Saturday, 19 October 2019

गाय के साथ आप्राकृतिक कृत्य करने केआरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार 

               
राष्ट्र चंडिका (अमर नोरिया) नरसिंहपुर - मुंगवानी थाने के अंर्तगत बचई ग्राम में गाय के साथ आप्राकृतिक कृत्य करने वाले आरोपी युवक पुलिस ने आखिर अपनी गिरफ्त में ले ही लिया , इस मामले में पुलिस ने दिनेश वंशकार निवासी,सलैया, चोराखेड़ा को आज न्यायालय में किया पेश जहां से माननीय न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया,आरोपी युवक डांगीढाना के एक निजी स्कूल में बतौर शिक्षक का काम करता था । गौरतलब है कि ग्राम बचई में गत 6 अक्टूबर की रात एक किराना दुकान के सामने लगे सीसीटीवी कैमरे में दुकान के सामने बैठी गाय के साथ आप्राकृतिक कृत्य करते हुऐ युवक की तस्वीरे कैद हुई थीं, इस घटना से लोगों में व्यापक आक्रोश व्याप्त था जिसपर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के सदस्यों और पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपी युवक को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की थी ।

Friday, 18 October 2019

महात्मा गांधी जी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में


 
    राष्ट्र चंडिका सिवनी. प्रदेश में लगातार कार्यक्रम जारी है,उसी तारतम्य में सी.एच.सी. कॉलेज में दिनाँक 18 अक्टूबर 2019 को गांधी जी के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी-जीवन दर्शन का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार खुराना द्वारा किया गया। इस अवसर जिला कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री ब्रजेश सिंह लल्लू बघेल ,कांग्रेस के प्रसन्न मालू ,अतुल मालू ,विजय नहाटा ,पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष राजिक आकिल,अधिवक्ता सुधीर ठाकुर,पार्षद इब्राहिम ,नब्बू पार्षद,चंदन माना ठाकुर,कांग्रेस के प्रवक्ता जे पी एस तिवारी,विष्णु करोसिया,अधिवक्ता निखलेन्द्र नाथ दादू, जिला पंचायत सदस्य घनश्याम सनोडिया,कॉंग्रेस कमेटी के लीगल सेल के अध्यक्ष अधिवक्ता पंकज शर्मा,उपस्थित रहे। राजकुमार खुराना ने अपने सम्बोधन में कहा कि ग़ांधी एक विचार धारा है ।इसे कभी भी खत्म नही किया जा सकता।युवाओं को जात पात जाती धर्म से ऊपर उठ कर महात्मा ग़ांधी के आदर्शों पर चलने की कोशिश करना चाहिए।अंत मे संस्था के संचालक पंकज बाउस्कर ने आभार व्यक्त किया।

Tuesday, 15 October 2019

पत्रकारों पर झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने की मांग हेतु पत्रकार आज सौंपेंगे कलेक्टर को ज्ञापन
 सिवनी विधायक मुनमुनराय का मिला समर्थन
 राष्ट्र चंडिका,बालाघाट। पत्रकार महासंघ के द्वारा मुख्यालय के सर्किट हाऊस में 3 बजे बैठक आहुत की गई जिसमें जिले भर के सभी पत्रकारों को बैठक में उपस्थित रहने हेतु विनम्र निवेदन किया था। इस निवेदन पर जिले के अधिकांश पत्रकार बैठक में उपस्थित हुये। बैठक का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों पर झूठे आरोप लगाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने हेतु प्रस्ताव पारित किया गया। पत्रकारों ने इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की। फलस्वरूप मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम जिला कलेक्टर को आज एक ज्ञापन सौंपा जायेगा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बालाघाट जिले में पत्रकार बंधूओं के साथ आये दिन कोई न कोई अभद्र व्यवहार की घटना,झूठी शिकायतें झूठे प्रकरण बिना कारण जाने दर्ज करवाये जा रहे हैं। पत्रकार बंधु समाज के चौथे स्तभ के एक महत्वपूर्ण अंग हैं। इन सभी घटनाओं के चलते जिले के पत्रकार बंधुओं में शासन प्रशासन के विरूद्ध भारी आक्रोश व्याप्त है जिससे कहीं न कहीं शासन की छवि धूमिल हो रही है। बालाघाट जिले में पत्रकार बंधुओं के विरूद्ध झूठे प्रकरणों की जांच कराकर झूठे रिपोर्टकर्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कठोर और दंडात्मक कार्यवाही करें,साथ ही पत्रकारों पर दर्ज प्रकरण विलोपित किया जाये। उक्त ज्ञापन सिवनी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक मुनमुनराय के द्वारा दिया गया है। वहीं मुनमुनराय का समर्थन पत्रकारों को दिया गया है।

Wednesday, 9 October 2019

चिट्ठी कहो या पाती सुख-दुख की है साथी 
                   (ललित निबंध) 
       समय साक्षी है, चिट्ठियों ने इतिहास में अमिट चिहिन्न अंकित किये हैं, जिनके निशान कभी तो भाव सौन्दर्य की मिसाल बन सामने आते हैं; तो कभी दुःख के तिमिर को अभिव्यक्त करते हैं| आज जब मानव, जीवन के नए पद सोपान चढ़ रहा है ऐसे में पत्र के महत्त्व के लिए गीत गागर पत्रिका के संपादक दिनेश प्रभात बड़ीसुंदर बात कहते हैं, “पत्रों में सुगंध होती है|” सच! आज भी जब कभी किसी का पत्र आता है तो मन प्रफुल्लित हो उठता है| चिट्ठी सुख-दुख बाँटने का सशक्त माध्यम है| प्राचीन काल से वर्तमान तक इसकी उपयोगिता अवर्णनीय है| यह माध्यम है संवादों का; सूचना का; व्यापार-वाणिज्य का; समाचार जगत का; कुछ खोने, कुछ पाने की खबर का; मित्रता बंध और विखंडन का; ख़ुशी और ग़म का; निंदाशास्त्र का; कभी ग़लत फ़हमियों तो कभी ख़ुश फ़हमियों का; अभिव्यक्ति है नौ रसों के नौ भावों का; कभी रूप है प्रेरणा का तो कभी निराशा का; मानव का मानव-से मानवीय और अमानवीय व्यवहारों का; यह स्रोत है हमारे जीवन में सूचनाओं के संप्रेषण का| सच ही तो है- “चिट्ठी की अपनी भाषा अपनी ज़ुबान होती है क्यों कि हर चट्ठी कुछ कहती है|” साधारण काग़ज़ पर लिखी चार पंक्तियाँ राजा को रंक और रंक को राजा बना सकती है| यह तो तय है कि सामर्थ्य का पिटारा है यह चिट्ठी| तभी तो भारतीय फ़िल्मो के कई गाने चिठी-ख़त पर आधारित हैं। कभी आपके साथ भी हुआ होगा ऐसा कि अचानक किसी दिन आपको मिले अपनी अलमारी-से, ऊपर कमरे में राखी मेज़ की दराज़-से, बिल इत्यादी काग़ज़ फ़साने वाले तार-से कुछ पुरानी चिट्ठियाँ| दोस्तों की, माता-पिता की, परिजनों की, नौकरी संबन्धित, किसी पत्रिका की सदस्यता समाप्ती की सूचना, कुछ आमंत्रण, कुछ निमंत्रण, नए कोर्स सम्बन्धित जानकारी और आप खो जाओ उसी समय में जब वो वर्तमान थीं| महसूस किया होगा भावों की वही लहर जो तब उठी होगी| कहिये इस समय आपका अतीत आपके वर्त्तमान के साथ नहीं मिल जाता! पता है मुझे, ऐसा हुआ है, आखिर हमारा जीवन लगभग एक सा ही तो है| क्या विचार है आपका, हैं न ये चिट्ठियाँ स्मृतियों के स्मृति-गुच्छ! संदेशों का आदान-प्रदान मानव का आदि स्वभाव है जो आज तक यथावत है| नगाड़े, क़बूतर, बाज़, हँस, ये प्राचीन संदेश वाहक रहे हैं| लघु दूरी पर संदेश प्रेषण के लिए शस्त्र धारी, बाणों में पत्र फँसा कर गंतव्य पर लक्ष्य करते| लंबी दूरी के संदेश, वाचिक, लिखित अथवा सांकेतिक रूप में मानव संदेश वाहकों द्वारा पंहुचाय जाते| इसी अनुक्रम में मेरा विचार है महर्षी नारद और श्री हनुमान ऐसे संदेश वाहक थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय संदेश संप्रेषण को संभव बनाया| हनुमान द्वारा श्रीराम का वाचिक और मुद्रिका रूप में सांकेतिक संदेश, माता सीता तक पंहुचाया गया; जिसका उत्तर सीता ने चूड़ामणी भेज कर दिया| इसी के साथ उन्होंने एक विद्वान् राजनयिक का दयित्व भी ख़ूब निभाया और परिस्थितिजन्य हो लंका दहन कर त्वरित यौद्धिक कार्यवाही को अंजाम दिया, जिसे आज की सर्जिकल स्ट्राइक कहा जा सकता है| सीता हरण से आकुल राम ने वन-वल्लरियों और वन्य-जीवों से हाल(संदेशा) जानना चाहा- ‘हे खग-मृग हो मधुकर श्रेनी, तुम्ह देखी सीता मृगनैनी|” इसी प्रकार नारद जी द्वारा तीनों लोकों में भ्रमण की बात कही जाती है| द्वापर में श्री कृष्ण पांडवो का संदेश ले स्वयं हस्तिनापुर गए थे| इससे पता चलता है संदेश वाहक कितना महत्वपूर्ण पद था, जिसका वध निषेध था| कथाएँ बताती हैं, हँस के संदेश से ही रजा नल और दमयंती का मिलन संभव हुआ| अपनी भूली भार्या शकुंतला को मुद्रिका-से ही रजा दुष्यंत पहचानते हैं| हुमायूँ रानी कर्णावती द्वारा रक्षाबंधन के साथ भेजे पत्र के परिणामस्वरूप उनकी सहायतार्थ आया | शिवाजी महाराज ने प्रशासनिक सुधारों के लिए अनेक प्रशासनिक आदेशों को संप्रेषित करवाया| अशोक ने सतम्भ लेखों के माध्यम से राजकीय आदेश आम किए, रानी दुर्गावती ने अकबर को पत्र के साथ सूत कातने का करघा भिजवाया था कि तुम आब बूढ़े हो गए हो घर पर सूत कातो| सांसारिक प्रताड़ना से दुखी मीरा बाई ने पदों में तुलसी को पत्र लिखा, जिसका उत्तर तुलसी ने भी पदों में ही दिया| आदीवासी समुदाय में पत्र के साथ क्या चीज़ रख कर भेजी जा रही है इसका बड़ा महत्त्व रहा; जैसे- पत्र के साथ लाल मिर्च और कँवल का फूल भेजने का आशय युद्ध संकेत था| भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी ऐसे ही रोटी और कंवल को विद्रोह-चिहिंन बनाया था। बाल-वधु मारू ने यौवन काल आने पर अपना संदेश तोते के माध्यम से अपने प्रियतम ढोला को भिजवाया| स्मरण करिए अनेक स्थानों पर प्राकृतिक उपादानों को संदेश वाहक के रूप में खुले ह्रदय-से अपनाया गया है; जैसे- मेघदूत में कालीदास ने मेघों के माध्यम से संदेश संप्रेषण संभव बनाया| इन सब अतीत की घटनाओं के स्मरण का ध्रुव-लक्ष्य यह सिद्ध करना है कि, चिट्ठी अतीत के व्यतीत को वर्तमान में ज़िन्दा रखते हुए भविष्य में यादों का पिटारा बनाने का एक सुंदर और सशक्त साधन है| महरुन्निसा परवेज़ अपने संस्मरण ‘चिट्ठी में बंद यादें’ में लिखती हैं,”नए संचार के माध्यमों की जलकुम्भी में सहज संदेशों के मनोहारी कँवल क्या गुम हो जाएंगे यह समय ही बताएगा|” आज कई विद्वानों के ख़त हमारे लिए मार्गदर्शक हैं; जैसे- नेहरू जी द्वारा अपनी बेटी इंदिरा को लिखे पत्र ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’, घनश्याम दास जी बिड़ला द्वारा अपने पुत्र बसंत कुमार जी बिड़ला को लिखा पत्र, अब्राहम लिंकन का पत्र उनके पुत्र के शिक्षक के नाम, स्वतंत्रोत्तर भारतीय सामाजिक दशा का कटु चित्रण करता दरभंगा जेल से महात्मा गाँधी को लिखा, नारायण सिंह का पत्र, स्वामी विवेकानंद के पत्र, नाथूराम गोडसे द्वारा लिखा आत्मस्वीकृति एवं मृत्यु-पत्र इत्यादी अनेक ऐसे पत्र हैं जो स्वयं में एक अद्भुत दस्तावेज़ हैं| साहित्यिक गवाक्ष-से चिट्ठी-पत्री के संसार में झाँका जाए तो महान रचनाकारों की तत्कालीन चिट्ठियाँ कालांतर में कई पत्रिकाओं की शोभा बनी, जिनसे सीख ले कई और साहित्य सेवियों ने इस साहित्यिक जगत में कदम रखा| स्वयंभू प्रश्न सामने आता है, आख़िर ये चिट्ठी, पत्री, पाती, ख़त, पुर्जी, है क्या...? मित्रों! ये किसी काग़ज़, कपडे, गत्ते, पत्ते का छोटा सा तुकड़ा है जिसमें कुछ सामाजिक, व्यक्तिगत, व्यापारिक, राजनैतिक, शैक्षणिक अथवा सार्वजनिक संदेश, संकेत, निर्देश, आदेश इत्यादी लिखे, उकरे, छपे अथवा अंकित रहते हैं| डाक विभाग द्वारा अन्तर्देशी, पोस्टकार्ड, लिफ़ाफ़े, टेलीग्राम, रजिस्टर्ड डाक, स्पीड-पोस्ट, पार्सल इत्यादी रूप में पत्राचार को सुगम बनाने की व्यवस्था की गयी है| संचार क्रांती के बाद सोशल मीडिया ने संदेश संप्रेषण को बहुत सुगम और गतिशील बना दिया, जिसमे ईमेल, जीमेल, फ़ेसबुक, व्हाटसैप, इस्न्टाग्राम, ट्विटर, टिकटोक इत्यादी व्यव्स्थाएं उपलब्ध हैं| यह विज्ञान का कमाल है, पर एक बात विशेष ध्यान देने की है कि, इतनी उन्नती के बाद भी हम हस्त लिखित दस्तावेज़ों को विशेष महत्त्व देते हैं| यहाँ तक की धार्मिक भावनाएँ भी इससे अछूती नहीं हैं | जबलपुर के नर्मदा तट ग्वारीघाट के समीप स्थित श्रीराम लला मंदिर में विराजे श्री हनुमान जी को लोग अपनी-अपनी मन्नतें लिखवाते हैं इसी लिए इन्हें अर्जी वाले हनुमान जी कहा जाता है| इन सब से ज़ाहिर है, पत्र-आचार किसी न किसी रूप में हमारे चहों ओर आच्छादित है| चिट्ठी का यह माया जाल कई प्रकार का होता है; मसलन- विषयानुरूप, निमंत्रण-पत्र, आमंत्रण-पत्र, संवेदना-पत्र, शोक-पत्र, सामान्य पत्र इत्यादि तथा शैली-शिल्प के आधार पर औपचारिक पत्र, जिसमें प्रमुखतः कार्यालयीन एवं व्यापारिक-पत्र आते हैं| अनौपचारिक पत्रों के अन्तर्गत वे सभी पत्र आते हैं जो औपचारिक नहीं हेते| पत्र चाहे कोई भी हो उसका भषा-शिल्प आकर्षक, सरल, स्पष्ट, मौलिक, संक्षिप्त, स्पष्ट उद्देश्य और विराम चिहिन्नों से परिपूर्ण होना चाहिए ये पत्रीय सौन्दर्य को सुनिश्चित करते हैं| इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पत्र भेजने वाले और पाने वाले का पूर्ण नाम और पता उल्लेखित हो| अपनी अक्षर-वाणी विराम के पूर्व यही कहूँगा, अतीत को वर्तमान और भविष्य से जोड़ने वाली चिट्ठी किसी न किसी संदेश को अवश्य वहन करती है इसीलिए सबका अपना-अपना मूल्य है| प्रगतिशील वसुधा में कवि बलराम गुमाश्ता की पंक्तियाँ कितनी सटीक हैं- “माँ गाँव में मरी, जिसकी सूचना मुझे भोपाल में तीन दिन बाद मिली| इस तरह मरने के बाद भी, मेरे लिए तीन दिन और ज़िंदा रही माँ| मैं माँ की मौत पर नहीं सूचना पर रोया|” भाव पूर्ति के लिए मैं स्वरचित पंक्तियों को पाठक न्यायलय के समक्ष प्रस्तुत करता हूँ- “चिट्ठी आशय है काग़ज़ का, बसता जिसमे संदेश कोई| वो मनोभाव की पाती है, सुख-दुःख का संदेश कोई| वो कल की बिसरी यादें हैं, वर्तमान का संदेश कोई| वो यादों का गुलदस्ता है, खट्टा-मीठा संदश कोई| हर कपड़ा, पत्ता भी चिट्ठी है, जिसमें लिखा संदेश कोई|” तो चलिए मित्रों! संदेश क्रांती में आए डायनामिक परिवर्तन को स्वीकारते हुए भारतीय डाक सेवा से भी जुड़े रहें और उसके द्वारा समय-समय पर चिट्ठी लेखन को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रमों का न केवल प्रतियोगी रूप में हिस्सा बने, बल्की चिट्ठी को अपने जीवन में पुनः स्थान दें| तो बस अब उठाइए क़लम और झट लिख भेजिए एक प्यारी-सी चिट्ठी अपनों को कि बनी रहे महक़ और खिला रहे यह पत्रों का गुलदस्ता हमेशा-हमेशा के लिए| विश्वास करिए बड़ा अच्छा लगेगा| वंदे...! 

    अखिलेश सिंह श्रीवास्तव 'दादू' कथेतर लेखक, दादू मोहल्ला- दादू साहब का बड़ा, संजय वार्ड, सिवनी- 480661 (म.प्र.) मोबाईल न.- 7049595861 ईमेल: akhileshvwo@gmail.com

Sunday, 6 October 2019

    विन-विन गरबा संपन्न

राष्ट्र चंडिका सिवनी. बारापत्थर क्षेत्र में बाहुबली चौराहे पर लगातार नौवे साल विन-विन गरबा स्पर्धा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया गया।आयोजकों ने बताया कि इस गरबे में महिलाओं और पुरूषों के लिये बैठने के लिये पृथक – पृथक व्यवस्था की गयी थी। केवलारी विधायक राकेश पाल सिंहभाजपा के जिला अध्यक्ष प्रेम तिवारीपूर्व विधायक नरेश दिवाकरपूर्व विधायक श्रीमति नीता पटेरियानगर पालिका अध्यक्ष श्रीमति आरती शुक्ला आदि के आतिथ्य में संपन्न हुई इस गरबा स्पर्धा में पाँच गरबा टीमों ने शिकरत की। आयोजकों के अनुसार इस गरबे में सभी प्रतिभागी दलों को नकद पुरूस्कार से नवाजा जाता है। इस साल सभी गरबा दलों को पाँच – पाँच हजार रूपये की नगद राशि प्रदाय की गयी। इस दौरान सैकड़ों की तादाद में गरबा प्रेमियों ने इस आयोजन का लुत्फ उठाया।

दशहरा का पर्व पापों के परित्याग का पर्व: अजय सुखदेवे

 राष्ट्र चंडिका,बालाघाट(पंकज डहरवाल)। सम्राट अशोक सेना के राष्ट्रीय सचिव अजय सुखदेवे ने शारदीय नवरात्रि एवं विजयदशमी की सभी जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए बताया कि पर्वों को पारस्परिक सद्भाव एवं सौहार्द के वातावरण में मनाना चाहिए। आगामी दशहरा पर्व 8 अक्टूबर को विजया दशमी को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में दशहरा का बहुत अधिक महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन किया जाता हैं। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त इसी दिन महिषासुर नामक राक्षस पर विजय प्राप्त की थी। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव मनाया जाता है, दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है। सुखदेवे ने बताया कि उन्होंने कहा कि विजयदशमी पर्व, सद्मार्ग पर चलने एवं आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा से विजयदशमी पर होने वाले कार्यक्रमों से सामाजिक समरसता सुदृढ़ होती है। इसी के साथ सुखदेवे ने इन पर्वों को पारस्परिक सद्भाव एवं सौहार्द के वातावरण मनाने व नवरात्रि, दशहरा, दुर्गा पूजा तथा मूर्ति विसर्जन जैसे त्योहारों के दौरान उन्होने युवा एवं बच्चों सहित गणमान्य नागरिकों को सतर्क रहने व आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की।
पूर्व विधायक मधु भगत ने दिव्यांग और अनाथ बच्चों के साथ मनाया जन्मदिन 

             
राष्ट्र चंडिका, बालाघाट(पंकज डहरवाल)। परसवाड़ा क्षेत्र के पूर्व विधायक मधु भगत ने आज अपना जन्मदिन बालाघाट में कांग्रेसियों के साथ सेवाभाव के साथ मनाया। आज अपने जन्मदिन पर पूर्व विधायक मधु भगत ने जिले के सीडब्ल्युएसएन छात्रावास में अनाथ और दिव्यांग बच्चों के साथ जन्मदिन का केक काटकर बच्चों के बीच खाद्य सामग्री का वितरण किया। यहां बच्चों और छात्रावास प्रबंधन को पूर्व विधायक मधु भगत ने आश्वस्त किया कि छात्रावास के बच्चों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जायेगा और जिसकी भी जरूरत होगी, उसे पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जायेगा। यहां बच्चों के साथ पूर्व विधायक मधु भगत और कांग्रेसियों ने लंबा वक्त बिताया और बच्चों को पारिवारिक माहौल देने का काम किया। इस दौरान युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रिकाब मिश्रा, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष दयाल वासनिक, नरेन्द्र मेश्राम, अनूपसिंह बैस, अल्लारक्खा, मकसुद खान, शमीम सिद्दीकी, अधिवक्ता संजय गौतम सहित अन्य युवा कांग्रेसी साथी मौजूद थे। जिसके बाद पूर्व विधायक मधु भगत के जन्मदिन पर सेवादल द्वारा जिला चिकित्सालय में रक्तदान किया गया। यहां पीड़ित मानवता के सेवार्थ कांग्रेसी प्रशांत मोहारे ने रक्तदान किया। इस दौरान कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी, राधेश्याम सिंघनधुपे, दिनेश पटेल, अमित लिल्हारे सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद थे।

Saturday, 5 October 2019

मुलना स्टेडियम में लगेगी ग्रास फिल्ड और बनेगा एथलेटिक्स ट्रेक 

श्रमजीवी पत्रकार संघ के मैदान बचाने की मांग पर कलेक्टर ने जताई सहमति, श्रमजीवी वाटिका पहुंचे कलेक्टर 


राष्ट्र चंडिका बालाघाट। कलेक्टर दीपक आर्य आज श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा मुलना मैदान के पास संरक्षित की गई श्रमजीवी वाटिका पहुंचे और यहां उन्होंने पत्रकारों के साथ समय बिताया। अतिथि देवो भवः की परंपरा के तहत श्रमजीवी पत्रकार संघ के साथियों और विभिन्न खेल संगठन पदाधिकारी और खिलाड़ियों ने कलेक्टर दीपक आर्य का स्वागत पुष्पहार से किया। इस दौरान श्रमजीवी पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष इंद्रजीत भोज ने युवा, उर्जावान कलेक्टर दीपक आर्य के जिले में विकास कार्याे को बढ़ावा दिये जाने की सराहना करते हुए मांग की, कि बालाघाट मंे खिलाड़ियों के लिए स्थित मुलना मैदान और उत्कृष्ट विद्यालय मैदान को संरक्षित किया जायें। जिसे राजनीतिक या व्यवसायिक प्रयोजन के उपयोग से रोका जायें। जिससे खिलाड़ियों को खेलने के लिए उपयुक्त मैदान मयस्सर हो सके। इसके अलावा खिलाड़ियों के रूकने और मुलना मैदान को ग्रास फिल्ड में परिवर्तित कर यहां एथलेटिक्स का टेªक कोर्ट बनाया जायें और मुलना मैदान में होने वाली 26 जनवरी की परेड पुलिस ग्राउंड में कराई जाये। श्रमजीवी पत्रकार संघ अध्यक्ष एवं खिलाड़ी इंद्रजीत भोज ने उत्कृष्ट विद्यालय मैदान को संरक्षित करने के लिए उसके चारो ओर स्टेप्स निर्माण की पहल, श्रमजीवी वाटिका के पास डे-केयर सेंटर और नगरपालिका के व्हालीवॉल मैदान को सिंथेटिक कोर्ट में तब्दील किये जाने की प्रमुख मांगो को कलेक्टर दीपक आर्य के समक्ष रखा। इस दौरान एक मांगपत्र भी उन्हें संघ की ओर से सौंपा गया। जिसको लेकर बतौर अतिथि श्रमजीवी वाटिका में पहुंचे कलेक्टर दीपक आर्य ने मैदानों के संरक्षण पर सहमति जाहिर करते हुए आश्वस्त किया कि बालाघाट के मुलना मैदान को ग्रास फिल्ड में परिवर्तित करने के साथ ही एथलेटिक्स ट्रेक बनाया जायेगा। जिसके लिए पर्याप्त फंड है, जिसके लिए उन्होंने खेल एवं क्रीड़ा अधिकारी श्री राणा को निर्देशित भी किया। उन्होंने कहा कि मुलना मैदान को संरक्षित करने के लिए टूटी बाउंड्रीवाल को सुधारा जा रहा है और मैदान सुरक्षित रहे, इसलिए यहां सीसीटीव्ही भी लगाया जाना है। साथ ही उन्होंने खेल में शामिल होने वाले खिलाड़ियों के रूकने की श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा सामने लाई गई समस्या पर आश्वस्त किया कि मैदान परिसर में ही खिलाड़ियो के रूकने के लिए और कमरो का निर्माण कराया जायेगा। उन्होने दानवीर मुलना जी के योगदान को अविस्मरणीय बनाने के लिए उनकी जन्मजयंती तक उनके समाधी स्थल पर गेट बनाये जाने का भी भरोसा दिलाया। मुलना मैदान में पहुंचकर जानी समस्या कलेक्टर दीपक आर्य श्रमजीवी पत्रकार संघ के आमंत्रण पर श्रमजीवी वाटिका पहुंचे। जहां संबोधन कार्यक्रम के उपरांत उन्होंने श्रमजीवी पत्रकार संघ अध्यक्ष, गणमान्य नागरिक और खेल संगठन एवं खिलाड़ियों के साथ मुलना मैदान का निरीक्षण किया और वहां के हालत का जायजा लिया। जहां पर ही उन्होंने पूर्व निर्धारित प्लानिंग को निरस्त कर श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा मुलना मैदान में ग्रास फिल्ड और ट्रेक बनाये जाने पर गंभीरता दिखाते हुए कार्य की योजना बनाये जाने के निर्देश दिये। श्रमजीवी वाटिका में किया गया पौधारोपण श्रमजीवी वाटिका में कलेक्टर दीपक आर्य के अलावा श्रमजीवी पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष इंद्रजीत भोज, वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र शुक्ला, पी.आर. भैरम, समाजसेवी नीरज तिवारी, अधि. जहरलाल अंगारे, बी.एस. पालीवाल, राजेश चौहान, राजेश नगपुरे, श्रवण शर्मा, रविन्द्र उमाटे, रजनीश राहंगडाले, नईम खान, गुड्डा चौरसिया, गुड्डा राठौर, योगेश बब्लु देशमुख, छोटेलाल बिसेन, बिसन नगपुरे, मुन्ना कुरील, शंकर कन्नौजिया, महेन्द्र रामटेके, सुनील कोरे, अनुराग झा, माही चौहान, गुड्डु उईके, शहबाज खान, श्री मुंजारे सहित पत्रकार साथी, खेल संगठन पदाधिकारी, खिलाड़ियों ने मिलकर पौधारोपण किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में कबड्डी खिलाड़ियों की कमी नहीं-राजा लिल्हारे    




राष्ट्र चंडिका(पंकज डहरवाल)बालाघाट। बालाघाट नगर से लगे ग्राम पंचायत कुम्हारी में 3 एवं 4 अक्टूबर को दो दिवसीय जिलास्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिसमें जिले की 24 टीमो सहित पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र ओर छत्तीसगढ़ की टीम ने भी अपनी सहभागिता दर्ज की थीं प्रतियोगिता का 4 अक्टूबर को समापन, मुख्य अतिथि के रूप में युवा समाजसेवी राजा लिल्हारे, विशेष अतिथि संतलाल उपवंशी, जनपद सदस्य प्रेमलाल दशहरे, समाजसेवी सावन पिछोड़े के आतिथ्य में किया गया। जहां जिलास्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय टीमों को क्रमशः प्रथम विजेता राजोबाटोला टीम को युवा समाजसेवी राजा लिल्हारे की ओर से 8 हजार रूपये, द्वितीय पुरस्कार कौडीटोला टीम को जनपद सदस्य प्रेमलाल दशहरे की ओर से 5 हजार रूपये और तृतीय पुरस्कार बालाघाट टीम को सरपंच प्रतिनिधि संतलाल उपवंशी द्वारा 3 हजार रूपये की राशि से पुरस्कृत किया गया। दो दिवसीय जिलास्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता के समापन पर मुख्य अतिथि की आसंदी से अपने विचार रखते हुए युवा समाजसेवी राजा लिल्हारे ने कहा कि कबड्डी का खेल, हमारा पुरातन खेल है, जो प्रायः हर क्षेत्र में खेला जाता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभायें कबड्डी खेल में आगे आ रही है जरूरत है उन्हें उचित मार्गदर्शन और मंच की, ताकि वह भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सके। उन्होंने विजेता और उपविजेता टीम को बधाई देते हुए कहा कि जीत और हार एक सिक्के के दो पहलु है, जो जीता है, वह अपने जीत को इसी तरह बनाये रखे और जो पराजित हुआ है, वह अपनी कमियों में सुधार करें, जिससे की वह भविष्य में जीत का लक्ष्य पार कर सकें। प्रतियोगिता में जिला कबड्डी संघ सचिव रमेश दीक्षित, सालिकराम डोमने, शीतल चौके, रामकिशोर राहंगडाले, मुरारी पिछोड़े, आयोजनकर्ता इमरान खान, रविकांत रनगिरे, राजेन्द्र राऊत, मंगलेश बिसाने, संतलाल चौधरी, शांतिलाल चौधरी, राजा माहुले, राजु दशहरे, बंटी दमाहे, भागीरथ बिसाने, लालु मस्करे, विजय, भोला माहुले, तुसार, सोनु, राहुल, समाज अध्यक्ष मनोज लिल्हारे, सहेजलाल उपवंशी, बब्लु दशहरे, राधे डीलर, बुधराम दमाहे, चैनलाल उराड़े, जीवन वाघाड़े, असलम भाईजान, नंदु रनगिरे सहित ग्रामीण मौजूद थे।


करोड़ों की लागत से बना बांध का बड़ा हिस्सा बहा

-लगभग 9 एकड़ में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद
-समनापुर जनपद के ग्राम रनगांव में बने बांध मामला
-बांध फूटने से बर्बाद हुई फसल
 राष्ट्र चंडिका (पप्पू पड़वार)  डिंडौरी। जिले भर में हो रही बारिश ने अब सरकारी निर्माण कार्यों की पोल खोलना शुरू कर दिया है। मामला समनापुर विकासखंड के रनगांव का है, जहां जलसंसाधन विभाग के द्वारा 4 करोड़ 70 लाख की लागत से बनाए गए बांध का एक बड़ा हिस्सा टूटकर बह गया है। बांध का बड़ा हिस्सा धराशायी होने से करीब 9 एकड़ में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े इस बांध ने इस कदर तबाही मचाई है कि जहां पहले हरे भरे खेत नजर आते थे अब वहां सिर्फ बांध का मलबा और पानी दिखाई दे रहा है। खेत में लहलहाती धान की फसल बांध के मलबे से पटा हुआ है वही कई खेत तो दरिया में तब्दील हो गए हैं। बांध का हिस्सा धराशायी होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। बांध का हिस्सा रविवार को बहना बताया जा रहा है।

भ्रष्टाचार करने का आरोप
रनगांव में जलसंसाधन विभाग के द्वारा करोड़ों की लागत से हिरौंदी नदी में बांध का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके निर्माण कार्य में ग्रामीणों ने विभाग के अधिकारीयों पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने बताया कि बांध पानी से लबालब भरा हुआ था, लेकिन एक बड़ा हिस्सा धराशायी होने के कारण पानी व्यर्थ में बह रहा है और अब बांध खाली होने की कगार पर पहुंच गया है। किसानों ने अपनी बर्बादी का जिम्मेदार जलसंसाधन विभाग के जिम्मेदारों को बताते हुए बांध के निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। जलसंसाधन विभाग के अधिकारी गोलमोल बातें कर अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
इनका कहना है
बारिश से नुकसान हुए इलाकों में जल्द सर्वे कराने का आदेश जारी दिए गए है। किसानों को हरसंभव मदद किया जाएगा। निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही की जांच कराई जाएगी।
ओमकार मरकाम
कैबिनेट मंत्री
नरसिंहपुर जिले में फिर बिक गई पट्टे की जमीनें गाडरवारा तहसील के बढ़ियाघाट और खामघाट का मामला

राष्ट्र चंडिका (अमर नौरिया) नरसिंहपुर। जिले में नर्मदा तटीय क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ शासकीय पट्टे की भूमि पर रसूखदारों के कब्जे किये जाने का मामला गोटेगांव तहसील के बाद एक बार फिर तेन्दूखेड़ा विधानसभा के अंतर्गत गाडरवारा तहसील की लिंगा ग्राम पंचायत के खामघाट में सामने आया है ...! मिली जानकारी के अनुसार खामघाट गांव में कुछ वर्षों पूर्व एक निजी कंपनी को शुगर मिल लगाने हेतु 87.557 हेक्टेयर शासकीय भूमि आवंटित की गई थी किंतु उक्त शासकीय भूमि आवंटन होने के बाद भी उस पर शुगर मिल का निर्माण नहीं किया गया था और वह भूमि वापस मध्य प्रदेश शासन के रूप में दर्ज होकर राजस्व विभाग के पास सुरक्षित हो गई थी, तथा शासन द्वारा उक्त भूमि को कृषि प्रयोजन हेतु 43 व्यक्तियों के नाम से पट्टे जारी कर दिए गए थे एवं 12 व्यक्तियों के नाम से भूमि स्वामी हक में वह भूमि दर्ज हो गई है जिस बात को लेकर क्षेत्रीय विधायक संजय शर्मा ने गत विधानसभा सत्र में इसपर सवाल उठाया था । गौरतलब है अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन जो लोग हैं उन्हें शासन द्वारा पूर्व से ही शासकीय भूमि के पट्टे कृषि करने के प्रयोजन से प्रदान किए गए हैं । कई मामलों में इन भूमियों को रसूखदार और दबंगों के द्वारा येन केन प्रकारेण खरीद लिया जाता है ।  वर्तमान में खामघाट में सामने आये इस मामले में जिसमें की गरीब किसानों और कमजोर वर्ग के लोगों को जो पट्टे की कृषि भूमि थी उस पर रसूखदारों ने कब्जा जमा कर उनके हक की भूमि को अपने नाम से दर्ज करा लिया है ,यह जमीन कैसे उन रसूखदारों के नाम दर्ज हो गई यह सवाल अब उठने लगे हैं जिस पर जांच किये जाने की मांग उठ रही है । नरसिंहपुर में सरकारी जमीनों के खरीदने और बेचने के मामले और फर्जीवाड़ा बार बार उजागर होते हैं तो शासन प्रशासन इस पर पहले से ही अपनी ओर से कार्रवाई क्यों नहीं करता वह ऐसे मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच क्यों नहीं करता है,गाडरवारा तहसील के बढ़ियाघाट में भी कुछ समय पहले स्थानीय ग्रामीणों ने कुछ रसूखदारों पर जमीनों पर कब्जे करने और उनके द्वारा उन्हें धमकाने के मामले में अनुविभागीय दंडाधिकारी, गाडरवारा और करेली पुलिस थाने में शिकायत कर जांच और कार्यवाही की मांग थी जिस पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई । कुछ इसी तरह का एक मामला कुछ समय पूर्व गोटेगांव तहसील में सामने आया था जिसमें लगभग 70 गरीब पट्टेधारियों की भूमि को प्लांट लगने की बात कहकर उनको उनकी भूमि से बेदखल कर दिया गया था तब उन पीड़ित किसानों की आवाज तत्कालीन कांग्रेस विधायक महिदपुर सुश्री कल्पना पारुलेकर ने विधानसभा में उठाई थी मिल रही जानकारी के अनुसार सरकारी जमीनों को बेचे और खरीदे जाने के मामले की एक जांच टीम बनाकर जांच की कार्यवाही की जा रही है किंतु यह जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी या फिर हर मामलों की तरह इस मामले में आपसी संबंधों और नफा नुकसान देखकर सामंजस्य की प्रक्रिया से हल होगी ।

Thursday, 3 October 2019

डोंगरमाली में मनाई गई महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती 

राष्ट्र चंडिका(पंकज डहरवाल)बालाघाट  । जिले के वारासिवनी तहसील के ग्राम डोंगरमाली में महात्मा गांधी जयंती पर पर में गायत्री उच्च्त्तर माध्यमिक विधालय डोंगरमाली, शासकीय माध्यमिक एवं हाई स्कूल डोंगरमाली, गंगा उच्च्त्तर माध्यमिक विधालय डोंगरमाली, एवं ग्राम पंचायत डोंगरमाली के सहयोग से गांधी सभा मंच पर गांधी जी की 150 वीं जयंती हर्षौल्लास के साथ मनाई गई। ईस अवसर पर सर्वप्रथम ग्राम के वरिष्ट नागरिक गणों के द्वारा गांधी जी की प्रतिमा का वंदन माल्यार्पण किया गया। तथा स्कूल के बच्चों के द्वारा स्वच्छता रैली का ग्राम में भरण कर स्वच्छता, जल संरक्षण एवं प्लास्टिक मुक्त का संदेश दिया गया। ईस अवसर पर गायत्री उच्च्त्तर माध्यमिक विधालय डोंगरमाली प्राचार्य श्री जे,आर,बिसेन जी के मार्गदर्शन और इंडिया स्टार अवार्ड युवा अजय सिंह धुर्वे के नेतृत्व में बस स्टेंड डोंगरमाली से अवन्ती चौक भेंडारा तक 2 किलोमीटर तक मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। ईस मैराथन दौड़ में स्कूल के बच्चों के साथ क्षेत्र के युवाओं ने भाग लिया। जिसमे महिला वर्ग में प्रथम स्थान पर गायत्री उच्च्त्तर माध्यमिक विधालय डोंगरमाली की छात्रा ज्ञानेश्वरी खजरे, द्वितीय स्थान पर स्वाति बणोटे एवं तृतीय स्थान पर हीना मेश्राम रही ईसी तरह पुरुष वर्ग में प्रथम स्थान पर ग्राम सतोना के युवा मिणेष पांचे, द्वितीय स्थान पर रवि माने, एवं तृतीय स्थान पर दीपक बाहें रहे। इन मैराथन दौड़ विजेताओ को 150 वीं गांधी जयंती कार्यक्रम में उपस्तिथ मुख्य अतिथि सरपंच श्रीमती सुरुचि अशोक लिल्हारे, डॉ. के आर कोल्ते जी, भेंडारा पूर्व सरपंच श्री अरविंद बंसोड़ जी, एवं अन्य वरिष्ट गण के हस्ते शील्ड मेडल तथा अजय सिंह धुर्वे एवं सलमान शेख के द्वारा सांत्वना राशि से सम्मानित किया गया। ईस अवसर पर अजय सिंह धुर्वे के द्वारा अतिथियों को कपड़े से बना थैला भेंट कर प्लास्टिक मुक्त का संदेश दिया गया एवं पंचायत सचिव श्री नरेन्द्र ठाकरे के द्वारा स्वच्छता ही सेवा की शपथ दिलाई गई। ईस अवसर पर सरपंच श्रीमती सुरुचि अशोक लिल्हारे, डॉ. के आर कोल्ते, भेंडारा पूर्व सरपंच श्री अरविंद बंसोड़, श्री अशोक लिल्हारे, ईश्वरदयाल उके, गजलाल चौधरी, खुमान जी टेटे, श्री नरेन्द्र ठाकरे, गायत्री उच्च्त्तर माध्यमिक विधालय डोंगरमाली के प्राचार्य श्री जे एल बिसेन सर, शिक्षक के के सोनवाने, जी आर चिखले, सचिन मेश्राम, जयश देशभरतार, महेश कोकोटे, सीमा लिल्हारे, प्रतीक्षा बंसोड़ एवं शाला परिवार, शासकीय माध्यमिक शाला डोंगरमाली के प्रभारी प्राचार्य श्री सी एस मेश्राम सर, शिक्षक मनोज सैयाम, शासकीय हाई स्कूल डोंगरमाली के प्रभारी प्राचार्य श्रीमती आशा नागपुरे, शिक्षक श्री लिल्हारे सर, जे एस तुरकर मेम, गंगा उच्च्त्तर माध्यमिक विधालय डोंगरमाली के शिक्षक श्री कुलदीप मसखरे, तरुण मसखरे एवं शाला परिवार, इंडिया स्टार अवार्डी अजय सिंह धुर्वे, युवा आइकन सलमान शेख, शुभम डहाके, शमीम शेख, नितेश पानेकर, लल्ला मसखरे, प्रशांत चौबे एवं क्रांति युवा संगठन डोंगरमाली के सदस्यो का कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान रहा।
खैरलांजी से आरंभा मार्ग जर्जर , सड़क से उखड़ गया डामर
 राष्ट्र चंडिका,खैरलांजी । खैरलांजी तहसील मुख्यालय से खुरसीपार आरंभा मार्ग जर्जर हो गया है । मार्ग में जगह-जगह से डामर की परत उखड़ कर गढडो में तब्दील हो गई जिसकी वजह से आवागमन प्रभावित हो जाता है यह मार्ग करीब 12 किलोमीटर लम्बा मार्ग है , प्रतिदिन इस मार्ग से सैकड़ों वहान आवाजाही करते हैं जो अपने गंतव्य की ओर सफ़र तय करते हैं । ग्रामीणो ने बताया कि इस मार्ग का निर्माण करीब पांच वर्षों के पहले प्रधानमंत्री मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़क का निर्माण कार्य किया गया था । यह मार्ग सीधा ग्रामीण अंचलों से होते हुए तहसील मुख्यालय को जोड़ता है जिसकी वजह से यह मार्ग से खूब आवाजाही होती हैं ।राहगीरों रोज अपने कामकाज के सिलसिले से जनपद पंचायत व तहसील में इसी मार्ग से आना जाना करते हैं सड़क में अनेक स्थानों पर गड्ढे हो गये हैं और डामर की परत निकल गई जिसके कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है । , राहगीरों ने बताया कि मार्ग खराब होने के कारण मिनटों की दूरी को तय करने में अधिक समय लगता है गाड़ी चालक सावधानी पूर्वक मार्ग से आना जाना करते हैं ताकि दुर्घटना न हो ।
पूर्व में विभाग के द्वारा जर्जर सड़क का सुधार कार्य भी किया गया । इस दौरान क्षतिग्रस्त सड़क के गड्ढो का डामर से भराव भी कराया गया लेकिन भारी वहान जाने व निम्न स्तर का सुधार कार्य होने से सड़क में पुन गड्ढे हो गये जिसका खामियाजा राहगीरों उठाना पड़ रहा है तथा आने जानें में परेशानी होती है । जागरूक राहगीरों ने सड़क का सुधार कार्य करने की मांग की । इनका कहना है यह मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है जगह-जगह से सड़क का डामर निकल गया है और गड्ढे हो गये हैं जिससे आवागमन प्रभावित होता है, मार्ग का सुधार कार्य होना चाहिए । राकेश बनोटे पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष खैरलांजी
परसवाड़ा में मनाई गई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वी जयंती रैली निकाल बच्चो ने दिया स्वच्छता का संदेश परसवाड़ा 

राष्ट्र चंडिका बालाघाट (पंकज डहरवाल)2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर शासकीय विद्यालयों में शालेय परिवार सहित गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में उन्हें याद करते हुए दीप प्रज्वलित करते हुए उन्हें श्रृदधा सुमन अर्पित किया गया। इस अवसर पर बच्चों के द्वारा बापू की याद में उनकी जयजयकार के नारे लगाकर नगर को गुंजायमान किया गया। वहीं प्रभात फेरी के दरमियान बच्चों के द्वारा स्वच्छता का संदेश, सिंगल यूज पालिथीन से पर्यावरण पर बढ़ते दुष्प्रभाव, धूम्रपान से हानि, अपने गांव -नगर सहित विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखने सहित अन्य संदेश दिये गए। इस दौरान परसवाड़ा व्यापारी संघ द्वारा रैली का स्वागत करते हुए उनके दिए हुए संदेश को जन जन तक पंहुचाने की बात कही गई, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्कूल प्रांगण में छात्र छात्राओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रामों की प्रस्तूति दी गई, वहीं बच्चों को स्कूल में बापू के जीवन चरित्र पर आधारित फिल्म भी दिखाई गई। कन्या हाई स्कूल में मनाई गई बापू की जयंती राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वी जयंती के अवसर पर शासकीय कन्या हाईस्कूल परसवाड़ा में भी बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए दीप प्रज्जवलित कर श्रृदधा सुमन अर्पित किए गए, इस दौरान स्कूल परिसर में जनपद पंचायत परसवाड़ा के सीईओ रितेश चौहान, जनपद अध्यक्ष सुशीला सरोते सहित अन्य जनप्रतिनिधियों गणमान्य नागरिको एवं स्कूली बच्चों के द्वारा साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया गया। वहीं सभी के द्वारा स्वच्छता बनाए रखने को लेकर शपथ भी ली गई। इस दौरान सिंगल यूज पालीथिन का उपयोग न करने की समझाईश देते हुए जनपद अध्यक्ष श्रीमति सरोते के द्वारा कपड़ों के थैले का वितरण किया गया। वहीं नशामुक्ति, अस्पृश्यता निवारण तथा स्वच्छता को लेकर संदेश दिया गया। इस दौरान संस्था प्रमुख डी डी ठाकरे, महेन्द्र गनवीर, श्याम पटले, बी आर सी एच के बघेल, प्रमेन्द्र श्यामकुवर, सहित स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।
हनी ट्रैप कांड: आरोपियों के ‘मेरा प्यार’ और ‘पंछी’ थे कोडवर्ड 


राष्ट्र चंडिका भोपाल. मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप कांड से एक के बाद एक परतें उघड़ती जा रही हैं और जो तस्वीर उभर रही है, वह और ज्यादा चौंकाने वाली है। पकड़ी गई महिलाओं के पास से एसआईटी (विशेष जांच दल) के हाथ एक डायरी लगी है, जिसमें शिकार बनाए गए लोगों से वसूली गई रकम और बकाया का तो ब्यौरा है ही, साथ ही उपयोग में लाए जाने वाले कोडवर्डों का भी जिक्र है। ‘मेरा प्यार’ और ‘पंछी’ इस गिरोह के प्रमुख कोडवर्ड थे। कई बार कोडवर्ड ‘वीआईपी’ का भी उपयोग किया गया।सूत्रों के अनुसार, हनी ट्रैप मामले में पकड़ी गई पांच महिलाओं में से एक जो रिवेरा टाउन में रहती है। उसके पास से कई सौ विडियो क्लिप और तस्वीरें तो मिली ही हैं, साथ ही एक डायरी भी सामने आई है। इस डायरी में बीते कई वर्षों का लेखा-जोखा है। डायरी में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़े कई नेताओं के नाम स्पष्ट तौर पर हैं और उनसे वसूली गई व बकाया रकम का भी जिक्र है।वसूली गई रकम का पूरा जिक्र!  सूत्रों से कुछ कागजात मिले हैं, जो एक महिला की डायरी के पन्ने बताए जा रहे हैं। एजेंसी का कहना है कि वह डायरी के इन पन्नों की पुष्टि नहीं करती, लेकिन इसमें मध्य प्रदेश में जिम्मेदार पद पर रहे एक नेता का नाम है, जो अब दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा कई पूर्व मंत्रियों व पूर्व सांसदों के नाम हैं। डायरी के ये पन्ने बता रहे हैं कि हनी ट्रैप गिरोह कोडवर्ड का इस्तेमाल किया करता था। कोडवर्ड थे- पंछी और मेरा प्यार। इन कोडवर्डों के साथ मुस्कुराते चेहरे और मुहब्बत के तीर वाले दिल का निशान भी बना हुआ है। इसके अलावा किस व्यक्ति से कितनी रकम मिली और कितनी बकाया है, इसका भी सिलसिलेवार ब्यौरा है। इन पन्नों से एक बात और साबित होती है कि एक व्यक्ति को शिकार बनाने में किस-किस की भूमिका रही और वसूली गई रकम में उसकी हिस्सेदारी कितने प्रतिशत की रही।‘वीआईपी’ कोडवर्ड की लिस्ट में बड़े नेता एसआईटी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि ‘पंछी’ कोडवर्ड का इस्तेमाल उस व्यक्ति के लिए किया जाता था, जो आसामी (अमीर शख्स) होता था और जिससे या तो बड़ी रकम ली जा चुकी होती थी या बकाया होती थी। इसके साथ ही गिरोह की सबसे कम उम्र की युवती के द्वारा जाल में फंसाए गए लोगों के लिए ‘मेरा प्यार’ कोडवर्ड को उपयोग में लाया जाता था। इसके अलावा कई बड़े नेताओं को ‘वीआईपी’ कोडवर्ड की श्रेणी में रखा जाता था। सूत्रों के अनुसार, डायरी में एक एनजीओ का भी जिक्र है। यह डायरी भी उसी महिला के पास से मिली है, जिसका पति एनजीओ चलाता है। डायरी की लिखावट उसी महिला की है या किसी और की, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। हस्तलिपि विशेषज्ञ या फरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो पाएगा। इंदौर पुलिस एटीएस की मदद से नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर पांच महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार कर चुकी है। क्लिपिंग की 4,000 से ज्यादा फाइलें मामले की जांच कर रही एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि पकड़ी गईं महिलाओं के मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव से बड़ी संख्या में विडियो क्लिपिंग मिली हैं। क्लिपिंग की 4,000 से ज्यादा फाइलें हाथ लगी हैं और कुछ तस्वीरें व ऑडियो-क्लिप भी बरामद हुए हैं। गिरोह की महिलाएं अपने जाल में फंसाए गए व्यक्ति की गुप्त तरीके से विडियो-क्लिप बनाती थीं। सिवनी से जुड़े कुछ युवक भी भोपाल में गर्म गोश्त के व्यापार में संलग्न पाये जाने पर पुलिस ने उन्हें अपना मेहमान भी बनाया है। इसके अलावा हनी ट्रेप मामले के प्रकाश में आने के बाद जिले के कुछ नेताओं के चेहरों की लाली भी उड़ी होने की चर्चाएं चौक चौराहों पर गरम दिख रही है। एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर अगर यकीन किया जाये तो शहर के पॉश कहे जाने वाले बारापत्थर इलाके में कुछ साल पहले हनी ट्रेप से जुड़ी एक महिला को देखा गया था। बारापत्थर क्षेत्र में सियासी नुमाईंदों के अलावा प्रशासन के अफसरान के निवास भी हैं।           ऐसे तो पुरातन में विष कन्याओं का इस्तेमाल राजा महाराजा करते आये है, पर आज के इस युग मे जल्द अमीर होने के लिए इनका सहारा लिया जा रहा है। खबर है कि सिवनी में भी कुछ नेता और ठेकेदार इस हनी ट्रैप के लपेटे में आ सकते है। पद और ठेके पाने के लिए इस डर्टी गेम का उपयोग सिवनी में होने की चर्चाएं जोरो पर है, तब से कुछ नेताओं व ठेकेदारों की जान साँसत में अटकी हुई है।
चिट्ठी कहो या पाती सुख-दुख की है साथी
 (ललित निबंध)
 प्रियतमा का पत्र- हमने सनम को ख़त लिखा ख़त में लिखा, दूर देश में वतन-से आई चिट्ठी मन भर जाती है- चिट्ठी आई है वतन से चिट्ठी आई है, सुहाने मौसम में नायक का गान- लिखा है ख़त तेरी यादों में, प्रेम की पुकार कहती है- चिठिये...लेजा-लेजा संदेशा मेरे यार का, वादियों में चहकते स्वर- प्यार के काग़ज़ पर दिल की क़लम से पहली बार सलाम लिखा, वियोग की पीड़ा दर्शाता भाव- कोई चिट्ठी ना संदेश जाने वो कौन से देश जहाँ तुम चले गए, संकोच भरी क़लम कहती है- कुछ लिखना है पर सोचती हूँ कैसे लिखूँ, इज़हार-ए-मोहब्बत का शरारती तरीक़ा- पहले प्यार की पहली चिट्ठी सजन को दे आ क़बूतर जा-जा-जा, युद्ध भूमि-से सैनिक की क़लम कहती है- संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं| ऐसे और भी अनेक पत्राश्रित गीत हैं जो मानवीय भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं| ये हमारे दैनंदिन जीवन में कभी न कभी झाँक ही जाते हैं| समय साक्षी है, चिट्ठियों ने इतिहास में अमिट चिहिन्न अंकित किये हैं, जिनके निशान कभी तो भाव सौन्दर्य की मिसाल बन सामने आते हैं; तो कभी दुःख के तिमिर को अभिव्यक्त करते हैं| आज जब मानव जीवन के नए पद सोपान चढ़ रहा है ऐसे में पत्र के महत्त्व के लिए गीत गागर पत्रिका के संपादक दिनेश प्रभात बड़ीसुंदर बात कहते हैं, “पत्रों में सुगंध होती है|” सच! आज भी जब कभी किसी का पत्र आता है तो मन प्रफुल्लित हो उठता है| चिट्ठी सुख-दुख बाँटने का सशक्त माध्यम है| प्राचीन काल से वर्तमान तक इसकी उपयोगिता अवर्णनीय है| यह माध्यम है संवादों का; सूचना का; व्यापार-वाणिज्य का; समाचार जगत का; कुछ खोने, कुछ पाने की खबर का; मित्रता बंध और विखंडन का; ख़ुशी और ग़म का; निंदाशास्त्र का; कभी ग़लत फ़हमियों तो कभी ख़ुश फ़हमियों का; अभिव्यक्ति है नौ रसों के नौ भावों का; कभी रूप है प्रेरणा का तो कभी निराशा का; मानव का मानव-से मानवीय और अमानवीय व्यवहारों का; यह स्रोत है हमारे जीवन में सूचनाओं के संप्रेषण का| सच ही तो है- “चिट्ठी की अपनी भाषा अपनी ज़ुबान होती है क्यों कि हर चट्ठी कुछ कहती है|” साधारण काग़ज़ पर लिखी चार पंक्तियाँ राजा को रंक और रंक को राजा बना सकती है| यह तो तय है कि सामर्थ्य का पिटारा है यह चिट्ठी| कभी आपके साथ भी हुआ होगा ऐसा कि अचानक किसी दिन आपको मिले अपनी अलमारी-से, ऊपर कमरे में राखी मेज़ की दराज़-से, बिल इत्यादी काग़ज़ फ़साने वाले तार-से कुछ पुरानी चिट्ठियाँ| दोस्तों की, माता-पिता की, परिजनों की, नौकरी संबन्धित, किसी पत्रिका की सदस्यता समाप्ती की सूचना, कुछ आमंत्रण, कुछ निमंत्रण, नए कोर्स सम्बन्धित जानकारी और आप खो जाओ उसी समय में जब वो वर्तमान थीं| महसूस किया होगा भावों की वही लहर जो तब उठी होगी| कहिये इस समय आपका अतीत आपके वर्त्तमान के साथ नहीं मिल जाता! पता है मुझे, ऐसा हुआ है, आखिर हमारा मूल जीवन लगभग एक सा ही तो है| क्या विचार है आपका, हैं न ये चिट्ठियाँ स्मृतियों के स्मृति-गुच्छ! संदेशों का आदान-प्रदान मानव का आदि स्वभाव है जो आज तक यथावत है| नगाड़े, क़बूतर, बाज़, हँस, ये प्राचीन संदेश वाहक रहे हैं| लघु दूरी पर संदेश प्रेषण के लिए शस्त्र धारी, बाणों में पत्र फँसा कर गंतव्य पर लक्ष्य करते| लंबी दूरी के संदेश, वाचिक, लिखित अथवा सांकेतिक रूप में मानव संदेश वाहकों द्वारा पंहुचाय जाते| इसी अनुक्रम में मेरा विचार है महर्षी नारद और अष्ट सिद्धी नव निधि के दाता, श्रीराम भक्त हनुमान ऐसे संदेश वाहक थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय संदेश संप्रेषण को संभव बनाया| हनुमान द्वारा श्रीराम का वाचिक और मुद्रिका रूप में सांकेतिक संदेश, माता सीता तक पंहुचाया गया; जिसका उत्तर सीता ने चूड़ामणी भेज कर दिया| इसी के साथ उन्होंने एक विद्वान् राजनयिक का दयित्व भी ख़ूब निभाया और परिस्थितिजन्य हो लंका दहन कर त्वरित यौद्धिक कार्यवाही को अंजाम दिया, जिसे आज की सर्जिकल स्ट्राइक कहा जा सकता है| इसी काल के एक और प्रसिद्ध दूत हैं, बालि पुत्र अंगद, जिसने रावण की राज्य सभा में उसका गर्व चूर किया| सीता हरण से आकुल राम ने वन-वल्लरियों और वन्य-जीवों से हाल जानना चाह- ‘हे खग-मृग हो मधुकर श्रेनी, तुम्ह देखी सीता मृगनैनी|” इसी प्रकार नारद जी द्वारा तीनों लोकों में भ्रमण की बात कही जाती है| द्वापर में योग योगेश्वर श्री कृष्ण पांडवो का संदेश ले संदेश वाहक रूप में स्वयं हस्तिनापुर गए थे| इससे पता चलता है संदेश वाहक कितना महत्वपूर्ण पद था, जिसका वध हर हाल में निषेध था| कथाएँ बताती हैं, हँस के संदेश से ही रजा नल और दमयंती का मिलन संभव हुआ| अपनी भूली भार्या शकुंतला को मुद्रिका-से ही रजा दुष्यंत पहचानते हैं| हुमायूँ रानी कर्णावती द्वारा रक्षाबंधन के साथ भेजे पत्र के परिणामस्वरूप उनकी सहायतार्थ आया | शिवाजी महाराज ने प्रशासनिक सुधारों के लिए अनेक प्रशासनिक आदेशों को संप्रेषित करवाया| अशोक ने सतम्भ लेखों के माध्यम से राजकीय आदेश आम किए, भारत पुत्री रानी दुर्गावती ने अकबर को पत्र के साथ सूत कातने का करघा भिजवाया था कि तुम आब बूढ़े हो गए हो घर पर सूत कातो| सांसारिक प्रताड़ना से दुखी मीरा बाई ने पदों में तुलसी को पत्र लिखा, जिसका उत्तर तुलसी ने भी पदों में ही दिया| आदीवासी समुदाय में पत्र के साथ क्या चीज़ रख कर भेजी जा रही है इसका बड़ा महत्त्व रहा; जैसे- पत्र के साथ लाल मिर्च और कँवल का फूल भेजने का आशय युद्ध संकेत था| भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी ऐसे ही रोटी और कंवल को विद्रोह-चिहिंन बनाया था। बाल-वधु मारू ने यौवन काल आने पर अपना संदेश तोते के माध्यम से अपने प्रियतम ढोला को भिजवाया| स्मरण करिए अनेक स्थानों पर प्राकृतिक उपादानों को संदेश वाहक के रूप में खुले ह्रदय-से अपनाया गया है; जैसे- मेघदूत में कालीदास ने मेघों के माध्यम से संदेश संप्रेषण संभव बनाया| इन सब अतीत की घटनाओं के स्मरण का ध्रुव-लक्ष्य यह सिद्ध करना है कि, चिट्ठी अतीत के व्यतीत को वर्तमान में ज़िन्दा रखते हुए भविष्य में यादों का पिटारा बनाने का एक सुंदर और सशक्त साधन है| महरुन्निसा परवेज़ अपने संस्मरण ‘चिट्ठी में बंद यादें’ में लिखती हैं,”नए संचार के माध्यमों की जलकुम्भी में सहज संदेशों के मनोहारी कँवल क्या गुम हो जाएंगे यह समय ही बताएगा|” आज कई विद्वानों के ख़त हमारे लिए मार्गदर्शक हैं; जैसे- नेहरू जी द्वारा अपनी बेटी इंदिरा को लिखे पत्र ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’, घनश्याम दास जी बिड़ला द्वारा अपने पुत्र बसंत कुमार जी बिड़ला को लिखा पत्र, अब्राहम लिंकन का पत्र उनके पुत्र के शिक्षक के नाम, स्वतंत्रोत्तर भारतीय सामाजिक दशा का कटु चित्र-चित्रण करता दरभंगा जेल से महात्मा गाँधी को लिखा नारायण सिंह का पत्र, योद्धा सन्यासी स्वामी विवेकानंद के पत्र, नाथूराम गोडसे द्वारा लिखा आत्मस्वीकृति एवं मृत्यु-पत्र इत्यादी अनेक ऐसे पत्र हैं जो स्वयं में एक अद्भुत दस्तावेज़ हैं| साहित्यिक गवाक्ष-से चिट्ठी-पत्री के संसार में झाँका जाए तो महान रचनाकारों की तत्कालीन चिट्ठियाँ कालांतर में कई पत्रिकाओं की शोभा बनी, जिनसे सीख ले कई और साहित्य सेवियों ने इस साहित्यिक जगत में कदम रखा| स्वयंभू प्रश्न सामने आता है, आख़िर ये चिट्ठी, पत्री, पाती, ख़त, पुर्जी, है क्या...? मित्रों! ये किसी काग़ज़, कपडे, गत्ते, पत्ते का छोटा सा तुकड़ा है जिसमें कुछ सामाजिक, व्यक्तिगत, व्यापारिक, राजनैतिक, शैक्षणिक अथवा सार्वजनिक संदेश, संकेत, निर्देश, आदेश इत्यादी लिखे, उकरे, छपे अथवा अंकित रहते हैं| डाक विभाग द्वारा अन्तर्देशी, पोस्टकार्ड, लिफ़ाफ़े, टेलीग्राम, रजिस्टर्ड डाक, स्पीड-पोस्ट, पार्सल इत्यादी रूप में पत्राचार को सुगम बनाने की व्यवस्था की गयी है| संचार क्रांती के बाद सोशल मीडिया ने संदेश संप्रेषण को बहुत सुगम और गतिशील बना दिया, जिसमे ईमेल, जीमेल, फ़ेसबुक, व्हाटसैप, इस्न्टाग्राम, ट्विटर, टिकटोक इत्यादी व्यव्स्थाएं उपलब्ध हैं| यह विज्ञान का कमाल है, पर एक बात विशेष ध्यान देने की है कि, इतनी उन्नती के बाद भी हम हस्त लिखित दस्तावेज़ों को विशेष महत्त्व देते हैं| यहाँ तक की धार्मिक भावनाएँ भी इससे अछूती नहीं हैं | जबलपुर के नर्मदा तट ग्वारीघाट के समीप स्थित श्रीराम लला मंदिर में विराजे श्री हनुमान जी को लोग अपनी-अपनी मन्नतें लिखवाते हैं इसी लिए इन्हें अर्जी वाले हनुमान जी कहा जाता है| इन सब से ज़ाहिर है, पत्र-आचार किसी न किसी रूप में हमारे चहों और वलयाकार में आच्छादित है| चिट्ठी का यह माया जाल कई प्रकार का होता है; मसलन- विषयानुरूप, निमंत्रण-पत्र, आमंत्रण-पत्र, संवेदना-पत्र, शोक-पत्र, सामान्य पत्र इत्यादि तथा शैली-शिल्प के आधार पर औपचारिक पत्र, जिसमें प्रमुखतः कार्यालयीन एवं व्यापारिक-पत्र आते हैं| अनौपचारिक पत्रों के अन्तर्गत वे सभी पत्र आते हैं जो औपचारिक नहीं हेते| पत्र चाहे कोई भी हो उसका भषा-शिल्प आकर्षक, सरल, स्पष्ट, मौलिक, संक्षिप्त, स्पष्ट उद्देश्य और विराम चिहिन्नों से परिपूर्ण होना चाहिए ये पत्रीय सौन्दर्य को सुनिश्चित करते हैं| इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पत्र भेजने वाले और पाने वाले का पूर्ण नाम और पता उल्लेखित हो| अपनी अक्षर-वाणी विराम के पूर्व यही कहूँगा, अतीत को वर्तमान और भविष्य से जोड़ने वाली चिट्ठी किसी न किसी संदेश को अवश्य वहन करती है इसीलिए सबका अपना-अपना मूल्य होता है| प्रगतिशील वसुधा में कवि बलराम गुमाश्ता की पंक्तियाँ कितनी सटीक हैं- “माँ गाँव में मरी, जिसकी सूचना मुझे भोपाल में तीन दिन बाद मिली| इस तरह मरने के बाद भी, मेरे लिए तीन दिन और ज़िंदा रही माँ| मैं माँ की मौत पर नहीं सूचना पर रोया|” भाव पूर्ति के लिए मैं स्वरचित पंक्तियों को पाठक न्यायलय के समक्ष प्रस्तुत करता हूँ- “चिट्ठी आशय है काग़ज़ का, बसता जिसमे संदेश कोई| वो मनोभाव की पाती है, सुख-दुःख का संदेश कोई| वो कल की बिसरी यादें हैं, वर्तमान का संदेश कोई| वो यादों का गुलदस्ता है, खट्टा-मीठा संदश कोई| हर कपड़ा, पत्ता भी चिट्ठी है, जिसमें लिखा संदेश कोई|” तो चलिए मित्रों! संदेश क्रांती में आए डायनामिक परिवर्तन को स्वीकारते हुए भारतीय डाक सेवा से भी जुड़े रहें और उसके द्वारा समय-समय पर चिट्ठी लेखन को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रमों का न केवल प्रतियोगी रूप में हिस्सा बने, बल्की चिट्ठी को अपने जीवन में पुनः स्थान दें| तो बस अब उठाइए क़लम और झट लिख भेजिए एक प्यारी-सी चिट्ठी अपनों को कि बनी रहे महक़ और खिला रहे यह पत्रों का गुलदस्ता हमेशा-हमेशा के लिए| विश्वास करिए बड़ा अच्छा लगेगा| वंदे...! 

      अखिलेश सिंह श्रीवास्तव कथेतर लेखक, दादू मोहल्ला- दादू साहब का बड़ा, संजय वार्ड, सिवनी- 480661 (म.प्र.) मोबाईल न.- 7049595861 ईमेल: akhileshvwo@gmail.com