Wednesday, 18 November 2020

मां नर्मदा के सहारे कैसे होता था जीवन यापन और कैसे गुजारे मां नर्मदा के सहारे जीवन के कई साल ...!

राष्ट्र चंडिका (चिनकी घाट नरसिंहपुर से अमर नोरिया कि एक चर्चा) आज नर्मदा तट चिनकी घाट पर हुई अचानक एक दादा जी से मुलाकात के दौरान बातों का जो सिलसिला चला उसमें उम्र के 82 पड़ाव पार कर चुके ग्राम रमपुरा निवासी श्री मनराखन ने मां नर्मदा किनारे रहने वाले अपने दौर के लोगों के बारे में बड़ी विस्तार से चर्चा की , इस दौरान जब अनायास ही उनके द्वारा अनेक लोगों के जीवन यापन का सहारा बनी मां नर्मदा की धार के प्रति जो चिंता दर्शाई गई अचानक लगा हमारे इन बुजर्गों के मन मे आज जो पीड़ा है उसका दर्द सालों मां नर्मदा किनारे अपना जीवन व्यतीत करने वालों से अच्छा कोई अहसास नहीं कर सकता । काफी लंबे अंतराल के बाद जब बात पता ठिकाने की पूछ परख की आई तो फिर बातों ही बातों में समाज के हालातों पर भी बात पहुंची जिसमें युवा पीढ़ी का नशा के प्रति रुझान बढ़ना, गौ वंशों के प्रति लोगों का मोह  खत्म होना आदि आदि ..और अंत मे जो बात निकली वह यह कि हम लोगों के पास न उतनी जमीन जायदाद है और न ही लोगों के पास नोकरी चाकरी हम लोगों की तो जैसे तैसे कट रही है और कट जायेगी किन्तु अब समाज को अन्य लोगों को देखकर जागरूक होकर अपने बाल बच्चों को शिक्षित करना पड़ेगा,युवाओं को नशे आदि के दुष्प्रभाव अगर आज समझ नहीं आये तो आनेवाले समय में हम गरीबी के दल दल से किसी भी हाल में बाहर नहीं निकल पायेंगे ..!

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