Saturday, 5 March 2016

वाहन चोर गिरोह और कबाडिय़ो की टोली पकड़ाई

 वाहनों की चोरी कर कबाडिय़ों को बेचते थे
राष्ट्रचंडिका/ नरसिंहपुर/- अमर नौरिया\ वाहन चोरों के एक बड़े गैंग का पर्दाफाश कर नरसिंहपुर पुलिस ने नरसिंहपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों से चुराये गये वाहनों को जप्त किया तथा इन चोरों से लगातार की जा रही पूछताछ से इनसे कई और वाहनों के चोरी किये जाने की जानकारी मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है ।
इस संबंध में गत दिवस थाना कोतवाली में आयोजित एक पत्रकारवार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में लगातार हो रही वाहनों की चोरियों को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन के नेतृत्व में जिला स्तर पर पतासाजी करने हेतु दो टीमों का गठन किया गया था जिसमें एक टीम में  एसडीओपी नरेश शर्मा,थाना कोतवाली प्रभारी डीव्हीएस नागर,मुंगवानी थाना प्रभारी उमेश दुबे,चौकी प्रभारी हिमलेन्द्र पटैल,एवं सहायक उप निरीक्षक संतोष मिश्रा,तथा दूसरी टीम में एसडीओपी करेली डीपी श्रीवास्तव,थाना प्रभारी करेली अरविंद दुबे,उप निरीक्षक बच्चन मिश्रा,सहाउनि,बसंत शर्मा,सउनि जीएस महोरे इन टीमों के द्वारा लगातार जुटाई जा रही जानकारी के आधार पर थाना कोतवाली प्रभारी डीव्हीएस नागर को सूचना मिली की एक बोलेरो गाड़ी चोरी करके बदमाश भाग रहें हैं जिस पर पुलिस टीम के द्वारा इस गाड़ी को पकडऩे हेतु पीछा किया गया जिस पर पुलिस द्वारा उक्त बोलेरो को जबलपुर कटनी रोड पर पनागर के  पास पकड़ा गया इस सफेद रंग  की बुलेरो गाड़ी जिसका नं एमपी 49टी0743 था इस गाड़ी में तीन बदमाश पाये गये गाड़ी को राजा बंशकार नाम का बदमाश चला रहा था तथा उसके साथी मोन्टी उर्फ पुष्पेन्द्र , गुडडू उर्फ धुव्रराज सिंह  परिहार पाये गये थे प्रारंभिक पूछताछ के दौरान इन बदमाशों ने बताया कि यह गाड़ी सिद्धेश्वर कालोनी स्टेशन गंज,नरसिंहपुर से  चुरा कर लाये हैं जब इनसे थाना कोतवाली लाकर पूछताछ की गई तो इन्होनें चोरी की गई अन्य गाडिय़ों के बारे में भी बताया ।
इन्होनें जो गाडिय़ा चुराई उनमें हुन्डई वर्ना कार एम पी 15 सी ए 0432,नरसिंहपुर से बुलेरो एमपी 49टी0743,करेली जिला नरसिंहपुर से एक बुलेरो एम पी 49 टी 5505 इसे बदमाश लेकर भाग रहे थे तो ब्यौहारी के पास सस्पेंसर टूट जाने से इसको वहीं छोड़कर भाग गये थे,एक महेन्द्र बुलेरो करेली महेन्द्र वार्ड एमपी 21टी 0815,महादेव वार्ड करेली से एक बुलेरो एमपी 49सी 1004 इस वाहन को आरोपियों ने धमेंन्द्र सिंह निवासी गाढ़ाघाट जिला सिवनी को बेचना बताया पुलिस द्वारा आरोपी धमेन्द्र को भी अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जा रही है ,इस दौरान पूछताछ में इन्होनें अमरवाड़ा जिला छिंदवाड़ा से 2 दो गाडिय़ा,लखनादौन जिला सिवनी से 1 गाड़ी तथा 1 गाड़ी बीना शाहपुर थाना सिमरिया जिला रीवा से 1 स्कार्पियो क्रीम कलर की ,1 पिकअप क्रीम कलर की ग्राम राजेंन्द्र नगर जिला अनूपपुर से चोरी किया जाना स्वीकार किया है । इसके अलावाा बदमाशों ने गोटेगांव जिला नरसिंहपुर से एक वर्ष पूर्व एक बुलेरो वाहन चोरी किया जाना कुबूल किया है जिसे आधारताल जबलपुर पुलिस ने जप्त कर लिया है इस प्रकार बदमाशों ने कुल 12 वाहनों की चोरी किया जाना कबूल किया जिसमें से पुलिस ने अभी तक 5 वाहनों जिनमें 4 बुलेरो व एक हुडंई वर्ना कार जप्त करने में सफलता प्राप्त की है । इसके अलावा पुलिस को अभी अन्य जिलों में बदमाशों द्वारा बेची गई गाडिय़ों की बरामदगी सुनिश्चित किया जाना है जिसमें एक हुंडई वर्ना कार एम पी 15 सीए 0432 का सतना में होना पता चला है जिसके पार्टस दूसरी वर्ना कार में आरोपी समद द्वारा लगाये गये हैं उसे भी पुलिस ने जप्त कर लिया है तथा करेली,रीवा तथ ा अनूपपुर से चुराई गई गाडिय़ों को बदमाशों ने गैस कटर से काटकर गाढ़ाघाट जिला सिवनी के कबाड़ी अहसान अली तथा रद्दी चौकी जबलपुर के कबाड़ी शौकत अली को बीस बीस हजार रूपये में बेची गई थीं इस कारण इन कबाडिय़ों को चोरी का माल हड़पने तथा साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में गिरप्तार किया गया है ।
पुलिस द्वारा इस पूरे मामले में लगभग 40 लाख रूपये के वाहन जप्त किये जाने में सफलता हासिल की गई है तथा इस मामले में समस्त घटनाक्रम में प्राप्त साक्ष्य के आधार पर आरोपी राजा बंशकार,पुष्पेन्द्र निवासी जबलपुर,गुडडू उर्फ धु्रव राज ,धमेन्द्र राजपूत, अहसान, समद, कवाड़ी शौकत अली को चोरी के वाहन खरीदने सहयोग देने एवं उन्हें खुर्दबुर्द करने के आरोप में गिरप्तार किया गया है ,वहीं पुलिस अधीक्षक मुकेश श्रीवास्तव ने इस मामले में आरोपियों के द्वारा नशीले पदार्थ का व्यापार करने  की आशंका के चलते इस  मामले में भी गहन पड़ताल की जा रही है । 

मजनुओं के आतंक के सामने गुम हुआ ऑपरेशन मजनूं

मजनुओं के आतंक के सामने गुम हुआ ऑपरेशन मजनूं
राष्ट्रचंडिका/सिवनी/क्षेत्र में मनचलों असमाजिक तत्वों में पुलिस नाम का डर समाप्त हो गया है। जिससे क्षेत्र के गली मोहल्लों सहित स्कूल कॉलेज आदि शैक्षणिक संस्थाओं के आसपास रास्तों पर मनचलों की हरकतें दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। जिसके कारण महिलाओं छात्राओं का स्कूल कॉलेज जाने के साथ बाजारों में जाना भी दुश्वार हो रहा है।
 बस स्टैंड सहित प्रमुख रास्तों पर दिन के समय तथा स्कूल कॉलेज की छुट्टी होने के समय जब छात्राओं का निकलना होता है तो कुछ युवक सरेआम अश्लील फब्तियां कसते गलत हरकतें करते नजर आते हैं। बाइक पर सवार होकर मुख्य रास्तों से तेज रफ्तार के साथ कानफोड़ू आवाज करती पटाखें छोड़कर चलती बाइकों पर से भी ये छेडख़ानी करने में नहीं चूकते। जब इन मनचलों को कोई रोकने की कोशिश करता है तो उसके साथ मिलकर मारपीट कर देते हैं। वहीं बदनामी के डर से पीडि़त छात्राओं के परिजन पुलिस में शिकायत नहीं कर पाते, जिससे इन मनचलों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। लोगों परिजनों का आरोप है कि इस संबंध में पुलिस को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन कोई विशेष कार्रवाई नहीं कर खानापूर्ती कर अपने काम की इतिश्री कर ली जाती है। 

कहां से आ रहे विक्षिप्त?

कहां से आ रहे विक्षिप्त?
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। अपराधियों की पनाहगार रह चुकी सिवनी में अब विक्षिप्तो की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। पहले कुछेक ही विक्षिप्त हुआ करते थे लेकिन कुछ दिनों से देखने में आ रहा है कि बस स्टैण्ड क्षेत्र में कुछ मानसिक विक्षिप्त चहलकदमी करते नजर आ रहे है। बस स्टैण्ड क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इनकी मानसिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे कई बार यात्रियों पर पत्थर तक बरसा चुके हैं, इतना ही नहीं वहां खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा चुके हैं। जिला कलेक्टर से क्षेत्रीयजनों की मांग है कि विक्षिपतो की बढ़ती संख्या को गंभीरता से लेते हुए उन्हें अन्यत्र पहुंचवाने की कार्यवाही करें। 

कन्या महाविद्यालय में चल रहा बाबूराज

कन्या महाविद्यालय में चल रहा बाबूराज

कुछ घंटो में क्यों समाप्त हुआ सेमीनार?
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। नगर के मध्य स्थित कन्या महाविद्यालय आये दिन चर्चा का विषय बनते जा रहा है, यहां पर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे बाबूराज चल रहा हो। यूजीसी द्वारा कहने को यहां पर सभी सुविधाओं के लिये पर्याप्त साधनो के लिये पर्याप्त राशि दी जा रहीहै लेकिन देखा जा रहा है कि यहां पर एक बाबू के भरोसे पूरा महाविद्यालय का संचालन हो रहा है।
इस महाविद्यालय में किस अतिथि विद्वान को रखना है नहीं रखना है इसके लिये उच्च शिक्षा विभाग की बात कहीं जाती है लेकिन हकीकत है कि महाविद्यालय की यह व्यवस्था का संचालन भी उक्त बाबू द्वारा किया जाता है, यहां तक कि प्राचार्य के आदेशों की अव्हेलना करते हुए महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों व अतिथि विद्वानों को फटकार लगाना हो या अपशब्द कहने जैसी बात भी अक्सर जनचर्चा बनी रहती है।
चूंकि यह महाविद्यालय छात्राओ का है और प्राचार्य भी महिला ही, ऐसी स्थिति में उक्त बाबू द्वारा आयोजन के दौरान भी गुमराह किया जाता रहा है। लोगों द्वारा आईटीआई के माध्यम से जानकारी मागी गयी थी कि बीते वर्ष सेमीनार में व्यय का ब्यौरा बताया जाये लेकिन मौखिक जानकारी के माध्यम से गुमराह किया गया था।
इसी तरह बीते वर्ष छात्रवृत्ति के मामले को लेकर की गयी गलती के चलते बाबू ने पूरे महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों को विश्वविद्यालय के समझ कटघरे मे खड़ा कर दिया था। अक्सर देखा जाता है कि राष्ट्रीय सेमीनार दो दिनों के आयोजित किये जाते हैं लेकिन बीते माह हुए सेमीनार को राष्ट्रीय सेमीनार का नाम तो दिया गया लेकिन मात्र कुछ ही घंटो मे यह सेमीनार समाप्त कर दिया गया, इस आयोजन के लिये ना तो आमंत्रण पत्र बांटे गये और विषय के अनुरूप किसी गंभीर वक्ता को बुलाया गया 100-50 किलों दूरी से आये शोधार्थियों ने यहां से जाने के बाद निराशा व्यक्त की। इस सेमीनार मे रजिस्ट्रेशन की राशि तो ली गयी मगर 2-5 रूपये का फाइल कवर पेड़ पकड़ाकर औपचारिकता पूरी की ना तो विषय के प्रोफेसर को किट दी गयी। इन सबके पीछे उक्त बाबू का मार्ग होने की बात जनचर्चा का विषय बनी हुई है। इतना ही नहीं महाविद्यालय की स्टेशनरी से लेकर विभिन्न आयोजन हो या परीक्षा की जवाबदारी सभी कार्यो में प्राचार्य के स्थान पर उक्त बाबू द्वारा रौब झाडऩा यहां तक कि महाविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों प्रोफेसरों को भी बोलने से नहीं छोड़ते। महाविद्यालय के अनेक निर्माण कार्य कराये गये लेकिन इस निर्माण कार्य के दौरान बिना जानकारी दिये कार्य कराये गये यहा तक कि महाविद्यालय की विकास समिति के पदेन अध्यक्ष वर्तमान जिला कलेक्टर के संज्ञान मेे भी यह बात क्यों नहीं लाई गई? महाविद्यालय की प्राचार्य के व्यवहार से तो छात्राएं खुश नजर आती हैं लेकिन उक्त बाबू के व्यवहार के संबंध में अनेक छात्राओं ने नाम ना प्रकाशित करने को लेकर भी शिकायत की है। बेहतर होता यहां की व्यवस्था को सुधारने के लिये प्राचार्य किसी भी निर्णय को स्वविवेक से लेते हुए महाविद्यालय के बाबूराज से मुक्त कराती जिससे महाविद्यालय की गरिमा पर उठने वाली ऊंगली पर अंकुश लग सकता।