Saturday, 18 December 2021

अखबारों के नाम बट रहे पर्चे


 पी.आर.ओ. असहाय, आर.एन.आई. से हस्तक्षेप की दरकार

राष्ट्रचंडिका सिवनी। नक्कालों की फेहरिश्त लंबी होती जा रही है नकेल कसने वाला अपनी जिम्मेदारी पल्ला झाड़ रहे है ऐसे में कौन इन जबरन दुकानदारी चलाने वाले पर रोक लगायेंगे...? उक्त कथन के परिपेक्ष्य में यह बताते है कि समाचार जगत या मीडिया जिसे बतौर नही तो फिर भी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मान लिया गया है इसकी जिम्मेदारी है कि वह व्यवस्थापिका कार्यपालिका और यहां तक की न्यायपालिका के भी गुणदोष आमजनता के सामने रखे इन महत्वपूर्ण व जनहितकारी कार्यो के मद्देनजर इनकी भूमिका का आंकलन किया जा सकता है पर इन दिनों देखा जा रहा है कि मीडिया खासकर सिवनी जिले का अनियंत्रित होता जा रहा है मीडिया मैनेजमेंट इन दिनों आम चलन का शब्द है जिससे राजनैतिक दल या अफसरशाही, ब्यूरोक्रेट, अधिकारी कर्मचारी अछूते नही बताये जा सकते।
आशय यह है कि समाचार पत्र प्रकाशन की तय नीति के विरूद्ध इस प्रकार के प्रकाशन जारी है इन्हें चलाने वाले दैनिक साप्ताहिक पाक्षिक रूप से प्रकाशित किये जा रहे है हद तो यह है कि अब यह अपने आर.एन.आई. याने भारत सरकार के रजिस्ट्रेशन का बेजा लाभ उठाते हुए मात्र विशेष अवसर जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी, दीपावली, दशहरा, होली पर प्रकाशित हो अपना उल्लू सीधा करते जा रहे है। अब तो चुनावी दंगल शुरू हो गया है फिर हर डाल पर इस प्रकार के उल्लू बैठने को तैयार है जिला पी.आर.ओ. एसडीएम या फिर जिला प्रशासन आदि यदि नाकाम है तो फिर आर.एन.आई. भारत सरकार नई दिल्ली को भी संज्ञान लेना होगा। 
एसडीएम से आवेदन देकर अपना नाम, अपने अखबार के प्रकाशन का नाम भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयन कार्यालय नई दिल्ली भेजो। कुछ खर्चा करो रजिस्ट्रेशन लेकर जिला जनसंपर्क को सूचित करो लो भाई बन गये संपादक और पत्रकार। इसके बाद अपने आंकलन और सेटिंग से लो सरकारी विज्ञापन खाओ कार्यालयों और नेताओं की जान बस इतना ही तो करना है। इन दिनों सिवनी में एक समाचार पत्र प्रकाशित हो रहा है जिसका नाम च्च्दैनिक सिवनी चंडिकाज्ज् है यह कब प्रकाशित होता है, क्यों? इसकी जानकारी जिला जनसंपर्क को भी नही है समाचार पत्रों के पोर्टल में भी यह दर्ज नहीं बताया जाता है पर साहब यह च्च्दैनिक सिवनी चंडिकाज्ज् पम्पलेट-पर्चे के रूप में हर मौके पर ही देखा जा सकता है।

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