Saturday, 5 March 2016

कन्या महाविद्यालय में चल रहा बाबूराज

कन्या महाविद्यालय में चल रहा बाबूराज

कुछ घंटो में क्यों समाप्त हुआ सेमीनार?
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। नगर के मध्य स्थित कन्या महाविद्यालय आये दिन चर्चा का विषय बनते जा रहा है, यहां पर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे बाबूराज चल रहा हो। यूजीसी द्वारा कहने को यहां पर सभी सुविधाओं के लिये पर्याप्त साधनो के लिये पर्याप्त राशि दी जा रहीहै लेकिन देखा जा रहा है कि यहां पर एक बाबू के भरोसे पूरा महाविद्यालय का संचालन हो रहा है।
इस महाविद्यालय में किस अतिथि विद्वान को रखना है नहीं रखना है इसके लिये उच्च शिक्षा विभाग की बात कहीं जाती है लेकिन हकीकत है कि महाविद्यालय की यह व्यवस्था का संचालन भी उक्त बाबू द्वारा किया जाता है, यहां तक कि प्राचार्य के आदेशों की अव्हेलना करते हुए महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों व अतिथि विद्वानों को फटकार लगाना हो या अपशब्द कहने जैसी बात भी अक्सर जनचर्चा बनी रहती है।
चूंकि यह महाविद्यालय छात्राओ का है और प्राचार्य भी महिला ही, ऐसी स्थिति में उक्त बाबू द्वारा आयोजन के दौरान भी गुमराह किया जाता रहा है। लोगों द्वारा आईटीआई के माध्यम से जानकारी मागी गयी थी कि बीते वर्ष सेमीनार में व्यय का ब्यौरा बताया जाये लेकिन मौखिक जानकारी के माध्यम से गुमराह किया गया था।
इसी तरह बीते वर्ष छात्रवृत्ति के मामले को लेकर की गयी गलती के चलते बाबू ने पूरे महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों को विश्वविद्यालय के समझ कटघरे मे खड़ा कर दिया था। अक्सर देखा जाता है कि राष्ट्रीय सेमीनार दो दिनों के आयोजित किये जाते हैं लेकिन बीते माह हुए सेमीनार को राष्ट्रीय सेमीनार का नाम तो दिया गया लेकिन मात्र कुछ ही घंटो मे यह सेमीनार समाप्त कर दिया गया, इस आयोजन के लिये ना तो आमंत्रण पत्र बांटे गये और विषय के अनुरूप किसी गंभीर वक्ता को बुलाया गया 100-50 किलों दूरी से आये शोधार्थियों ने यहां से जाने के बाद निराशा व्यक्त की। इस सेमीनार मे रजिस्ट्रेशन की राशि तो ली गयी मगर 2-5 रूपये का फाइल कवर पेड़ पकड़ाकर औपचारिकता पूरी की ना तो विषय के प्रोफेसर को किट दी गयी। इन सबके पीछे उक्त बाबू का मार्ग होने की बात जनचर्चा का विषय बनी हुई है। इतना ही नहीं महाविद्यालय की स्टेशनरी से लेकर विभिन्न आयोजन हो या परीक्षा की जवाबदारी सभी कार्यो में प्राचार्य के स्थान पर उक्त बाबू द्वारा रौब झाडऩा यहां तक कि महाविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों प्रोफेसरों को भी बोलने से नहीं छोड़ते। महाविद्यालय के अनेक निर्माण कार्य कराये गये लेकिन इस निर्माण कार्य के दौरान बिना जानकारी दिये कार्य कराये गये यहा तक कि महाविद्यालय की विकास समिति के पदेन अध्यक्ष वर्तमान जिला कलेक्टर के संज्ञान मेे भी यह बात क्यों नहीं लाई गई? महाविद्यालय की प्राचार्य के व्यवहार से तो छात्राएं खुश नजर आती हैं लेकिन उक्त बाबू के व्यवहार के संबंध में अनेक छात्राओं ने नाम ना प्रकाशित करने को लेकर भी शिकायत की है। बेहतर होता यहां की व्यवस्था को सुधारने के लिये प्राचार्य किसी भी निर्णय को स्वविवेक से लेते हुए महाविद्यालय के बाबूराज से मुक्त कराती जिससे महाविद्यालय की गरिमा पर उठने वाली ऊंगली पर अंकुश लग सकता। 

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