Saturday, 10 November 2012
लक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चनलक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चनलक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चन
लक्ष्मी नारायण मंदिर में 10 को बैठक और 11, 12, 13 नवम्बर को पूजन- अर्चन
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बस स्टैण्ड सिवनी में भगवान लक्ष्मीनारायण जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एवं कलशारोहण के आयोजन को लेकर एक आवश्यक बैठक 10 नवंबर को रात्रि 8 बजे मंदिर परिसर में ही रखी गई है। ज्ञात हो कि अक्षयातृतीया के अवसर पर श्री जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में उक्त आयोजन होना है। साथ ही आत्यात्मिक ऊर्जा एवं शारीरिक षक्ति संग्रह करने में कार्तिक मास का विषेश महत्व है। कार्तिक मास के दौरान विषेश तौर पर श्री लक्ष्मी-नारायण पूजा एवं तुलसी पूजा से सादक का कल्याण होता है। कार्तिक मास के चलते दिव्य धाम श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर बस स्टैण्ड सिवनी में दिनांक 11, 12, 13 नवम्बर को होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में सुबह 6 बजे से विधिवत श्री लक्ष्मी-नारायण जी की वैदिक नित पूजन, सुबह 7 बजे से श्री लक्ष्मी-नारायण जी सहस्त्र अर्चन, सुबह 9 बजे दीपदान के पष्चात् आरती प्रसाद वितरण, षाम 4 बजे से श्री लक्ष्मी-नारायण जी का पूजन, वैदिक ब्राम्हणों द्वारा श्रीसूक्त पूजन, पुरूशसूक्त पूजन, कनक धारा स्त्रोत, लक्ष्मी स्त्रोत, श्री नारायण गायत्री एवं लक्ष्मी गायत्री का जाप एवं दीपदान आदि कार्यक्रम के पष्चात् षाम 7ः30 बजे आरती, प्रसाद वितरण। यह कार्यक्रम निरंतर धनतेरस दिन रविवार से दीपावली दिन मंगलवार तक प्रतिदिन समयानुसार पंडित राजेष मिश्र जी, पंडित हेमंत त्रिवेदी जी एवं पंडित विजय मिश्र जी के द्वारा पूजन-अर्चन किया जावेगा। इस इस पूजन में सुबह 6 बजे से पति-पत्नि एवं अन्य श्रृद्धालु भी पूजन में षामिल हो सकते हैं। अतः आप सभी धर्मप्रेमी और समस्त गणमान्य नागरिकों से लक्ष्मी-नारायण मंदिर पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पूजा एवं सहस्त्र अर्चन में षामिल होने हेतु श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में
Thursday, 1 November 2012
कुर्सी बचाने की जुगत में लगे मोहन चंदेल
कुर्सी बचाने की जुगत में लगे मोहन चंदेल
क्या चल पायेगा हरवंश का जादू..?
राष्ट्र्रचंडिका/ पूर्ण बहुमतों से जिला पंचायत पर काबिज कांग्रेस में अध्यक्ष मोहन चंदेल से खफा सदस्यों ने एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाकर पूरी कांग्रेस पर भूचाल ला दिया है और वहीं स्कार्पियों बांटने जैसी हास्याप्रद विज्ञप्ति भी कांग्रेस ही किरकिरी कर रही है। मजे की बात तो यह है कि अविश्वास प्रस्ताव की पूरी लड़ाई में कांग्रेस ही कांग्रेस आपस में भिड़ रही है। यह बात सभी लोग जानते हैं कि 19 सदस्यों में से 15 सदस्य कांग्रेस के हैं और इसी पूर्ण बहुमत के चलते कांग्रेस के भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनकर आये थे, उस समय कांग्रेस के नेताओं में यह बात जोरों पर चल रही थी कि संभवत: इस बार बिना किसी विवाद के जिला पंचायत का पूरा कार्यकाल कांग्रेसी शांतिपूर्वक निभा पायेंगे। क्योंकि पिछली पंचवर्षीय पर प्रीता ठाकुर के खिलाफ वर्तमान अध्यक्ष मोहन चंदेल ने अविश्वास लाकर कांग्रेस के बीच घमासान छेड़ दिया था, लेकिन अपनी राजनैतिक योग्यता दिखाते हुए मोहन चंदेल के द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को धराशायी कर दिया था, लेकिन मोहन चंदेल को शायद यह नहीं पता था कि वह भविष्य में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद में विराजमान होंगे और उनके द्वारा किये गये अविश्वास प्रस्ताव की पेशकश पुन: इतिहास दोहरायेगा।
03 नवंबर को अविश्वास प्रस्ताव की बैठक कमिश्रर दीपक खांडेकर के द्वारा दी गई है, जिसमें राजनैतिक हल्को पर यह चर्चा जोरो पर है कि यह प्रस्ताव पास होने के आसार कम है। क्योंकि मोहन चंदेल ने अपनी गोटियां फिट करते हुए सदस्यों को अपने पाले में ले रखा है। सूत्र बताते हैं कि कम पड़ रहे सदस्यों मे मोहन चंदेल ने उन सदस्यों की भारी कीमत लगाई है तो वहीं रामगोपाल जायसवाल ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करके प्रस्ताव के पक्ष में पूर्ण रूप से यह हामी भरी है कि यह प्रस्ताव संभवत: पास होगा। साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद से मोहन चंदेल के द्वारा सदस्यों की नीलामी की बोली लगा रहे हैं। यही नहीं सदस्यों का विश्वास खोने वाले मोहन चंदेल पर यह भी आरोप लगाये गये हैं कि इनके कार्यकाल का पूरा सिस्टम ही भ्रष्ट है। इतनी संगीन आरोपों से नगर में तीखी प्रतिक्रिया मिल रही है साथ ही दो कांग्रेसियों की बीच की इस लड़ाई में तीसरे मजे मार रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए अनिल चौरसिया को अध्यक्ष पद का लालीपाप थमाकर यह प्रस्ताव को पास किया जा सकता है, क्योंकि उपाध्यक्ष अनिल चौरसिया के पास पर्याप्त जिला पंचायत सदस्य है और रामगोपाल जायसवाल ने अपने पाले के मोहरो को इस बिसात पर जमा चुका है। अगर ये दोनों एक होते हैं तो मोहन चंदेल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होना तय है। क्या चल पायेगा हरवंश का जादू?
सिवनी की राजनीति में हरवंश सिंह को राजनीति का चाणक्य कहा जाता है, यह बात शत- प्रतिशत सत्य भी है कि कांग्रेस के शासनकाल में त्रिविभगाीय मंत्री और भाजपा शासन काल में भी इस चाणक्य को लालबत्ती से नवाजा गया है, जिससे कि यह भाजपा के खिलाफ ज्यादा जहर न उगल सके। यही नही कांग्रेस में दादा की बात काटने की हिमाकत कोई कांग्रेसी नहीं कर सकता। जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष बनाने में भी दादा का खासा रोल था, चूंकि अब अविश्वास प्रस्ताव पेश हो चुका है तो एक तरफ जायसवाल पूरी
शेष 0 ताकत के साथ अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए लगा रहे हैं तो वहीं अपनी अध्यक्ष पद की कुर्सी बचाने के लिए मोहन चंदेल सदस्यों को मना- पटाकर अपनी कुर्सी बचाने के लिए लगे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि मोहन चंदेल कांग्रेस के चाणक्य की शरण में जा पहुंचे हैं और वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए दादा से हर अदृश्य समझौता कर चुकी हैं। इसी समझौते के कारण कई कांग्रेसी जो जिला पंचायत के सदस्य है, वह इस अविश्वास प्रस्ताव की बैठक के पूर्व ही दिल्ली की विशाल आमसभा में शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरी गणित के पीछे विधानसभा उपाध्यक्ष की ताकत लगी हुई है, तो वहीं ठा. हरवंश सिंह का मोहन चंदेल का सपोर्ट करना इसलिए भी मजबूत माना जा रहा है, क्योंकि अनिल चौरसिया अपनी प्रारंभिक राजनीति से ही हरवंश विरोधी रहे हैं। अब ऐसे में यह बात तो तय है कि दादा अपने विरोधी को अध्यक्ष पद पर बैठने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि रामगोपाल जायसवाल के द्वारा पूरे विश्वास से लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव धराशायी होता है या फिर पास होकर मोहन चंदेल की कुर्सी छीनने में सफल होता है?
कांग्रेस नहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस से होगा विधानसभा प्रत्याशी?
कांग्रेस नहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस से होगा विधानसभा प्रत्याशी?
राष्ट्र्रचंडिका / सिवनी। 2013 के विधानसभा चुनावों में सिवनी सीट से चुनाव लडऩे के इच्छुक सभी कांग्रेसी नेताओं के लिए एक बुरी खबर यह है कि सिवनी सीट पुन: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में जा सकती है। इसके पहले 2008 के विधानसभा चुनाव में भी सिवनी सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को एक अदृश्य समझौते के तहत दी गयी थी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2013 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की बुरहानपुर, इटारसी एवं सिवनी की विधानसभा सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस की झोली में जा सकती है। सूत्र बताते हैं कि इस खबर को पाकर राकांपा के स्थानीय नेताओं में उत्साह बढ़ गया है और सभी अपने- अपने स्तर पर गोटी फिट करने की कवायद में जुट गये हैं।
ज्ञातव्य है कि पिछले 2008 के विधानसभा चुनाव में जिले के कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावना और इच्छा को नजरअंदाज करते हुए जिला मुख्यालय सिवनी की सीट रांकापा
शेष 0 को दी गयी थी, जिसे ददुआ पटेल को घड़ी चुनाव चिन्ह के साथ अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि इस चुनाव में ददुआ पटेल को कुछ हजार वोट मिले थे। चुनाव के दौरान ददुआ पटेल ने कांग्रेस पर समझौता तोडऩे का आरोप लगाया था।
उल्लेखनीय है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में सिवनी सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दिये जाने के बाद राष्ट्र के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर जिले के सर्वमान्य एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ठा. हरवंश सिंह का पुतला भी दहन किया था। हालांकि इस चुनाव में नामांकन के ऐन पहले कांग्रेस के युवा नेता इंजी. प्रसन्न मालू स्वयं को कांग्रेस पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाने में सफल हो गये थे, परंतु तत्कालीन परिस्थिति और विभिन्न कारणों के चलते वे चुनाव में अपनी जमानत नहीं बचा पाये थे।
पिछली बार 2008 के विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले सिवनी सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को देने की खबर के सामने आने पर सिवनी के लगभग सभी कांग्रेसी नेताओं ने इसे मजाक के तौर पर लिया था। संभवत: इस बार भी ऐसा ही हो, परंतु सूत्रों की माने तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के स्थानीय खेमे में 2013 के विधानसभा चुनाव में सिवनी सीट से कौन लड़ेगा? इसका आंकलन और तौल मौल प्रारंभ हो गया है।
सिवनी जिले में कमलनाथ, सुरेश पचौरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं राहुल गांधी से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा नेता 2013 के विधानसभा चुनाव में अपनी- अपनी दावेदारी को प्रस्तुत करने को तैयार है, ऐसे में यह खबर उनके प्रयासों पर कुठाराघात साबित होगी। जबकि सूत्रों की माने तो पुन: कांग्रेस के एक कद्दावार नेता सिवनी विधानसभा सीट में रांकापा की घड़ी को टिक-टिक सुनवाने के लिए अभी से चाबी भरकर सिवनी में कांग्रेस को बीते समय का इतिहास बनाने को तैयार है।
''स्व. श्री मूलचंद दुबे ÓÓ
''स्व. श्री मूलचंद दुबे ÓÓ
एक अद्वितीय व्यक्तित्व
(जन्म- 26.12.1949, शांति- 04.11.2002)
स्व. श्री मूलचंद दुबे अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति थे, जो कि हर जाति धर्म सम्प्रदाय में एक बराबर लोकप्रिय थे, उन्होंने अपनी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा सिवनी के साथ- साथ कई शहरों से पूरी की, क्योंकि वे शिक्षा प्राप्त करने के लिऐ अपने फूफाजी के साथ रहते थे, जो मप्र के पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे। उच्च शिक्षा की प्राप्ति उन्होंने राबर्असन कॉलेज जबलपुर से की और यही वह समय था, जब उनकी राजनीति के प्रति प्रेम व समाजसेवा का भाव सामने आया। वर्ष 1969 में आपने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता स्वीकार और अपने राजनैतिक कौशल के चलते 1974 में राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के पद निर्वाचित भी हुए। यह वह वर्ष था, जब उनकी युवा कांग्रेस की टीम से 10 व्यक्तियों को पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया गया और 08 लोग स्वयं उन्हें मिलाकर विजयी भी रहे। वे उन विशिष्ट व्यक्तियों में से थे, जो पदो को सुशोभित किया करते थे। हर बार अपने कार्य में इतनी कुशलता रखते थे कि हर अगले आने वाले व्यक्ति के लिये वे एक मील का पत्थर साबित होते थे, किसी तरह कारवां बढ़ता गया और वे जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष वर्ष 1980-90 मप्र थोक उपभोक्ता भंडार के प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, महात्मागांधी शिक्षण प्रशिक्षण शोध संस्थान के प्रदेश समिति के संचालक मंडल सदस्य, जिला उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष रहे हैं। शासकीय कार्यो और शासकीय कर्मचारियों में आपकी पकड़ से सभी लोग वाकिफ थे। चपरासी से लेकर प्रमुख अधिकारी आपका सम्मान करते थे, जो कि एक जनसेवा के लिये अतिआवश्यक होता है। जनसेवा के लिए इसी के चलते वर्ष 1993 में नगरपालिका कर्मचारी संघ के लगभग 02 हजार कर्मचारियों का कांग्रेस के बैनर तले समस्याओं का निराकरण भी किया। विद्युत कर्मचारी संगठन, सिवनी संभाग के संरक्षक कृषि उपज मंडी सिवनी कर्मचारी के संरक्षक, जिला द्विसूत्रीय कार्यक्रम के सक्रिय सदस्य, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के सदस्य रहे। जमीनी स्तर में आप काम करने की मिसालें पेश करते हुए आदिवासी विकास खंड कुरई में एक शिविर का आयोजन कर लगभग तीन किमी सड़क का निर्माण भी किया, जिसमें उनके साथ हजारों युवा कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।
वर्षो कांग्रेस की सेवा करने के बाद भी उचित स्थान प्राप्त न होने के चलते आपने विद्रोह भी किया, क्योंकि आप मानते थे कि अगर आपके साथ न्याय न हो तो अन्याय सहन भी जुल्म है। आपे दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सिवनी विधानसभा से चुनाव लड़ा और उसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस और आप में दूरियां बढ़ती चली गई। आपके आघात से कांग्रेस विजयी न हो सकी। खैर आपकी नागरिक मोर्चे में सक्रियता बढ़ी और आपने एक ऐसा विकल्प निकाला, जो कि जनता के लिए सटीक था।
वर्ष 1999-2000 में प्रदेश में सीधे तौर पर नगर पालिका परिषद चुनाव संपन्न होने थे, आपने नागरिक मोर्चे की ओर से अपना नामांकन पत्र भरा, आपको चुनाव चिन्ह के रूप में पीपल का पत्ता आवंटित हुआ और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास में अंकित है। सिवनी नगर की जनता ने आपको अभूतपूर्व समर्थन प्रदान करते हुए आपको सिवनी नपा का अध्यक्ष चुना। आपने अपने कार्यकाल में सभी वार्डों का विकास किया और आप हर दिल अजीत बन गये। चहुंओर आपके अच्छे कार्यों और सहृदय होने की चर्चायें होने लगी, पर शायद नियती को कुछ और ही मंजूर था। नवंबर माह की 04 तारीख को आपको हृदयघात हुआ और हम सभी को रोता बिलखता छोड़कर चले गये। आपने मात्र दो वर्षों में नई ऊंचाईयों को छू लिया था। सारी उम्र अविवाहित रहकर समाज के प्रति इस दिये गये योगदान के लिए आपको सदैव याद रखा जायेगा। मेरी खुशनसीबी है कि मुझ आप जैसे व्यक्तिव को इतने करीब से जानने का मौका मिला। आपकी बारात तो नहीं निकली थी, पर आपकी अंतिम यात्रा का वह मंजर जीवन के अंतिम क्षण तक नहीं भुलाए जा सकते, क्योंकि शहर का हर छोटा बड़ा उस दिन आपको श्रद्धांजलि देने हाथों में फूल और आंखों में आंसू लिये कतारबद्ध खड़ा हुआ था, आपको पुन: श्रृद्धासुमन अर्पित करते हैं.......... -अखिलेश दुबे-
एक अद्वितीय व्यक्तित्व
(जन्म- 26.12.1949, शांति- 04.11.2002)
स्व. श्री मूलचंद दुबे अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति थे, जो कि हर जाति धर्म सम्प्रदाय में एक बराबर लोकप्रिय थे, उन्होंने अपनी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा सिवनी के साथ- साथ कई शहरों से पूरी की, क्योंकि वे शिक्षा प्राप्त करने के लिऐ अपने फूफाजी के साथ रहते थे, जो मप्र के पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे। उच्च शिक्षा की प्राप्ति उन्होंने राबर्असन कॉलेज जबलपुर से की और यही वह समय था, जब उनकी राजनीति के प्रति प्रेम व समाजसेवा का भाव सामने आया। वर्ष 1969 में आपने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता स्वीकार और अपने राजनैतिक कौशल के चलते 1974 में राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के पद निर्वाचित भी हुए। यह वह वर्ष था, जब उनकी युवा कांग्रेस की टीम से 10 व्यक्तियों को पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया गया और 08 लोग स्वयं उन्हें मिलाकर विजयी भी रहे। वे उन विशिष्ट व्यक्तियों में से थे, जो पदो को सुशोभित किया करते थे। हर बार अपने कार्य में इतनी कुशलता रखते थे कि हर अगले आने वाले व्यक्ति के लिये वे एक मील का पत्थर साबित होते थे, किसी तरह कारवां बढ़ता गया और वे जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष वर्ष 1980-90 मप्र थोक उपभोक्ता भंडार के प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, महात्मागांधी शिक्षण प्रशिक्षण शोध संस्थान के प्रदेश समिति के संचालक मंडल सदस्य, जिला उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष रहे हैं। शासकीय कार्यो और शासकीय कर्मचारियों में आपकी पकड़ से सभी लोग वाकिफ थे। चपरासी से लेकर प्रमुख अधिकारी आपका सम्मान करते थे, जो कि एक जनसेवा के लिये अतिआवश्यक होता है। जनसेवा के लिए इसी के चलते वर्ष 1993 में नगरपालिका कर्मचारी संघ के लगभग 02 हजार कर्मचारियों का कांग्रेस के बैनर तले समस्याओं का निराकरण भी किया। विद्युत कर्मचारी संगठन, सिवनी संभाग के संरक्षक कृषि उपज मंडी सिवनी कर्मचारी के संरक्षक, जिला द्विसूत्रीय कार्यक्रम के सक्रिय सदस्य, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के सदस्य रहे। जमीनी स्तर में आप काम करने की मिसालें पेश करते हुए आदिवासी विकास खंड कुरई में एक शिविर का आयोजन कर लगभग तीन किमी सड़क का निर्माण भी किया, जिसमें उनके साथ हजारों युवा कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।
वर्षो कांग्रेस की सेवा करने के बाद भी उचित स्थान प्राप्त न होने के चलते आपने विद्रोह भी किया, क्योंकि आप मानते थे कि अगर आपके साथ न्याय न हो तो अन्याय सहन भी जुल्म है। आपे दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सिवनी विधानसभा से चुनाव लड़ा और उसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस और आप में दूरियां बढ़ती चली गई। आपके आघात से कांग्रेस विजयी न हो सकी। खैर आपकी नागरिक मोर्चे में सक्रियता बढ़ी और आपने एक ऐसा विकल्प निकाला, जो कि जनता के लिए सटीक था।
वर्ष 1999-2000 में प्रदेश में सीधे तौर पर नगर पालिका परिषद चुनाव संपन्न होने थे, आपने नागरिक मोर्चे की ओर से अपना नामांकन पत्र भरा, आपको चुनाव चिन्ह के रूप में पीपल का पत्ता आवंटित हुआ और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास में अंकित है। सिवनी नगर की जनता ने आपको अभूतपूर्व समर्थन प्रदान करते हुए आपको सिवनी नपा का अध्यक्ष चुना। आपने अपने कार्यकाल में सभी वार्डों का विकास किया और आप हर दिल अजीत बन गये। चहुंओर आपके अच्छे कार्यों और सहृदय होने की चर्चायें होने लगी, पर शायद नियती को कुछ और ही मंजूर था। नवंबर माह की 04 तारीख को आपको हृदयघात हुआ और हम सभी को रोता बिलखता छोड़कर चले गये। आपने मात्र दो वर्षों में नई ऊंचाईयों को छू लिया था। सारी उम्र अविवाहित रहकर समाज के प्रति इस दिये गये योगदान के लिए आपको सदैव याद रखा जायेगा। मेरी खुशनसीबी है कि मुझ आप जैसे व्यक्तिव को इतने करीब से जानने का मौका मिला। आपकी बारात तो नहीं निकली थी, पर आपकी अंतिम यात्रा का वह मंजर जीवन के अंतिम क्षण तक नहीं भुलाए जा सकते, क्योंकि शहर का हर छोटा बड़ा उस दिन आपको श्रद्धांजलि देने हाथों में फूल और आंखों में आंसू लिये कतारबद्ध खड़ा हुआ था, आपको पुन: श्रृद्धासुमन अर्पित करते हैं.......... -अखिलेश दुबे-
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