राष्ट्र चंडिका,सिवनी। जिले की राजनीतिक क्षितिज पर सूरज की तरह चमकने वाली नेत्री स्वर्गीय विमला वर्मा के साथ मिलकर कांग्रेस की यात्रा प्रारंभ करने वाले राजकुमार खुराना ( पप्पू) ने जिस तरह से कांग्रेस की उस नेत्री का दामन उस समय छोड़ा जब कांग्रेस को संभालने का वक्त था और टिकट प्राप्त कर उन्होंने बुआ जी (विमला वर्मा) एवं (दादा ठाकुर हरवंश सिंह) का कद कम करने का प्रयास किया और छिंदवाड़ा के सांसद कमलनाथ की चरण वंदना प्रारंभ की लेकिन इस नेता राजकुमार खुराना(पप्पू)के हाव-भाव को कांग्रेसियों ने अ‘छी तरह समझ गए और दोबारा उन्होंने इन्हें छठी का दूध पिलाकर सिवनी की धरा की धूल चटा दी। लेकिन फिर भी चापलूसी कर पूर्व अध्यक्ष हीरा आसवानी के निधन और ठाकुर हरवंश सिंह के निधन के बाद मानों खुराना की किस्मत खुल गई उन्होंने फिर कमलनाथ से जुगाड़ कर अध्यक्ष पद हासिल किया और अब तो यह भी कह रहे हैं कि उनके कार्यकाल में कांग्रेस कार्यालय बना जिसमें धन संग्रह उनके द्वारा किया गया।
हम बताना चाहते हैं कि पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय हीरा आसवानी के घर में हुई कांग्रेस की बैठक में सभी कांग्रेसियों ने इतना सहयोग कर दिया था कि 4 माह में भवन खड़ा हो सकता था लेकिन राजकुमार खुराना इस भवन निर्माण का श्रेय खुद लेना चाहते थे इसीलिए उन्होंने कांग्रेस भवन बनने में हीला-हवाली की थी।
दो बार विधानसभा चुनाव हारने का कारण उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर विश्वासघात का आरोप लगाया जबकि हकीकत यह थी कि शहर एवं ग्रामीण अंचलों में राजकुमार खुराना को कोई जानता तक नहीं था और पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति उनका अ‘छा व्यवहार ना होने से पार्टी कार्यकर्ता मन मार कर काम किया था और जिसके कारण पराजय के रूप में देखने को मिला।
इतना ही नहीं कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए अल्पकाल में सरकार में कमलनाथ के आने के बाद मानों स्वयं मुख्यमंत्री हो ऐसा रुतबा दिखाने में संकोच नहीं किया। आज स्थिति है कि कांग्रेस कार्यालय में होने वाले कार्यक्रमों में मात्र 10-20 कार्यकर्ता उपस्थित रहते हैं और महिलाओं के साथ उनका संतोषजनक व्यवहार ना होने से महिलाए ने तो कार्यालय एवं कार्यक्रमों से दूरी बनाना प्रारंभ कर दिया है।
कांग्रेस में राजकुमार खुराना ऐसे बरगद के पेड़ साबित हो रहे हैं जिसके नीचे कोई वृक्ष नहीं पनप पाता इसी तरह खुराना किसी कार्यकर्ता को आगे नहीं बढऩे देना चाहते। अब तो लोग यह नारा तक दे रहे हैं कि कांग्रेस को बचाना है तो पप्पू को हटाना है।
देखा गया कि राजकुमार खुराना के राजनीतिक आका कहे जाने वाले कमलनाथ के जन्मदिन पर प्रतिवर्ष उन्हें शुभकामनाएं देने छिंदवाड़ा भोपाल दिल्ली जाते थे लेकिन इस बार कमलनाथ ने अपना जन्मदिन मनाया लेकिन राजकुमार खुराना उन्हें शुभकामनाएं देने तक नहीं पहुंचे इस बात को कांग्रेसी दबी जुबान में कह रहे हैं कि कमलनाथ ने अब राजकुमार खुराना से दूरी बनाना प्रारंभ कर दिया है और आगामी समय में विधायक की टिकट तो दूर की बात उन्हें अपने अध्यक्ष पद से भी हटाया जा सकता है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पिछले विधानसभा चुनाव में राजकुमार खुराना कमलनाथ से कहकर पुन: टिकट लेना चाहते थे लेकिन जिले के कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद यह टिकट मोहन चंदेल को दिया गया और आंकड़े बताते हैं कि मोहन चंदेल भले ही हार गए हो मगर वोट बैंक बढ़ाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी सूत्रों का कहना है कि राजकुमार खुराना नहीं चाहते थे कि चंदेल विजयी हो और जिले में उनका औहदा बढ़े इसीलिए उन्होंने चंदेल को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। जिस तरह पूरे देश में कांग्रेसी नारे लगा रहे हैं कि कांग्रेस को बचाना है तो राहुल गांधी को हटाना है उसी तरह जिले में भी कहा जा रहा है कि राजकुमार खुराना को हटाओ और कांग्रेस को विजय बनाएं का नारा लगाया जा रहा है।

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