पावर प्लांट के लिये दे दी जमीनें नौकरी के नाम पर छले गये गरीब आदिवासी
अमर नौरिया/राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर - प्रदेश में किसान आंदोलन के बाद हरकत में आई सरकार और प्रशासनिक अमला किसानों की जहां पर भी जैसी भी समस्या है उसके निराकरण को लेकर मुस्तैद दिखाई दे रहा है और इसके बाद जिस तरह से प्रदेश के अनेक जिलों से किसानों के द्वारा आत्महत्यायें की खबरें आ रहीं है इससे किसानों में अंदर ही अंदर सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट भी होने लगें हैं नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से लगे 17 गांवों के केंद्र बिंदु नयाखेड़ा गांव का देवमुरलीधर मंदिर प्रांगण भी इस किसान एकता क ा गवाह बना है और आगामी 23 मई को हजारों की तादाद में जिला मुख्यालय के जनपद मैदान में किसान एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपेगेंं ।
इस सब के बीच जिले की गोटेगांव तहसील के अंतगर्त आने वाले सिलारी, दलपतपुर, झांसीघाट सहित अन्य आसपास के गांवों के अनुसूचित जाति जनजाति के वे किसान भी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर इस किसान आंदोलन के बीच राहत मिल सके इसकी आस लगाये बैठें हैं । गोरतलब है कि इन गरीब भूमिहीन किसानों के लिये प्रदान की गई शासकीय भूमि जिसका पटटा शासन द्वारा उन गरीबों को प्रदान किया गया था उस भूमि को पावर प्लांट लगाये जाने के नाम औने पौने दाम से नौकरी दिलाने का लालच खरीद लिया गया था किंतु पिछले 7-8 साल बीत जाने के बाद न तो उक्त भूमि पर पावर प्लांट लग पाया और न ही उन गरीबों को नौकरी मिली ।
पावर प्लांट लगाये जाने की कवायदों के बीच लुुटे पिटे दर्जनों गरीब ग्रामीणों कइ्र्र बार ज्ञापन आदि सौंप कर अपने हक की मांग उठा चुकें हैं और सरकार व प्रशासन को बता चुके हैं कि शासन द्वारा उन्हें प्रदान की गई पटटे की भूमि से वे लोग अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे थे किंतु पावर प्लांट लगाये जाने की बातों में हमें उन्नत जीवन भय व दलालों का आश्रय लेते हुये उनकी जमीनों को खरीदा गया तथा हमारे जैसे लगभग 326 लोगों में से केवल 31 लोगों को कंपनी में नौकरी दी गई और वाकी लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया जिससे उन गरीबों के साथ रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया उनकी जमीनें भी चली गई और नौकरी भी नहीं मिली नतीजा यह हुआ कि वे आज मजदूरी के लिये दर दर भटक रहें हैं ।
इस संबेंध में जो जानकारी सामने आयी है उसके अनुसार मध्यप्रदेश शासन ेके राजस्व विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन,भोपाल के पत्र कं्रमाक एफ 12-4/04/सात/2-ए , भोपाल दिनांक 1/7/2008 के अुनसार वर्ष 2008 में निजी कंपनी टुडे होम्स एंड इन्फ्रास्टक्रचर प्रा लि द्वारा 2 गुणा 500 मेगावाट थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना हेतु जिला नरसिंहपुर की तहसील गोटेगांव के ग्राम सिलारी की 234.050 हेक्टेयर,ग्राम खमरिया की 30.394 हेक्टेयर,ग्राम झांसीघाट की 68.040 हेक्टेयर,ग्राम बूढ़ी मवई की 0.446 हेक्टेयर एवं ग्राम दलपतपुर की 17.096 हेक्टेयर इस तरह कुल 350.581 हेक्टेयर निजी भूमि अर्जित किये जाने का प्र्रस्ताव कलेक्टर नरसिंहपुर ने आयुक्त जबलपुर के माध्यम से प्रेषित किया जिस पर भूे अर्जन समिति ने विचारोपरान्त भू अर्जन किये जाने की सहमति दी गई थी जिसमें इस बात का उल्लेख स्पष्ट तौर पर किया गया था कि कंपनी जिनि कृषकों की भूमि अधिग्रहीत की जा रही है उन कृषकों के परिवार के कम से कम एक सदस्य को कंपनी में आदर्श पुनर्वास नीति में दिये गये निर्देेशों की अनुरूप नौकरी देगी ।
इस पूरे प्रकरण में महत्वपूर्ण बात यह रही थी कि शासकीय पटटै की कूषि भूमि के इस तरह से विक्रय किये जाने को लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्ष 2011 में यह मामला उठाया गया था । इतना सब कुछ होने के बाद स्थिति यह है कि कं पनी के द्वारा अभी तक उक्त भूमि पर पावर प्लांट न लगाये जाने से इन सैकड़ो लोगों के साथ आज भी जो मजाक किया जा रहा है उसकी सुनवाई कहीं भी नहीं हो रही है और वे अपनी कूषि भूमि बेचकर अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस कर रहें हैं एक ओर सरकार की लाख कोशिशें की वह किसानों के हित में फैसले ले रही है उसके बाद भी लगातार किसानों की आत्महत्यायें सरकार के दाबे पर सवाल उठा रहीं है तो ऐसे में नरसिंहपुर के धमना गांव में एक किसान ने भी अपनी जीवन लीला अपने हाथों से समाप्त कर ली ऐसे में सैकड़ों की संख्या में अपना सब कुछ लुटा चुका झांसीघाट,सिलारी,दलपतपुर ओर खमरिया गांव के गरीब किसानों पर सरकार व प्रशासन की नजरें कब तक पड़ेगी यह देखने वाली बात है ।
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