Sunday, 27 February 2022

4 साल का बच्चा बना कॉन्स्टेबल, 18 साल का होने तक मिलेगी इतनी सैलरी

 

मध्य प्रदेश के कटनी  जिले में एक 4 साल के बच्चे को पुलिस विभाग में चाइल्ड कॉन्स्टेबल के पद पर नियुक्त किया गया है. बच्चे के पिता नरसिंहपुर जिले में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे.
राष्ट्र चंडिका,कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी  जिले में अनुकंपा के आधार पर चार साल के एक बच्चे को बाल रक्षक या चाइल्ड कॉन्स्टेबल  नियुक्त किया गया है. बच्चे को 18 साल का होने तक कॉन्स्टेबल का आधा वेतन मिलेगा. मध्य प्रदेश में बाल रक्षक की नियुक्ति का प्रावधान है. एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी.
एजेंसी के अनुसार, कटनी के पुलिस अधीक्षक  सुनील जैन ने बताया कि गजेंद्र मरकाम को इस सप्ताह चाइल्ड कॉन्स्टेबल  नियुक्त किया गया. गजेंद्र के पिता श्याम सिंह मरकाम एक हेड कॉन्स्टेबल थे. वे मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में तैनात थे. बच्चे ने अपने पिता को खो दिया था. इसको लेकर बच्चे को विभाग में अनुकंपा नियुक्ति दी गई है. वहीं कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज केडिया ने बताया कि कटनी में बाल रक्षक के करीब छह या आठ पद हैं. नियमानुसार गजेंद्र को 18 साल की उम्र और स्कूली शिक्षा पूरी करने तक नियमित सिपाही का आधा वेतन मिलेगा.
पुलिस की कार्यशैली समझने के लिए आना होगा दफ्तर
केडिया ने कहा कि गजेंद्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली को जानने समझने के लिए एक या दो बार कार्यालय आएंगे. उन्होंने कहा कि जबलपुर अंचल के पुलिस महानिरीक्षक ने गजेंद्र को यहां बाल रक्षक के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव कटनी पुलिस को भेजा था, क्योंकि नरसिंहपुर में कोई पद खाली नहीं था. बता दें कि मध्य प्रदेश पुलिस में अनुकंपा के आधार पर बाल रक्षक की नियुक्ति का प्रावधान है


Thursday, 24 February 2022

उमरिया में बोरवेल में गिरा 4 साल का बच्चा बच नहीं सका, 15 घंटे चला रेस्क्यू

 राष्ट्र चंडिका( अनुज सेन)उमरिया. यहां के बरछड़ गांव में 24 फरवरी को 4 साल का बच्चा गौरव द्विवेदी खेलते-खेलते 200 फीट के बोरवेल में गिर गया था। बच्चा 28 फीट पर फंसा था। करीब 15 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन में बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरफ, एसडीईआरएफ, पुलिस की टीमें लगी थीं।

ऐसे चलाया रेस्क्यू: गौरव को बचाने में लगी रेस्क्यू टीम को 15 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद 25 फरवरी तड़के 4 बजे सफलता मिली। टीम ने बोरवेल के समानांतर 28 फीट का गड्ढा बनाने के बाद टनल बनाकर मासूम को निकाला। इसके बाद गौरव को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। बच्चे को नजदीकी सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र (बरही) ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG शहडोल जोन) दिनेश चंद्र सागर, कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और एसपी प्रमोद सिन्हा के साथ स्वास्थ्य अमला और पुलिस-प्रशासन भी मौके पर डटे रहे।

ये बोले डॉक्टर: ये बोले डॉक्टर: मीडिया से बात करते हुए बरही सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र के डॉ. राजमणि पटेल ने बताया कि गौरव की मौत 6-7 घंटे पहले ही हो गई थी। बच्चे की मौत की मुख्य वजह पानी में डूबना और सांस लेने में तकलीफ थी। रेस्क्यू ऑपरेशन ले दौरान सैकड़ों ग्रामीण भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। प्रदेश सरकार के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी गौरव के बोरवेल से सुरक्षित निकलने की ईश्वर से कामना की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चे को बचाया नहीं जा सका।




रिश्वत लेते पंचायत सचिव रंगे हाथ गिरफ्तार

 

राष्ट्र चंडिका,गुना(पं.शिवकुमार उपरिंग) ।लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायत सचिव को ₹40000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है यह मामला गुना जिले का है पंचायत सचिव देवनारायण शर्मा ने पाइपलाइन हैंड ओवर करने के लिए ठेकेदार से रिश्वत मांगी थी ग्वालियर की लोकायुक्त टीम ने पंचायत सचिव को ₹40000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है गिरफ्तार पंचायत सचिव जनपद पंचायत गुना की गोपालपुरा टकटीया मैं सचिव के पद पर पदस्थ था लोकायुक्त पुलिस को पंचायत सचिव के द्वारा बिल पास कराने के नाम पर पैसा मांगे जाने की शिकायत मिली थी इस शिकायत पर रिश्वत लेते पकड़ने के लिए लोकायुक्त पुलिस की एक टीम बुधवार सुबह के समय गुना आई उसने फरियादी ठेकेदार को ₹40000 रंग लगे नोट पंचायत सचिव को देने के लिए कहकर रवाना किया यहां दोपहर 12:30 बजे के करीब गुना शहर के हनुमान चौराहे पर नगर पालिका के सामने फरियादी ने पंचायत सचिव को बुलाकर पाउडर लगे यह नोट दे दिए नोट देते ही लोकायुक्त पुलिस ने पंचायत सचिव को धर दबोचा एवं मौके पर ही उसके हाथ धुलाए उसके हाथ में रंग निकला इसके बाद  टीम उसको लेकर सिटी कोतवाली पहुंची जहां कागजी कार्रवाई हुई यह मामला गुना जिले का है गुना जिले की बमोरी विधानसभा के वर्तमान विधायक महेंद्र सिंह सिसोदिया प्रदेश सरकार में ग्रामीण पंचायत मंत्री भी हैं गुना जिला उनका गृह  जिला भी है

बमोरी विधानसभा में कांग्रेस का घर चलो घर-घर चलो अभियान जारी

 राष्ट्र चंडिका,गुना(पं.शिवकुमार उपरिंग) । गुना जिले की बमोरी विधानसभा के  ग्रामीण क्षेत्र मैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर घर चलो घर घर चलो अभियान के तहत कांग्रेस जन कई ग्रामों का दौरा कर रहे हैं जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सुमेर सिंह गढा कांग्रेस जनों के साथ गांव-गांव घूमकर ग्रामीण लोगों से मिल रहे हैं एवं उन्हें भाजपा सरकार की विफलता बताते हुए बेरोजगारी  बढ़ती महंगाई के बारे में समझा रहे हैं तथा 15 महीने की कमलनाथ सरकार के काम भी  गिना रहे हैं इसी तारतम्य पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुमेर सिंह गढा बमोरी क्षेत्र के ग्राम अकोदा, बमोरी, भैंसटोरी,खैरीखता, कुसमखो, उमरी, मोहनपुर, अमरोही, सहित लगभग 30-35 गांव का दौरा अभी तक कर चुके हैं

Tuesday, 8 February 2022

10 या 14 नहीं, अब सिर्फ 2 दिन में दिख रहे हैं कोरोना के ये 5 लक्षण, तुरंत जांच कराएं

 

कोरोना को आए हुए दो तीन साल हो गए हैं और अभी तक इसका स्थायी इलाज नहीं मिला है। चिंता की बात यह है कि कोरोना को लेकर आए दिन, जो नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं, वो डरावने वाले हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण अब 10 या 14 दिनों में नहीं बल्कि दो दिन में सामने आ रहे हैं।

कोरोना वायरस  का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिस तरह से कोरोना के नए-नए खतरनाक वेरिएंट सामने आ रहे हैं, उससे स्थिति और ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। डेल्टा (Delta) और ओमीक्रोन (Omicron variant) जैसे कोरोना के नए वेरिएंट आने के बाद इस घातक वायरस के लक्षण भी तेजी से बदल रहे हैं। कोरोना को आए हुए तीन साल हो गए हैं और अभी तक इसका स्थायी इलाज नहीं मिला है। चिंता की बात यह है कि कोरोना को लेकर आए दिन, जो नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं, वो डरावने वाले हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण अब 10 या 14 दिनों में नहीं बल्कि दो दिन में सामने आ रहे हैं।
कोरोना वायरस के लक्षणों (Covid-19 symptoms) को लेकर यह अध्ययन इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने DHSC और रॉयल फ्री लंदन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ मिलकर किया है। शोधकर्ताओं के एक समूह ने अध्ययन के दौरान कुछ स्वस्थ लोगों वायरस से संक्रमित किया। उन्होंने समय के साथ उन पर नजर रखी ताकि वे शरीर में वायरस के संपर्क में आने और संक्रमण से विकास और लक्षणों की शुरुआत तक होने वाले परिवर्तनों को देख सकें। यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जो पहले दिन से लेकर खात्मे तक संक्रमण की पहचान करता है।
शोधकर्ताओं ने यह पाया कि संक्रमण गले से शुरू होकर पांच दिनों में अपने चरम पर पहुंच जाता है। इसने संकेत दिया कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने का सबसे कारगर तरीका है कि मुंह और नाक को मेडिकल मास्क से ढक दिया जाए। शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि लेटरल फ्लो टेस्ट (एलएफटी) यह जांचने का प्रभावी तरीका है कि क्या वायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमण को अन्य लोगों तक पहुंचाने में सक्षम है।

स्वस्थ लोगों पर हुआ इस तरह का पहला अध्ययन-यह परीक्षण उन 36 स्वस्थ टीक नहीं लगवाने प्रतिभागियों पर किया गया था, जिन्होंने अतीत में कभी भी वायरस का सामना नहीं किया था। प्रतिभागियों की आयु 18 वर्ष से 30 वर्ष के बीच थी। 36 प्रतिभागियों में से केवल 18 प्रतिभागी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए और 16 लोगों को हल्के या गंभीर लक्षण महसूस हुए।

दो दिन में दिखाई दिए ये लक्षण - शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन मरीजों को वायरस से संक्रमित किया गया था उनमें कुछ लोगों हल्के या गंभीर लक्षण महसूस हुए। इन लक्षणों में भरी हुई या बहती नाक, जुकाम, सर्दी और गले में खराश सहित हल्के से मध्यम जैसे लक्षण विकसित हुए। जबकि प्रतिभागियों में से किसी ने भी गंभीर संक्रमण का अनुभव नहीं किया. 13 लोगों ने गंध की भावना के नुकसान की सूचना दी, जो 90 दिनों के भीतर वापस आ गई।

नहीं दिखाई दिए गंभीर लक्षण- शोधकर्ताओं ने बताया कि अधिकतर मरीजों में कोरोना वायरस के सिर्फ हल्के या मध्यम ही लक्षण दिखाई दिए। इनमें से किसी भी व्यक्ति ने अपने फेफड़ों में कोई बदलाव या किसी गंभीर प्रतिकूल घटना का अनुभव नहीं किया। किसी भी संभावित दीर्घकालिक प्रभाव की निगरानी के लिए सभी प्रतिभागियों का 12 महीने तक ख्याल रखा जाएगा।

कोरोना से बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके- शोध में कहा गया है कि मुंह और नाक दोनों को ढंकने के लिए उचित फेस मास्क का इस्तेमाल करें। शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि लेटरल फ्लो टेस्ट (एलएफटी) यह जांचने का प्रभावी तरीका है कि क्या वायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमण को अन्य लोगों तक पहुंचाने में सक्षम है।

Saturday, 5 February 2022

लता मंगेशकर निधन :भारत रत्न लता मंगेशकर का निधन, कोरोना और निमोनिया होने के बाद 29 दिन से मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल के ICU में थीं

 


राष्ट्र चंडिका,आखिर जिसका डर था वो ही हुआ। भारत ने अपना सबसे अमूल्य रत्न खो दिया। कोरोना की कर्कश आवाज भारत की स्वर कोकिला को लील गई। आज सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर कोरोना से जंग हार कर दुनिया को विदा कह गईं। आज उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली। 92 साल की लता जी की 8 जनवरी को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके भर्ती होने की खबर भी 2 दिन बाद 10 जनवरी को सामने आई थी। उन्होंने कोरोना और निमोनिया दोनों से 29 दिन तक एक साथ जंग लड़ी।

उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल के ICU रखा गया था। लंबे समय से लता ताई का इलाज कर रहे डॉ. प्रतीत समधानी की देखरेख में ही डॉक्टर्स की टीम उनका इलाज कर रही थी। इलाज के दौरान उनकी हेल्थ में सुधार भी देखा जा रहा था। उन्हें लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया। करीब 5 दिन पहले उनकी सेहत में सुधार होना भी शुरू हो गया था। ऑक्सीजन निकाल दी गई थी लेकिन ICU में ही रखा गया।

स्वर कोकिला, दीदी और ताई जैसे नामों से लोकप्रिय लता जी के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। फैंस उनके ठीक होने की दुआएं कर रहे थे लेकिन आज इस बुरी खबर से करोड़ों संगीत प्रेमियों का दिल टूट गया। सैंकड़ों कालजयी गानों को अपनी आवाज देने वाली लता जी आज अनंत यात्रा पर चली गईं।

घर के नौकर के पॉजिटिव आने के बाद आईं कोरोना की चपेट में

लता जी लगभग दो साल से घर से नहीं निकली थीं। वे कभी-कभी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस के लिए संदेश देती थीं। बढ़ती उम्र और गिरती सेहत के कारण वे अपने कमरे में ही ज्यादा समय गुजारती थीं। उनके घर के एक स्टॉफ मेंबर की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उनका टेस्ट कराया गया था। 8 जनवरी को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।

संगीत की दुनिया के 8 सुरमयी दशक

92 साल की लता जी ने 36 भाषाओं में 50 हजार गाने गाए, जो किसी भी गायक के लिए एक रिकॉर्ड है। करीब 1000 से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने अपनी आवाज दी। 1960 से 2000 तक एक दौर था जब लता मंगेशकर की आवाज के बिना फिल्में अधूरी मानी जाती थीं। उनकी आवाज गानों के हिट होने की गारंटी हुआ करती थी। सन 2000 के बाद से उन्होंने फिल्मों में गाना कम कर दिया और कुछ चुनिंदा फिल्मों में ही गाने गाए। उनका आखिरी गाना 2015 में आई फिल्म डुन्नो वाय में था।

करीब 80 साल से संगीत की दुनिया में सक्रिय लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्य प्रदेश के ही इंदौर में हुआ था। 13 साल की छोटी उम्र में 1942 से उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। लता जी के पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर संगीत की दुनिया और मराठी रंगमंच के जाने पहचाने नाम थे। उन्होंने ही लता जी जो संगीत की शिक्षा दी थी। 5 भाई-बहनों में सबसे बड़ी लता जी की तीन बहनें आशा भोंसले, उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और भाई हृदयनाथ मंगेशकर हैं।

प्रभु कुंज की आभा गुम

लता मंगेशकर अपनी बहन उषा और भाई हृदयनाथ के साथ मुंबई के पेडर रोड स्थित प्रभुकुंज में पहले फ्लोर पर रहती थीं। कई सालों से वे यहां रह रही थीं। बहन आशा भोंसले भी यहां से कुछ दूरी पर ही रहती हैं। सालों तक प्रभाकुंज सोसायटी की सुबह लता मंगेशकर के संगीत के रियाज से ही शुरू होती रहीं। करीब 4 साल से उनका रियाज खराब सेहत के कारण लगभग बंद सा ही था। नवंबर 2019 में भी लता जी को निमोनिया और सांस की तकलीफ के कारण ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था। जहां वे 28 दिन भर्ती रही थीं। नवंबर 2019 के बाद से उनका घर से निकलना भी लगभग बंद हो चुका था।

2001 में मिला था भारत रत्न

लता मंगेशकर को 2001 में संगीत की दुनिया में उनके योगदान के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। इसके पहले भी उन्हें कई सम्मान दिए गए जिसमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और दादा साहेब फाल्के सम्मान भी शामिल हैं। कम ही लोग जानते हैं कि लता जी गायिका के साथ संगीतकार भी थीं और उनका अपना फिल्म प्रोडक्शन भी था, जिसके बैनर तले बनी फिल्म “लेकिन” थी, इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट गायिका का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था, 61 साल की उम्र में गाने के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली वे एकमात्र गायिका रहीं। इसके अलावा भी फिल्म “लेकिन” को 5 और नेशनल अवॉर्ड मिले थे।