दशहरा का पर्व पापों के परित्याग का पर्व: अजय सुखदेवे
राष्ट्र चंडिका,बालाघाट(पंकज डहरवाल)। सम्राट अशोक सेना के राष्ट्रीय सचिव अजय सुखदेवे ने शारदीय नवरात्रि एवं विजयदशमी की सभी जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए बताया कि पर्वों को पारस्परिक सद्भाव एवं सौहार्द के वातावरण में मनाना चाहिए। आगामी दशहरा पर्व 8 अक्टूबर को विजया दशमी को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में दशहरा का बहुत अधिक महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन किया जाता हैं। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त इसी दिन महिषासुर नामक राक्षस पर विजय प्राप्त की थी। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव मनाया जाता है, दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।
सुखदेवे ने बताया कि उन्होंने कहा कि विजयदशमी पर्व, सद्मार्ग पर चलने एवं आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा से विजयदशमी पर होने वाले कार्यक्रमों से सामाजिक समरसता सुदृढ़ होती है। इसी के साथ सुखदेवे ने इन पर्वों को पारस्परिक सद्भाव एवं सौहार्द के वातावरण मनाने व नवरात्रि, दशहरा, दुर्गा पूजा तथा मूर्ति विसर्जन जैसे त्योहारों के दौरान उन्होने युवा एवं बच्चों सहित गणमान्य नागरिकों को सतर्क रहने व आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की।
No comments:
Post a Comment