Saturday, 5 October 2019

नरसिंहपुर जिले में फिर बिक गई पट्टे की जमीनें गाडरवारा तहसील के बढ़ियाघाट और खामघाट का मामला

राष्ट्र चंडिका (अमर नौरिया) नरसिंहपुर। जिले में नर्मदा तटीय क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ शासकीय पट्टे की भूमि पर रसूखदारों के कब्जे किये जाने का मामला गोटेगांव तहसील के बाद एक बार फिर तेन्दूखेड़ा विधानसभा के अंतर्गत गाडरवारा तहसील की लिंगा ग्राम पंचायत के खामघाट में सामने आया है ...! मिली जानकारी के अनुसार खामघाट गांव में कुछ वर्षों पूर्व एक निजी कंपनी को शुगर मिल लगाने हेतु 87.557 हेक्टेयर शासकीय भूमि आवंटित की गई थी किंतु उक्त शासकीय भूमि आवंटन होने के बाद भी उस पर शुगर मिल का निर्माण नहीं किया गया था और वह भूमि वापस मध्य प्रदेश शासन के रूप में दर्ज होकर राजस्व विभाग के पास सुरक्षित हो गई थी, तथा शासन द्वारा उक्त भूमि को कृषि प्रयोजन हेतु 43 व्यक्तियों के नाम से पट्टे जारी कर दिए गए थे एवं 12 व्यक्तियों के नाम से भूमि स्वामी हक में वह भूमि दर्ज हो गई है जिस बात को लेकर क्षेत्रीय विधायक संजय शर्मा ने गत विधानसभा सत्र में इसपर सवाल उठाया था । गौरतलब है अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन जो लोग हैं उन्हें शासन द्वारा पूर्व से ही शासकीय भूमि के पट्टे कृषि करने के प्रयोजन से प्रदान किए गए हैं । कई मामलों में इन भूमियों को रसूखदार और दबंगों के द्वारा येन केन प्रकारेण खरीद लिया जाता है ।  वर्तमान में खामघाट में सामने आये इस मामले में जिसमें की गरीब किसानों और कमजोर वर्ग के लोगों को जो पट्टे की कृषि भूमि थी उस पर रसूखदारों ने कब्जा जमा कर उनके हक की भूमि को अपने नाम से दर्ज करा लिया है ,यह जमीन कैसे उन रसूखदारों के नाम दर्ज हो गई यह सवाल अब उठने लगे हैं जिस पर जांच किये जाने की मांग उठ रही है । नरसिंहपुर में सरकारी जमीनों के खरीदने और बेचने के मामले और फर्जीवाड़ा बार बार उजागर होते हैं तो शासन प्रशासन इस पर पहले से ही अपनी ओर से कार्रवाई क्यों नहीं करता वह ऐसे मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच क्यों नहीं करता है,गाडरवारा तहसील के बढ़ियाघाट में भी कुछ समय पहले स्थानीय ग्रामीणों ने कुछ रसूखदारों पर जमीनों पर कब्जे करने और उनके द्वारा उन्हें धमकाने के मामले में अनुविभागीय दंडाधिकारी, गाडरवारा और करेली पुलिस थाने में शिकायत कर जांच और कार्यवाही की मांग थी जिस पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई । कुछ इसी तरह का एक मामला कुछ समय पूर्व गोटेगांव तहसील में सामने आया था जिसमें लगभग 70 गरीब पट्टेधारियों की भूमि को प्लांट लगने की बात कहकर उनको उनकी भूमि से बेदखल कर दिया गया था तब उन पीड़ित किसानों की आवाज तत्कालीन कांग्रेस विधायक महिदपुर सुश्री कल्पना पारुलेकर ने विधानसभा में उठाई थी मिल रही जानकारी के अनुसार सरकारी जमीनों को बेचे और खरीदे जाने के मामले की एक जांच टीम बनाकर जांच की कार्यवाही की जा रही है किंतु यह जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी या फिर हर मामलों की तरह इस मामले में आपसी संबंधों और नफा नुकसान देखकर सामंजस्य की प्रक्रिया से हल होगी ।

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