कोरोना को आए हुए दो तीन साल हो गए हैं और अभी तक इसका स्थायी इलाज नहीं मिला है। चिंता की बात यह है कि कोरोना को लेकर आए दिन, जो नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं, वो डरावने वाले हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण अब 10 या 14 दिनों में नहीं बल्कि दो दिन में सामने आ रहे हैं।
कोरोना वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिस तरह से कोरोना के नए-नए खतरनाक वेरिएंट सामने आ रहे हैं, उससे स्थिति और ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। डेल्टा (Delta) और ओमीक्रोन (Omicron variant) जैसे कोरोना के नए वेरिएंट आने के बाद इस घातक वायरस के लक्षण भी तेजी से बदल रहे हैं। कोरोना को आए हुए तीन साल हो गए हैं और अभी तक इसका स्थायी इलाज नहीं मिला है। चिंता की बात यह है कि कोरोना को लेकर आए दिन, जो नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं, वो डरावने वाले हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण अब 10 या 14 दिनों में नहीं बल्कि दो दिन में सामने आ रहे हैं।
कोरोना वायरस के लक्षणों (Covid-19 symptoms) को लेकर यह अध्ययन इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने DHSC और रॉयल फ्री लंदन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ मिलकर किया है। शोधकर्ताओं के एक समूह ने अध्ययन के दौरान कुछ स्वस्थ लोगों वायरस से संक्रमित किया। उन्होंने समय के साथ उन पर नजर रखी ताकि वे शरीर में वायरस के संपर्क में आने और संक्रमण से विकास और लक्षणों की शुरुआत तक होने वाले परिवर्तनों को देख सकें। यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जो पहले दिन से लेकर खात्मे तक संक्रमण की पहचान करता है।
शोधकर्ताओं ने यह पाया कि संक्रमण गले से शुरू होकर पांच दिनों में अपने चरम पर पहुंच जाता है। इसने संकेत दिया कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने का सबसे कारगर तरीका है कि मुंह और नाक को मेडिकल मास्क से ढक दिया जाए। शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि लेटरल फ्लो टेस्ट (एलएफटी) यह जांचने का प्रभावी तरीका है कि क्या वायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमण को अन्य लोगों तक पहुंचाने में सक्षम है।
शोधकर्ताओं ने यह पाया कि संक्रमण गले से शुरू होकर पांच दिनों में अपने चरम पर पहुंच जाता है। इसने संकेत दिया कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने का सबसे कारगर तरीका है कि मुंह और नाक को मेडिकल मास्क से ढक दिया जाए। शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि लेटरल फ्लो टेस्ट (एलएफटी) यह जांचने का प्रभावी तरीका है कि क्या वायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमण को अन्य लोगों तक पहुंचाने में सक्षम है।
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