसे धराशायी करेगा? या फिर पुलिस प्रशासन में ऐसा कोई सच्चा ईमानदार अफसर ही नही है? यह प्रश्र यथावत आज भी जनता के जहन में उभर रहा है।
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