Saturday, 24 June 2017

काश कोई नर्मदा तट के गरीब किसानों की भी सुध ले लेता

पावर प्लांट के लिये दे दी जमीनें नौकरी के  नाम पर छले गये गरीब आदिवासी 


 अमर नौरिया/राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर - प्रदेश में किसान आंदोलन के बाद हरकत में आई सरकार और प्रशासनिक अमला किसानों की जहां पर भी जैसी भी समस्या है  उसके निराकरण को लेकर मुस्तैद दिखाई दे रहा है और इसके बाद जिस तरह से प्रदेश के अनेक जिलों से किसानों के द्वारा आत्महत्यायें की खबरें आ रहीं है इससे किसानों में अंदर ही अंदर सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट भी होने लगें हैं नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से लगे 17 गांवों के केंद्र बिंदु नयाखेड़ा  गांव का देवमुरलीधर मंदिर प्रांगण भी इस किसान एकता क ा गवाह बना है और आगामी 23 मई को हजारों की तादाद में जिला मुख्यालय के जनपद मैदान में किसान एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपेगेंं । 
इस सब के बीच  जिले की गोटेगांव तहसील के अंतगर्त आने वाले सिलारी, दलपतपुर, झांसीघाट सहित अन्य आसपास के गांवों के अनुसूचित जाति जनजाति के वे किसान भी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर इस किसान आंदोलन के बीच राहत मिल सके इसकी आस लगाये बैठें हैं । गोरतलब है कि इन गरीब भूमिहीन किसानों  के लिये प्रदान की गई शासकीय भूमि जिसका पटटा शासन द्वारा उन गरीबों को प्रदान किया गया था उस भूमि को पावर प्लांट लगाये जाने के नाम औने पौने दाम से नौकरी दिलाने का लालच  खरीद लिया गया था किंतु पिछले 7-8 साल बीत जाने के बाद न तो उक्त भूमि पर पावर प्लांट लग पाया और न ही उन गरीबों को नौकरी मिली । 
पावर प्लांट लगाये जाने की कवायदों के बीच लुुटे पिटे दर्जनों गरीब ग्रामीणों कइ्र्र बार ज्ञापन आदि सौंप कर अपने हक की मांग उठा चुकें हैं और सरकार व प्रशासन को बता चुके हैं कि  शासन द्वारा उन्हें प्रदान की गई पटटे की भूमि से वे लोग अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे थे किंतु पावर प्लांट लगाये जाने की बातों में हमें उन्नत जीवन भय व दलालों का आश्रय लेते हुये उनकी जमीनों को खरीदा गया तथा हमारे जैसे लगभग 326 लोगों में से केवल 31 लोगों को कंपनी में नौकरी दी गई और वाकी लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया जिससे उन गरीबों के साथ रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया उनकी जमीनें भी चली गई और नौकरी भी नहीं मिली नतीजा यह हुआ कि वे आज मजदूरी के लिये दर दर भटक रहें हैं ।
इस संबेंध में जो जानकारी सामने आयी है उसके अनुसार मध्यप्रदेश शासन ेके राजस्व विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन,भोपाल के पत्र कं्रमाक एफ 12-4/04/सात/2-ए , भोपाल दिनांक 1/7/2008 के अुनसार  वर्ष 2008 में निजी कंपनी टुडे होम्स एंड इन्फ्रास्टक्रचर प्रा लि द्वारा 2 गुणा 500 मेगावाट थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना हेतु जिला नरसिंहपुर की तहसील गोटेगांव के ग्राम सिलारी की 234.050 हेक्टेयर,ग्राम खमरिया की 30.394 हेक्टेयर,ग्राम झांसीघाट की 68.040 हेक्टेयर,ग्राम बूढ़ी मवई की 0.446 हेक्टेयर एवं ग्राम दलपतपुर की 17.096 हेक्टेयर इस तरह कुल 350.581 हेक्टेयर निजी भूमि अर्जित किये जाने का प्र्रस्ताव कलेक्टर नरसिंहपुर ने आयुक्त जबलपुर के माध्यम से प्रेषित किया जिस पर भूे अर्जन समिति ने विचारोपरान्त भू अर्जन किये जाने की सहमति दी गई थी जिसमें इस बात का उल्लेख स्पष्ट तौर पर किया गया था कि कंपनी जिनि कृषकों की भूमि अधिग्रहीत की जा रही है उन कृषकों के परिवार के कम से कम एक सदस्य को कंपनी में आदर्श पुनर्वास नीति में दिये गये निर्देेशों की अनुरूप नौकरी देगी । 
इस पूरे प्रकरण में महत्वपूर्ण बात यह रही थी  कि शासकीय पटटै की कूषि भूमि के इस तरह से विक्रय किये जाने को लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्ष 2011 में यह मामला उठाया गया था । इतना सब कुछ होने के बाद स्थिति यह है कि कं पनी के द्वारा अभी तक उक्त भूमि पर पावर प्लांट न लगाये जाने से इन सैकड़ो लोगों के साथ आज भी जो मजाक किया जा रहा है उसकी सुनवाई कहीं भी नहीं हो रही है और वे अपनी कूषि भूमि बेचकर अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस कर रहें हैं एक ओर सरकार की लाख कोशिशें की वह किसानों के हित में फैसले ले रही है उसके बाद भी लगातार किसानों की आत्महत्यायें सरकार के दाबे पर सवाल उठा रहीं है तो ऐसे में नरसिंहपुर के धमना गांव में एक किसान ने भी अपनी जीवन लीला अपने  हाथों से समाप्त कर ली ऐसे में सैकड़ों की संख्या में अपना सब कुछ लुटा चुका झांसीघाट,सिलारी,दलपतपुर ओर खमरिया गांव के गरीब किसानों पर सरकार व प्रशासन की नजरें कब तक पड़ेगी यह देखने वाली बात है । 

ट्यूशनखोर दिखा रहे प्रेस की धौंस


क्या शालाओं मूें अध्यापन कार्य ठीक से नहीं होता?

क्या अध्यापक छात्र- छात्राओं को मार्गदर्शन नहीं देते?

क्या अभिभावको की मजबूरी है ट्यूशन अथवा कोचिंग करवाना

ऐसे तमाम सवाल समाज के लिए चुनौति बने हुए हैं। सिवनी नगर मुख्यालय में कक्षा आठवी के बाद से बच्चो को कोचिंग सेंटरो की शरण लेनी पड़ती है।
कोचिंग सेंटरो के संचालकों द्वारा कहा जाता है कि कोचिंग आने वाले बच्चों का कैरियर सवर जायेगा और वे उच्च पदो की नौकरी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं लेकिन देखा गया कि कोचिंग जाने वालो में अधिकांश विद्यार्थियों को उद्देश्य पढ़ाई करना नहीं बल्कि भोली भाली बालिकाओं को गुमराह करना होता है और बाद में क्या कहानी होती है यह बताने की जरूरत नहीं है। 

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। सुबह से शाम तक एसपी निवास के पास संचालित इन कोचिंग सेंटर मेें जाने वालो की संख्या हजारों में हुआ करती है बीते वषो के परिणाम बताते हैं। कोचिंग सेंटर के विद्यार्थियों में अधिकांश विद्यार्थी उत्तीर्ण तो हुए मगर उन्हें अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हुई। समाचार पत्रों में उन विद्यार्थियों की फोटो छपवाता जिन्होंने जिला एवं प्रदेश में टॉप किया है और इसका श्रेय कोचिंग सेंटरो को दिलवाना कहा तक न्यायसंगत है।
इतना ही नहीं अब तो कोचिंग सेंटर के संचालक बुराईयो को छुपाने के लिए अपने वाहनों में प्रेस लिखने लगे हैं और प्रेस की गरिमा पर कालिख लगाने का प्रयास में लगे हैं इतना ही नहीं इन्होंने अपने लूटपाट की दुकान को छुपाने के लिए अपने निवास में प्रेस कार्यालय भी पार्टनरशिप में दे रखा है। क्या इनके द्वारा किया जा रहा कृत्य न्यायसंगत है। प्रदेश सरकार शिक्षा में आ रही विसंगतियों को दूर करने के लिए नित नये प्रयोग कर रही है लेकिन ट्यूशन के कारण सारे प्रयोग असफल हो रहे हैं। पूर्व वर्षो में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती निर्मला पटले ने कार्यवाही भी की थी लेकिन परिणाम सिफर निकले। 
ट्यूशन जाने के नाम पर चौक चौराहो पर आवारा लड़के लड़कियो का जमघट को बेतुकी बाते होना आदि अब आम बात हो गयी है और दिनो दिन इन विद्यार्थियों के ऊपर से नियंत्रण समाप्त हो रहा है अत: प्रेस की धौंस दिखाकर ट्यूशन का धंधा करने वालो पर कार्यवाही की मांग की गई है। 
नहीं हैं सुविधाएं
शहर में जितने भी कोचिंग सेंटर चल रहे हैं वह छात्र.छात्राओं से मनमाफिक मोटी फीस तो बसूली जाती है पर सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं देते। एक बड़े हाल में 70 से 80 छात्र/छात्राओं को जमीन में बैठकर पढ़ाया जाता है। जहां पर छात्राओं को घंटों बैठे रहने के बाद भी न तो कूलर पंखों की व्यवस्था होती है और न ही शुद्ध पेयजल की और न ही पार्किंग की। दूसरी ओर भीड़ की आड़ में कुछ शरारती तत्व छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें भी करते हैं। उल्लेखनीय है कि ऐसी कोचिंग संस्थानों के समाचार हमारे द्वारा विगतांको में भी प्रकाशित किये जा चुके हैं लेकिन अब तक प्रशासन के कानो में जूं तक नहीं रेंगी वहीं शिक्षा विभाग में आंखे मूंदे यह सब खेल देख रहा है। नए जिला कलेक्टर से लोगों ने इस ओर ध्यान देने की जनापेक्षा जताई है। 

Saturday, 17 June 2017

कबाड़ के कारोबार के नेटवर्क को खंगाले पुलिस तो खुलेगें कई राज

कबाड़ के कारोबार के नेटवर्क को खंगाले पुलिस तो खुलेगें कई राज


राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर /अमर नौरिया/जिले में बिजली के तारों की चोरी के मामले में कवाडिय़ों के द्वारा जिस बैखौफ तरीके से कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है इससे ऐसा लगता है कि कबाडिय़ों को मानों चोरी करते समय पुलिस का भय ही न हो । कुछ समय पूर्व गोटेगांव थाने के अंतगर्त एक मामला सामने आया था जिसमें की बिजली के तारों को एक ट्रक में भरकर जिस बैखौफ तरीके से ले जाते हुये कुछ लोग पकड़ाये थे इस मामले में सूत्रों से  मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर के कुछ चिंन्हित कबाडिय़ों के नाम सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने अपनी ओर से संबंधों की बुनियाद पर मामले को अपने तरीके से जांच की थी नतीजा यह हुआ था कि इस मामले में बड़ा पर्दाफाश हो जाता किंतु पुलिसिया कार्यवाही के चलते वह अपने पूर्ण अंजाम तक नहीं पहुंचा ।
मिली जानकारी के अनुसार गाडरवारा थाने के अंतगर्त ग्राम कौडिय़ा के पास से इसी तरह से बिजली के तारों को भरकर ले जाते हुये एक ट्रक को गाडरवारा पुलिस की मुस्तैदी से पकड़ लिया गया और जो जानकारी सामने आयी है उसके अनुसार नरसिंहपुर के किंन्हीं दो लोगों ने बाहर से माल लेकर आये एक ट्रक से माल परिवहन का सौदा कर कौडिय़ा से बिजली का तार भरकर ले जाने की बात की थी जिसके चलते पुलिसिया कार्यवाही के दौरान ट्रक के चालक और परिचालक धरपकड़े गये ।
नरसिंहपुर में जिस तरीके से कबाड़ की आड़ में चोरी को अंजाम दिया जा रहा है इससे लगता है कि इस पूरे रैकेट क े तार किसी बड़ी गिरोह से जुड़े हुये हैं जिसको यह  पूरी जानकारी रहती है कि उसे किस तरह से कहां से कबाड़ की आड़ में कितना माल उठाना है और जिस तरीके से दिन दहाड़े इस तरह से कामों को अंजाम दिया जाता है तो लगता है कि इनके पीछे जिनका संरक्षण है वे भी काफी पहुंंंचे लोग हैं जिसकी बजह से कबाड़ चोरी के जितने भी मामले आये हैं उनमें पुलिस इनके सरगनाओं तक नहीं पहुंच पायी है।
सूत्रों के अनुसार जिले में कबाड़ का कारोबार संचालित करने वाले कुछ लोगों ने कम समय में ही करोड़ों की संपत्ति जमा कर ली है पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अगर कबाड़ के कारोबारियों के द्वारा अल्प समय में कमाई गई संपत्ति का रिकार्ड तो खंगालेंगी तो कबाडिय़ों के पूरे नेटवर्क के राज भी खुल सकेंगें । वहीं कुछ कबाडिय़ों की संपत्ति को लेकर तो कुछ शिकायतें भी की गई हैं फिलहाल देखना यह है कि आखिर गाडरवारा पुलिस के द्वारा जो मामले में धरपकड़ की गई है उसके सूत्रधारों तक पुलिस के हाथ पहुंंच पाते हैं या नहीं । 


राष्ट्रचंडिका/मंडला/सोमेश चौरसिया/ स्थानीय हागगंज बाजार में चुन्नीलाल नन्दन कुमार जैन की दुकान से श्रीकृष्णा मिल तक बनी दुकानों तथा प्रस्तवित नई सब्जी मण्डी के बीच दुकानों के ऊपर जाने हेतु बनाई गई सीढ़ी का उपयोग विगत् कई सालों से सार्वजनिक मूत्रालय के रूप में हो रहा है। जिससे स्थानीय व्यापरियों में अत्याधिक रोष व्याप्त है देशबंधु से चर्चा के दौरान स्थानीय व्यापारियों द्वारा बताया गया की नगर पालिका परिषद मण्डला द्वारा श्री कृष्ण मिल स्टोर्स आटा चक्की के बाजू में महिला एवं पुरूष सार्वजनिक मूत्रालय बनाये गये थे जिसका उपयोग जन सामान्य द्वारा किया जाता रहा है परन्तु इसके बावजूद भी बाजार स्थित प्रश्नाधीन सीढ़ी का उपयोग सार्वजनिक मूत्रालय हेतु तत्वों द्वारा किया जाता रहा है। वर्तमान में सीढ़ी तथा उसके ऊपर के छत का प्लास्तर जीर्ण-शीणं हो गया है तथा आए दिन गिरता रहता है जिससे कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। व्यापारियों के दुकानों के बीच बने इस अघोषित मूत्रालय में सफाई एवं पानी की व्यवस्था नही है और न ही मान-मर्यादा के संदर्भ में दरवाजे की व्यवस्था हेै इस प्रकार की स्थिति में पेशाब की दुर्गन्ध से व्यापारियों का जीना हराम हो गया है, इस बाजार पर अधिकंाश दुकाने महिलाओं के सैादन्र्य एवं महिला  रेडीमेंट कपड़े, महिलाओं के पर्स व बैग इत्यादि की दुकाने है वहीं प्रतिदिन बदबू का सामना करना पडता है जिससे  उनके स्वास्थ्य पर विपरीत रूप से असर पडऩा स्वाभाविक है तथा डेंगू, चिकिंनगुनिया एवं अन्य संक्रामक बीमारियों के प्रकोप से इंकार नही किया जा सकता। इस अघोषित   मूत्रालय के दूसरी ओर प्रस्तावित सब्जी मण्डी की 33 से 37 नम्बंर की दुकान तथा उसके सामने छ:-आठ सब्जी दुकाने ऐसी होगी जहां से पेशाब करते व्यक्ति को खुली आखों से देखा जा सकेगा तथा ये सब्जी विक्रेता भी पेशाब की बदबू से वहां दुकान नही लगा सकेगें। व्यापारियों द्वारा विगत् तेरह वर्षो से इस अघोषित मूत्रालय को बंद करने हेतु अनेकों बार आवेदन प्रस्तुत किये गये परन्तु बीच में ही कुछ दिनों मूत्रालय बंद किया गया तथा श्रीकृष्ण मिल स्टोर आटा चक्की के पास महिला एवं पुरूष हेतु प्रथक-प्रथक मूत्रालय स्थापित किये गये परन्तु प्रस्तावित सब्जी मण्डी के निर्माण में बनाये गये मूत्रालयों को अलग कर दिया गया तथा ढाक के तीन पात की कहाबत चरितार्थ हुई तथा विभिन्न आवेदनों के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों रही। व्यापारियों की नगर पालिका प्रशासन से अपील है कि बाजार स्थित सीढ़ी में दीवार उठाकर अघोषित मूत्रालय को बंद किया जावें तथा प्रस्तावित सब्जी मण्डी में व्यापारियों व आम जनता के लिये महिला एवं पुरूष सार्वजनिक मूत्रालय का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जावें। 

जनविरोधी निर्णय के जनजागरण को लेकर निकलेगी शटल संदेश यात्रा

इटारसी सतना इटारसी शटल को पूर्वत: चलाये जाने की मांग को लेकर संपन्न हुआ धरना
राष्ट्रचंडिका/नरसिंहपुर। पश्चिम मध्य रेल्वे  के अंतगर्त चलने वाली रेलगाडिय़ों का संचालन  जिस अव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है उसका खामियाजा क्षैत्र के आमजन को भुगतना पड़ रहा है । रेलों के संचालन के बाद रेलों में जिस तरह से सुविधाओं के नाम पर यात्रियों की जेबों से नये नये नियम बनाकर पैसे निकाले जा रहें हैं इससे लगता है कि सरकार रेलसेवा दिये जाने की आड़ में आमजनता के गाढ़े खून पसीने की कमाई को किसी न किसी बहाने अपने कब्जे में लेना चाह रही है ।
पश्चिम मध्य रेल्वे के अंतगर्त इटारसी सतना इटारसी शटल गाड़ी संख्या  51673/51674 जो कि इटारसी सतना रेलखंड के छोटे छोटे स्टेशनों तक की यात्रा करने वाले साधारण आमजन के लिये पिछले कई सालों से सुविधाजनक और किफायती थी उस का संचालन रेलमंडल ने पिछले कई माह से बंद कर  दिया है जिसके चलते इस गाड़ी से रोजमर्रा के कामकाज सहित छोटे छोटे कामधंधे करने वाले दैनिक यात्रा करने वाले यात्रियों व तीज त्यौहारों सहित शादी विवाह के सीजन में परिवार सहित आने जाने वाले लोगों को अन्य गाडिय़ों से यात्रा करना जहां एक ओर महंगा व भारी असुविधाजनक हो रहा है ।
इटारसी सतना इटारसी शटल गाड़ी लोगों के जीवन का एक हिस्सा बन गई थी और इस तरह से उसका संचालन बंद किया जाना रेल्वे विभाग का जनविरोधी निर्णय है । रेल्वे द्वारा शटल गाड़ी का संचालन बंद किये जाने को लेकर नरसिंहपुर जिले के अनेक गांवों व कस्बों के लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर अनेक सामाजिक संगठनों सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं व जागरूक नागरिकों द्वारा इस संबंध में एक दिवसीय सांकेतिक धरना जिला मुख्यालय नरसिंहपुर के जनपद मैदान में दिया गया ।
इस धरने में उपस्थित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रेल विभाग के शटल बंद किये जाने के निर्णय को लेकर शीघ्र ही इसे पूर्वत: चलाये जाने के मांग की । धरने में अपने उदबोधन के दौरान पंतजलि योग समिति की तहसील प्रभारी इुंदुसिंह ने कहा कि 1977 में स्वर्गीय हरिविष्णु कामथ जी के प्रयासों से प्रारंभ हुई शटल के बंद किये जाने की पूर्ति कोई अन्य गाड़ी के माध्यम से नहीं हो सकती और इसके पुन: चलाये जाने की मांग को लेकर धरना रूपी इस जनयज्ञ में सभी लोगों को अपनी अपनी ओर से मांग रूपी आहुति देनी होगी । शटल को बंद करके गरीबों की लाइफलाइन को काट दिया गया है ।  मां भारती मानव सेवा समिति के पदाधिकारी सुनील चौकसे ने बताया कि जनता को उम्मीद नहीं थी कि शटल की सुविधा छीन ली जायेगी और इसे विद्युतीकरण के कार्य होने के नाम पर बंद कर दिया जायेगा रेल विभाग इस तरह से अनुचित निर्णय लेकर जनता के साथ छलावा कर रहा है । जागरूक नागरिक मंच के मंजीत छाबड़ा ने कहा कि शटल बंद करना रेल्वे को निजीकरण की दिशा में लिये जा रहें निर्णयों की तरह एक कदम है जिस तरह से रेलवे के स्टैेशनों को निजी हाथों मे ंसौंपा जा रहा है उसी तरह से ट्रेनों को भी सौंपा जायेगा । क्रांतिकारी क ोटवार संघ के सरंक्षक लीलाधर मेहरा ने सरकार के इस तरह से लिये जा रहें निर्णय को लेकर लोगों को गुलामी की ओर ले जाने की दिशा में एक कदम बताया ओर जहां चुनाव पूर्व किये बादों की बात बताई उसके विपरीत सरकार द्वारा लिये जा रहें जनविरोधी निर्णयों से आमजनता को जिस तरह से परेशान किया जा रहा है यह बर्दाश्त करने वाली बात नहीं है । एडवोकेट सुलभ जैन ने शटल बंद किये जाने के विरोध में दिये जा रहे सांकेतिक धरने को अंधेरे में दिये जलाने के समान बताया और कहा कि आने वाले समय में शटल को बंद किये जाने के इस अंधेरे पूर्ण लिये गये निर्णय को जनता का एक एक व्यक्ति अपने  एक एक दीपक के प्रकाश से उजाला फैलाकर पुन: शटल को प्रारंभ किये जाने का कार्य करेगा । समाजसेवी शशिकांत मिश्र ने शटल को बंद किया जाना आमजनता के हितों की अनदेखी बताया और इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर भी आने वाले समय में इस बात को लेकर उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराये जाने की बात कही ।
समाजसेवी बाबू लाल पटैल ने अपने उदबोधन में शटल को बंद किये जाने के खिलाफ आगामी समय में नरसिंहपुर जिलें में शटल संदेश यात्रा निकालने के प्रस्ताव को लेकर बताया कि इसके माध्यम से गांव गांव जाकर लोगों को उनकी लाइफलाइन कही जाने वाली शटल गाड़ी को बंद किये जाने के सरकार के इस निर्णय के खिलाफ लगातार जनजागरण अभियान चलाया जायेगा और फिर एक वृहद आंदोलन किया जायेगा ।   धरने में मनु विश्वकर्मा समाज संगठन के उपाध्यक्ष मोहन लाल विश्वकर्मा, सहित प्रमुख रूप से उमाशंकर पटैल,राकेश चरण दुबे, निहाल सिंह पटैल,अनिल श्रीवास्तव,शैलेन्द्र विल्थरे करेली से,चंद्रप्रकाश अग्रवाल चंदपुरा ,मनोज लोधी,मनीष लोधी सुजवारा, स्कन्द शर्मा समनापुर, किशोरी लोधी हर्रई, सोबरन सिंह लोधी, सुंदरलाल यादव छीताघाट, गोविंद सिंह पटैल, गोगावली, गिरिराज यादव मड़ेसुर,श्रीमती मंजु ठाकुर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।

परिषद को के.के. से अच्छा नहीं मिला प्रभारी

परिषद को के.के. से अच्छा नहीं मिला प्रभारी

स्वार्थसिद्धि के लिए दे दिया पद

जीवन के सर्वागीा विकास के लिए शिक्षा को सर्वोपरि माना गया है और ऐसा माना जाता है कि जीवन में जो अच्छी तरह शिक्षा ग्रहण करता है उसे समाजसेवा का मौका देती है लेकिन कुछ स्वार्थी तत्व अपने आप को शिक्षाविद कहते हैं और शिक्षा के नाम पर मासूमो के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं क्या यह समाज ऐसे लोगों को माफ करेगा।

राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। डीपी चतुर्वेदी महाविद्यालय के संचालक के.के. चतुर्वेदी का नाम किसी से छिपा नहीं है हर माह विश्वविद्यालय इन्हें किसी ना किसी अवार्ड से सम्मानित करती है ये अवार्ड ऐसे हो गये है जैसे घर में होने वाली कथा के बाद प्रसाद दिया जाता है ठीक वैसे ही यूनिवर्सिटी इन्हें अवार्ड देती है बेहतर होता बीते वर्ष की घटना पर भी लोग इन्हें एक अवार्ड या मेडल देते तो बेहतर होता।
हाल ही में भाजपा की विंग कही जाने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जिसे अनुशासन आदर्श के नाम से जाता जाता है इस परिषद के राहुल पाण्डे एवं पियुष दुबे ने अपने थोड़े से लाभ के लिए ऊपर के मंत्रियो से कहकर केके चतुर्वेदी को तीन जिलो का प्रभारी बना दिया है इसके पीछे क्या कारण है यह जनचर्चा का विषय बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राहुल पाण्डे एवं पियुष दुबे द्वारा केके चतुर्वेदी से इस शर्त पर यह दायित्व दिलवाने का मौखिक अनुबंध किया कि अगर वे अपने कॉलेज से उन्हें एमएसडब्ल्यू नि:शुल्क करवा देंगे तो वह इसके एवज में उन्हें परिषद का तीन जिलों का प्रभारी बनवा देंगे। जानकारों  का कहना है कि एमएसडब्लू जैसा महंगा कोर्स करने में 50-50 हजार रूपए की राशि खर्च करनी पड़ती है लेकिन इन दोनों ने फुकट का चंदन घिस मेरे लल्लू की कहावत को चरितार्थ किया है।
हम याद दिलाना चाहते है कि बीते वर्ष जो घटना इस डीपी चतुर्वेदी महाविद्यालय में घटी थी और जिसके सूत्रधार स्वयं के.के. चतुर्वेदी को माना गया था अभी उक्त मामले का अंतिम फैसला न्यायालय को में प्रतिक्षित है इसके बावजूद भी परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिले में कोई ऐसा नाम नहीं मिला जो परिषद की गरिमा को बढ़ा सकता। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में लोग अन्य संगठनों की तरह इस संगठन को भी गलत निगाह से देखेंगे।
बीते वर्ष घटित घटना के संदर्भ में राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई ने तो केके चतुर्वेदी का खुलकर विरोध किया था लेकिन एबीवीपी ने तो अपना मौन तक नहीं तोड़ा था इसके पीछे एक ही कारण माना जा रहा है कि चतुर्वेदी ने परिषद को अच्छा खासा सहयोग देकर उनके मुंह पर पट्टी बांध दी थी जिससे सदस्य उनके खिलाफ ना बोले जहां छोटी छोटी बातों को लेकर परिषद आये दिन सड़कों पर नारेबाजी करती है लेकिन उस घटना पर मौन रहना इस बात का सकेत है कहीं ना कहीं कुछ गड़बड है।
जो व्यक्ति घर परिवार के बीच अपनी मर्यादा को लांघ सकता है उससे समाज क्या अपेक्षा करेगा बेहतर होगा की परिषद ऐसे लोपियुष-राहुल की राजनीति का शिकार हुआ युवा छात्र
पियुष एवं राहुल की गंदी राजनीति का शिकार एक सक्रिय युवक भी हुआ जिसे जिला संयोजक का पद दिया जाने वाला था लेकिन इन दोनों ने ही उक्त सक्रिय छात्र का पत्ता कट करते हुए अपने आका का फोन कर किसी और को यह पद दिलवा दिया जबकि उक्त युवक का नाम फायनल ही माना जा रहा था लेकिन इनकी गंदी राजनीति ने छात्र को अपना शिकार बना लिया। गों को शामिल करने से पहले अच्छी तरह से विचार करें।