Sunday, 28 October 2012

जगतगुरू शंकराचार्य के सानिध्य में होगी विष्णु व महालक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा


जगतगुरू शंकराचार्य के सानिध्य में होगी विष्णु व महालक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा

राष्ट्र्रचंडिका/ नगर के बस स्टैण्ड मंदिर लक्ष्मी नारायण दिव्यधाम में विराजित भगवान विष्णु एवं भगवती महालक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा व कलशारोहण का भव्य आयोजन आगामी अक्षय तृतीया के पुण्य अवसर पर अनंत श्री विभूषित जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में होगा। इस अविस्मरणीय और गौरवशाली अवसर पर स्
वयं महाराज श्री के साथ ही दण्डी स्वामी पूज्य सदानंद सरस्वती जी महाराज, अमरकंटक के महामण्डलेश्वर जी, संत सुबुद्धानंद जी महाराज सहित अनेक संतो की उपस्थिति की अनुमति महाराज श्री द्वारा प्रदान कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि नगर के धार्मिक, सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कुछ उत्साही युवकों द्वारा काफी दिनों से इस बात का प्रयास किया जा रहा था कि मंदिर में विराजित जगधापति भगवान लक्ष्मीनारायण जी की दिव्य प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम अनेक संयोगो से सुसज्जित ऐसे अनूठे अवसर पर संपन्न हो, जब ग्रह नक्षत्र और तिथियां तो अनुकूलहो ही बल्कि स्वयं श्री अनंत विभूषित जगतगुरू स्वामी शंकराचार्य जी की उपस्थिति भी इस धार्मिक अनुष्ठान को अलौकिकता प्रदान करें। इन धर्म परायण युवाओं का संकल्प उनकी श्रद्धा, लगन और विश्वास का ही प्रतिफल है कि 2013 में पडऩे वाली अक्षय तृतीय के पावन अवसर पर महाराज श्री अपनी उपस्थिति की अनुमति प्रदान कर उन्हें कृतार्थ कर दिया है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान लक्ष्मी नारायण का नैमेतिक पूजन अर्चन इस मंदिर में चल रहा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विशाल शोभायात्रा, प्राण प्रतिष्ठा एवं कलशारोहण होंगे। जगत के पालनकर्ता, ग्रह और नक्षत्रों के स्वमी भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, अक्षय तृतीय जैसी सर्वश्रेष्ठ तिथि और संत समागम एक ऐसा अनुपम एवं दुर्लभ सुसंयोग है जो जन्मो की साधना और अनेक पुण्य कर्मो के फलस्वरूप मानव जीवन को प्राप्त होता है।

लता रानी पुलिस को पिला रही पानी


लता रानी पुलिस को पिला रही पानी
सिवनी में जहां रोजगार के अवसर न के बराबर है, वहीं गुण्डागर्दी, वसूली के साथ साथ सट्टे का भरा पूरा कारोबार चल रहा है। आज हर कोई इस काम में हाथ डालकर रातों-रात करोड़पति बनने की जुगत भिड़ा रहा है और अगर आज का युवा ऐसा सोचता है तो उसकी गलती भी नहीं है। इस सोच के पीछे उसके सामने कई उदाहरण है। उनमें से एक प्रत्यक्ष ही सामने ही, जिसमें एक महिला जो 5-6 वर्षो पहले एक छोटी सी
लकड़ी और सब्जी की दुकान बुधवारी बाजार में लगाया करती थी, इनका पति मैकेनिक था और आज उसका अपना एम्पायर खड़ा हुआ है। कार, बंगला, बैंक बैलेंस और लठैत ये सभी चीजें चंद वर्षों के भीतर सट्टा खिलाने के चलते उसके पास आ गई। इतना ही नहीं पुलिसिया संरक्षण जितना उक्त महिला को मिला है, उतना शायद ही इतिहास में किसी काले काम करने वाले को प्राप्त हुआ होगा।
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। हम बात कर रहे हैं लता नामक एक सट्टा लिखाने वाली महिला की, जिसका फेसबुक पर पुलिस के साथ सांठगांठ कर सट्टा खिलाने का वीडियो भी डला हुआ है। उक्त महिला के द्वारा खटीकी मोहल्ले में 09 लाख रू. का भवन, भैरोगंज क्षेत्र में दो मंजिला लगभग 10 लाख रू. का भवन, एक शिफ्ट कार और अनेको प्लॉट इस काले धंधे के द्वारा बना लिये गये हैं। जब हमारे रिपोर्टर ने इसका स्टिंग ऑपरेशन किया तो उस महिला के द्वारा अपने कुछ गुर्गे रिपोर्टर के पीछे लगा दिये गये। आये दिन रिपोर्टर के मोबाईल पर जान से मारने की धमकियां तक मिल रही हैं। इतना सब होने के बाद भी नगर कोतवाली के एक पुलिस अधिकारी इनके किरायेदार के रूप में निवासरत हैं।
इस महिला की शिकायत पुलिस विभाग तो दूर हमारे जिला कलेक्टर को तक की जा चुकी है, जिसमें यह बताया गया था कि उक्त महिला बुधवारी क्षेत्र में खुलेआम सट्टे का काला कारोबार चला रही है और इस पर त्वरित कार्यवाही नहीं की गई तो इसके गंभीर परिणाम मिल सकते हैं। भैरोगंज क्षेत्र के नागरिक भी उक्त महिला से त्रस्त हो चुके हैं और जल्द ही एक दल के साथ शिकायत करने पहुंच रहे हैं। किंतु प्रश्र यह है कि हमारा सिवनी एक शांत और दहशतमुक्त नगर है, जहां ऐसे काले कामों को करने वालों के लिये कोई जगह नहीं है। फिर भी इस प्रकार के धंधे खुले रूप से चल रहे हैं, जिसमें चलते कई घर टूट चुके हैं और कई घर टूटने की कगार पर है। अपनी महिने भरे की गाढ़ी कमाई आदमी सट्टे में खर्च कर घर में भूखे मरने की नौबत ला रहा है। क्या इतने पर भी हमारा पुलिस विभाग सोया रहेगा? अपने गौरवशाली 150 वें वर्ष को मना रही पुलिस क्या अपनी शपथ को तक भूल चुकी है? जो ऐसे लोग फल-फूल रहे हैं।

कौन है लता बाई......?
सिवनी नगर में सट्टा क्वीन के नाम से प्रचलित महिला सट्टा व्यवसायी लता बाई इन दिनों सट्टा खेलने वालों की जुबान पर बखूबी सुनने को मिलती है। किसी समय में कर्जे से लैस लता बाई एक वक्त की रोटी के लिए मोहताज हुआ करती थी। सूत्र बताते हैं कि उस समय उसका भाई मदन सट्टा पट्टी का काम करता था और लता बाई को इस लाईन में लाने के लिये मदन का खासा रोल रहा है, लेकिन देखते ही देखते बहन ने अपने ही भाई के साथ विश्वासघात करके सट्टे का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया कि मदन तो गुमनामी के समुंदर में समा गया, लेकिन सट्टा साम्राज्य की महारानी लता बाई अब इस साम्राज्य की क्वीन मानी जाती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अपराधियों को दुश्मन समझने वाली पुलिस भी इन अपराधियों के साथ पूरी मित्रता का भाव रखती है और लताबाई के साथ खाकीधारक एसआई और सिपाही चाय-पान की दुकान में चाय- नाश्ता करते हुए देखे जाते हैं और अगर इनके सबूत कोई समाचार पत्र के रिपोर्टर एकत्रित करें तो ऐसे खबरची को लताबाई के गुर्गे को ढूंढकर चमकाने से बाज भी नहीं आते। सूत्र बताते हैं कि किसी समय में रोड पर रहने वाली यह महिला आज करोड़पति बनने की कगार पर है और पैसे के मोह के कारण सट्टा जैसे अवैध व्यवसाय को छोडऩे का नाम नहीं ले रहीहै। इसके एक कारण यह भी है कि पुलिस प्रशासन के निकृष्ट और बेईमान एसआई व सिपाही इसे खुला संरक्षण देकर इसके हौंसले बुलंद कर रहे हैं। बड़े ही शर्म की बात है कि पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे यह सब चल रहा है, फिर भी पुलिस के आला कमान अपने ही विभाग पीठ थपथापने और छोटी मोटी उपलब्धि को बढ़ाचढ़ाकर बताने से बाज नहीं आते। प्रश्र यह उठता है कि आखिर लता बाई के इस साम्राज्य पर कौन सच्चा और ईमानदार अफसर गाज गिराकर इसे धराशायी करेगा? या फिर पुलिस प्रशासन में ऐसा कोई सच्चा ईमानदार अफसर ही नही है? यह प्रश्र यथावत आज भी जनता के जहन में उभर रहा है।

हिल गया लता का साम्राज्य


हिल गया लता का साम्राज्य
राष्ट्रचंडिका पर लगाया 2000 रू. मांगने का झूठा आरोप, एएसआई पंद्रे की गाड़ी में घूमती थी लता बाई
नगर में सट्टा व्यवसाय का संचालन करने वाली और सट्टा क्वीन के नाम से विख्यात प्राप्ति लता कुल्हाड़े देर सही लेकिन पुलिस क
े जाल में फंस ही गई। पुलिस कार्यवाही में एसआई श्रीमती प्रीति विजय तिवारी ने जाल बिछाकर इसे एक बोरा सट्टा पट्टी और 05 हजार रू. नगद के साथ रंगे हाथ दबोच लिया। एसआई प्रीति तिवारी की यह कार्यवाही काबिले तारीफ है, जिसने पुलिस की छवि पर लगते दाग को कुछ हद तक साफ किया है, लेकिन प्रश्र यह उठता है कि क्या इस कार्यवाही में लता के पास बचने के लिए कोई दूसरा उपाय था, क्योंकि यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि सट्टा क्वीन के नाम से प्रसिद्ध रही यह महिला पुलिस प्रशासन के कुछ कर्मचारी और अधिकारियों से गहरा तालुक्क रखती है। यहीं नहीं पुलिस प्रशासन के सिपहे सालारों को अपने मकान में किराये से रखना और फिर उन्हीं का संरक्षण लेना इसकी पुरानी फितरत है।
राष्ट्रचंडिका। अब चूंकि लता बाई पुलिस शिंकजे में कसी जा चुकी थी, तो थाने में इस भीगी बिल्ली ने निर्भिकता से समाचार प्रकाशित करने वाले और जनहित में समाचार प्रकाशित करने का संकल्प लेने वाले हमारे राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रधान संपादक को ही दागदार बनाने की कोशिश की है। जबकि यह सभी लोग जानते हैं कि राष्ट्रचंडिका ने लता कुल्हाड़े की हर अपराधिक गतिविधियों को पूरी निष्पिक्षता के साथ समय- समय पर जिला प्रशासन और जनता के सामने रखी है।
यहां हम अपने सुधि पाठकों को यह अवश्य बताना चाहेंगे कि लता बाई ने अपने घर पर एक एसआई को मकान किराये पर दे रखा था। इस बात को पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखते हुए समाचार ''अपराधी के यहां रह रहे एसआई ÓÓ शीर्षक से प्रकाशित किया था। जुलाई माह के अंक क्रं. 34 पर समाचार प्रकाशन के बाद श्री जैन से राष्ट्रचंडिका ने दूरभाष पर भी चर्चा की थी। एसआई बैस जो कि लता बाई के यहां किराये से रहते थे, उन पर कार्यवाही करने की हामी भी श्री जैन ने भरी थी। राष्ट्रचंडिका की सट्टा और अपराधियों के खिलाफ यह पहली मुहिम थी। इसके पश्चात इसी मुहिम पर सितंबर माह के अंक. क्रं. 45 के पृष्ठ क्रं. 08 पर 'आजाद वार्ड में सट्टा कारोबारÓ शीर्षक से पुन: समाचार प्रकाशित किया। इस समाचार प्रकाशन के बाद भी पुलिस प्रशासन अपनी कुंभकरणीय नींद में सोये रहा और सट्टा नगरिया पर कोई कार्यवाहीं नही किया। तो राष्ट्रचंडिका ने फिर पुलिस प्रशासन को कुंभकरणीय नींद से जगाने के लिए अक्टूबर माह के अंक क्रं. 48 पर 'लता रानी पुलिस को पिला रही पानीÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। समाचार प्रकाशन के बाद ही जिले में पहली बार अनुविभागीय पुलिस अधिकारी के रूप में पदस्थ सिद्धार्थ बहुगुणा ने इस सट्टा नगरिया को संज्ञान में लेकर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को कार्यवाही के आदेश दिये। तो थाना कोतवाली में कुंभकरणीय नींद पर सोए अधिकारी भी जाग गये और ऐन-केन- प्रकरेण लता के साम्राज्य को हिलाने की कोशिश में लग गये, जिस पर महिला एसआई श्रीमती प्रीति विजय तिवारी ने सफलता भी प्राप्त की।
मजे की बात तो यह है कि अपने धंधे में आंच आते देख और पुलिस शिंकजे में कसी लता बाई ने अपने आपको बचाने के लिए राष्ट्रचंडिका के प्रधान संपादक पर ही झूठा आरोप लगाना प्रारंभ कर दिया, जो सरासर निराधार है। माह जुलाई से अक्टूबर तक जिला प्रशासन को लता बाई के इस अवैध कारोबार पर कार्यवाही करने के लिए और अपनी निष्पक्षता पर अडिग राष्ट्रचंडिका यह चाहता था कि जिले से सट्टा जैसे कारोबार को खत्म किया जा सके और खून पसीने की कमाई को धनवान बनने के शार्टकर्ट रास्ते पर गरीब जनता न उजड़ सके। पुलिस प्रशासन की इस कार्यवाही के बाद लता रानी के आतंक में कुछ तो कमी आई है, लेकिन अब भी नगर में ऐसे दर्जनों सट्टा खाईबाज अब भी सक्रिय है, जो अपने इस कारोबार को यथावत जारी रखे हुए हैं।
प्रश्र यह उठता है कि लता कुल्हाड़े पर तो पुलिस प्रशासन ने कार्यवाही करके अपने दाग धोने की कोशिश की है, लेकिन उन पुलिस अधिकारियों का क्या होगा जो सामने से लता बाई के इस सट्टा कारोबार को देखकर भी इसे संरक्षण देते आए हैं? क्या उन एसआई और पुलिस कर्मियों पर कभी गाज गिर पायेगी? नेट पर अपलोड उस वीडियों पर खाकीधारक पंद्रे और शुक्ला स्पष्ट नजर आ रहे हैं, जो सट्टा क्वीन के साथ चाय की चुश्कियां लेकर क्वीन के व्यवसाय के हाल-चाल जान रहे हैं, क्या इन पर कोई कार्यवाही होगी? क्या एसपी महोदय ऐसे भ्रष्ट और निकृष्ठ अधिकारियों को सबक सिखा पायेंगे? जो खाकी को दागदार बनाते हैं?

5555 की मालकीन पंद्रे
नगर में यह चर्चा जोरों पर है कि किसी समय में कौड़ी को मोहताज लता बाई आज करोड़ों की मालकीन है और देखते ही देखते इसकी आर्थिक स्थिति आसमान छू रही है। कई लाखों का बैंक बैलेंस और नगर में महंगे- महंगे मकानों की मालकिन बन चुकी यह महिला किसी समय में पैदल चलती थी। सट्टे के व्यापार में कमाये काले धन से पहले यह दोपहिया वाहन पर उतरी और फिर देखते ही देखते चारपहिया वाहन में घूमने लगी। एमपी 28/ 5555 पर लता बाई को नगर में अक्सर घूमते देखा गया है, लेकिन पाठकों को यह जानकर हैरानी होगी कि एमपी 28/5555 एक खाकीधारक की पत्नी के नाम पर है। आरटीओ विभाग छिंदवाड़ा में यह वाहन एएसआई पंद्रे की श्रीमती के नाम पर रजिस्टर्ड है। इन बातों से स्पष्ट होता है कि लता बाई को पंद्रे का खुला संरक्षण था। यहीं नहीं सूत्र तो यह भी बताते हैं कि पंद्रे लताबाई के साथ सट्टा के इस व्यापार में पार्टनरशिप भी चाहता था। इस पार्टनरशिप के ही लालच के कारण ही वह लताबाई पर इतना मेहरबान था और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को लता के इस कारोबार पर कार्यवाही करने से रोकता था। इन तथ्यों के उजागर होने के बाद अब देखना है कि क्या उच्चाधिकारियों की जांच पंद्रे पर गिरेगी? यह भविष्य की गर्त पर है।