लघु लेख(पं.शिवकुमार उपरिंग)।किसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे एक सज्जन व्यक्ति काफी दिनों से परेशान कई डॉक्टरों के चक्कर काटने एवं कई प्रकार की दवाइयां के लेने के बाद एक और किसी के बताने पर कि वह बहुत ही जानकार डॉक्टर(वैद्य)है वहां पहुंचे वैद्य जी के पास काफी भीड़ लगी हुई थी कई लोग अपना इलाज करा रहे थे जैसे तैसे वैद्य जी से मिलने का नंबर आ गया डॉक्टर ने पूछा बताओ क्या तकलीफ है सज्जन व्यक्ति ने अपनी शरीर में हो रही तकलीफ को बताया और साथ में यह भी बताया कि आप से पहले कई और डाक्टरों से भी इलाज करा चुका हूं पर पूर्णरूपेण आराम नहीं मिल रहा है वैद्य जी ने नब्ज चेकअप करके कुछ दवाइयां दी और कहां की इनमें से जो एक दवा है वह आपको गाय के शुद्ध दूध के साथ लेना है आपको आराम चंद दिनों में ही मिल जाएगा वह सज्जन व्यक्ति दवाई लेकर अपने वापस घर लौट आए पहले उनके घर कई गाय हुआ करती थी पर आज अब एक भी गाय उनके घर नहीं है घर आकर सोचने लगे कि शुद्ध गाय का दूध कहां से लाएंगे जिसे मिलाकर दवाई का सेवन करना है आस पड़ोस में भी गाय नहीं थी सज्जन व्यक्ति सोच में पड़ गए उनकी बिल्कुल पास में ही गांव था जिसमें उनके दूर के रिश्तेदार रहते थे उनके यहां दो गाय पल रही थी सोचा उनके हां चल कर बात करूं रिश्तेदार केहां पहुंचे उनको पूरी बात बताई रिश्तेदार ने सहज ही कहा कि बिल्कुल हम आपको गाय का दूध आपके घर अपने बेटे के हाथ भिजवा दिया करेंगे सज्जन व्यक्ति की खुशी का ठिकाना ना रहा एक महीने बाद जब उन सज्जन व्यक्ति ने अपने पुराने रोग की जांच कराई तो वह रोग पूरी तरह ठीक हो चुका था
अब मैं अपनी मूल बात पर आ जाता हूं वर्तमान समय में हम देख रहे हैं कि गोवंश की हालत ठीक नहीं है आवारा सड़कों पर फिरते हुए आपको जगह जगह गोवंश दिख जाएगा धीरे धीरे गोवंश में कमी आना मानव जाति के लिए अच्छा संकेत नहीं देता है मैं निष्पक्ष भाव से उन लोगों की प्रशंसा करना चाहता हूं जो लोग वास्तविकता में गौ सेवा में लगे हुए हैं पहले से अधिक गौशालाओं का निर्माण होना बहुत ही अच्छी और सुंदर बात है पर उनका संचालन भी ठीक से होना जरूरी है उदाहरण के लिए किसी जिले में 50 से ऊपर गौशाला संचालित हो रही हूं फिर भी सड़कों पर गोवंश देखना व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है एवं दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी भी इसका एक प्रमुख कारण है एक बहुत अच्छा गौ सेवा का उदाहरण देखने को भी मिला है एक कस्बे में गौ सेवकों द्वारा गायों की सेवा निरंतर की जा रही है गोवंश को तेज पड़ रही ठंड से बचाने के लिए कई उपाय किए गए हैं इसी तारतम्य में उन्हें खाने के लिए गुड़ से बना हरीला भी दिया गया है अपने मन की भावनाओं को थोड़ा सा गोवंश की सेवा मैं भी लगाया जाए तो सुखद और शानदार अनुभव के साथ अच्छे परिणाम भी सामने आएंगे।