- दिनेश राय पर ग्रहण लगाने जुटे चाटुकार
जिले की समस्या जिले में क्यों नही सुलझाते
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी जिले में जनप्रतिनिधिया में एक बार अक्सर देखने को मिलती है जिले में कोई अच्छा कार्य होता है तो उसका श्रेय वे स्वयं लेने का प्रयास करते हैं और बुरा कुछ होता है वे मौन धारण कर लेते हैं। सिवनी विधानसभा के विधायक दिनेश राय के साथ भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।
वे सिवनी की समस्या के निराकरण के लिये विधानसभा में तो प्रश्र उठाते हैं लेकिन जिला स्तर पर उनके द्वारा कभी कोइ प्रयास नहीं किया जाता। अनेक संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन मे बैठते हैं मगर उन्हे श्री राय समस्या निराकरण के स्थान पर सिर्फ आश्वासन देते हैं।
हाल ही में वीरांगना सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि पर साहित्यिक कार्यक्रम को रोके जाने के दौरान दूसरे दिन जब साहित्यकार पत्रकार, अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा तब भी विधायक श्री राय ने आजादी में अपना अमिट योगदान देने वाली सुभद्र जी के प्रति इतना भी नहीं बना कि वे इस आंदोलन मं शामिल होने पहुंचे अथवा मौखिक रूप से ही समर्थन करते। ज्ञातव्य है कि इस कार्यक्रम की जो संयोजना थी उसमें कोई राजनैतिक पार्टी के उद्देश्य की पूर्ति को विषय नही ंबनाया गया था बल्कि साहित्यिक मंच के माध्यम के लोगों में राष्ट्रप्रेम जागृत करना उद्देश्य था। हाल ही में चल रही विधानसभा में हमारे विधायक जी सिवनी विधानसभा सहित अनेक सड़कों के निर्माण को लेकर सदन के पटल पर प्रश्र रख रहे है लेकिन यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि विधायक जी के निवास के सामने की रोड जब नहीं सुधर पायी है तो फिर अन्य सड़कों के सुधारे जने की बात विधानसभा के पटल पर रखना कहां तक उचित होगा। इसी तरह अन्य समस्याओ को लेकर भी वे ग्रामीणों को गुमराह करते है, अब तो आलम यह ह कि ग्रामीणों ने भी उनके पास आने के स्थान पर दूरिया बनाना प्रारंभ कर दिया है। कुछ निर्धन वर्गो को छोटी मोटी आर्थिक सहायता करके उसका ढिंढौरा पीटना तथा अपने चाटुकारो को अपने इर्द गिर्द घुमाने को ही उन्होंने अपना राजनैतिक दायरा मान लिया है।
भाजपा कांग्रेस से त्रस्त आकर लोगों ने विधायक दिनेश राय को जो कमान सौंपी थी अब ऐसा लगता है उस कमान की पकड़ ढिली नजर आने लगी है। आज हालात यह है कि श्री राय के इर्द गिर्द घूमन वाले विभागों में जाकर विधायक के नाम की धौंस दिखाकर वसूली कर रहे क्या उनके ये कारनामे उनकी भविष्य की राजनीति पर ग्रहण नहीं लगायेंगे?

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