Saturday, 24 June 2017

ट्यूशनखोर दिखा रहे प्रेस की धौंस


क्या शालाओं मूें अध्यापन कार्य ठीक से नहीं होता?

क्या अध्यापक छात्र- छात्राओं को मार्गदर्शन नहीं देते?

क्या अभिभावको की मजबूरी है ट्यूशन अथवा कोचिंग करवाना

ऐसे तमाम सवाल समाज के लिए चुनौति बने हुए हैं। सिवनी नगर मुख्यालय में कक्षा आठवी के बाद से बच्चो को कोचिंग सेंटरो की शरण लेनी पड़ती है।
कोचिंग सेंटरो के संचालकों द्वारा कहा जाता है कि कोचिंग आने वाले बच्चों का कैरियर सवर जायेगा और वे उच्च पदो की नौकरी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं लेकिन देखा गया कि कोचिंग जाने वालो में अधिकांश विद्यार्थियों को उद्देश्य पढ़ाई करना नहीं बल्कि भोली भाली बालिकाओं को गुमराह करना होता है और बाद में क्या कहानी होती है यह बताने की जरूरत नहीं है। 

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। सुबह से शाम तक एसपी निवास के पास संचालित इन कोचिंग सेंटर मेें जाने वालो की संख्या हजारों में हुआ करती है बीते वषो के परिणाम बताते हैं। कोचिंग सेंटर के विद्यार्थियों में अधिकांश विद्यार्थी उत्तीर्ण तो हुए मगर उन्हें अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हुई। समाचार पत्रों में उन विद्यार्थियों की फोटो छपवाता जिन्होंने जिला एवं प्रदेश में टॉप किया है और इसका श्रेय कोचिंग सेंटरो को दिलवाना कहा तक न्यायसंगत है।
इतना ही नहीं अब तो कोचिंग सेंटर के संचालक बुराईयो को छुपाने के लिए अपने वाहनों में प्रेस लिखने लगे हैं और प्रेस की गरिमा पर कालिख लगाने का प्रयास में लगे हैं इतना ही नहीं इन्होंने अपने लूटपाट की दुकान को छुपाने के लिए अपने निवास में प्रेस कार्यालय भी पार्टनरशिप में दे रखा है। क्या इनके द्वारा किया जा रहा कृत्य न्यायसंगत है। प्रदेश सरकार शिक्षा में आ रही विसंगतियों को दूर करने के लिए नित नये प्रयोग कर रही है लेकिन ट्यूशन के कारण सारे प्रयोग असफल हो रहे हैं। पूर्व वर्षो में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती निर्मला पटले ने कार्यवाही भी की थी लेकिन परिणाम सिफर निकले। 
ट्यूशन जाने के नाम पर चौक चौराहो पर आवारा लड़के लड़कियो का जमघट को बेतुकी बाते होना आदि अब आम बात हो गयी है और दिनो दिन इन विद्यार्थियों के ऊपर से नियंत्रण समाप्त हो रहा है अत: प्रेस की धौंस दिखाकर ट्यूशन का धंधा करने वालो पर कार्यवाही की मांग की गई है। 
नहीं हैं सुविधाएं
शहर में जितने भी कोचिंग सेंटर चल रहे हैं वह छात्र.छात्राओं से मनमाफिक मोटी फीस तो बसूली जाती है पर सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं देते। एक बड़े हाल में 70 से 80 छात्र/छात्राओं को जमीन में बैठकर पढ़ाया जाता है। जहां पर छात्राओं को घंटों बैठे रहने के बाद भी न तो कूलर पंखों की व्यवस्था होती है और न ही शुद्ध पेयजल की और न ही पार्किंग की। दूसरी ओर भीड़ की आड़ में कुछ शरारती तत्व छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें भी करते हैं। उल्लेखनीय है कि ऐसी कोचिंग संस्थानों के समाचार हमारे द्वारा विगतांको में भी प्रकाशित किये जा चुके हैं लेकिन अब तक प्रशासन के कानो में जूं तक नहीं रेंगी वहीं शिक्षा विभाग में आंखे मूंदे यह सब खेल देख रहा है। नए जिला कलेक्टर से लोगों ने इस ओर ध्यान देने की जनापेक्षा जताई है। 

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