Monday, 29 February 2016

दिनेश राय पर ग्रहण लगाने जुटे चाटुकार


  • दिनेश राय पर ग्रहण लगाने जुटे चाटुकार

जिले की समस्या जिले में क्यों नही सुलझाते
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी जिले में जनप्रतिनिधिया में एक बार अक्सर देखने को मिलती है जिले में कोई अच्छा कार्य होता है तो उसका श्रेय वे स्वयं लेने का प्रयास करते हैं और बुरा कुछ होता है वे मौन धारण कर लेते हैं। सिवनी विधानसभा के विधायक दिनेश राय के साथ भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।
वे सिवनी की समस्या के निराकरण के लिये विधानसभा में तो प्रश्र उठाते हैं लेकिन जिला स्तर पर उनके द्वारा कभी कोइ प्रयास नहीं किया जाता। अनेक संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन मे बैठते हैं मगर उन्हे श्री राय समस्या निराकरण के स्थान पर सिर्फ आश्वासन देते हैं।
हाल ही में वीरांगना सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि पर साहित्यिक कार्यक्रम को रोके जाने के दौरान दूसरे दिन जब साहित्यकार पत्रकार, अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा तब भी विधायक श्री राय ने आजादी में अपना अमिट योगदान देने वाली सुभद्र जी के प्रति इतना भी नहीं बना कि वे इस आंदोलन मं शामिल होने पहुंचे अथवा मौखिक रूप से ही समर्थन करते। ज्ञातव्य है कि इस कार्यक्रम की जो संयोजना थी उसमें कोई राजनैतिक पार्टी के उद्देश्य की पूर्ति को विषय नही ंबनाया गया था बल्कि साहित्यिक मंच के माध्यम के लोगों में राष्ट्रप्रेम जागृत करना उद्देश्य था। हाल ही में चल रही विधानसभा में हमारे विधायक जी सिवनी विधानसभा सहित अनेक सड़कों के निर्माण को लेकर सदन के पटल पर प्रश्र रख रहे है लेकिन यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि विधायक जी के निवास के सामने की रोड जब नहीं सुधर पायी है तो फिर अन्य सड़कों के सुधारे जने की बात विधानसभा के पटल पर रखना कहां तक उचित होगा। इसी तरह अन्य समस्याओ को लेकर भी वे ग्रामीणों को गुमराह करते है, अब तो आलम यह ह कि ग्रामीणों ने भी उनके पास आने के स्थान पर दूरिया बनाना प्रारंभ कर दिया है। कुछ निर्धन वर्गो को छोटी मोटी आर्थिक सहायता करके उसका ढिंढौरा पीटना तथा अपने चाटुकारो को अपने इर्द गिर्द घुमाने को ही उन्होंने अपना राजनैतिक दायरा मान लिया है।
भाजपा कांग्रेस से त्रस्त आकर लोगों ने विधायक दिनेश राय को जो कमान सौंपी थी अब ऐसा लगता है उस कमान की पकड़ ढिली नजर आने लगी है। आज हालात यह है कि श्री राय के इर्द गिर्द घूमन वाले विभागों में जाकर विधायक के नाम की धौंस दिखाकर वसूली कर रहे क्या उनके ये कारनामे उनकी भविष्य की राजनीति पर ग्रहण नहीं लगायेंगे? 

किराएदारों से बेखबर पुलिस

किराएदारों से बेखबर पुलिस
राष्ट्रचंडिका/आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और संदिग्धों की निगरानी के उद्देश्य से पुलिस विभाग ने किराएदारों की खोज खबर लेने शुरू की थी, मुनादी कराई गई और किरायादारों को सूचीबद्घ करने थाना स्तर पर अभियान भी चलाया गया लेकिन वह भी टांय-टांय फिस हो गया।
जिला मुख्यालय सहित आसपास अंचलों में कुछ ऐसे अजनबी लोगों ने डेरा डालना शुरू कर दिया है इसका न तो पहले कभी इस शहर से कोई वास्ता रहा है और न आज है। इसी उद्देश्य को लेकर पुलिस ने दीगर प्रदेशों या जिलों से आकर शहर में रह रहे किराएदारों की सूची बनानी शुरू की थी। थानों में कुछ लोगों की सूची तो बनी लेकिन जिन लोगों को टारगेट में रखा गया था वे इससे बाहर ही है। पुलिस के पास केवल उन्हीं लोगों की जानकारी है जिन्होंने खुद थाने में आकर अपना नाम दर्ज कराया था। जिन्होंने नाम दर्ज नहीं कराए इनके बारे में पुलिस के पास कोई भी जानकारी नहीं है। नगर में किराए के मकानों,लाजों सहित अन्य ठिकानों में शरण ले चुके ऐसे लोगों के संबंध में न तो नगरवासियों के पास कोई पुख्ता जानकारी है और न ही पुलिस प्रशासन के पास। किस अजनबी ने कहां से दस्तक दी है, किस मकसद से आया और क्या करता है, इन तमाम जानकारियों को जुटाने की जरूरत मकान मालिक किराए की मोटी रकम के चक्कर में महसूस नहीं करते। लाज संचालक अपनी ग्राहकी बिगडऩे के डर से सिर्फ नाम, पता पूछकर ही काम चला लेता है और पुलिस प्रशासन नियमित रूप से न तो कभी लाज, धर्मशाला की जांच करता है और न ही मकान मालिकों तक पहुंचकर इनके किराएदारों के संबंध में जानकारी जुटाता है। इतना जरूर है कि नगर में चोरी की घटना घटते ही पुलिस प्रशासन इस बात का फरमान जारी कर देता है कि मकान मालिक अपने किराएदारों के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी पुलिस थाना में दे लेकिन पुलिस प्रशासन का यह मौखिक फरमान परवान चढऩे से पहले ही टांय-टांय फिस हो जाता है।
बाहरी लोगों का है जमावड़ा
विश्वसनीय सूत्रों की माने तो सिवनी नगर सहित आसपास के अंचलों में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे लोगों ने पनाह ले रहे हैं जिनका न तो जिले के किसी भी क्षेत्र की वोटर लिस्ट में नाम है और न ही सामाजिक गतिविधियों में दखलंदाजी। दो-चार की संख्या में पहुंचे इन लोगों की संख्या आज इतनी बढ़ गई है कि स्थानीय चेहरे कम ही नजर आने लगे हैं। इन लोगों की पैठ यहां इनती मजबूत हो गई है कि इनका परिचय पत्र व राशन कार्ड भी बन गए हैं जबकि स्थानीय लोग इसको बनवाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। कुल मिलाकर शासन की योजनाओं का ऐसे लोग दुरुपयोग कर शासन प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं। इन सबका कारण प्रशासनिक उदासीनता है। कमीशन की मोह ने कर्मचारियों के हांथ बांध दिए हैं। पात्र लोग दरकिनार कर दिए जाते हैं और अपात्र लोगों को बकायदा घर-घर जाकर राशन कार्ड व अन्य चीजों का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
अपराध में हो रही बढ़ोत्तरी
बाहरी व्यक्तियों के जमावड़े की वजह से आज शांतप्रिय जिला कहलाने वाला कबीरधाम अशांति की आगोश में है। बड़े-बड़े शहरों की तरह यहां भी अब तरह-तरह की वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है इसकी लोगों ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। चोरी, लूटपाट, डकैती, हत्या जैसे अपराधों में विगत कुछ वर्षों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। डकैती, लूटपाट जैसे अपराधों को बढ़ते देख कुछ वर्ष पूर्व अभियान चलाकर मकान मालिकों व लाज मालिकों को सख्त हिदायत देते हुए बाहर से आए लोगों को किराए देने से पहले पूर्ण जानकारी प्राप्त करने तथा इसकी सूचना पुलिस थाने में देने के निर्देश दिए गए। यह अभियान कुछ दिन चलने के बाद टांय-टांय फिस हो गया। वही लाजों में भी बाहर से आए व्यक्तियों का पूर्ण बायोडाटा लेने के बाद किराए से देने की बात कही गई थी। इस दौरान कुछ दिनों तक पुलिस की टीम ने लाजों में जाकर चेकिंग भी किया तथा लोगों से पूछताछ भी किए लेकिन हमेशा की तरह यह अभियान भी कुछ दिन चलने के बाद ठंडे बस्ते में कैद हो गया। नगर में जिस तरह से अपराधिक प्रवृत्तियां बढ़ती जा रही है इसमें बाहरी लोगों का ही हाथ माना जा रहा है बावजूद इसके पुलिस प्रशासन कुंभकर्णीय नींद में सोया हुआ है इसका फायदा अपराधी लोग घटना को अंजाम देकर उठा रहे हैं।
पुलिस विभाग द्वारा किराएदारों की सूची तो बनाई जा रही है साथ ही हाटल व लाज में निरीक्षण कर वहां रूकने वाले लोगों को पहचान पत्र होने के बाद ही रूकने की व्यवस्था करने के निर्देश संचालकों को दिया गया है। शहरवासी अपने किराएदारों का पंजीकरण करवाने में रूचि नहीं दिखा रहे। जिस कारण केवल वे किसी अनजानी मुसीबत को निमंत्रण दे रहे हैं वहीं पुलिस प्रशासन के आदेशों को ठेंगा भी दिखा रहे हैं। इसके लिए शहर पुलिस ने कुछ समय पूर्व लोगों को निर्देश दिए थे कि वे अपने अपने किराएदारों का पूरा विवरण पुलिस को दें ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। पुलिस अब ऐसे लोगों के खिलाफ शीघ्र ही जांच कर कार्रवाई करने का काम करेगी। तुरंत करवाएं पंजीकरण यदिआपने अपने मकान में कोई किराएदार या मकान, दुकान या संस्थान में कोई नौकर रखा है और अभी तक पुलिस थाने में पंजीकरण नहीं करवाया है
बिना किसी जान पहचान के किसी को भी अपना मकान या दुकान किराए पर देना आपको किसी मुसीबत में भी फंसा सकता है क्योंकि हो सकता है किराएदार या नौकर किसी अपराधी प्रवृति का हो तथा उसके संबंध किसी अपराधी से हों तो आप किसी मुसीबत में फंस सकते हैं। इसलिए पुलिस ने किसी को किराए पर या नौकर रखने से पूर्व उसके पहचान पत्र लेना तथा सिटी थाने में पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया है। 

किराए से हेलमेट लेकर भरवा रहे पेट्रोल

किराए से हेलमेट लेकर भरवा रहे पेट्रोल
राष्ट्रचंडिका/  सिवनी/पेट्रोल लेना है तो पास वाली दुकान में जाकर हेलमेट किराये से ले लो, 10 रुपए लगेगा और पेट्रोल भी मिल जाएगा। ये बातें पेट्रोल पंप के एक कर्मचारी ने बिना हेलमेट पेट्रोल भरवाने आये बाइक चालक से कही। इसके बाद बाइक चालक युवक पास की दुकान में गया। जहां एक बालक हाथ में हेलमेट लिये हुए 
           भरवाया पेट्रोल
पेट्रोल पंप का नजारा कुछ और ही देखने को मिला।  कुमार हेलमेट लगाकर पेट्रोल पंप पहुंचा। जहां पर पहले से ही लोगों की भीड़ जमा थी। इस दौरान अमित पेट्रोल भरवाने के बाद जैसे ही वहां से निकला उतने में ही बिना हेलमेट के दूसरे बाइक चालकों ने उसे रोककर उससे हेलमेट ले लिया। इस दौरान तकरीबन आधा घंटे तक एक ही हेलमेट से तकरीबन 2 दर्जन से अधिक लोगों ने पेट्रोल भरवाकर चलते बने। लेकिन वहां पर खड़े पेटोल पंप कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की बजाय पेट्रोल देने में ही व्यस्त रहे। इतना ही नहीं पेट्रोल पंप में जिन वाहन चालकों के पास हेलमेट नहीं है, उन्हें पहले हेलमेट पहनाया जाता, फिर पेट्रोल भरवाया जा रहा था।
पंप संचालकों ने कहा- जब पुलिस नहीं पहना  
  पाई तो हम कैसे हेलमेट पहनाएं
शासन के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को बिना हेलमेट पेट्रोल देने का निर्देश तो दे दिया है। लेकिन उन्हें इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि आये दिन पुलिस शहर के चौराहे पर चेकिंग लगाकर बिना हेलमेट बाइक सवारों का चालान काटती रहती है। बावजूद इसके लोग बिना हेलमेट के ही शहरों की सड़कों पर बाइक दौड़ा रहे हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि जिन वाहन चालकों को पुलिस अभी तक हेलमेट नहीं पहना पाई उनको पेट्रोल न देकर हेलमेट कैसे पहनाया जा सकता है। इस संबंध में कई पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि जब पुलिस हेलमेट नहीं पहना पाई तो हम कैसे पहना पायेंगे
नकली हेलमेट से रहें सावधान
हेलमेट की अनिवार्यता के बाद शहर की सड़को में डुब्लीकेट हेलमेट की दुकानों का सजना शुरू हो गया है। बाहर से आए कुछ विक्रेता शहर में जगह-जगह हेलमेट की दुकान लगाकर बैठ गए हैं और बिना किसी रोक-टोक के हेलमेट बेच रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप जब भी हेलमेट खरीदें। अधिकृत दुकान से ही खरीदें और सस्ते के चर में अपनी जान को खतरे में न डालें। हो सकता है कि इस प्रकार से बिकने वाले हेलमेट नकली हो और वे बाद में आपके लिए परेशानी का सबब बन जाए। शहर में विभिन्न स्थानों पर सड़कों पर हेलमेट बेचने वाले कोई बिल तक नहीं देते।
दो पाहिया वाहन चालकों को हेलमेट अनिवार्य करने नो हेलमेट, नो पेट्रोल का फार्मूला लागू किया गया है। इस आशय का आदेश कलेक्टर ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को जारी किया है। कलेक्टर के आदेश पर पेट्रोल पम्प संचालकों ने नोटिस तो लगा दिया, लेकिन इसका पालन नहीं कर रहे हैं। 
इसलिए जारी हुआ आदेश
पिछले साल प्रशासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। इस पर कोर्ट ने प्रशासन के आदेश पर स्टे दे दिया था। बीते दिनों हाईकोर्ट में फिर से हुई सुनवाई में कोर्ट ने यह कहते हुए आदेश को सही करार दिया कि जिला प्रशासन अगर दुर्घटना रोकने की कोशिश कर रहा है तो हेलमेट की अनिवार्यता गलत नहीं है। इसके बाद से पूरे जिले में इसे लागू कर दिया है।
पूर्व में भी जारी हुए थे आदेश
विभाग ने अपने निर्देश में कहा कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप मालिकों के खिलाफ? आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। पूर्व में भी विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किए थे, लेकिन जनहित याचिकाओं के जरिए इस पर स्थगन लिया गया था। हाई कोर्ट की खंडपीठ (इंदौर) ने इन पर विचार करते हुए सभी याचिका को हाल में रद्द कर दिया। हाई कोर्ट की खंडपीठ (इंदौर) द्वारा याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद नागरिक आपूर्ति विभाग ने हेलमेट पहनने वाले दुपहिया वाहन चालकों को ही पेट्रोल देने के निर्देश दिए हैं।
हेलमेट पहनने वालों को ही पेट्रोल
जिले के सभी पेट्रोल एवं डीजल पम्प मालिकों को निर्देश दिए है कि प्रत्येक दो पहिया वाहन चालक जब भी पेट्रोल एवं डीजल पम्प पर पेट्रोल क्रय करने आए, ऐसी स्थिति में पेट्रोल/डीजल पम्प प्रबंधक अनिवार्य रूप से यह देखे कि दो पहिया वाहन चालक हेलमेट लगाकर आया है या नहीं। जिले में पेट्रोल एवं डीजल मालिक अथवा उसके कर्मचारी बिना हेलमेट वाले दोपहिया वाहन चालक को पेट्रोल का प्रदाय नहीं करेंगे एवं पम्प परिसर में बैनर या बोर्ड में इस प्रकार की सूचना बड़े-बड़े अक्षरों में लगाकर रखे, जिसमें स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख किया गया हो।
सख्ती से रोक
गौरतलब है कि सड़क दुर्घटनाओं में बिना हेलमेट लगाए चालकों को गंभीर चोट, शारीरिक अपंगता, मृत्यु की संभावना अधिक होने को दृष्टिगत रखते हुए ऐसे दो पहिया वाहन चालकों की हेलमेट लगाए बिना ही वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर सख्ती से रोक लगाए जाने हेतु मोटर स्पिरिट तथा हाईस्पीड डीजल ऑयल (अनुज्ञापन तथा नियंत्रण) आदेश 1980 की धारा 10 के अंतर्गत समस्त पेट्रोल एवं डीजल पंप्स के अनुज्ञप्तिधारियों को दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट लगाकर वाहन लेकर आने पर ही उन्हें पेट्रोल प्रदाय किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
नहीं हो रही मॉनीटरिंग
पेट्रोल पम्प संचालक को नो हेलमेट, नो पेट्रोल का पालन कराने के लिए खाद्य विभाग के निरीक्षकों को जिला आपूर्ति नियंत्रक ने निर्देश दिया है। लेकिन कोई भी खाद्य निरीक्षक पेट्रोल पम्प की मॉनीटरिंग नहीं कर रहा है। इससे पेट्रोल पम्प संचालक मनमानी पर उतारु हैं।

Monday, 22 February 2016

सावधान! कहीं ट्रायल रूम के कैमरो में न कैद हो जाएं

सावधान!  कहीं ट्रायल रूम के कैमरो में न कैद हो जाएं
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। आज कल शॉपिंग स्टोर के ट्रायल रूम में गलत ढंग से वीडियो बन रहे हैं जैसी बहुत सारी खबरें हमें सुनाई देती हैं। अखबार, न्यूज चैनल में रोज ही इस तरह की खबरों का जिक्र होता है कि ट्रायल रूम में अगर कोई लड़की कपड़ा चेंज करने गयी है तो उसका एमएमएस बनाकर उसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया गया या इसके एवज में लड़की को ब्लैकमेल किया जा रहा था जिसके कारण तंग आकर लड़की ने आत्महत्या कर ली।


जब भी आप कपड़े चेंज करने के लिए किसी शोरूम के ट्रायल रूम में जाएं तो सबसे पहले ऊपर की ओंर दिए गए कोनों और शीशे को चेक कर लें, ट्रायल रूम में हो सकता है शीशे के पीछे हिडेन कैमरा लगा हो, शीशे में हिडेन कैमरा चेक करने के लिए,रूम में अगर कोई आवाज आ रही है तो उसे ध्यान से सुनें क्योंकि कुछ हिडेन कैमरे मोशन सेंसिटिव होतें हैं जो अपने आप ऑन हो जाते हैं।
रूम में जब भी जाएं एक बार सभी लाइटें बंद करके पूरे रूम का मुआयना करें लें कि कही कोई रेड लाइट या फिर ग्रीन लाइट तो नहीं जल रहीं है।
अगर आपके मन में हिडेन कैमरा होने का शक हो बाजार में आरएफ सिंग्नल डिटेक्टर या फिर बग डिटेक्टर ले खरीद लें, ये डिवाइस रूम में हिडेन कैमरा होने पर आपको सर्तक कर देंगी।
सबसे पहले शीशे में एक उंगली रखें
अगर शीशे में रखी गई उंगली और शीशे में दिख रही उंगली के बीच में गैप रहता है तो मतलब ये ओरीजनल शीशा है, लेकिन अगर शीशे में रखी गई उंगली के बीच में कोई गैप नहीं रहता है और वे जुड़ी रहती हैं तो मतलब शीशे के पीछे सब कुछ दिख रहा है और हो सकता है वहां पर कैमरा लगा हो जो सब रिकार्ड कर रहा हो।
कहीं आप किसी की साजिश का शिकार तो नहीं हो रहे हैं। ऐसा तो नहीं कि किसी साजिशकर्ता ने आपको अपने में कैद करने के मकसद से किसी खास स्थान पर कैमरा छिपा कर रखा हो। तो सजग हो जाएं, आपकी थोड़ी सी सावधानी आप को एक बड़े संकट से बचा सकती है। अगर आप कपड़ों के किसी स्टोर में खरीदारी करने जा रहे हैं तो इस बात को सुनिश्चित कर लें कि स्टोर के ट्रायल रूम में खुफिया कैमरे या वीडियो रिकॉर्डिंग मोड में मोबाइल फोन तो नहीं छुपा के रखा हुआ है। यह सावधानी सिर्फ ट्रायल रूम में ही नहीं बल्कि होटल, कॉलेज, हॉस्टल आदि में भी बरतने की जरूरत है। कहीं आप किसी की साजिश का शिकार तो नहीं हो रहे हैं। ऐसा तो नहीं कि किसी साजिशकर्ता ने आपको अपने में कैद करने के मकसद से किसी खास स्थान पर कैमरा छिपा कर रखा हो। तो सजग हो जाएं, आपकी थोड़ी सी सावधानी आप को एक बड़े संकट से बचा सकती है। अगर आप कपड़ों के किसी स्टोर में खरीदारी करने जा रहे हैं तो इस बात को सुनिश्चित कर लें कि स्टोर के ट्रायल रूम में खुफिया कैमरे या वीडियो रिकॉर्डिंग मोड में मोबाइल फोन तो नहीं छुपा के रखा हुआ है। यह सावधानी सिर्फ ट्रायल रूम में ही नहीं बल्कि होटल, कॉलेज, हॉस्टल आदि में भी बरतने की जरूरत है।
सिवनी की भी कई दुकानों में भी है खुफिया कैमरे
सूत्रों की माने तो नगर में कई दुकानें ऐसी है जहां व्यापारियों ने ट्रायल रूम में खुफिया कैमरे लगा रखे हैं। बड़े शहरों की तर्ज पर सिवनी के व्यापारियों ने भी अपनी दुकानों में ऐसे कैमरे लगा रखे हैं जो दिखाईही नहीं देते। ब्लेकमेलिंग व पैसा कमाने के चक्कर में व्यापारी ऐसा करते हैं ताकि वह किसी संपन्न परिवार की महिला या लड़कियों को ब्लेकमेल कर उनसे पैसे ऐंठ सके।