Wednesday, 24 June 2015

होर्डिग्स लगाये जाने की क्या है नीति ?

होर्डिग्स लगाये जाने कीहोर्डिग्स लगाये जाने की क्या है नीति ? क्या है नीति ?
राष्ट्रचंडिका/  अमर नौरिया  नरसिंहपुर- होर्डिंग्स लगाये जाने की अनुमति को लेकर उच्च न्यायालय में एक मामला अभी कुछ दिन पूर्व तक सुर्खियों में रहा था और उस मामले के चलते ही पूरे प्रदेश में होर्डिंग्स की अनुमति को लेकर नगर पालिका परिषद और गलत तरीके से होर्डिंग्स लगाये गये हैं तो उस बात को लेकर पुलिस विभाग को इस तरह के मामले में कार्यवाही करने के निर्देश जारी किये गये थे , उसके बाद नरसिंहपुर नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर ने भी शहर में लगाई गई होर्डिग्सों की अनुमतियों के न होने पर उन्हें निकाले जाने की कार्यवाही भी की थी 
 नरसिंहपुर नगर पालिका परिषद में होर्डिंग्स लगाये जाने की क्या नीति है इस बात को लेकर सूचना के अधिकार के तहत लगाये गये आवेदन में नगरपालिका परिषद नरसिंहपुर ने अभी तक उक्त जानकारी नहीं दी गई । वहीं इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान में लगभग आधाा  सैकड़ा होर्डिंग्स शहर में विभिन्न स्थानों पर लगाई गई हैं जब इन होर्डिंग्सों को लगाये जाने की अनुमति दी गई है तो वह किस नीति के तहत दी गई है इस बात की जानकारी देने में नगरपालिका परिषद आखिर बच क्यों रही है ।
 पहले हटवाई थी होर्डिग्स -पूर्व नपाध्यक्ष के कार्यकाल के समय नगरपालिका परिषद नरसिंहपुर ने अपने एक पत्र क्रं. 1719/लो.नि.वि./2010 नरसिंहपुर दिनांक 10/9/10 के तहत एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह प्रचारित और प्रसारित किया था कि नगर में यातायात सुव्यवस्था एवं नगर सौन्दर्यकरण को ध्यान में रखते हुये नगरपालिका परिषद शहर में लगी समस्त अवैध होर्डिंग्स को हटवाने की कार्यवाही कर रहा है । तथा इसके बाद जिन व्यक्तियों / एजेंसियों को होर्डिग्स लगाना है आवेदन का प्रारूप प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण कर स्वीकृत प्राप्त कर होर्डिंग्स स्थापित कर सकते हैँ । और इसक पश्चात नगर में होर्डिग्स लगाये जाने की अनुमति नगरपालिका परिषद ने अपने स्तर से जारी कर होर्डिग्स लगाये जाने की अनुमति प्रदान की थी । और पूर्व से लगाई गई      लगभग दर्जनों होर्डिग्स को नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर ने अवैध मानकर उन्हें उखड़वाकर उसका सारा मटेरियल्स अपने कब्जे में रखवा लिया जो आज नगर पालिका में रखा है कि नहीं इसकी जानकारी भी नहीं है ।
अब नगरपालिका परिषद नरसिंहपुर न्यायालय के निर्देश पर पूर्व में शहर से अवैध होर्डिग्स भी हटवा चुकी और जो आधा सैकड़ा होर्डिग्स शहर में लगी हैं उन्हें वैध भी मान लिया जाये तो फिर आखिर नरसिंहपुर नगर पालिका में होर्डिग्स लगाये जाने की क्या नीति है इसका जबाब देने से क्यों बच रही है ।  

09 माह में भी खाली नहीं हुआ मस्के का बंगला

09 माह में भी खाली नहीं हुआ मस्के का बंगला


राष्ट्रचंडिका/ अधिकारी वर्ग के लिए सिवनी जन्नत की तरह है, यहां जो भी आता है वह यहीं का होना चाहता है। एक ऐसे ही पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यपालन यंत्री हैं एस.के. मस्के। जिनका ट्रांसफर 09 माह पूर्व ग्वालियर किया जा चुका है लेकिन इन्होंने अपना बंगला अब तक खाली नहीं किया है। इन्हें अभी भी आस बाकी है कि वह अपना ट्रांसफर पुन: सिवनी करवा सकते हैं। इससे पहले भी इनका ट्र्रांसफर बैतूल व बालाघाट हो चुका था लेकिन इन्होंने वहां चंद माह बिताकर पुन: अपना तबादला सिवनी करवा लिया। मस्के को सिवनी में ऐसा क्या नजर आता है जिसके कारण वह सिवनी में रहना पसंद करते हैं।
09 माह हो चुके हैं लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग मस्के से बंगला खाली नहीं करवा पाया। हमारे सूत्र तो यह भी बताते हैं कि मस्के अपने सिवनी दौरे के दौरान जब भी यहां आते हैं तब वह अपने बंगले में ही रात गुजारते हैं। जब इस संबंध में श्री मस्के से बंगला खाली करवाने के संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा कि हमारे पैकिंग लगभग पूरी हो चुके हैं और संभवत: एक दो दिन में मैं यह बंगला खाली कर दूंगा। 

Monday, 22 June 2015

छोटे कद के ब्लेकमेलर पत्रकार

छोटे कद के ब्लेकमेलर पत्रकार

राष्ट्रचंडिका  सुना है सिवनी में अब ब्लेकमेलर पत्रकार भी पैदा हो गये हैं जो पहले यदा-कदा ही देखने को मिलते थे। नगर का एक मिड डे अखबार (राष्ट्रचंडिका नही) जो लोगों की वाणी कहलाता था जिस पर अब ब्लेकमेलिंग का धब्बा लग गया है। यूं तो सिवनी में ऐसे भी पत्रकार है जिनके पास अखबार न होते हुए भी वह डंके की चोट में वसूली अभियान चलाते हैं। राष्ट्रचंडिका ने पहले भी कई ऐसे पत्रकारों के काले कारनामें सामने लायें हैं जिनका कोई वजूद (अखबार) ही नहीं है। ऐसे पत्रकारों को हम 'छोटे कद केÓ पत्रकार कहेंगे जिनका कद वास्तविकता में लंबा क्यों न हो लेकिन पत्रकारिता में छोटे कद के नाम से ही जाने जायेंगे।
अभी कुछ दिनों से एक पत्रकार की ब्लेकमेलिंग किस्से लोग ठहाके मार-मारके सुन-सुना रहे हैं। चर्चाओं के आधार पर सुनने को मिल रहा है कि बीते दिनों केवलारी/उगली के एक पत्रकार जो एक मिड डे अखबार का संवाददाता भी है, ने रेत ठेकेदार से मैनेज करने की बात कही थी जिसका आडियों वाट्सअप में वायरल हो गया। इस आडियों में यह ब्लेकमेलर पत्रकार कह रहा है कि साहब, आप तो हमें मैनेज ही नहीं कर रहे, हमारे बॉस के साथ रेस्टहाऊस में बैठकर मैनेजमेंट की बात कर लो। इस तुच्छ शब्दों से ऐसा लगता है मानों जैसे भूखे मर रहे हो, पत्रकारिता में पैसा लेना जायज है लेकिन ब्लेकमेलिंग का नहीं। इतना ही नहीं इस ब्लेकमेलर पत्रकार के बॉस (उस्ताद) तो पहले से ही चर्चाओं में रहते हैं। सिवनी छोड़ मंडला, बालाघाट जैसे दूसरे जिलों में इनके द्वारा जमकर धनउगाही की गई है, ऐसा मंडला के लोग बताते हैं। इतना ही नहीं इनका चेला तो ऑडियो में अपने अपने अखबार को भोपाल से प्रकाशित होना बताकर रेत ठेकेदार को धौंस दे रहा है। यही नहीं आडियों में तो रेत ठेकेदार ने चेले के उस्ताद को 05 हजार रूपये महीना देने की बात भी कही।
 धीरे-धीरे अब इनके गढ़े मुर्दे उखडऩे लगे हैं जिसके बाद चर्चा यह भी चल रही है कि 01 से 10 तारीख के बीच इनके पास एक जुआं खिलाने वाले नालकट का पैसा भी पहुंचता है।
इन चंद ब्लेकमेलरों की वजह से पूरी मीडिया बदनाम हो रही है। कभी पत्रकार संगठन के नाम से तो कभी सदस्य बनाने के नाम पर 'छोटे कदÓ के पत्रकार वसूली करते फिरते हैं। बहरहाल ऐसे पत्रकारों को अच्छा खासा सबक मिल गया है जो अब अपना मुंह छिपाए लोगों को सफाई देते फिर रहे हैं। 

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

अब पत्रकार पर हमले की फिराक में स्वयंभू युवा अध्यक्ष 
सच्चाई छापने वाले पत्रकार कभी मरते और डरते नहीं लेकिन बीते दिनों उत्तरप्रदेश के एक निष्पक्ष पत्रकार को जिंदा जला दिया गया। इस पत्रकार ने सिर्फ इतनी हिम्मत जुटाई कि उसने काला धंधा करने वालों की खाल उधेड़ दी जिसके बाद उसे पुलिस की अभिरक्षा में जिंदा जला दिया गया।  इस हादसे के बाद अब नेता, मंत्री, दबंगों व ठेकेदारों के हौंसले बुलंद हो गये हैं। वे तो खुलेआम पत्रकारों को धमकी देते हैं कि तुझे और तेरे परिवार को उठवा लेंगे मगर निष्पक्ष व ईमानदार पत्रकार की इनकी धमकी कुत्ते की भौंक के समान लगती है। 
/ सिवनी। सिवनी में भी ऐसे एक पत्रकार है अजय मिश्रा जो राष्ट्रचंडिका के संपादक को पहले भी जान से मारने की धमकी दे चुके हैं, बावजूद इसके राष्ट्रचंडिका इनकी बखिया उधेड़ते आ रहा है और आगे भी उधड़ेगा। अजय मिश्रा (स्वयंभू) के बारे में कहा जाता है कि ये ब्राम्हण समाज में अपनी धाक जमाकर समाज के लोगों को अपने इशारें पर नचाना चाहते हैं लेकिन हम ऐसा कदापि नहीं होने देंगे। मिश्रा जी हैं तो ठेकेदार लेकिन ये अवैध कब्जा करने के मामले में भी बदनाम हो चुके हैं। 
पत्रकार बनने का भी रखते हैं शौक
समाज में अपना एकछत्र राज जमाने की चाह रखने वाले अजय मिश्रा पत्रकारिता में खासी रखते हैं भले इन्हे पत्रकारिता का 'पÓ नहीं मालूम लेकिन अखबार की आड़ में अपने काम निकालना इन्हे अच्छी तरह आता है। पत्रकारों को अक्सर अखबार से दूर रहने की हिदायत देने वाले अजय मिश्रा ने खुद एक दबंग अखबार लाया लेकिन वह ज्यादा दिनों तक इनके हाथ में नहीं रहा और इनके पास से अखबार छीनकर किसी और को दे दिया गया। 
ब्राम्हण समाज में बैठकों का दौर जारी
राष्ट्रचंडिका अपने विगतांको में ब्राम्हण समाज के स्वयं भू युवा अध्यक्ष की मानसिकता को प्रकाशित करते आ रहा है जिसके बाद ब्राम्हण समाज भी सतर्क होता दिख रहा है और जगह-जगह बैठकों का दौर जारी है। हमारे सूत्र बताते हैं कि कुछ बैठकों से युवा अध्यक्ष अजय मिश्रा को दूर रखा गया जिसके बाद यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि ब्राम्हण समाज में जल्द ही कोई बदलाव आ सकता है और चुनाव हो सकते हैं। 
राष्ट्रचंडिका के संपादक ने दिया सिवनी कोतवाली में आवेदन
सिवनी । उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हुए हमलों की ही तरह सिवनी में पत्रकारों पर हमले होने की बातें फिजां में तैर रही हैं। इस आशय का एक आवेदन बीते दिवस राष्ट्रचंडिका के सपंादक ने कोतवाली सिवनी में दिया है। सिवनी में भी मीडिया जगत द्वारा कुछ लोगों के अनैतिक कामों को अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है। इससे झुझलाकर कुछ लोगों के द्वारा मीडिया पर्सन्स पर हमले की तैयारियां भी की जा रही है। हमारे द्वारा कोतवाली में दिए आवेदन मेें उल्लेख किया गया है कि अजय मिश्रा के खिलाफ लगातार सच्चाई छापने के बाद सूचना मिल रही है कि राष्ट्रचंडिका के संपादक या उनके परिवार पर कोई हमला कर सकता है। इसी के चलते थाना कोतवाली को इसकी इत्तला दे दी गई है। यदि संपादक या उसके परिवार को कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार अजय मिश्रा होंगे। 

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

अब पत्रकार पर हमले की फिराक में स्वयंभू युवा अध्यक्ष 
सच्चाई छापने वाले पत्रकार कभी मरते और डरते नहीं लेकिन बीते दिनों उत्तरप्रदेश के एक निष्पक्ष पत्रकार को जिंदा जला दिया गया। इस पत्रकार ने सिर्फ इतनी हिम्मत जुटाई कि उसने काला धंधा करने वालों की खाल उधेड़ दी जिसके बाद उसे पुलिस की अभिरक्षा में जिंदा जला दिया गया।  इस हादसे के बाद अब नेता, मंत्री, दबंगों व ठेकेदारों के हौंसले बुलंद हो गये हैं। वे तो खुलेआम पत्रकारों को धमकी देते हैं कि तुझे और तेरे परिवार को उठवा लेंगे मगर निष्पक्ष व ईमानदार पत्रकार की इनकी धमकी कुत्ते की भौंक के समान लगती है। 
/ सिवनी। सिवनी में भी ऐसे एक पत्रकार है अजय मिश्रा जो राष्ट्रचंडिका के संपादक को पहले भी जान से मारने की धमकी दे चुके हैं, बावजूद इसके राष्ट्रचंडिका इनकी बखिया उधेड़ते आ रहा है और आगे भी उधड़ेगा। अजय मिश्रा (स्वयंभू) के बारे में कहा जाता है कि ये ब्राम्हण समाज में अपनी धाक जमाकर समाज के लोगों को अपने इशारें पर नचाना चाहते हैं लेकिन हम ऐसा कदापि नहीं होने देंगे। मिश्रा जी हैं तो ठेकेदार लेकिन ये अवैध कब्जा करने के मामले में भी बदनाम हो चुके हैं। 
पत्रकार बनने का भी रखते हैं शौक
समाज में अपना एकछत्र राज जमाने की चाह रखने वाले अजय मिश्रा पत्रकारिता में खासी रखते हैं भले इन्हे पत्रकारिता का 'पÓ नहीं मालूम लेकिन अखबार की आड़ में अपने काम निकालना इन्हे अच्छी तरह आता है। पत्रकारों को अक्सर अखबार से दूर रहने की हिदायत देने वाले अजय मिश्रा ने खुद एक दबंग अखबार लाया लेकिन वह ज्यादा दिनों तक इनके हाथ में नहीं रहा और इनके पास से अखबार छीनकर किसी और को दे दिया गया। 
ब्राम्हण समाज में बैठकों का दौर जारी
राष्ट्रचंडिका अपने विगतांको में ब्राम्हण समाज के स्वयं भू युवा अध्यक्ष की मानसिकता को प्रकाशित करते आ रहा है जिसके बाद ब्राम्हण समाज भी सतर्क होता दिख रहा है और जगह-जगह बैठकों का दौर जारी है। हमारे सूत्र बताते हैं कि कुछ बैठकों से युवा अध्यक्ष अजय मिश्रा को दूर रखा गया जिसके बाद यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि ब्राम्हण समाज में जल्द ही कोई बदलाव आ सकता है और चुनाव हो सकते हैं। 
राष्ट्रचंडिका के संपादक ने दिया सिवनी कोतवाली में आवेदन
सिवनी । उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हुए हमलों की ही तरह सिवनी में पत्रकारों पर हमले होने की बातें फिजां में तैर रही हैं। इस आशय का एक आवेदन बीते दिवस राष्ट्रचंडिका के सपंादक ने कोतवाली सिवनी में दिया है। सिवनी में भी मीडिया जगत द्वारा कुछ लोगों के अनैतिक कामों को अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है। इससे झुझलाकर कुछ लोगों के द्वारा मीडिया पर्सन्स पर हमले की तैयारियां भी की जा रही है। हमारे द्वारा कोतवाली में दिए आवेदन मेें उल्लेख किया गया है कि अजय मिश्रा के खिलाफ लगातार सच्चाई छापने के बाद सूचना मिल रही है कि राष्ट्रचंडिका के संपादक या उनके परिवार पर कोई हमला कर सकता है। इसी के चलते थाना कोतवाली को इसकी इत्तला दे दी गई है। यदि संपादक या उसके परिवार को कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार अजय मिश्रा होंगे।